Shayari: 10,000+ Best Hindi Shayari Collection of 2018

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1. उसी दिन से व्हाट्सएप्प से नफरत हो गयी ग़ालिब, जब बाल कटवाने के लिए एडमिन ने चंदा माँग लिया।

2. मदहोश हम हरदम रहा करते हैं, और इल्ज़ाम शराब को दिया करते हैं, कसूर शराब का नहीं उनका है यारों, जिनका चेहरा हम हर जाम में तलाश किया करते हैं!!

3. लोग दौलत देखते हैं, हम इज़्ज़त देखते हैं,लोग मंज़िल देखते हैं, हम सफ़र देखते हैं,लोग दोस्ती बनाते हैं, हम उसे निभाते हैं |

4. दिल में कोई गम नहीं बातों में कोई दम नहीं, ये ग्रुप है नवाबो का यहाँ कोई किसीसे कम नहीं।

5. उम्मीद नहीं है फिर भी जिए जा रहा हूँ, खाली है बोतल फिर भी पिए जा रहा हूँ, पता नहीं वो मिलेंगे या नहीं, इज़हार-ए-मोहब्बत के लिए पिए जा रहा हूँ!!

6. दिल मैं में जिनको भी जगह देता हूँ खुद से ज़्यादा मैं उनका ख्याल रखता हूँ जैसे के तुम मेरे दोस्त |

7. किस किस का नाम लें अपनी बरबादी में, बहुत लोग आये थे दुआएं देने शादी में।

8. रात चुप है मगर चाँद खामोश नहीं, कैसे कहूँ आज की फिर होश नही, इस तरह डूबा हूँ तेरी मोहब्बत की गहराई में, हाथ में जाम है और पिने का होश नहीं!!

9. आओ ताल्लुकात को कुछ और नाम दें, ये दोस्ती का नाम तो बदनाम हो गया |

10. बीवी भी हक जताती है, माँ भी हक जताती है, शादी के बाद आदमी कश्मीर हो जाता है ।

11. बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये, के वो आज नजरों से अपनी पिलाये, मजा तो तब ही आये पीने का यारो, शराब हम पियें और नशा उनको हो जाए!!

12. हम वक्त गुजारने के लिए दोस्तों को नही रखते, दोस्तों के साथ रहने केलिए वक्त रखते है |

13. नोटबंदी का एक ये भी असर नजर आया, वो बेवफा फिर से मेरे दर पे नजर आया।

14. तेरी आँखों के ये जो प्याले हैं, मेरी अंधेरी रातों के उजाले हैं, पीटा हूँ जाम पर जाम तेरे नाम का, हम तो शराबी बे-शराब वाले हैं!!

15. सच्चे दोस्त हमे कभी गिरने नहीं देते, ना किसी कि नजरों मे, ना किसी के कदमों मे.!!

16. कुछ ऐसे हादसे भी होते है जिंदगी में दोस्त, हजार का नोट रखने वाले सौ रुपये मांगते हैं।

17. होंठों पे आज उनका नाम आ गया, प्यासे के हाथ में आज जाम आ गया, डोले कदम तो गिरे उनकी बाहों मैं जाके, आज तो पीना भी हमारे काम आ गया!!

18. लोग रूप देखते है ,हम दिल देखते है , लोग सपने देखते है हम हक़ीकत देखते है, लोग दुनिया मे दोस्त देखते है, हम दोस्तो मे दुनिया देखते है |

19. दोस्ती बुरी हो तो होने उसे मत दो, अगर हो गयी तो उसे खोने मत दो, और अगर दोस्त हो सबसे प्यारा तो, उसे चैन की नींद सोने मत दो।

20. चारों तरफ तन्हाई का साया है, ज़िन्दगी में प्यार किसने पाया है, हम यादों में झूमते हैं उनकी, और ज़माना कहता है आज फिर पीकर आया है!!

21. लोग पूछते हैं इतने गम में भी खुश क्युँ हो.. मैने कहा दुनिया साथ दे न दे.. मेरा दोस्त तो साथ हैं.” |

22. वो मिला तो कहता था कि पायलट बनूँगा फ़राज़, हालत ऐसी है की मक्खी भी उड़ाई नहीं जाती।

23. पूरा अब मेरा ये ख़्वाब हो जाये, लिख दू उनके दिल पे किताब हो जाये, ना मयकदे की जरूरत हो ना मयखाने की, अगर नज़र से पिला दो शराब हो जाये।

24. एक बात हमेशा याद रखना दोस्तों ढूंढने पर वही मिलेंगे जो खो गए थे, वो कभी नहीं मिलेंगे जो बदल गए है|

25. मेरा दोस्त मुझसे यह कह कर दूर चला गया फ़राज़, कि दोस्ती दूर की अच्छी रोटी तंदूर की अच्छी।

26. जाम पे जाम पिने से क्या फायदा, शाम को पी सुबह उतर जाएगी, अरे दो बूँद मेरे प्यार की पी ले, ज़िन्दगी सारी नशे में ही गुजर जाएगी!!

27. मेरे “शब्दों” को इतने ध्यान से ना पढ़ा करो दोस्तों, कुछ याद रह गया तो.. मुझे भूल नहीं पाओगे!

28. इश्क को सर का दर्द कहने वाले सुन, हमने तो ये दर्द अपने सर ले लिया, हमारी निगाहों से बचकर वो कहाँ जायेंगे, हमने उनके मोहल्ले में ही घर ले लिया।

29. मेरे हाथों में जाम के प्याले है, मेरी ज़िन्दगी तेरे हवाले है, न रौंद तू इस तरह मेरी चाहत को ज़ालिम, मेरे दिल में तेरी मोहब्बत के छाले है!!

30. अपनी दोस्ती का बस इतना सा उसूल है ज़ब तू कुबूल है तो तेरा सब कुछ कुबूल है |

31. तेरे इश्क का बुखार है मुझको, और हर चीज खाने की मनाही है, एक इश्क के हकीम ने सिर्फ, तेरे चमन की मौसमी बताई है।

32. इतनी पीता हूँ कि मदहोश रहता हूँ, सब कुछ समझता हूँ पर खामोश रहता हूँ, जो लोग करते हैं मुझे गिराने की कोशिश, मैं अक्सर उन्ही के साथ रहता हूँ!!

33. कोन कहेता है की दोस्ती बराबरी वालो में होती है.. सच तो ये है की दोस्ती में सब बराबर होता है |

34. काला न कहो मेरे महबूब को, काला न कहो मेरे महबूब को, खुदा तो तिल ही बना रहा था, स्याही का प्याला लुढ़क गया।

35. आशिकों को मुहब्बत के अलावा अगर कुछ काम होता, तो मखाने जाके हर रोज़ यूँ बदनाम ना होता, मिल जाती चाहने वाली उसे भी कहीं राह में कोई, अगर कदमों में नशा और हाथ में जाम ना होता!!

36. ऐ दोस्त मै तेरी खुशीयां बाटने शायद न आ सकुं, पर ये वादा रहा, जब गम आऐ तो खबर कर देना, सारे के सारे ले जाउंगा |

37. आज तुम पे आँसुओं की बरसात होगी, फिर वही कडकती काली रात होगी, एस.एम.एस. न करके तूने जो दिल दुखाया मेरा, जा तेरे बदन में खुजली सारी रात होगी।

38. गम इस कदर मिला की घबरा के पी गये, खुशी थोड़ी सी मिली तो मिला के पी गये, यूँ तो ना थी जनम से पीने की आदत, शराब को तन्हा देखा तो तरस खा के पी गये!!

39. जिन्दगी जख्मो से भरी है, वक्त को मरहम बनाना सीख लो, हारना तो है एक दिन मौत से, फिलहाल दोस्तों के साथ जिन्दगी जीना सीख लो..!!

40. अपनी सूरत का कभी तो दीदार दे, तड़प रहा हूँ अब और न इंतज़ार दे, अपनी आवाज नहीं सुनानी तो मत सुना, कम से कम एक मिस काल ही मार दे।

41. इश्क़-ऐ-बेवफ़ाई ने डाल दी है आदत बुरी, मैं भी शरीफ हुआ करता था इस ज़माने में, पहले दिन शुरू करता था मस्जिद में नमाज़ से, अब ढलती है शाम शराब के साथ मखाने में!!

42. दोस्त तो दोस्त होता है, उसकी कोई जात या धर्म नही होता, वो ख़ुशी के टाइम पे भी गालियाँ सुनता है और बुरे टाइम पे भी।

43. तेरी दुनिया में कोई गम ना हो, तेरी खुशियाँ कभी कम न हो, भगवान तुझे ऐसी आइटम दे, जो सनी लिओनी से कम ना हो।

44. पी के रात को हम उनको भुलाने लगे, शराब में गम को मिलाने लगे, दारू भी बेवफा निकली यारों, नशे में तो वो और भी याद आने लगे!!

45. ए दोस्त कौन कहता है की मुझ में कोई कमाल रखा है मुझे तो बस कुछ दोस्तो ने संभाल रक्खा है |

46. जब सफेद साड़ी पे लाल बिंदी लगाती हो, कसम से एम्बुलेंस नजर आती हो, वो तो घायलों को लेकर जाती है, और तुम घायल कर के जाती हो।

47. पी है शराब हर गली हर दुकान से, एक दोस्ती सी हो गई है शराब के जाम से, गुज़रे हैं हम इश्क़ में कुछ ऐसे मुकाम से, की नफ़रत सी हो गई है मुहब्बत के नाम से!!

48. दोस्त को दोस्त का इशारा याद रहेता हे, हर दोस्त को अपना दोस्ताना याद रहेता हे, कुछ पल सच्चे दोस्त के साथ तो गुजारो, वो अफ़साना मौत तक याद रहेता हे|

49. कैसे मुमकिन था किसी दवा से इलाज़ ग़ालिब। इश्क का रोग था माँ की चप्पल से ही आराम आया।

50. दिल के दर्द से बड़ा कोई दर्द नहीं होता, आशिकों का शराब के सिवा कोई हमदर्द नहीं होता, जब दिल टूटता है तो आँसू उनके भी निकलते हैं, जो कहते हैं कि मर्द को दर्द नहीं होता!!

51. वातावरण को जो महका दे उसे ‘इत्र’ कहते हैं, जीवन को जो महका दे उसे ही ‘मित्र’ कहते हैं |

52. तेरे इश्क ने सरकारी दफ्तर बना दिया दिल को, ना कोई काम करता है, ना कोई बात सुनता है।

53. जाम में अफ़साने ढूंढते हैं हम लोग, लम्हों में ज़माने ढूंढते हैं हम लोग, तु ज़हर दे दे शराब कह कर सनम, अब तो मरने के बहाने ढूंढते हैं हम लोग!!

54. दोस्ती नाम है सुख दुख की कहानी का, दोस्ती नाम है सदा मुस्कुराने का, यह कोई पल भर की पहचान नही, दोस्ती नाम है सदा साथ निभाने का |

55. सफ़र लम्बा है दोस्त बनाते रहिये, दिल मिले ना मिले हाथ बढ़ाते रहिये, ताजमहल न बनाईये महंगा पड़ेगा, मगर हर तरफ मुमताज़ बनाते रहिये।

56. कुछ चेहरे लाजवाब लगते हैं, मोहब्बत के लम्हें शराब लगते हैं, दर्द इतने सहे मोहब्बत में मैंने, कि अब होश के पल खराब लगते हैं!!

57. याद तुम्हारी ना आए ऐसा हम होने ना देंगे, दोस्त तुम्हारे जैसा हम खोने नही देंगे, एक दो स्मस करते रहना, वरना रात को हम सोने नही डेनेगे |

58. तुम सा कोई दूसरा जमीन पर हुआ, तो रब से शिकायत होगी, एक को तो झेला नहीं जाता, दूसरा आ गया तो क्या हालत होगी।

59. जाम तो यू ही बदनाम है यारों कभी इश्क करके देखो, या तो पीना भूल जाओगे या फिर पी-पी के जीना भूल जाओगे!!

60. इश्क के सहारे जिया नहीं करते, गम के प्यालों को पिया नहीं करते, कुछ नवाब दोस्त हैं हमारे, जिनको परेशान न करो तो वो याद ही किया नहीं करते |

61. खयाल को आहट की आस रहती है, निगाह को किसी सूरत की तलाश रहती है, तेरे बिन कोई कमी नहीं है ऐ दोस्त, बस गली वाली जमादारनी उदास रहती है।

62. कुछ तो शराफत सीख ले इश्क शराब से, बोतल पे लिखा तो है मैं जानलेवा हूँ!!

63. क्यूँ मुश्किलों में साथ देते हैं दोस्त क्यूँ गम को बाँट लेते हैं दोस्त, न रिश्ता खून का न रिवाज से बंधा है, फिर भी ज़िन्दगी भर साथ देते हैं दोस्त |

64. पलट दूँगा सारी दुनिया मैं ऐ खुदा, बस रजाई में से निकलने की ताकत दे दे।

65. तन्हाई में भी कहते है लोग जरा महफ़िल में जिया करो, पैमाना लेके बिठा देते है मैखाने में, और कहते है जरा तुम कम पिया करो!!

66. दोस्ती होती है दिले राज़ बताने के लिए, हम अपनी हानशी मिटा दें आपको हसने के लिए, मिलने की तो आपको फ़ुर्सत नही, तो हम स्मस करते हैं अपनी याद दिलाने के लिए |

67. मत ढूंढो मुझे इस दुनिया की तन्हाई में, ठण्ड बहुत है मैं यही हूँ अपनी रजाई में।

68. तेरी यादों को अपने सीने से लगा लेता हूँ, और शाम होते ही मैं दो जाम लगा लेता हूँ!!

69. उमर की रह मे इंसान बदल जाता है, वक़्त की आँधी मे तूफान बदल जाता है, सोचता हूँ तुम्हे परेशन ना करू, लेकिन बाद मे इरादा बदल जाता है |

70. गहरी आँखों के समंदर में उतर जाने दे, प्यार का मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे, बिल कितने तेरे फ़ोन के भरे हैं मैंने, सोचता हूँ माँग लूँ पैसे मगर जाने दे।

71. शराब शरीर को खत्म करती है, शराब समाज को ख़तम करती है, आओ आज इस शराब को खत्म करते हैं, एक बॉटल तुम खत्म करो, एक बॉटल हम खत्म करते है!!

72. भूलना चाहो तो भी याद हमारी आएगी! दिल की गहराई मे हमारी तस्वीर बस जाएगी!! ढूढ़ने चले हो हमसे बेहतर दोस्त! तलाश हमसे शुरू होकर हम पे ही ख़त्म हो जाएगी!!

73. काश प्यार का इन्श्योरेंस करवाया जाता, प्यार करने से पहले प्रीमियम भरवाया जाता, प्यार में वफ़ा मिली तो ठीक वर्ना, जो खर्चा होता उसका क्लेम दिलवाया जाता।

74. रोक दो मेरे जनाज़े को ज़ालिमों, मुझ में जान आ गयी है, पीछे मुड़ के देखो कमीनो, दारू की दुकान आ गयी है!!

75. दोस्तों की कमी को पहचानते है हम; दुनियाँ के गमों को भी जानते है हम; आप जैसे दोस्तों के ही सहारे, आज भी हँस कर जीना जानते है हम!!

76. जवानी के दिन चमकीले हो गए, हुस्न के तेवर नुकीले हो गए, हम इज़हार करने में रह गए, उधर उनके हाथ पीले हो गए।

77. एक जाम उलफत के नाम, एक जाम मुहब्बत के नाम. एक जाम वफ़ा के नाम, पूरी बोतल बेवफा के नाम, और पूरा ठेका दोस्तों के नाम!!

78. हम अपने पर गुरुर नहीं करते, याद करने के लिए किसी को मजबूर नहीं करते. मगर जब एक बार किसी को दोस्त बना ले, तो उससे अपने दिल से दूर नहीं करते |

79. जब जब घिरे बादल तेरी याद आई, जब झूम के बरसा सावन तेरी याद आई, जब जब मैं भीगा मुझे तेरी याद आई, मेरे भाई तूने मेरी छतरी करूं नहीं लौटाई।

80. रख ले 2-4 बोतल कफ़न में, साथ बैठ कर पिया करेंगे, जब माँगे गा हिसाब गुनाहों का, एक पेग उसे भी दे दिया करेंगे!!

81. कोई दोस्त कभी पुराना नहीं होता, कुछ दिन बात न करने से बेगाना नहीं होता, दोस्ती में दुरी तो आती रहती हैं, पर दुरी का मतलब भुलाना नहीं होता |

82. बाहर से सूरज की गर्मी की तरह अंदर से बारिश की बूंदो की तरह क्या बोलू उसके बारे में..वो तो हैं घने बादलो में इंद्र धनुष की तरह |

83. महफ़िल में इस कदर पीने का दौर था, हमको पिलाने के लिए सबका जोर था, पी गए हम इतनी यारो के कहने पर, न अपना गौर था न ज़माने का गौर था!!

84. मेरी शायरी के हर अलफ़ाज़ में मैंने आपको सजाया, मेरी यादों के हर किस्से में मैंने आपको ही पाया, ख़ुशी हो या गम साथ, आपने हर पल निभाया रोशन हुयी ज़िन्दगी जब से सनम आपको बनाया |

85. हजारो फूल चाहिए एक माला बनाने के लिए, हजारों दीपक चाहिए एक आरती सजाने के लिए हजारों बून्द चाहिए समुद्र बनाने के लिए, पर “माँ “अकेली ही काफी है, बच्चो की जिन्दगी को स्वर्ग बनाने के लिए..!!

86. हालात कह रहे हैं मुलाकात नहीं मुमकिन, उम्मीद कह रही है थोड़ा इंतज़ार कर।

87. आप हमसे हम आपसे प्यार पाते रहे मोहब्बत का एहसास युही जगाते रहे होके हमेशा के लिए एक दूसरे के वैलेंटाइन्स डे हम साथ मनाते रहे |

88. हमारे कुछ गुनाहों की सज़ा भी साथ चलती है हम अब तन्हा नहीं चलते दवा भी साथ चलती है अभी ज़िन्दा है माँ मेरी मुझे कुछ भी नहीं होगा मैं जब घर से निकलता हूँ दुआ भी साथ चलती है |

89. आँखें रहेंगीं शाम-ओ-शहर मुन्तज़िर तेरी, आँखों को सौंप देंगे तेरा इंतज़ार हम।

90. जाम पे जाम पीने से क्या फायदा, शाम को पी सुबह उतर जाएगी, अरे दो बूंद मेरे प्यार की पीले, जिन्दगी सारी नशेमे गुज़र जाएगी |

91. माँ ना होती तो वफ़ा कौन करेगा, ममता का हक़ भी कौन अदा करेगा, रब हर एक माँ को सलामत रखना, वरना हमारे लिए दुआ कौन करेगा |

92. आँखों के इंतज़ार का दे कर हुनर चला गया, चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया, दिन की वो महफिलें गईं रातों के रतजगे गए, कोई समेट कर मेरे शाम-ओ-सहर चला गया।

93. दर्द की जब कभी इन्तहा होती हैं दवा की जरुरत फिर कहाँ होती हैं तन्हाई, बेचैनी और बस कुछ आहें इनमे पल कर ही मोहब्बत जवां होती हैं |

94. ये जो सख्त रस्तो पे भी आसान सफ़र लगता हे ये मुझ को माँ की दुआओ का असर लगता हे एक मुद्दत हुई मेरी मां नही सोई तबिश मेने एक बार कहा था के मुझे डर लगता हे |

95. मेरे दिल की उम्मीदों का हौसला तो देखो, इंतज़ार उसका है जिसे मेरा एहसास तक नहीं।

96. तेरी दुआओं का असर है, जो अब तक मैं सलामत हूँ.! तेरी आँखों की नमी नहीं, हाथों की लकीरों में बस्ता हूँ मैं जानता हूँ जान-ए-जहाँ, तुझे बस मोहब्बत है मुझ से तेरी साँसों की राह पकड़ तेरी रूह में बस्ता हूँ |

97. माँ से रिश्ता कुछ ऐसा बनाया जिसको निगाहों में बिठाया जाए रहे उसका मेरा रिश्ता कुछ ऐसा की वो अगर उदास हो तो हमसे भी मुस्कुराया न जाये |

98. आधी से ज्यादा शबे-ग़म काट चुका हूँ, अब भी अगर आ जाओ तो ये रात बड़ी है।

99. मिटा दो अब तो रंजिशो को सारी, यूँ रूठ कर कब तक तडपाओगी हमें सुनो ना, जान थे हम भी कभी तुम्हारी, कब तक साँसो से दूर रखपाओगी हमें |

100. कौन सी है वो चीज़ जो यहाँ नहीं मिलती, सब कुछ मिल जाता है लेकिन “माँ” नहीं मिलती माँ-बाप ऐसे होते हैं दोस्तों जो ज़िन्दगी में फिर नहीं मिलते, खुश रखा करो उनको फिर देखो जन्नत कहाँ नहीं मिलती |

101. जान देने का कहा मैंने तो हँसकर बोले, तुम सलामत रहो हर रोज के मरने वाले, आखिरी वक़्त भी पूरा न किया वादा-ए-वस्ल, आप आते ही रहे मर गये मरने वाले।

102. कुछ तुम कहो, कुछ हम कहे और एक कहानी बन जाये एक रोज़ पड़ेंगे लोग इन्हे और मिसालें हमारी बन जाये |

103. ज़िन्दगी की हक़ीक़त बस इतनी सी हैं, की इंसान पल भर में याद बन जाता हैं |

104. बस यूँ ही उम्मीद दिलाते हैं ज़माने वाले, कब लौट के आते हैं छोड़ कर जाने वाले।

105. तुम्हें देखकर मैं खुद को भूल जाता हूँ तन्हाई में अक्सर ग़ज़ल गुनगुनाता हूँ । इश्क़ हो गया है या कोई और बला है, बेवजह यूँ हर घड़ी अब मुस्कुराता हूँ ।।

106. पास वो मेरे इतने कि दूरियो का कोई एहसास नहीं, फिर भी जाने क्यों वो पास होकर भी मेरे पास नहीं |

107. रात भर जागते रहने का सिला है शायद, तेरी तस्वीर सी महताब में आ जाती है।

108. खुदा की रहमत में अर्जियाँ नहीं चलतीं दिलों के खेल में खुदगर्जियाँ नहीं चलतीं चल ही पड़े हैं तो ये जान लीजिए हुजुर, इश्क़ की राह में मनमर्जियाँ नहीं चलतीं !

109. रुकावटें तो सिर्फ ज़िंदा इंसान के लिए हैं मय्यत के लिए तो सब रास्ता छोड देते हैं |

110. तमाम रात मेरे घर का एक दर खुला रहा, मैं राह देखता रहा वो रास्ता बदल गया।

111. मुझे लेते हो जब अपनी मुहब्बत की पनाहों में, ये जादू कैसा तुम करते खिची आती मै बांहों में, ये धड़कन तेज क्यों होती ये सांसे क्यों उखडती है मुझे जब देखते हो तुम निगाहों ही निगाहों में..!!

112. कौन याद रखता हैं गुजरे हुए वक़्त के साथी को लोग तो दो दिन में नाम तक भुला देते हैं |

113. कभी तो चौंक के देखे कोई हमारी तरफ़, किसी की आँख में हमको भी इंतज़ार दिखे।

114. मोह्ब्बत किसी ऐसे शख्स की तलाश नही करती जिसके साथ रहा जाये, मोह्ब्बत तो ऐसे शख्स की तलाश करती हे जिसके बगेर रहा न जाये !!

115. गम ए आरज़ू तेरी आह में, शब् ए आरज़ू तेरी चाह में, जो उजड़ गया वो बसा नहीं, जो बिछड़ गया वो मिला नहीं |

116. किसी रोज़ होगी रोशन, मेरी भी ज़िंदगी, इंतज़ार सुबह का नही, तेरे लौट आने का है।

117. चलो आज खामोश प्यार को इक नाम दे दें, अपनी मुहब्बत को इक प्यारा अंज़ाम दे दें इससे पहले कहीं रूठ न जाएँ मौसम अपने धड़कते हुए अरमानों एक सुरमई शाम दे दें !

118. मुझे तलाश हैं एक रूह की, जो मुझे दिल से प्यार करे वरना इंसान तो पेसो से भी मिल जाया करते हैं |

119. पलकों पर रूका है समन्दर खुमार का, कितना अजब नशा है तेरे इंतजार का।

120. मोहब्बत एक अहसासों की पावन सी कहानी है ! कभी कबिरा दीवाना था कभी मीरा दीवानी है !! यहाँ सब लोग कहते हैं, मेरी आंखों में आँसू हैं ! जो तू समझे तो मोती है, जो ना समझे तो पानी है !!

121. दिल में आने का रस्ता तो होता हैं लेकिन जाने का नहीं इसलिए जब कोई दिल से जाता हैं तो दिल तोड़ कर ही जाता हैं|

122. एक अजनबी से मुझे इतना प्यार क्यूँ है, इन्कार करने पर चाहत का इकरार क्यूँ है, उसे पाना नहीं मेरी तकदीर में शायद, फिर भी हर मोड़ पर उसका इंतजार क्यूँ है।

123. मैं फ़रमाईश हूँ उसकी, वो इबादत है मेरी, इतनी आसानी से कैसे निकाल दू उसे अपने दिल से, मैं ख्वाब हूँ उसका, वो हकीकत है मेरी |

124. आखिर क्यों बस जाते हैं दिल में बिना इजाज़त लिए वो लोग जिन्हे हम ज़िन्दगी में कभी पा नहीं सकते |

125. आदतन तुमने कर दिये वादे, आदतन हमने भी ऐतबार किया, तेरी राहों में हर बार रुककर, हमने अपना ही इंतजार किया।

126. तेरी जुदाई भी हमें प्यार करती है, तेरी याद बहुत बेकरार करती है, वह दिन जो तेरे साथ गुज़ारे थे, नज़रें तलाश उनको बार-बार करती हैं |

127. गुजरा हैं मोहब्बत में कुछ ऐसा भी ज़माना रूठा हूँ अगर तो मनाया था हमे भी किसी ने |

128. मेरी इक उमर कट गई है तेरे इंतजार में, ऐसे भी हैं कि कट न सकी जिनसे एक रात।

129. जब वादा किया है तो निभाएंगे; सूरज किरण बन कर छत पर आएंगे; हम हैं तो जुदाई का ग़म कैसा; तेरी हर सुबह को फूलों से सजाएंगे |

130. चले जायेंगे एक दिन तुझे तेरे हाल पर छोड़कर कदर क्या होती हैं प्यार की तुझे वक़्त ही सीखा देगा |

131. अब तेरी मोहब्बत पर मेरा हक तो नहीं सनम, फिर भी आखिरी साँस तक तेरा इंतजार करेंगे।

132. इश्क मुहब्बत तो सब करते हैं! गम-ऐ-जुदाई से सब डरते हैं हम तो न इश्क करते हैं न मुहब्बत! हम तो बस आपकी एक मुस्कुराहट पाने के लिए तरसते हैं |

133. जब लगा सीने पे तीर तब हमे इतना दर्द नहीं हुआ .ग़ालिब ज़ख्म का एहसास तो तब हुआ जब कमान अपनों के हाथ में दिखी |

134. आप करीब ही न आये इज़हार क्या करते, हम खुद बने निशाना तो शिकार क्या करते, साँसे साथ छोड़ गयीं पर खुली रखी आँखें, इस से ज्यादा किसी का इंतज़ार क्या करते।

135. हमें मालूम है दो दिल जुदाई सह नहीं सकते मगर रस्मे-वफ़ा ये है कि ये भी कह नहीं सकते जरा कुछ देर तुम उन साहिलों कि चीख सुन भर लो जो लहरों में तो डूबे हैं, मगर संग बह नहीं सकते |

136. दोस्त हो या दुश्मन ताल्लुक बस इतना ही रहे बदले की भावना कभी अपने मन में ना रहे |

137. मुझे हर पल तेरा इंतज़ार रहता है, हर लम्हा मुझे तेरा एहसास रहता है, तुझ बिन धडकनें रुक सी जाती हैं, कि तू दिल में धड़कन बनके रहता है।

138. जुदा होकर भी जुदाई नहीं होती इश्क उम्र कैद है प्यारे इसमें रिहाई नहीं होती |

139. सच्ची मोहब्बत एक जेल के कैदी की तरह होती हैं जिसमे उम्र बीत भी जाए तो सजा पूरी नहीं होती |

140. तड़प के देख किसी की चाहत में, तो पता चले कि इंतज़ार क्या होता है, यूँ मिल जाए अगर कोई बिना तड़प के, तो कैसे पता चले कि प्यार क्या होता है |

141. तेरी जुदाई का शिकवा करूँ भी तो किससे करूँ, यहाँ तो हर कोई अब भी, मुझे, तेरा समझता हैं |

142. उड़ जायेंगे तस्वीरों से, रंगो की तरह हम वक़्त की टहनी पर हैं, परिंदो की तरह हम |

143. ग़जब किया तेरे वादे पर ऐतबार किया, तमाम रात किया क़यामत का इंतज़ार किया।

144. जिन्दगी आप बिन ऊलझन सी लगती है एक पल की जुदाई मुदत सी लगती है पहले तो ऐहसास था पर अब यकीन है हर लम्हा आपकी जरूरत सी लगती है |

145. रेस वो लोग लगाते है जिसे अपनी किस्मत आजमानी हो, हम तो वो खिलाडी है जो अपनी किस्मत के साथ खेलते है |

146. आँखों ने जर्रे-जर्रे पर सजदे लुटाये हैं, क्या जाने जा छुपा मेरा पर्दानशीं कहाँ।

147. किसी को मोहब्बत में जुदाई न मिले किसी को मोहब्बत में जुदाई न मिले और जो पोस्ट को लाइक ना करे उसे कड़कड़ाती ठंड में रजाई ना मिले |

148. कुछ इम्तिहानो को, कुछ जुबानो को, बंद आँखों से सह गए वो ना कमजोरी थी, ना ही जी हुजूरी थी बस कुछ मज़बूरी थी जो अपना हर कदम कांटो पर चल गए वो |

149. बेवफा वक़्त था.तुम थे.या मुकद्दर था मेरा बात इतनी ही है की अंजाम जुदाई निकला |

150. एक छोरी तै घना मजबूर एक छोरा होया करै। जो कालजा टूटण के बाद भी रोया ना करदा।

151. प्यार में डूब कर देखो, एक अलग ही नजारा हैं इस चाहत भरी दुनिया में, एक नाम हमारा हैं|

152. आपकी जुदाई भी हमें प्यार करती हैं आपकी याद बहुत बेकरार करती हैं जाते जाते कहीं भी मुलाकात हो जाये आप से तलाश आपको ये नज़र बार बार करती हैं |

153. कितनी बार कह राखी है छोड़ कै ना जायां कर मन्ने तेरे बिना जी कोणी लागदा मेरा।

154. कभी तो ऐसी भी हवा चले कौन कैसा है पता तो चले |

155. किसी लिबास की ख़ुशबू जब उड़ के आती है तेरे बदन की जुदाई बहुत सताती है तेरे बगैर मुझे चैन कैसे पड़ता है मेरे बगैर तुझे नींद कैसे आती है |

156. बाट वो ए देख सके सै जिसकी मोहब्बत सच्ची हो |

157. दो लाइन्स उनके लिए जो ज़िन्दगी के दुखो से परेशान हैं, ज़िन्दगी की उलझनों में फंस गए हैं |

158. तन्हाई ना पाए कोई साथ के बाद, जुदाई ना पाए कोई मुलाकात के बाद, ना पड़े किसी को किसी की आदात इतनी, कि हर सांस भी आए उसकी याद के बाद |

159. कुछ ना था खोंण खातर मेरे धोरै जब त तू मिलीं सै तब त डरण लाग्या मै।

160. दुखो के बोझ में ज़िन्दगी कुछ इस तरह डूबे जा रही हैं की मेरी हर एक चाहत, हर एक आस टूटे जा रही हैं |

161. बड़ी हिम्मत दी उसकी जुदाई ने ना अब किसी को खोने का दुःख ना किसी को पाने की चाह |

162. किस्ती आला नै समंदर ना देख्या आँखों को देख्या पर दिल मै उतर कै ना देख्या पत्थर समझे है मेरे चाहन आले हाम तो मोम थे किसे नै छु कै ए ना देख्या |

163. किसी ने क्या खूब कहा है सिर्फ गुलाब देने से अगर मोहब्बत हो जाती, तो माली सारे ‘शहर’ का महबूब बन जाता |

164. ना जाने मेरी मौत कैसी होगी पर ये तो तय है.,तेरी जुदाई से बेहतर होंगी |

165. सुकून मिलै है जब मेरी उस त बात होवे है। हज़ार रातां म वा एक रात होवे है। आँख उठा क देखें जब वा मेरे कानी। वो एक पल भी पूरी कायनात होवे है।

166. मत तोल मोहब्बत मेरी अपनी दिल्लगी से चाहत देखकर मेरी अक्सर तराज़ू टूट जाते है |

167. जुदाई सहने का अंदाज कोई मुझसे सीखे रोते है मगर आँखों में आँसूं नहीं होते |

168. आग सूरज में होवे है पर जलना जमीन न पड़े है। मोहब्बत आंखां म होवे है पर तड़पना दिल न पड़े है।

169. रूठे हुए को मनाना तो दस्तूर-ए-दुनिया पर रूठे की मानना क्यों नहीं सीखती दुनिया |

170. जुदाई मोहब्बत मे जरुरी है, तभी तो पता चलता है की कोन किस के बिना कब तक जुदा रह पाता है |

171. कुछ घुट नशे की ले बैठी कुछ ले बैठी तेरी यारी रै। बोतल न तो भीतर का फुख्या पर तने फुखदी ज़िन्दगी सारी रै।

172. आज ऊँगली थाम ले मेरी, तुझे मैं चलना सिखलाऊँ कल हाथ पकड़ना मेरा, जब मैं बुढा हो जाऊं |

173. जिंदगी मोहताज नहीं मंज़िलों की वक्त हर मंजिल दिखा देता है; मरता नहीं कोई किसी की जुदाई में वक्त सबको जीना सिखा देता है |

174. दिल के रिस्ताँ का कोए नाम ना होंदा। हर रास्तां का कोए मुकाम ना होंदा। अगर निभाण की चाहत हो दोनों कानी। तो कसम त कोए रिस्तां नाकाम ना होंदा।

175. मेरी हैसियत से ज्यादा मेरे थाली में तूने परोसा है, तु लाख मुश्किलें भी दे दे मालिक, मुझे तुझपे भरोसा है।

176. लम्हे जुदाई को बेकरार करते हैं, हालत मेरी मुझे लाचार करती हैं, आँखे मेरी पढ़ लो कभी, हम खुद कैसे कहे की आपसे प्यार करते हैं |

177. सच्ची मोहब्बत जेल की कैदी की ढाल होया करे। जिसमे उम्र बीत जान के बाद भी सजा पूरी ना करदी।

178. बदन के घाव दिखा कर जो अपना पेट भरता है, सुना है, वो भिखारी जख्म भर जाने से डरता है!

179. कोई वादा नहीं फिर भी प्यार है, जुदाई के बावजूद भी तुझपे अधिकार है |

180. मेरी चाहत तेर त अलग कुकर है। दिल की बात तेर त अलग कुकर है। तू साथ रह दिल म धड़कन की ढाल। फिर ज़िन्दगी न सांस की जरूरत कुकर है।

181. ज़ख़्म दे कर ना पूछा करो, दर्द की शिद्दत, दर्द तो दर्द होता हैं, थोड़ा क्या, ज्यादा क्या !!

182. तेरे चेहरे की उदासी दे रही है गवाही, मुझसे मिलने को तू भी बेक़रार है |

183. तू चाँद और सितारा होंदा। आसमान में एक घर हमारा होंदा। लोग तने दूर त देखदे। धोरे त देखण का हक़ बस हमारा होंदा।

184. अच्छा लगता हैं तेरा नाम मेरे नाम के साथ, जैसे कोई खूबसूरत सुबह जुड़ी हो, किसी हसीन शाम के साथ !

185. कोई रूठे अगर तुमसे तो उसे फ़ौरन मना लेना, इस हाल में अक्सर जुदाई जीत जाती है।

186. न जाने वो कोण इतना हसीन होवेगा। तेर हाथ में जिसका हाथ होवेगा। कोए तने चावे या कोए बड़ी बात कोणी। जिस न तू चावेगी वो खुश नसीब होवेगा।

187. “रिश्ता” दिल से होना चाहिए, शब्दों से नहीं, “नाराजगी” शब्दों में होनी चाहिए दिल में नहीं!

188. ऐ चाँद चला जा क्यो आया है मेरी चौखट पे, छोड़ गया वो सख्स जिसके धोखे में हम तुझे देखते थे।

189. तेरे हर दुःख न अपना बना लु तेरे हर गम न अपना बना लु मने आंदि कोणी चोरी करनी। वरना तेरे दिल न चुरा लू।

190. पढ़ रहा हूँ मै इश्क़ की किताब ऐ दोस्तों ग़र बन गया वकील तो बेवफाओं की खैर नही |

191. मैं तो खुद अपने से भी अजनबी सा बन गया, तू बता मुझसे जुदा होकर तुझे कैसा लगा।

192. गुलाब की महक भी फीकी लागे है। कोण सी खुसबू मेर म बसागी तू। ज़िन्दगी है के तेरी चाहत के सिवा। यो किसा ख्वाब आंखां न दिखागी तू।

193. ना शौक दीदार का ना फिक्र जुदाई की, बड़े खुश नसीब हैँ वो लोग जो मोहब्बत नहीँ करतेँ |

194. बेवफा वक़्त था, वो थे या मुक़द्दर मेरा, बात जो भी थी बहरहाल अंजाम जुदाई निकला।

195. मने इस बात का गम कोणी के बदल गया जमाना। मेरी ज़िन्दगी तो सर्फ तू ए कदे तू ना बदल जाना।

196. इतनी बदसलूकी ना कर, ऐ जिंदगी, हम कौन सा यहाँ बार बार आने वाले हैं।

197. हो जुदाई का शब़ब कुछ भी! उसे हम अपनी “ख़ता” कहते हैं!! वो तो ढली है “साहिल” के सांसो मे! जाने क्यु लोग उसे मुझसे ज़ुदा कहते हैं!

198. तू दिल त मने नू ना पुकारा कर। नू तू मने इशारा ना कर। दूर हु तेर त या मेरी मज़बूरी है तू तन्हाईया म मने इतना तड़पाया ना कर।

199. छोटा बनके रहोगें तो, मिलेगी हर बड़ी रहमत दोस्तों बड़ा होने पर तो माँ भी, गोद से उतार देती है!!

200. बहोत सताया करे मन्नै यो सवाल कै आपा मिलै ही क्यों जब बिछड़ना ए था।

201. याद आता है अक्सर वो गुजरा ज़माना, तेरी मीठी सी आवाज में भैया कहकर बुलाना, वो स्कूल के लिए सुबह मुझको जगाना, आई है राखी लेकर दीदी, यही है भाई-बहन के प्यार का तराना।

202. मुकाम वो चाहिए की जिस दिन भी हारु , उस दिन जीतने वाले से ज्यादा मेंरे चर्चे हो |

203. प्यार भी बहोत अजीब चीज़ स रोण त पहला सोंण भी ना दैवे।

204. रिश्ता हैं जन्मो का हमारा, भरोसे का और प्यार भरा! चलो इसे बांधे भैया, राखी के अटूट बंधन में!! रक्षा बंधन की हार्दिक शुभकामना |

205. रोज ढलता हुआ सूरज कहता है मुझसे, आज उसको बेवफा हुए एक दिन और बीत गया ।

206. अगर गुस्सा करेगी तो भी धोरे आयूंगा तेरे तेर बिना रहण की आदत कोणी मन्नै।

207. आसमान पर सितारे है जितने, उतनी जिंदगी हो तेरी, किसी की नज़र न लगे, दुनिया की हर ख़ुशी हो तेरी, रक्षाबंधन के दिन भगवान से बस यह दुआ है, मेरी! रक्षा बंधन का हार्दिक अभिनन्दन!

208. फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ “इश्क” मुकम्मल, इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है !!

209. दिल से देता हूँ मैं दुआ तुझको, कभी न हो दुःख की भावना मन में, उदासी छू न पाए कभी भी तुझको, खुशियों की चाँदनी छा जाये जीवन में।

210. सिखा मुझसे ही मेरी मोहब्बत ने मोहब्बत करने का हुन्नर ! आज मेरी मोहब्बत गैरों से मोहब्बत रचा बैठी !!

211. तू आ च ना आ पर तेरी याद तो नुए आवेगी।

212. अब हर भाई के हाथ पे होगा रंग-बिरंगे रेशम का तार, भाई बहन का प्यार बढ़ाने आया राखी का त्यौहार। हैप्पी राखी।

213. हमें तो कबसे पता था की तू बेवफ़ा है ! तुझे चाहा इसलिए कि शायद तेरी फितरत बदल जाये !!

214. मन्ने सिर्फ दो चीज़ां त डर लाग्या करै एक तेरा रोंण त दूसरा तन्ने खोंण त।

215. कभी हमसे लड़ती है, कभी हमसे झगड़ती है, लेकिन बिना कहे हमारी हर बात को समझने का हुनर भी बहन ही रखती है।

216. लफ्ज़ वही हैं, माईने बदल गये हैं ! किरदार वही, अफ़साने बदल गये हैं ! उलझी ज़िन्दगी को सुलझाते सुलझाते ! ज़िन्दगी जीने के बहाने बदल गये हैं !!

217. वो मेरी ना होइ तो कै होग्या मैं तो उसका ए हूँ।

218. राखी कर देती है, सारे गिले-शिकवे दूर इतनी ताकतवर होती है कच्चे धागों की पावन डोर

219. तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी ! वरना हमको कहां तुम से शिकायत होगी ! ये तो बेवफ़ा लोगों की दुनिया है ! तुम अगर भूल भी जाओ जो रिवायत होगी !!

220. ओरे ए ढाल का अकेलापन है मेरा तेरी चाहत भी कोणी अर तेरी ज़रूरत भी सै।

221. याद है हमारा वो बचपन , वो लड़ना – झगड़ना और वो मना लेना , यही होता है भाई – बहन का प्यार , और इसी प्यार को बढ़ाने के लिए आ रहा है रक्षा बंधन का त्यौहार।

222. किसी को इतना भी न चाहो कि भुला न सको क्योंकि ! ज़िंदगी_इन्सान_और_मोहब्बत_तीनों_बेवफा‬ हैं !!

223. किसे नै मेर त पूछा के तन्ने उसकी याद आया करे। मै भी हास के बोल्या जबे तो ज़िंदा सूं मै।

224. ये लम्हा कुछ ख़ास है , बहन के हाथों में भाई का हाथ है , ओ ! बहना तेरे लिए मेरे पास कुछ ख़ास है , तेरे सकून की खातिर मेरी बहना , तेरा भाई हमेशा तेरे साथ है।

225. आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए ! महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए ! करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो ! पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए |

226. बैरण तू के जाने प्यार मेरा तेरे खातर तो मने मेरे बाबू के गुट भी खाये ओढे सै।

227. आया राखी का त्यौहार , छाई खुशियों की बहार , एक रेशम की डोरी से बाँधा , एक बहन ने अपने भाई की कलाई पर प्यार।

228. तू भी बेवफा निकला औरों की तरह, सोचा था ! की हम तुझसे ज़माने की बेवफाई का गिला करेंगे |

229. नेचर का हर रंग आप पे बरसे हर कोई आपसे होली खेलने को तरसे रंग दे आपको मिल के सारे इतना की आप वो रंग उतारने को तरसे होली की हार्दिक शुभकामनाएं |

230. फूलों का तारों का सब का कहना है। . एक हज़ारों में मेरे भईया हैं लव यू अलॉट |

231. जुल्मो सितम सहते रहे एक बेवफा की आस मे ! डुबो दिया मुझे दरिया ने दो घूट की प्यास में |

232. हात है जिसका हमारे उपर ये तेवर भी उसका वरदान है। शानसे जिना सिखाया जिसने महादेव उनका नाम है|

233. साथ पले और साथ बढ़े हैं , खूब मिला बचपन में प्यार।, भाई बहन का प्यार बढ़ाने आया ये त्यौहार |

234. मैंने उस से वफ़ा की उम्मीद लगा रखी थी दोस्तों ! जिसके चर्चे आम थे बाजार में बेवफाई के दोस्तों |

235. शिवराय का नारा लगा के!! दुनिया मै हम छा गये!! दुश्मन भी छुपकर बोले वो देखो!! शिवराय के शिवभक्त आ गये |

236. चन्दन की डोरी ,फूलों का हार , आया सावन का महीना और राखी का त्यौहार , जिसमें झलकता है भाई – बहन का प्यार |

237. इंतज़ार की आरज़ू अब खो गयी है ! खामोशियो की आदत हो गयी है ! न सीकवा रहा न शिकायत किसी से अगर है तो ! एक मोहब्बत जो इन तन्हाइयों से हो गई है |

238. तने भी मरते प्यार कोनियाउसने भी मरते प्यार कोनियाम्हारी जिंदगी तो इसी होरी हैज़ुकर भैंस की खोर मे न्यार कोनिया |

239. बहन चाहे सिर्फ प्यार – दुलार, नहीं माँगती बड़े उपहार , रिश्ता बने रहे सदियों तक , मिले भाई को खुशियां हज़ार|

240. ये बेवफा, वफा की कीमत क्या जाने ! ये बेवफा गम-ए-मोहब्बत क्या जाने ! जिन्हे मिलता है हर मोड पर नया हमसफर ! वो भला प्यार की कीमत क्या जाने |

241. कसुती मासुम थी वाजिसकॆ स्यामी बॆठ लिखना सीखा थाबडी अजीब थी उसकी हास्सीजिसके स्यामी हर पकवान फीका थाफेर तन्हा करग्यी जो थामा था उसने मेरा हाथबहोत दुर चली ग्यी छोड क मन्नॆ मेरी कलम के साथ ।

242. सूरज की तरह चमकते रहो , फूलों की तरह महकते रहो, यही दुआ है इस बहन की आज कि आप सदा खुश रहो। बहन की तरफ से भाई को राखी की हार्दिक शुभकामनाएँ।

243. मिल ही जाएगा कोई ना कोई टूट के चाहने वाला, अब शहर का शहर तो बेवफा हो नहीं सकता।

244. इतणा बुरा तो पहले करया ढोंग क्युज म तेरा ए सुं तो इब मॊन क्युज म तेरा नही तो मेरी निन्दा क्युज तु मेरी नहीं तो म जिन्दा क्यु |

245. रिश्ता हम भाई बहन का , कभी खट्टा कभी मीठा , कभी रूठना कभी मनाना , कभी दोस्ती कभी झगड़ा , कभी रोना और कभी हसाना , ये रिश्ता है प्यार का , सबसे अलग सबसे अनोखा |

246. बंद कर देना खुली आँखों को मेरी आ के तुम, अक्स तेरा देख कर कह दे न कोई बेवफा।

247. आज भी बैठ्या हुँ उस्से जगहा जित तेरी जुल्फां की छाँ तै मेरी साँस थम जाया करतीउस्से सवाल का जवाब ढूंढते ढूंढते जो कद्दे मेरी आँख्या मै बस्या करते |

248. राखी का त्यौहार था राखी बंधवाने को भाई भी तैयार था भाई बोल बहना मेरी अब तो राखी बाँध दो , बहना बोली “कलाई पीछे करो , पहले रुपये हज़ार दो “ |

249. सिर्फ एक ही बात सीखी इन हुस्न वालों से हमने, हसीन जिसकी जितनी अदा है वो उतना ही बेवफा है।

250. तेरी अक्टिवा जावे साइलेंट मोड पेमेरी बुलेट छोड़े पटाखे हर रोड पेहथियार इतने हैँ के छोरी तन्ने तोल दूँ औरमेरे यार इतने हैँ के तेरे पूरे शहर ने फोड़ दूँ |

251. गलियाँ फूलों से सज़ा रखी हैं , हर मोड़ पर लड़कियाँ बिठा रखी हैं पता नहीं तुम कहाँ से आ जाओ इसलिए सबके हाथ में राखी थमा रखी है |

252. रोये कुछ इस तरह से मेरे जिस्म से लग के वो, ऐसा लगा कि जैसे कभी बेवफा न थे वो।

253. हम आज भी उसका इंतज़ार करा सा,हम आज भी उसने इतना प्यार करा सा,एक बार प्यार ते बोल के तो देखे,हम आज भी उस पे जान निसार करा सा |

254. उसका हुसन गया कलेजा चीर , नयनों से छूटा एक तीर , वो मुस्कराई , नज़दीक आई , और बोली ” राखी बन्धवाले मेरे वीर “ |

255. इलाही क्यूँ नहीं उठती क़यामत माजरा क्या है, हमारे सामने पहलू में वो दुश्मन के बैठे हैं।

256. दिल का दर्द ना छुपा सके हम, यो गम किसे ने बता भी ना सके हम, क्यू कर सहे इश्स दर्द ने हम, महरि मजबूरी से किसे ते यो दर्द दिखा भी नही सकते हम |

257. हर लड़की को आपका इंतज़ार है हर लड़की आपके लिए बेकरार है , हर लड़की को आपकी आरज़ू है , दोस्त ! ये आपका कमाल नहीं , कुछ दिन बाद राखी का त्यौहार है।

258. रहने दे ये किताब तेरे काम की नहीं, इस में लिखे हुए हैं वफाओं के तज़करे।

259. तन्नै अपणी तो मै बणाऊगाघर के मानगे , तो ठीक नी ठा ल्याउगातु कहै दिये अपणे भाई नैरोक कै दिखा दियो तेरे बाप के ‪‎जमाई‬ नै‬ |‬

260. अगले बरसों कि तरह होंगे करीने तेरे, किसे मालुम नहीं बारह महीने तेरे।

261. अनजान एक साथी का इस दिल को इंतजार हैं, बहुत प्यासी हैं ये आँखें और दिल बेकरार हैं उनके साथ मिल जाए तो हर राह आसान हो जाएगी शायद इसी अनोखे एहसास का नाम प्यार हैं |

262. एक वो टेम था जब बात खत्म ना होया करतीएक यो टेम है के तेरे तै बात ए ना होती |

263. इतनी मुश्किल भी ना थी राह मेरी मोहब्बत की, कुछ ज़माना खिलाफ हुआ कुछ वो बेवफा हो गए।

264. जब किसी के सपने किसी के अरमान बन जाये जब किसी की हसी किसी की मुस्कान बन जाए उसे सिर्फ और सिर्फ प्यार कहा करते हैं जब किसी की साँसे किसी की जान बन जाए |

265. हुँने की ए ते प्यार कोनी. की ए ने हम ते प्यार कोनी म्हरी जिंदगी तो इसीई होगी जानू भैसा की खोर मै न्यार कोनी |

266. मेरी वफा के क़ाबिल नही हो तुम, प्यार मिले ऐसे इन्सान नही हो तुम, दिल क्या तुम पर ऐतबार करेगा, प्यार मे धोखा दिया ऐसे बेवफा हो तुम।

267. कभी अलफ़ाज़ तोह कभी खयाल भूल जाऊ तुझे इस कदर चाहू के अपनी सांस भूल जाऊ उठ कर तेरे पास से जो मैं चल दू , तो जाते हुए खुद को तेरे पास भूल जाऊ |

268. कर कर कै बहाने रोवैगी जब याद तन्नै मेरी आवैगीफोटो धर कै सिराहणै सोवैगी जब याद तन्नै मेरी आवैगी |

269. नजर नजर से मिलेगी तो सर झुका लेगा, वह बेवफा है मेरा इम्तिहान क्या लेगा, उसे चिराग जलाने को मत कह देना, वह नासमझ है कहीं उंगलियां जला लेगा।

270. साथ अगर दोगे तो मुस्कुरायेंगे जरूर प्यार अगर दिल से करोगे तो निभाएंगे जरूर राह में कितने भी कांटे क्यों ना हो आवाज़ अगर दिल से दोगे तो आएंगे जरूर |

271. सुबह शाम तरी घनी याद आवे से,सारी रात मानने जागवे से,करने को कर लू कॉल तनने,पेर कस्टमर केर की वा चोरी बार बार बॅलेन्स लो बटावे से!

272. जब तक न लगे एक बेवफाई की ठोकर, हर किसी को अपने महबूब पे नाज़ होता है।

273. दो बातें उनसे की तो दिल का दर्द खो गया लोगो ने हमसे पूछा आज तुम्हे क्या हो गया हम बेकरार आँखों से सिर्फ हंस पाए ये भी ना कह पाए की हमे प्यार हो गया |

274. ख़ाक से बढ़कर कोई दौलत नहीं होती छोटी मोटी बात पे हिज़रत नहीं होती, पहले दीप जलें तो चर्चे होते थे और अब शहर जलें तो हैरत नहीं होती |

275. बेवफाओं की इस दुनियां में संभलकर चलना, यहाँ मुहब्बत से भी बर्बाद कर देते हैं लोग।

276. उनका हर अंदाज़ हकीकत है या ख्वाब है , खुशनसीबों के पास रहते हैं वो , मेरे पास तो बस उनकी मीठी सी याद है |

277. सच की हालत किसी तवायफ सी है, तलबगार बहुत हैं तरफदार कोई नही |

278. किसी का रूठ जाना और अचानक बेवफा होना, मोहब्बत में यही लम्हा क़यामत की निशानी है।

279. तेरी अदाओं का जादू इस शेर में लिखता हूँ तेरी अदाओं का जादू इस शेर में लिखता हूँ मदहोश हूँ अभी थोड़ी देर में लिखता हूँ |

280. इलाज ए इश्क पुछा जो मैने हकीम से धीरे से सर्द लहजे मे वो बोला जहर पिया करो सुबह दोपहर शाम |

281. उसकी बेवफाई पे भी फ़िदा होती है जान अपनी, अगर उस में वफ़ा होती तो क्या होता खुदा जाने।

282. तुमसे मिलकर जाने किस गुमान में हूँ मैं तुमसे मिलकर जाने किस गुमान में हूँ मैं देखो भूल गया सब पते-ठिकाने आसमान में हूँ मैं |

283. दुनिया में सब चीज़ मिल जाती है, केवल अपनी ग़लती नहीं मिलती |

284. वो सुना रहे थे अपनी वफाओ के किस्से, हम पर नज़र पड़ी तो खामोश हो गए।

285. मेरी आँखों से आसूँ भले ही ना निकले हो पर ये दिल आज भी तेरे लिए रोता है लाखों दिल भी मिल कर उतना प्यार नहीं कर सकते जितना ये अकेला दिल तुमसे करता है |

286. जो अंधेरे की तरह डसते रहे ,अब उजाले की कसम खाने लगे चंद मुर्दे बैठकर श्मशान में ,ज़िंदगी का अर्थ समझाने लगे |

287. चाहते हैं वो हर रोज़ नया चाहने वाला. ऐ खुदा मुझे रोज़ इक नई सूरत दे दे।

288. शौंक नहीं है मुझे अपने जज़्बातों को यूँ सरेआम लिखने का मगर क्या करूँ , अब जरिया ही ये है तुझसे बात करने का |

289. हलकी हलकी सी सर्द हवा ,जरा जरा सा दर्द ए दिल अंदाज अच्छा है ए नवम्बर तेरे आने का |

290. दिल भी गुस्ताख हो चला था बहुत, शुक्र है की यार ही बेवफा निकला।

291. सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा , सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा , जाने क्या बात थी उसमें और मुझ में ,सारी महफ़िल भूल गए बस वही एक चेहरा याद रहा |

292. मोहब्बत हमने सीखी है चराग़ों की शमाओं से कभी तो रात आएगी कभी तो लौ जलाओगे |

293. न कोई मज़बूरी है न तो लाचारी है, बेवफाई उसकी पैदायशी बीमारी है।

294. साथ ना रहने से रिश्ते टूटा नहीं करते , वक़्त की धुंध से लम्हे टूटा नहीं करते , लोग कहते हैं कि मेरा सपना टूट गया, टूटी नींद है , सपने टूटा नहीं करते |

295. पहचान कहाँ हो पाती है, अब इंसानों की, अब तो गाड़ी, कपडे लोगों की, औकात तय करते हैं |

296. तुझे है मशक-ए-सितम का मलाल वैसे ही, हमारी जान थी, जान पर वबाल वैसे ही।

297. जो तू साथ न छोड़े ता-उम्र मेरा ए मेहबूब मौत के फ़रिश्ते को भी इनकार न कर दूं तो कहना इतनी कशिश है मेरी मुहब्बत की तासीर में दूर हो के भी तुझ पे असर न कर दूं तो कहना !

298. आख़िर तुम भी उस आइने की तरह ही निकले जो भी सामने आया तुम उसी के हो गए |

299. चला था ज़िकर ज़माने की बेवफाई का, सो आ गया है तुम्हारा ख्याल वैसे ही।

300. मेरी नजरों की तरफ देख जमानें पे न जा , इक नजर फेर ले, जीने की इजाजत दे दे, रुठ ने वाले वो पहली सी मोहब्बत दे दे , इश्क मासुम है, इल्जाम लगाने पे न जा |

301. दिलों में खोट है ज़ुबां से प्यार करते हैं बहुत से लोग दुनिया में यही व्यापार करते हैं

302. मेरी आँखों से बहने वाला ये आवारा सा आसूँ पूछ रहा है पलकों से तेरी बेवफाई की वजह।

303. ये आँखें हैं जो तुम्हारी , किसी ग़ज़ल की तरह खूबसूरत हैं कोई पढ़ ले इन्हें अगर इक दफ़ा तो शायर हो जाए|

304. मुझ से पत्थर ये कह कह के बचने लगे , तुम ना संभलोगे ठोकरें खा कर |

305. मेरी मोहब्बत सच्ची है इसलिए तेरी याद आती है, अगर तेरी बेवफाई सच्ची है तो अब याद मत आना।

306. अकेले हम बूँद हैं, मिल जाएं तो सागर हैं अकेले हम धागा हैं, मिल जाएं तो चादर हैं अकेले हम कागज हैं, मिल जाए तो किताब हैं।

307. पडेगा हम सभी को अब खुले मैदान मे आना घरों मे बात करने से ये मसले हल नही होंगे |

308. वो रात दर्द और सितम की रात होगी, जिस रात रुखसत उनकी बारात होगी, उठ जाता हूँ मैं ये सोचकर नींद से अक्सर, कि एक गैर की बाहों में मेरी सारी कायनात होगी!!

309. प्यार कहो तो दो ढाई लफज़, मानो तो बन्दगी , सोचो तो गहरा सागर,डूबो तो ज़िन्दगी , करो तो आसान ,निभाओ तो मुश्किल , बिखरे तो सारा जहाँ ,और सिमटे तो ” तुम “ |

310. पालते हैं वे कबूतर पर कतरने के लिए, ताकि बेबस हों उन्हीं के घर उतरने के लिए |

311. टूटे हुए प्याले में जाम नहीं आता, इश्क़ में मरीज को आराम नहीं आता, ये बेवफा दिल तोड़ने से पहले ये सोच तो लिया होता, की टुटा हुआ दिल किसी के काम नहीं आता!!

312. कुछ रिश्तों को कभी भी नाम ना देना तुम इन्हें चलने दो ऐसे ही इल्ज़ाम ना देना तुम ॥ ऐसे ही रहने दो तुम तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में के अल्फ़ाज़ों को मेरे अंज़ाम ना देना तुम ॥

313. मैं छुपाना जानता तो जग मुझे साधू समझता शत्रु मेरा बन गया है छलरहित व्यवहार मेरा |

314. गम इस बात का नही कि तुम बेवफा निकली, मगर अफ़सोस ये है कि, वो सब लोग सच निकले, जिनसे मैं तेरे लिए लड़ा करता था!!

315. मुझसे नफरत करके भी खुश ना रह पाओगे, मुझसे दूर जाकर भी पास ही पाओगे , प्यार में दिमाग पर नहीं दिल पर ऐतबार करके देखिये , अपने आप को रोम – रोम में बसा पाएँगे।

316. सुना था तेरी महफिल में सुकूने-दिल भी मिलता है, मगर हम जब भी तेरी महफिल से आये, बेकरार आये |

317. कोई भी नही यहाँ पर अपना होता, इस दुनिया ने यह सिखाया है हमको, उसकी बेवफ़ाई का ना चर्चा करना, आज दिल ने यह समझाया है हमको!

318. दुनिया की भीड़ में तुझे याद कर सकूँ कुछ पल , अजनबी राहों की तरफ कदम मोड़ता हूँ।

319. गरीबी थी जो सबको एक आंचल में सुला देती थी अब अमीरी आ गई सबको अलग मक़ान चाहिए |

320. आपने तो की थी दिल्लगी मगर, हम तो दिल अपना तोड़ बैठे, आपने समझा प्यार को खेल मगर, हम तो गमो से नाता जोड़ बैठे!!

321. नशा था उनके प्यार का , जिसमें हम खो गए , उन्हें भी पता नहीं चला कि कब हम उनके हो गए।

322. दर्द के सिवा कभी कुछ न दिया, गज़ब के हमदर्द हो आप मेरे |

323. यह माना के मुहब्बत करना है जुर्म मगर, यह जुर्म यारो बार बार करते हैं हम, वो बेवफा है संगदिल हैं जानते है मगर, उनपर यारो आज भी ऐतबार करते हैं हम!!

324. लिख दूँ तो लफज़ तुम हो , सोच लूँ तो ख्याल तुम हो , माँग लूँ तो मन्नत तुम हो , और चाह लूँ तो मोहब्बत भी तुम ही हो।

325. ना जाने वो बच्चा किससे खेलता होगा वो जो मेले में दिन भर खिलौने बेचता हैं |

326. कभी देखा है अंधे को किसी का हाथ पकड़ कर चलते हुए, मैने मोहब्बत में ‘तुझपे’ कुछ यूँ भरोसा किया था!!

327. कितने चेहरे हैं इस दुनिया में, मगर हमको एक चेहरा ही नज़र आता है, दुनिया को हम क्यों देखें, उसकी याद में सारा वक़्त गुज़र जाता है।

328. तेरी महफ़िल से उठे तो किसी को खबर तक ना थी, तेरा मुड़-मुड़कर देखना हमें बदनाम कर गया।

329. जिस फूल की परवरिश हम ने अपनी मोहब्बत से की, जब वो खुश्बू के क़ाबिल हुआ तो औरो के लिए महकने लगा!!

330. हर शख्स को दिवाना बना देता है इश्क जन्नत की सैर करा देता है इश्क दिल के मरीज हो तो कर लो महोब्बत हर दिल को धड़कना सिखा देता है इश्क |

331. परिन्दों की फ़ितरत से आए थे वो मेरे दिल में। ज़रा पंख निकल आए तो आशियाना छोड दिया॥

332. मैं नहीं जानता प्यार मैं बेवफ़ाई क्यू मिलती है पर, इतना जरूर जानता हूँ, जब दिल भर जाए तो लोग छोड़ देते हैं!!

333. एक सुकून सा मिलता है. तुझे सोचने से भी. फिर कैसे कह दूँ मेरा इश्क़ बेवजह सा है |

334. ख्वाब ख्याल, मोहब्बत, हक़ीक़त, गम और तन्हाई, ज़रा सी उम्र मेरी किस-किस के साथ गुज़र गयी !!!

335. दिलवाले तो और भी होंगे तुम्हारे शहर में मगर, हमारा अंदाज़-ए-वफ़ा तुम्हे हमेशा याद आएगा!!

336. बहुत दिनों बाद तेरी महफ़िल में कदम रखा है , मगर नजरो से सलामी देने का तेरा अंदाज़ नही बदला

337. दान देना ही आमदमी का एकमात्र व्दार है।

338. हमने तो अपनी मोहब्बत का इज़हार किया, मगर उसने फिर भी ना हमारा एतबार किया, मैं तो जहाँ से लड़ा, एक उसकी खातिर, उस बेवफा ने शिकवा फिर भी हज़ार किया!!

339. कुछ तुम कहो, कुछ हम कहे,और एक कहानी बन जाये एक रोज़ पड़ेंगे लोग इन्हे , और मिसालें हमारी बन जाये

340. यदि किसी युवती के दोष जानना हों, तो उसकी सखियों में उसकी प्रशंसा करो।

341. जैसा करोगे आप वैसा ही पाओगे सदा, आज सबके होठो पर यह सच्चाई मिली, मगर कैसे मान लूँ मैं इस बात को सच, मुझको तो वफ़ा के बदले बेवफ़ाई मिली!!

342. दिल के पास आपका घर बना लिया , ख्वाबों में आपको बसा लिया , मत पूछो कितना चाहते हैं आपको , आपकी हर खता को अपना मुक्कद्दर बना लिया।

343. पैसा आपका सेवक है। यदि आप उनका उपयोग जानते हैं; वह आपका स्वामी है। यदि आप उसका उपयोग नहीं जानते।

344. भुला देंगे तुमे भी, ज़रा सबर तो कीजिए, तुम्हारी तरह बेवफा होने मे थोड़ा वक़्त तो लगेगा!!

345. तेरा इंतज़ार मुझे हर पल रहता है , हर पल मुझे तेरा एहसास रहता है , तुझ बिन धड़कन रुक सी जाती है , क्यूंकि तू मेरे दिल में धड़कन बन कर रहता है।

346. दुसरे के दोष पर ध्यान देते समय हम स्वयं बहुत भले बन जाते हैं। परंतु जब हम अपने दोषों पर ध्यान देंगे। तो अपने आपको कुटिल और कामी पाएँगे।

347. बड़ा शौक़ था उन्हे मेरा आशियाना देखने का, जब देखी मेरी गरीबी तो रास्ता बदल लिया!!

348. मेरी दीवानगी की कोई हद्द नहीं , तेरी सूरत के सिवा कुछ याद नहीं , मैं हूँ फूल तेरे गुलशन का , तेरे सिवा मुझपर किसी का हक्क नहीं।

349. जब तक तुममें दूसरों के दोष देखने की आदत मौजूद है। तब तक तुम्हारे लिए ईश्वर का साक्षात्कार करना अत्यन्त कठिन है।

350. में जानता हूँ की उसके बिना जी नही पाऊंगा, हाल उसका भी यही है मगर किसी ओर के लिए!!

351. तेरी खुशियों पर मुस्कराने को जी चाहता है , हो तुझे दर्द तो उदास होने को जी चाहता है , तेरी मुस्कराहट ही इतनी प्यारी है कि , तुझे बार बार हसाने को जी चाहता है।

352. ज्ञानवान मित्र ही जीवन का सबसे बड़ा वरदान है।

353. तेरी मोहब्बत भी किराए के घर की तरह थी, कितना भी सजाया, पर मेरी ना हुई…

354. मेरे जीने के लिए तेरा अरमान ही काफी है, दिल की कलम से लिखी ये दास्तान ही काफी है , तीर – तलवार की क्या ज़रूरत है तुझे ऐ हसीन , क़तल करने के लिए तेरी मुस्कान ही काफी है।

355. मुँह के सामने मीठी बातें करने और पीठ पीछे छुरी चलानेवाले मित्र को दुधमुँहे विषभरे घड़े की तरह छोड़ दो।

356. कुछ अजब रंग से गुज़री है ज़िंदगी अपनी, दिलों पे राज किया फिर भी प्यार से महरूम रही, हम वफ़ा कर के भी बन गये मुजरिम, वो दगा देके भी मासूम रही!!

357. आप खुद भी नहीं जानती आप कितनी प्यारी हो जान तो हमारी हो पर जान से प्यारी हो , दूरियां होने से कोई फरक नहीं पड़ता , आप कल भी हमारी थी और आज भी हमारी हो।

358. सच्चे मित्र को दोनों हाथों से पकड़कर रखो।

359. मुहब्बत ने आज हुमको रुला दिया, जिस पर मरते थे उस ने ही भुला दिया, हम भी उस की याद भूलने क लिए पीते गये, एक दिन बेवफा ने उस मे भी ज़हर मिला दिया!!

360. परवाह उसकी कर जो तेरी परवाह करे , ज़िन्दगी में जो कभी तनहा ना करे , जान बन कर उतर जा उसकी रूह में , जो जान से भी ज्यादा तुझसे प्यार और वफ़ा करे।

361. उस काम को, जिसे तुम दुसरे व्यक्ति में बुरा समझते हो, स्वयं त्याग दो परंतु दूसरों पर दोष मत लगाओ।

362. उनकी चाहत मे दिल मजबूर हो गया, बेवफ़ाई करना उनका दस्तूर हो गया, कसूर उनका नही मेरा था, हमने चाहा ही इतना की उनको शायद गुरूर हो गया!!

363. हमदम तो साथ चलते हैं , रास्ते तो बेवफ़ा बदलते हैं , तेरा चेहरा है जब से आँखों में , मेरी आँखों से लोग जलते हैं।

364. जब जेब में पैसे होते हैं, तो तुम बुद्धिमान और सुंदर लगते हो तथा उस समय तुम अच्छा गाते भी हो।

365. खुशी की राह मे गम मिले तो क्या करे, वफ़ा की राह मे बेवफा मिले तो क्या करे, कैसे बचाए ज़िंदगी को दगाबाजो से, कोई दिल लगा के दे जाए दगा तो क्या करे!!

366. आँखों के सामने हर पल आपको पाया है , अपने दिल में सिर्फ आपको ही बसाया है , आपके बिना हम जिए तो भी कैसे , भला जान के बिना भी कोई जी पाया है

367. धर्म तो मानव-समाज के लिए अफीम है।

368. मैं नही जानता मुझसे खफा कौन है, मैं ये जानता हू वफ़ा कौन है, वो चली तो गयी है पर पता ये करना है की ज़िंदगी ओर उसमे बेवफा कौन है!!

369. ना हथियार से मिलते है , ना अधिकार से मिलते है , दिलो में जगह अपने व्यवहार से मिलते है

370. जो चीज विकार को मिटा सके। राग-व्देष को कम कर सके। जिस चीज के उपयोग से मन सूली पर चढ़ते समय भी सत्य पर डटा रहे वही धर्म की शिक्षा है।

371. आप ने की बेवफाई, मगर मैं अभी वफ़ा करता हूँ, कही आखो में ना आजाए आँसू, इसलिए मुस्कुराते रहता हूँ!!

372. प्यार तो जिंदगी का एक अफसाना है, इसका अपना ही एक तराना है, सबको मालूम है कि मिलेंगे सिर्फ आंसू, पर न जाने क्यों, दुनियां में हर कोई इसका दीवाना है |

373. संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है।

374. इतने ज़ख़्म खाए हुए है, अब इश्क़ भी होता नही, दर लगता है इस ज़माने में, कहीं सब बेवफा तो नही!!

375. खुशबु बनकर आपके पास बिखर जायेंगे ! हवा बनकर आपके सांसो मे सामा जायेंगे! धड़कन बनकर आपके दिल मे उतर जायेंगे!! जरा महसूस करने की कोशिश तो कीजिए! दूर रहकर भी पास नजर आएंगे!!

376. जिसे धीरज है और जो मेहनत से नहीं घबराता, कामयाबी उसकी दासी है।

377. मजबूरी में जब कोई जुदा होता है, ज़रूरी नही के वो बेवफा होता है, देख कर वो आपकी आँखो मे आँसू, अकेले मे आपसे भी ज़्यादा रोता है!!

378. तू रूठा रूठा सा लगता है , कोई तरकीब बता मनाने की , मैं ज़िन्दगी गिरवी रख दूँगी , तूँ कीमत बता मुस्कराने की।

379. अपने जीवन का ध्येय बनाओ और इसके बाद अपनी सारी शारीरिक और मानसिक शक्ति, जो भगवान ने तुम्हें दी है, उसमें लगा दो।

380. दिन हो भले ही रात हो, बस याद तेरी ही आती है, कैसे कहूं के मैं ठीक हू, यह हरदम मुझको रूलाती है, अब तो यारो खुद से भी, मुझको वफ़ा की उमीद नही, मोहब्बत ऐसी सही है यारो, जिसे सकते कभी खरीद नही!!

381. ना वो कभी आ सके ना हम कभी जा सके , ना दर्द दिल का किसी को सुना सके , बस खामोश बैठे हैं उनकी यादों में , ना उन्होंने याद किया ना हम उनको भूला सके।

382. महान ध्येय महान मस्तिष्क की जननी है।

383. दिल के दरिया मे धड़कन की कश्ती है, ख्वाबो की दुनिया मे यादो की बस्ती है, मोहब्बत के बाज़ार मे चाहत का सौदा, वफ़ा की कीमत से तो बेवफ़ाई सस्ती है!!

384. प्यार किया बदनाम हो गए, चर्चे हमारे सरेआम हो गए, ज़ालिम ने दिल उस वक़्त तोडा, जब हम उसके गुलाम हो गए

385. चाहे धैर्य थकी घोड़ी हो, परंतु फिर भी वह धीरे-धीरे चलेगी अवश्य।

386. पत्थरों से प्यार किया नादान थे हम, ग़लती हुई क्यू के इंसान थे हम, आज जिन्हे नज़रे मिलने मे तकलीफ़ होती है, कभी उसी शख्स की जान थे हम!!

387. ज़माने से नहीं, तन्हाई से डरते हैं, प्यार से नहीं, रुसवाई से डरते हैं, मिलने की उमंग है दिल में लेकिन, मिलने के बाद तेरी जुदाई से डरते हैं

388. जो अपने लक्ष्य के प्रति पागल हो गया है, उसे ही प्रकाश का दर्शन होता है। जो थोड़ा इधर, थोड़ा उधर हाथ मारते हैं, वे कोई लक्ष्य पूर्ण नहीं कर पाते। वे कुछ क्षणों के लिए बड़ा जोश दिखाते है; किन्तु वह शीघ्र ठंडा हो जाता है।

389. लगे हे इल्ज़ाम दिल पे जो मुझ को रुलाते है, किसी की बेरूख़ी और किसी और को सताते हे, दिल तोड़ के मेरा वो बड़ी आसानी से कह गये अलविदा, लेकिन हालात मुझे बेवफा ठहराते है!!

390. बिन बात के ही रूठने की आदत है; किसी अपने का साथ पाने की चाहत है; आप खुश रहें, मेरा क्या है; मैं तो आइना हूँ, मुझे तो टूटने की आदत है।

391. हमारा ध्येय सत्य होना चाहिए, न कि सुख।

392. खा कर ज़ख़्म दुआ दी हमने, बस यूही उमर बीता दी हमने, देख कर जिसको दिल दुखता था, आज वो तस्वीर जला दी हमने!!

393. घर से बाहर कोलेज जाने के लिए वो नकाब मे निकली, सारी गली उनके पीछे निकली, इनकार करते थे वो हमारी मोहबत से, और हमारी ही तसवीर उनकी किताब से निकली |

394. मनुष्य के लिए निराशा के समान दूसरा पाप नहीं है। इसलिए मनुष्य को इस पापरुपिनी निराशा को समूल हटाकर आशावादी बनना चाहिए।

395. एक दिन हम आपसे इतनी दूर हो जाएँगे, के आसमान के इन तारो मे कही खो जाएँगे, आज मेरी परवाह नही आपको, पर देखना एक दिन हद से ज़्यादा हम आपको याद आएँगे!!

396. उसे भूल कर जिया तो क्या जिया , दम है तो उसे पाकर दिखा , लिख पथरों पर अपनी प्रेम कहानी , और सागर को बोल , दम है तो इसे मिटाकर दिखा.

397. कष्ट और क्षति सहने के पश्चात् मनुष्य अधिक विनम्र और ज्ञानी हो जाता है।

398. अंजाने में हम अपना दिल गवां बैठे, इस प्यार मे कैसा धोखा कर बैठे, उनसे क्या गिला करे… भूल हमारी थी, जो बिना दिलवालों से दिल लगा बैठे!!

399. जहाँ याद न आये तेरी वो तन्हाई किस काम की; बिगड़े रिश्ते न बने तो खुदाई किस काम की; बेशक़ अपनी मंज़िल तक जाना है हमें; लेकिन जहाँ से अपने न दिखें, वो ऊंचाई किस काम की।

400. उड़ने की अपेक्षा जब हम झुकते हैं तब विवेक के ज्यादा नजदीक होते हैं।

401. हक़ीकत जान लो जुड़ा होने से पहले, मेरी सुन लो अपनी सुनने से पहले, ये सोच लेना भूलने से पहले, बहुत रोई हैं ये आँखें मुस्कुराने से पहले!!

402. उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो; जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो; इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है; इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो |

403. अभिमान की अपेक्षा नम्रता से अधिक लाभ होता है।

404. दिल से रोए मगर होंठो से मुस्कुरा बैठे, यूँही हम किसी से वफ़ा निभा बैठे, वो हमे एक लम्हा ना दे पाए अपने प्यार का, और हम उनके लिए अपनी ज़िंदगी गवां बैठे |

405. भीड़ की आदत नहीं मुझे, थोड़े में जीना सीख लिया है मैंने, चन्द दोस्त हैं, चन्द दुआएं हैं, बस इन खुशियों को गले लगा लिया मैंने ।

406. निराशा आशा के पीछे-पीछे चलती है।

407. क्या पता था प्यार करके दिल तोड़ जायेगी, दिल मे प्यार भर के मुँह मोड़ जाएगी, ऐ बेवफा, तू जिससे भी दिल लगाएगी देखना, कभी चैन की सांस ना ले पाएगी |

408. रात गुमसूँ है मगर चेन खामोश नही, कैसे कह दू आज फिर होश नही, ऐसा डूबा तेरी आखो की गहराई मैं, हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही |

409. निराशा निर्बलता का चिह्न है।

410. सब कुछ मिला बस खुदाई के सिवा, ज़िंदगी बहुत पसंद आई रुसवाई के सिवा, मेरी चाहत का एहसास भी न होगा, उसकी हर अदा पसंद आई बेवफ़ाई के सिवा |

411. वफ़ा का दरिया कभी रुकता नही, इश्क़ में प्रेमी कभी झुकता नही, खामोश हैं हम किसी के खुशी के लिए, ना सोचो के हमारा दिल दुःखता नहीं!

412. जिस तरह पानी को कोई जल, कोई आब, कोई वाटर कहते हैं, उसी तरह एक ही सच्चिदानंद परमेश्वर को कोई अल्लाह, कोई हरि, कोई गॉड कहकर पुकारते हैं।

413. बिन उस की ज़िंदगी दर्द-ए-तन्हाई है, मेरी आँखों में क्यू मौत सिमट आई है, कहते हैं लोग इश्क़ को इबादत यारो, इबादत में फिर क्यू इतनी रुसवाई है |

414. किसी ने मुझ से कहा बहुत खुबसूरत लिखते हो यार,मैंने कहा … खुबसूरत मैं नहीं वो है जिसके लिए हम लिखा करते है |

415. उस अल्लाह की स्तुति करनी चाहिए, जो समस्त संसार का चालक, दयालु, उदार पर अंतिम निर्णय के समय न्यायाधीश भी है।

416. हम भी कभी मुस्कुराया करते थे, उजाले मे भी शोर मचाया करते थे, उसी दिए ने जला दिया मेरे हाथो को, जिस दिए को हम हवा से बचाया करते थे |

417. कोई वादा ना कर, कोई ईरादा ना कर, ख्वाइशों मे खुद को आधा ना कर, ये देगी उतना ही जितना लिख दिया खुदा ने, इस तकदीर से उम्मीद ज़्यादा ना कर |

418. ईश्वर की कोई बौद्धिक परिभाषा नहीं दी जा सकती। हाँ, उसका आत्मा के सहारे अनुभव किया जा सकता है।

419. संघर्ष में आदमी अकेला होता है, सफलता में दुनिया उसके साथ होती है, उसीने इतिहास रचा है |

420. काँच का तोहफा ना देना कभी, रूठ कर लोग तोड दिया करते हैं, जो बहुत अच्छे हो उनसे प्यार मत करना, अकसर अच्छे लोग ही दिल तोड दिया करते है |

421. पाप एक प्रकार का अँधेरा है, जो ज्ञान का प्रकाश होते ही मिट जाता है।

422. चलता रहूँगा पथ पर, चलने में माहिर बन जाऊंगा !! या तो मंजिल मिल जाएगी, या अच्छा मुसाफ़िर बन जाऊंगा |

423. न मिले किसी का साथ तो हमें याद करना, तन्हाई महसूस हो तो हमें याद करना, खुशियाँ बाटने के लियें दोस्त हजारो रखना, जब ग़म बांटना हो तो हमें याद करना |

424. पुस्तकें मन के लिए साबुन का कार्य करती हैं।

425. जो मजिंलो को पाने की चाहत रखते, वो समंदरो पर भी पथरो के पुल बना देते है|

426. दर्द का एहसास जानना है तो प्यार करके देखो, अपनी आँखों में किसी को उतार कर देखो, चोट उनको लगेगी आँसू तुम्हें आ जायेंगे, ये एहसास जानना हो तो दिल हार कर देखो।

427. किसी की मजबूरियों पर मत हँसिए कोई मजबूरियां खरीद कर नहीं लाता डरिये वक्त की मार से क्युकी बुरा वक्त किसी को बता कर नहीं आता |

428. पानी को बर्फ में, बदलने में वक्त लगता है !! ढले हुए सूरज को, निकलने में वक्त लगता है |

429. तेरी मोहब्बत से मुझे इनकार नहीं , कौन कहता है जान मुझे तुझसे प्यार नहीं , तुझसे वादा है साथ निभाने का, पर मुझे अपनी साँसों पर ऐतबार नहीं |

430. मत करना अभिमान खुद पर ऐ इन्सान तेरे और मेरे जैसे कितनो को खुदा ने माटी से बनाकर माटी में मिला दिया |

431. टूटने लगे हौसले तो ये याद रखना, बिना मेहनत के तख्तो-ताज नहीं मिलते, ढूंढ़ लेते हैं अंधेरों में मंजिल अपनी, क्योंकि जुगनू कभी रौशनी के मोहताज़ नहीं होते |

432. मोहब्बत की गवाही अपने होने की ख़बर ले जा जिधर वो शख़्स रहता है मुझे ऐ दिल! उधर ले जा |

433. मिलने को तो हजार लोग मिल जाते है लेकिन हजारो गलतियां माफ़ करने वाले माँ बाप नहीं मिलते |

434. जो मुस्कुरा रहा है, उसे दर्द ने पाला होगा, जो चल रहा है उसके पाँव में ज़रूर छाला होगा, बिना संघर्ष के चमक नहीं मिलती, जो जल रहा है तिल-तिल, उसी दीए में उजाला होगा |

435. प्यार करो तो हमेशा मुस्करा के किसी को धोखा ना दो अपना बना के कर लो याद जब तक हम ज़िंदा हैं फिर ना कहना कि चले गए दिल में यादें बसा कर |

436. ज्यादा बोझ लेकर चलने वाले अक्सर डूब जाते है फिर चाहे वह अभिमान का हो या सामान का |

437. जीत निश्चित हो तो कायर भी लड़ सकते हैं,बहादुर वे कहलाते हैं, जो हार निश्चित हो,फिर भी मैदान नहीं छोड़ते |

438. जिस जिस ने मुहब्बत में, अपने महबूब को खुदा कर दिया, खुदा ने अपने वजूद को बचाने के लिए, उनको जुदा कर दिया |

439. असफलता जीवन का एक हिस्सा है और फिर से परयास करने से ही सफलता मिलती है |

440. शाम सूरज को ढ़लना सिखाती है,शमा परवाने को जलना सिखाती है, गिरने वाले को होती तो है तकलीफ,पर ठोकर ही इंसान को चलना सिखाती है|

441. सकून मिलता है जब उनसे बात होती है , हज़ार रातों में वो एक रात होती है, निगाह उठाकर जब देखते हैं वो मेरी तरफ , मेरे लिए वो ही पल पूरी कायनात होती है।

442. एक सफल व्यक्ति बनने की कोशिश मत करो, बल्कि मूल्यों पर चलने वाले व्यक्ति बनो |

443. लहरों का शांत देखकर ये मत समझना,की समंदर में रवानी नहीं है, जब भी उठेंगे तूफ़ान बनकर उठेंगे,अभी उठने की ठानी नहीं है |

444. आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हुए, महसूस हुआ तब, जब वो जुदा हुए, करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो, पर बहुत कुछ दे गए जब वो बेवफ़ा हुए |

445. क्यों डरें कि ज़िंदगी में क्या होगा ! हर वक़्त क्यों सोचें कि बुरा होगा ! बढ़ते रहें मंज़िलों की ओर हम ! कुछ ना भी मिला तो क्या तज़ुर्बा तो नया होगा |

446. खोल दे पंख मेरे, कहता है परिंदा, अभी और उड़ान बाकी है, जमीं नहीं है मंजिल मेरी, अभी पूरा आसमान बाकी है, लहरों की ख़ामोशी को समंदर की बेबसी मत समझ ऐ नादाँ, जितनी गहराई अन्दर है, बाहर उतना तूफ़ान बाकी है|

447. किसी ना किसी पर किसी को ऐतबार हो जाता है , अजनबी कोई सखा यार हो जाता है , खूबियाँ से नहीं होती मोहब्बत सदा , कमियों से भी अकसर प्यार हो जाता है।

448. विश्वास वह पक्षी है, जो प्रभात के पूर्व अंधकार मेँ ही प्रकाश का अनुभव करने लगता है और गाने लगता है |

449. यूँ तो ए ज़िन्दगी तेरे सफर से शिकायते बहुत थी, मगर दर्द जब दर्ज कराने पहुँचे तो कतारे बहुत थी |

450. छोड़ तो सकता हूँ, मगर छोड़ नहीं पाता उसे, वो शख्स मेरी बिगड़ी हुई आदत की तरह है |

451. ख़फा हैं कुछ लोग,इस कारण भी तुमसे उन्होंने चेहरे पे तुम्हारे कभी उदासी नहीं देखी |

452. सुबह सुबह उठना पड़ता है, कमाने के लिए,, आराम कमाने निकलता हूँ आराम छोड़कर |

453. दिल का हाल बताना नहीं आता किसी को ऐसे तड़पाना नहीं आता सुनना चाहते हैं आपकी आवाज़ मगर बात करने का बहाना नहीं आता |

454. जीवन के कुछ संबंध ऐसे होते हैं ! जो किसी पद या प्रतिष्ठा के मोहताज नहीं होते ! वे शाश्वत स्नेह और प्रेम की बुनियाद पर टिके होते हैं |

455. जिंदगी बहुत हैं शिकवे तुझसे! रहने दे मगर आज इतवार हैं |

456. हाल अपने दिल का, मैं तुम्हें सुना नहीं पाती हूँ जो सोचती रहती हूँ हरपल, होंठो तक ला नहीं पाती हूँ बेशक बहुत मोहब्बत है, तुम्हारे लिए मेरे इस दिल में पर पता नहीं क्यों तुमको, फिर भी मैं बता नहीं पाती हूँ |

457. वक्त सबको मिलता है, जिंदगी बदलने के लिए पर जिंदगी दोबारा नहीं मिलती वक्त बदलने के!

458. है मोहलत “चार” दिन की,, और हैं “सौ” काम करने को, हमें “जीना” भी है, “मरने” की तैयारी भी करनी है|

459. साथ अगर दोगे मुस्कराएंगे जरूर , प्यार अगर दिल से करोगे तो निभाएंगे जरूर , राह में कितने काँटे क्यों ना हो , आवाज़ अगर दिल से दोगे तो आएँगे जरूर |

460. तीन चीजें इंसान कभी नहीं खो सकता शांति, आशा, और ईमानदारी |

461. माथे को चूम लूँ मैं और उनकी जुल्फ़े बिखर जाये, इन लम्हों के इंतजार में कहीं जिंदगी न गुज़र जाये |

462. इस बात का एहसास किसी पर ना होने देना, कि तेरी चाहतों से चलती है हैं मेरी साँसे।

463. सुंदरता की तलाश में चाहे हम सारी दुनिया का चक्कर लगा आएं पर अगर वो हमारे अंदर नहीं है, तो कही नहीं मिलेगी |

464. ज़िन्दगी तो अपने दम पर ही जी जाती हे दूसरो के कन्धों पर तो सिर्फ जनाजे उठाये जाते हैं |

465. मुझे किसी कि ज़रूरत नहीं सिवाए तेरे मेरी नज़र को तलाश जिसकी बरसों से किसी के पास वो सूरत नहीं सिवाए तेरे जो मेरे दिल और ज़िन्दगी से खेल सके किसी को इतनी इजाजत नहीं सिवाए तेरे |

466. नाम बड़ा किस काम का जो काम किसी के ना आये, सागर से नदियॉं भली जो सबकी प्यास बुझाये |

467. एक ही समानता है पतंग औऱ जिन्दगी मॆं,, ऊँचाई में हो तब तक ही “वाह-वाह” होती हैं |

468. तेरे चेहरे में मेरा नूर होगा फिर तूँ ना कभी मुझसे दूर होगा सोच क्या ख़ुशी मिलेगी जान उस पल जिस पल तेरी माँग में मेरे नाम का सिंधूर होगा।

469. जीत हासिल करनी हो तो, काबिलियत बढ़ाओं, किस्मत की रोटी तो कुत्तों को भी नसीब होती है।

470. चौराहे पर खड़ी ज़िन्दगी, बीच रास्ते पड़ी ज़िन्दगी, बच्चों सी है शायद आज अपनी जिद पर अड़ी ज़िन्दगी |

471. नज़रें मिले तो प्यार हो जाता है , पलकें उठे तो इज़हार हो जाता है , ना जाने क्या कशिश है चाहत में , के कोई अनजान भी हमारी ज़िन्दगी का हक़दार हो जाता है।

472. अगर कोई व्यक्ति आपसे जलता है, तो ये उसकी बुरी आदत नही, बल्कि आपकी काबिलियत है, जो उसे ये काम करने पे मजबूर करती है।

473. कौन कहता है की ज़िन्दगी बहुत छोटी है सच तो ये है की हम जीना ही देर से शुरू करते है |

474. इश्क़ ने हमें बेनाम कर दिया , हर ख़ुशी से हमे अंजान कर दिया, हमने तो कभी नहीं चाहा कि हमें भी मोहब्बत हो, लेकिन आपकी एक नज़र ने हमें नीलाम कर दिया।

475. अगर लगने लगे कि लक्ष्यह हासिल नहीं हो पाएगा, तो लक्ष्यल को नहीं अपने प्रयासों को बदलें |

476. ज़िंदगी में कभी कभी अपनो से हारना सीखो, देख लेना जीत जाओंगे तुम |

477. बदलना आता नहीं हमे मौसम की तरह, हर इक रुत में तेरा इंतज़ार करते हैं, ना तुम समझ सकोगे जिसे क़यामत तक, कसम तुम्हारी तुम्हे हम इतना प्यार करते हैं।

478. एक मूर्ख खुद को बुद्धिमान समझता है, लेकिन एक बुद्धिमान व्यमक्ति खुद को मूर्ख समझता है!

479. तूफान भी आना, जरुरी है जिंदगी में तब जा कर पता चलता है ”कौन” हाथ छुड़ा कर भागता है और “कौन” हाथ पकड़ कर |

480. मजा चख लेने दो उसे गेरो की मोहबत का भी,इतनी चाहत के बाद जो मेरा न हुआ वो ओरो का क्या होगा।

481. भगवान से ना डरो तो चलेगा लेकिन कर्मो से जरूर डरना क्योंकि किए हुए कर्मो का फल तो भगवान को भी भोगना पड़ता है।

482. किसी की मजबूरी का.मजाक ना बनाओ यारों ज़िन्दगी कभी मौका देती है तो कभी धोखा भी देती है |

483. यूँ पलके बिछा कर तेरा इंतज़ार करते है , ये वो गुनाह है जो हम बार बार करते हैं , जलकर हसरत की राह पर चिराग, हम सुबह और शाम तेरे मिलने का इंतज़ार करते हैं।

484. बहुत से गुणों के होने के बावजूद भी, सिर्फ एक दोष सब कुछ नष्ट कर सकता है।

485. यूँ तो मोहब्बत की सारी हकीक़त से वाकिफ है हम, पर उसे देखा तो सोचा चलो ज़िन्दगी बर्बाद कर ही लेते है |

486. मुस्कान का कोई मोल नहीं होता , रिश्तों का कोई तोल नहीं होता, लोग तो मिल जाते है हर रस्ते पर , लेकिन हर कोई आपकी तरह अनमोल नहीं होता।

487. ज़िन्दगी कभी आसान नही होती इसे आसान बनाना पड़ता हे कुछ नज़र अंदाज करके कुछ को बर्दाश्त करके |

488. पति बाल कटवाकर घर लौटा और पत्नी से बोला, “देखो मैं तुमसे 10 साल छोटा लगता हूं या नहीं?” हाजिर जवाब पत्नी बोली, “मुंडन करवा ले ऐसा लगेगा अभी-अभी पैदा हुआ है।”

489. जो बदनाम थे कल तक, आज वो सुखनवर हो गए जो थे कल तक बाहर, आज दिलों के अंदर हो गए हम तो आज भी एक कतरा हैं रुके हुए पानी का, पर लोग देखते ही देखते, कतरे से समंदर हो गए |

490. तुम्हे हक है अपनी जिन्दगी जैसे चाहे जीयो तुम, ज़रा एक पल के लिये सोचना मेरी ज़िन्दगी हो तुम |

491. बेझिझक मुस्कुराये जो भी गम है, जिंदगी में टेंशन किसको कम है, अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम है, जिंदगी का नाम ही कभी ख़ुशी कभी गम है।

492. ना तस्वीर है उसकी की दीदार किया जाये , ना पास है वो जो उसे प्यार किया जाये, यह कैसा दर्द दिया है उस बेदर्द ने , ना उससे कुछ खा जाये , ना उसके बिन रहा जाये।

493. “पैसा” कमाने के लिये इतना वक़्त⏰खर्च ना करो की, “पैसे” खर्च करने के लिये ज़िन्दगी में वक़्त ही ना मिले।

494. आसाराम, रामपाल, और बाबा राम रहीम पर आरोप के बाद कोई मनचला निर्मल बाबा के घर के बाहर एक बोर्ड टांग गया |

495. क़यामत टूट पड़ती है, ज़रा से होंठ हिलने पर ! जाने क्या हस्र होगा, जब वो खुलकर मुस्कुरायेंगे |

496. घड़ी⏰ की टिक टिक को मामूली न समझो बस यूँ समझ लीजिये ” ज़िन्दगी ” के पेड़ पर कुल्हाड़ी के वार है |

497. अकेला ही चला था जानिब-ए-जेल मगर, बाबा आते गए और काफिला बनता गया |

498. मेरे दिल में तेरे लिए प्यार आज भी है माना कि तुझे मेरी मोहब्बत पर शक आज भी है नाव में बैठकर जो धोए थे हाथ तूने पूरे तालाब में फैली मेंहदी की महक आज भी है |

499. दुनिया का सबसे बेहतरीन रिश्ता वहीं होता है जहाँ एक हल्की सी मुस्कराहट और छोटी सी माफ़ी से ज़िन्दगी दोबारा पहले जैसी हो जाती है |

500. मोहब्बत में जब मुझे धोखा मिला तो ज़िन्दगी में चारो ओर उदासी छा गयी सोचा था की आग लगा दूंगा इस दुनिया को पर कम्भख्त कॉलोनी में दूसरी आ गयी |

501. लिखी कुछ शायरी ऐसी तेरे नाम से कि,जिसने तुम्हे देखा भी नही उसने भी तेरी तारीफ कर दी |

502. एक अजीब सी दौड़ है ये ज़िन्दगी जीत जाओ तो कई अपने पीछे छूट जाते हैं, हार जाओ तो अपने ही पीछे छोड़ जाते हैं ।

503. 10 और 20 व 50 के नोट के दादाजी व 100 के नोट के पुज्य पिताजी श्री 500 के व 1000 के नोट का अभी अभी निधन हो गया है । वे कालेधन के मुख्य संगठक थे वही धन्नासेठो के मसीहा थे । अंतिम यात्रा कल 8 तथा उठावना 11 को होगा ।

504. किसी उदास मौसम में, मेरी आँखों पे वो हाथ रख दे अपना, और हस्ती हुई कह दे, पहचान लो तो हम तुम्हारे ना पहचानो तो तुम हुमारे |

505. जिस दिन आपने अपनी जिन्दगी को खुलकर जी लिया, वही दिन आपका है, बाकी तो सिर्फ केलेंडर की तारीखें हैं।

506. वाह रे वाह मोदी जी क्या दिमाग लगाया है काले धन का तो पता नहीं पर घरो की औरतो के खजाने का तो पता चल ही जायेगा |

507. मेरी साँसों में बिखर जाओ तो अच्छा है बन के रूह मेरे जिस्म में उतार जाओ तो अच्छा है किसी रात तेरी गोद में सिर रख कर सो जाऊँ मैं उस रात की कभी सुबह ना हो तो अच्छा है |

508. “शौक पूरे कर लो ज़िन्दगी तो खुद ही पूरी हो जाएगी एक दिन |

509. महिलाओ में मोदी जी के फैसले से नाराजगी पति से छिपकर रखे खजाने पर सर्जीकल अटैक |

510. तन्हाईयों में मुस्कुराना इश्क है; एक बात को सबसे छुपाना इश्क है; यु तो नींद नहीं आती हमें रात भर; मगर सोते-सोते जागना और जागते-जागते सोना इश्क है |

511. जिन्दंगी को समझना बहुत मुशकिल हैं. कोई सपनों की खातिर “अपनों” से दूर रहता हैं और , कोई “अपनों” के खातिर सपनों से दूर |

512. आज रात जिस घर की लाइट्स जलती दिखे समझ लो की नोटों की गिनती चल रही हैं |

513. तुझे इनकार है मुझसे, मुझे इकरार है तुझसे, तू खफा है मुझसे, मुझे चाहत है तुझसे, तू मायूस है मुझसे, मुझे खुशी है तुझसे, तुझे नफ़रत है मुझसे और मुझे प्यार है तुझसे |

514. ज़रा मुस्कुराना भी सीखा दे ऐ ज़िंदगी रोना तो पैदा होते ही सीख लिया था |

515. कल रद्दी वाले आवाज लगायेंगे लो लो भाई 10 रुपयों किलो 500 के नोट 20 रुपयों किलो 1000 के नोट |

516. मोहब्बत करने चला है, तो कुछ अदब भी सीख लेना ऐ दोस्त इसमें हंसते साथ हैं, पर रोना अकेले ही पड़ता है|

517. मत सोच इतना. जिन्दगी के बारे में , जिसने जिन्दगी दी है उसने भी तो कुछ सोचा होगा |

518. चीटिंग है — काला धन बाहर से लाने का कहा था- ये अंदर का निकाल रहे है!

519. क्यूँ हम किसी के ख्यालो मे खो जाते है, एक पल की दूरी मे रो जाते है कोई हमे इतना बता दो की,हम ही ऐसे है या प्यार करने के बाद सब ऐसे हो जाते है |

520. ज़िदगी जीने के लिये मिली थी, लोगों ने सोचने में ही गुज़ार दी |

521. कृपया दान पेटी में 500 अथवा 1000 के नोट न डालें।

522. तू मुझमें पहले भी था , तू मुझमें अब भी है। पहले मेरे लफ्जों में था अब मेरी खामोशियों में है।

523. जिंदगी को इतना सिरियस लेने की जरूरत नही यारों, यहाँ से जिन्दा बचकर कोई नही जायेगा |

524. में धारक को 500 और 1000 रुपए के नोट अदा करने का वचन वापस लेता हूँ |

525. प्यार जब मिलता नही तो होता ही क्यूँ है” “अगर ख्वाब सच नही होते तो इंसान सोता क्यू है” “जब यही प्यार आँखो के सामने किसी और का हो जाए” “तो फिर यह पागल दिल इतना रोता क्यूँ है”|

526. भरोसे पे ही “जिंदगी” टीकी है वरना कौन कहता “फ़िर मिलेंगे”|

527. आज रात को आराम से सोये चोर भी आने से पहले 100 बार सोचेगा |

528. मेरी वफ़ाएँ याद करोगे, रोओगे फरियाद करोगे, मुजको तो बर्बाद किया हे, अब ओर किसे बर्बाद करोगे |

529. सिर्फ सांसें चलते रहने को ही ज़िंदगी नहीं कहते आँखों में कुछ ख़्वाब और दिल में उम्मीदें होना भी ज़रूरी हैं|

530. 500 और 1000 के अकास्मिक मृत्यु। 100 का नोट, बना परिवार का मुखिया। पगड़ी रस्म कल।

531. कहा मिलेगा तुम्हे मुझ जैसा कोई; जो तुम्हारे सितम भी सहे; और तुमसे मोहब्बत भी करे |

532. जिन्दगी की हर सुबह कुछ शर्ते लेकर आती है, और जिन्दगी की हर शाम कुछ तजुर्बे देकर जाती है |

533. मैंने पूछा उनसे, भुला दिया मुझको कैसे चुटकियाँ बजा के वो बोली ऐसे, ऐसे, ऐसे |

534. अब तो गम सहने की आदत सी हो गयी है रात को छुप – छुप रोने की आदत सी हो गयी है तू बेवफा है खेल मेरे दिल से जी भर के हमें तो अब चोट खाने की आदत सी हो गयी है |

535. “हर रोज गिरकर भी, मुक्कमल खड़े हैं ए जिंदगी देख, मेरे हौसले तुझसे भी बड़े हैं |

536. हसीनों से मिलें नज़रें अट्रैक्शन हो भी सकता है, चढ़े फीवर मोहब्बत का तो एक्शन हो भी सकता है, हसीनों को मुसीबत तुम समझ कर दूर ही रहना, ये अंग्रेजी दवाएं हैं रिएक्शन हो भी सकता है |

537. कुछ चीज़े हम पुरानी छोड़ आए हैं, आते आते उसकी आँखो मे पानी छोड़ आए हैं, ये ऐसा दर्द है जो बया हो ही नही सकता दिल तो साथ ले आए धड़कन छोड़ आए हैं |

538. जिंदगी में सिर्फ ‘पाना’ ही सबकुछ नहीं होता, उसके साथ नट-बोल्ट भी चाहिए ।

539. मुझको अज़ीज़ है वही मोहब्बत जिसमें उजड़ गया संसार मेरा |

540. हर दिल का एक राज़ होता है, हर बात का एक अंदाज़ होता है जब तक ना लगे बेवफ़ाई की ठोकर , हर किसी को अपनी पसंद पर नाज़ होता है |

541. यहां खुदा है, वहां खुदा है, आस पास खुदा ही खुदा है, और जहां खुदा नहीं है, वहां कल खुदेगा ।

542. मोहब्बत के ज़ख्म बेहद खुबसूरत हैं इन ज़ख्मों को यूँ तो ना सिया कर |

543. इस बात का एहसास किसी पर ना होने देना के तेरी चाहतों से चलती है मेरी साँसें |

544. पत्नी अर्धांगिनी होती है, इसलिए उसे आधी जानकारी ही दें, जीवन के आधे कष्ट कम हो जायेंगे |

545. हम मोहब्बत की जुबाँ समझते हैं भई आप ये जुबाँ बोलते हैं क्या |

546. क्या विश्वास नही तुम्हे हमारे विश्वास पे आज तुम फिर से ज़रा मेरी बातों पे एतबार तो करो यूँ ना कहो मुझे बेवफा, मैं बेवफा नही हूँ तुम मेरी वफ़ा को ज़रा समझने की कोशिश तो करो |

547. अपनी इंडिया में सरकार हो या शादी, बको एक साल में खुश खबरी चाहिए |

548. मोहब्बतों की हदें देखना चाहता है हमारी सब्र हमारा अब आज़माने लगा है वो |

549. वो मोहब्बत भी तेरी थी, वो नफ़रत भी तेरी थी, वो अपनाने और ठुकराने की अदा भी तेरी थी, मैं अपनी वफ़ा का इंसाफ़ किस से माँगता वो शहर भी तेरा था, वो अदालत भी तेरी थी |

550. पगली प्यार दिखाएगी तो प्यार पाएगी एट्टीटुड दिखाएगी तो थप्पड खाएगी |

551. मुझे मोहब्बत थी जिससे बेहद ही कभी उसे अब देखूं तो बेवफा सी लगती है |

552. आंसूओ तले मेरे सारे अरमान बह गये जिनसे उमीद लगाए थे वही बेवफा हो गये, थी हमे जिन चिरागो से उजाले की चाह वो चिराग ना जाने किन अंधेरो में खो गये |

553. कभी कभी ऐसी लडकी से शादी हो जाती है, जिसे लडका खुद सात जन्म तक नहीं पटा सकता |

554. तेरा रूप ढला हो लेकिन कशिश नहीं तुझसे आज भी उतनी ही मोहब्बत है |

555. ज़िन्दगी का फलसफा भी कितना अजीब है, शामें कटती नहीं, और साल गुज़रते चले जा रहे है |

556. मैं भी तेरे ईश्क में आतंकवादी बन जाऊं, तुझे बांहो में ले के बम से उड़ जाऊ |

557. “आकाश” ना आई तुम्हें करने मोहब्बत जिससे हो मोहब्बत उसे कोसते हैं क्या |

558. ज़रूरी तो नहीं के शायरी वो ही करे जो इश्क में हो, ज़िन्दगी भी कुछ ज़ख्म बेमिसाल दिया करती है।

559. नींद तो ठीक ठाक आई , पर जैसे ही आँख खुली, फिर वही ज़िन्दगी और वो याद आई |

560. बड़ी दिल-फरेब थी वो मोहब्बत धुंधला से रहे हैं जिसके फ़साने |

561. अकेले ही गुज़रती है ज़िन्दगी लोग तसल्लियां तो देते हैं , पर साथ नहीं |

562. मेरे नजदीक आ के देख मेरे अहसास की शिद्दत, ये दिल कितना धड़कता है,,तेरा नाम आने पर |

563. मोहब्बत रोग बन जाये तो छोड़ देना तुम किसी के लिए ज़िन्दगी ज़ाया की नहीं जाती |

564. जीवन की सुबह में कभी सांझ न हो जो मिल न सके रब से वो मांग न हो खूब चमकें सितारे खुशियों के ज़िन्दगी कभी अमावस का चाँद न हो |

565. सीने से लगा के सुन वो धड़कन जो हर पल तुझसे मिलने की ज़िद करती है |

566. मोहब्बत नहीं इबादत की है तेरी क्यों मेहरबां कोई तेरी चश्म नहीं होती |

567. सही वक़्त पर पिए गए “कड़वे घूंट” अक़्सर ज़िन्दगी “मीठी” कर दिया करते है” |

568. मेरे घर की दर ओ दीवार पर अब आइना नहीं जब जी करता है ख़ुद को तेरी आँखो में देख लेता हूँ |

569. मैं ख़ामोशी तेरे मन की, तू अनकहा अलफ़ाज़ मेरा मैं एक उलझा लम्हा, तू रूठा हुआ हालात मेरा |

570. रास्ता तू ही और मंज़िल तू ही, चाहे जितने भी चलूँ मैं कदम, तुझसे ही तो मुस्कुराहटें मेरी, तुझ बिन ज़िन्दगी भी है सूनी |

571. न चाहकर भी मेरे लब पर ये फ़रियाद आ जाती है, ऐ चाँद सामने न आ किसी की याद आ जाती है |

572. सौदा कुछ ऐसा किया है तेरे ख़्वाबों ने मेरी नींदों से या तो दोनों आते हैं, या कोई नहीं आता |

573. तकदीरें बदल जाती हैं, जब ज़िन्दगी का कोई मकसद हो; वर्ना ज़िन्दगी कट ही जाती है ‘तकदीर’ को इल्ज़ाम देते देते |

574. जब रात को आपकी याद आती है सितारों में आपकी तस्वीर नज़र आती है खोजती है निग़ाहें उस चेहरे को याद में जिसकी सुबह हो जाती है |

575. जब नफ़रत करते करते थक जाओ तो एक मौका प्यार को भी दे देना |

576. ये ज़िन्दगी जो मुझे कर्ज़दार करती रही, कभी अकेले में मिले तो हिसाब करूँ |

577. यूँ दूरियों की आग में सुलगती है जाँ छुटता नही है दिल से तेरी याद का धुआँ |

578. सुना था मोहब्बत मिलती है, मोहब्बत के बदले हमारी बारी आई तो, रिवाज हि बदल गया |

579. धीरे धीरे उम्र कट जाती है, जीवन यादों की पुस्तक बन जाती है, कभी किसी की याद बहुत तड़पाती है और कभी यादों के सहारे ज़िन्दगी कट जाती है |

580. नींद को आज भी शिकवा है मेरी आँखों से, मैंने आने न दिया उसको तेरी याद से पहले |

581. बेवफा कहने से पहले मेरी रग रग का खून निचोड़ लेना कतरे कतरे से वफ़ा ना मिले तो बेशक मुझे छोड़ देना |

582. दो रोज़ तुम मेरे पास रहो दो रोज़ मैं तुम्हारे पास रहुं चार दिन की ज़िन्दगी है ना तुम उदास रहो ना मैं उदास रहुं |

583. ये मत कहना कि तेरी याद से रिश्ता नहीं रखा; मैं खुद तन्हा रहा मगर दिल को तन्हा नहीं रखा |

584. प्यार मोहब्बत चाहत इश्क़ जिन्दगी उल्फ़त एक तेरे आने से कितना बदल गई किस्मत |

585. “दहशत” सी होने लगी है इस सफ़र से अब तो ए-ज़िन्दगी कहीं तो पहुँचा दे ख़त्म होने से पहले |

586. रात हुई जब शाम के बाद! तेरी याद आई हर बात के बाद! हमने खामोश रहकर भी देखा! तेरी आवाज़ आई हर सांस के बाद |

587. ठहर सके जो लबों पे हमारे हँसी के सिवा, है मजाल किसकी |

588. फटी जेब सी ज़िन्दगी, सिक्को से दिन लो आज फिर इक गिर कर गुम हो गया |

589. हो जाओ गर तनहा कभी तो मेरा नाम याद रखना मुझे याद हैं सितम तेरे , तू मेरा प्यार याद रखना |

590. तुम पल भर के लिए दूर क्या जाते हो तो हम ‘बिखरने’ से लगते हैं |

591. मेरी ज़िन्दगी में खुशियाँ तेरे बहाने से है, आधी तुझे सताने से है, आधी तुझे मनाने से है |

592. इन आँखों ने भी दम तोड़ दिया तेरे आने के एतबार में मुझे याद है वादा फरोशी तेरी तू ये इंतज़ार याद रखना |

593. मुझे क़बूल है हर दर्द हर तकलीफ़ तेरी चाहत में सिर्फ़ इतना बता दो क्या तुम्हें मेरी मोहब्बत क़बूल है |

594. चाहा है तुझ को तेरी तग़ाफ़ुल के बावजूद; ए ज़िन्दगी तू याद करेगी कभी हमें |

595. गम ने हसने न दिया ज़माने ने रोने न दिया इस उलझन ने चैन से जीने न दिया थक के जब सितारों से पनाह ली तो तेरी याद ने सोने न दिया |

596. मैं खुद भी अपने लिए अजनबी हूं मुझे गैर कहने वाले तेरी बात मे दम है |

597. मरता नहीं कोई किसी के बगैर ये हकीकत है ज़िन्दगी की लेकिन सिर्फ सांसें लेने को `जीना` तो नहीं कहते |

598. जीने को कोइ बहाना बता दो तेरी याद में रोज़ मरती हूँ मैं |

599. ज़िन्दगी में कई ऐसे लोग भी मिलते हैं जिन्हें हम पा नहीं सकते सिर्फ चाह सकते हैं |

600. बाद मुद्दत के यह घडी आई आप आये तो ज़िन्दगी आई इश्क मर-मर के कामयाब हुआ आज एक ज़र्रा आफताब हुआ |

601. मुस्कुराती आँखों से अफ़साना लिखा था, शायद आपका मेरी ज़िन्दगी में आना लिखा था तक़दीर तो देखो मेरे आँसू की उसको भी तेरी याद मे बह जाना लिखा था |

602. नज़रों से दूर सही दिल के बहुत पास है तू बिखरी हुई इस ज़िन्दगी में मेरे जीने की आस है तू |

603. कुछ इस तरह फ़कीर ने ज़िन्दगी की मिसाल दी, मुट्ठी में धूल ली और हवा में उछाल दी |

604. दुआ कौन सी थी हमे याद नही बस इतना याद है, दो हथेलियाँ जुड़ी थी एक तेरी थी एक मेरी थी |

605. जादू वो लफ़्ज़-लफ़्ज़ से करता चला गया और हमने बात-बात में हर बात मान ली |

606. ज़िन्दगी की जरूरतें समझिए वक्त कम है फरमाइश लम्बी हैं झूठ-सच,जीत- हार की बातें छोड़िये, दास्तान बहुत लम्बी है |

607. सांस को बहुत देर लगती है आने में हर सांस से पहले तेरी याद आ जाती है |

608. दुनिया खरीद लेगी हर मोड़ पर तुझे तूने जमीर बेचकर अच्छा नहीं किया |

609. ज़िन्दगी एक हसीन ख्वाब है जिसमें जीने की चाहत होनीचाहिये गम खुद ही खुशी में बदल जायेंगे सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनीचाहिये |

610. हम कोई तर्क ए वफ़ा करते हैं तू ना सही तेरी याद ही सही |

611. कभी आपको याद आई कभी हमने याद किया खैर छोड़ो ये बेकार सियासत चलो आओ बात करें |

612. कुछ ज़रूरतें पूरी तो कुछ ख्वाहिशें अधूरी, इन्ही सवालों के जवाब हैं ज़िन्दगी |

613. तुझसे ज्यादा तेरी याद को है मुझसे हमदर्दी, देखती है मुझे तन्हा तो चली आती है |

614. सच के रास्ते पे चलने का ये फ़ायदा हुआ रास्ते में कहीं भीड़ नहीं थी |

615. लम्हों की खुली किताब हैं ज़िन्दगी, ख्यालों और सांसों का हिसाब हैं ज़िन्दगी |

616. मैं शिकायत करूँ तो क्यों करूँ ,ये तो किस्मत की बात है, तेरी सोच में भी नहीं मैं,और तू मुझे लफ्ज़ लफ्ज़ याद है|

617. वो मेरी हर दुआ में शामिल था जो किसी और को बिन मांगे मिल गया |

618. फिर कोई मोड़ लेने वाली है ज़िन्दगी शायद अब के फिर हवाओं में, एक बे-करारी है |

619. मुझे याद है तो इतना तेरी जुस्तजू में था मैं मगर उसके बाद तो बस कहीं ख़ुद ही खो गया मैं |

620. तुम थोड़ी सी ‪#‎फुलझड़ी‬ क्या हुई पूरा मौहल्ला ही ‪#‎माचिस‬ हो गया |‬‬

621. ज़िन्दगी की राहों में ऐसा अक्सर होता है फैसला जो मुश्किल हो वो ही बेहतर होता है |

622. यूँ चाँद भी तन्हा है, चांदनी के बगैर, मेरा दिल भी तन्हा है तेरी याद के बगैर |

623. कोन कहता है सिर्फ नफरतो में ही दर्द है कभी कभी बेपनाह मोहब्बत भी बहुत दर्द देता है |

624. सुबह तो खुशनुमा थी, क्यों शाम मुझे फिर तनहा छोड़ गयी, मंजिल दिखी ही थी, कि ज़िन्दगी फिर रास्ता मोड़ गयी |

625. चली आती है तेरी याद मेरे जहन में अक्सर तुझे हो ना हो तेरी यादो को जरूर मुझसे मोहब्बत है |

626. तमाम नीदें गिरवी है हमारी उसके पास जिससे जरा सी मोहब्बत की थी |

627. यादो की कसक..साँसों की थकन..आँखों में नमी सी है. ज़िन्दगी तुझमे सब है, फिर काहे की कमी सी है |

628. याद आती है तेरी आ के ठहर जाती है मेरी साँसों में जुनूँ बन के उतर जाती है |

629. चाहो तो छोड़ दो चाहो तो निभा लो मोहब्बत तो हमारी है पर मर्ज़ी सिर्फ तुम्हारी है |

630. डूबती हैं ज़िन्दगी,ग़म के सागर में कभी बच निकलने की तुम्ही,बस आस लगते हो मुझे |

631. लिखते हैं कि तेरी याद चली जायेगी, पर हर लब्ज क़यामत ढाता है ।

632. सच्चा प्यार चाहे दो पल के लिए ही हो सच्चा प्यार चाहे दो पल के लिए ही हो |

633. आरज़ू,हसरत,तमन्ना और ख़ुशी कुछ भी नही, ज़िन्दगी में तू नही तो ज़िन्दगी कुछ भी नही |

634. बहुत छुपा कर रखा था तेरी मोहब्बत का राज़ सबसे ! तेरी याद आते ही ये अश्क सब बयान कर देते हैं |

635. सुनो एक बार और मोहब्बत करनी है तुमसे लेकिन इस बार बेवफाई हम करेंगे |

636. हाथ पकड़ कर रोक लेते अगर, तुझपर ज़रा भी ज़ोर होता मेरा, ना रोते हम यूँ तेरे लिये, अगर हमारी ज़िन्दगी में तेरे सिवा कोई ओर होता |

637. मेरी मोहब्बत सच्ची है इसलिए तेरी याद आती है अगर तेरी बेवफाई सच्ची है तो अब याद मत आना |

638. हर घडी एक नाम याद आता है कभी सुबह कभी शाम याद आता है सोचते है की कर ले फिर से मोहब्बत फिर हमे मोहब्बत का अंजाम याद आता है |

639. शिकायत तो बहुत है तुझसे ऐ ज़िन्दगी, पर चुप इसलिए हूं कि जो दिया तूने वो भी बहुतों को नसीब नहीं होता |

640. धूप गई छाँव गई दिन गया रात गई दिल से तेरी याद न गयी मिलने की फरियाद न गयी |

641. सुना है आज उनके आँखों में आँसू आगये बच्चो को सिखा रहे थे मोहब्बत ऐसे करते है |

642. इन्तिहा आज इश्क की कर दी, आप के नाम ज़िन्दगी कर दी, था अँधेरा गरीब खाने में, आप ने आ के रोशनी कर दी |

643. तेरी याद को पसन्द आ गई है मेरी आँखों की नमी, हँसना भी चाहूँ तो रूला देती है तेरी कमी |

644. जो आप से सच्ची मोहब्बत करेगा वो आप की आप से ज्यादा करेगा |

645. ख़्वाबों से मुझको और न बहला सकेगी रहने दे ज़िन्दगी..! तेरा जादू उतर गया |

646. मेरी डबडबाती आंखों पे ठिठके अश्क़ सा नश्तऱ सी गड़ती तेरी याद सा इश्क़ |

647. बेवजह हम वजह दुढ़ते है तेरे पास आने को ये दिल बेकरार है तुझे धड़कन में बसने को बुझी नही प्यास इन होठो की अभी ना जाने कब मिलेगा सुकून तेरे इस दीवाने को |

648. मुझे रात दिन ये ख्याल है•वो नज़र से मुझको गिरा ना दें•मेरी ज़िन्दगी का दिया कहीं•ये ग़मो की आंधी बुझा ना दें|

649. कितने अजीब इंसान है तेरी दुनिया मेँ ऐ खुदा शौक ऐ मोहब्बत भी रखते है और याद तक नहीँ करते |

650. तुम भी करके देख मोहब्बत किसी से जान जाओगे की हम मुश्कुराना क्यों भूल गए |

651. तेरी मजबूरियाँ भी होगी चलो मान लेते है मगर तेरा एक वादा भी था मुझे याद रखने का |

652. पलकें झुकें , और नमन हो जाए मस्तक झुके, और वंदन हो जाए ऐसी नज़र, कंहाँ से लाऊँ, मेरे कन्हैया कि आपको याद करूँ और आपके दर्शन हो जाए |

653. तेरी मुहब्बत की तलब थी तो हाथ फैला दिए वरना, हम तो अपनी ज़िन्दगी के लिए भी दुआ नहीं करते |

654. तुजे भुलाने के हज़ार तरीक़े सोचते रहे रात भर , और इस तरह तेरी याद में एक रात और गुज़र गयी |

655. कृष्णा तेरी गलियों का जो आनंद है, वो दुनिया के किसी कोने में नहीं । जो मजा तेरी वृंदावन की रज में है, मैंने पाया किसी बिछौने में नहीं ।

656. उस के चहरे पर लिखे है दिल के अफ़साने कई, वो किताबे-ज़िन्दगी का इक सुनहरा बाब है |

657. तुझे भूल जाने की कोशिश कभी कामयाब न हो सकी तेरी याद फूल-ऐ-गुलाब है, जो हवा चली तो महक गई |

658. कृष्णा जिसका नाम है , गोकुल जिसका धाम है , ऐसे भगवन को हम सब का परनाम है. कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये |

659. ज़िन्दगी जिसका बड़ा नाम सुना है हमने, एक कमजोर सी हिचकी के सिवा कुछ भी नहीं।

660. तेरी याद से शुरू होती है मेरी हर सुबह, फिर ये कैसे कह दूँ कि मेरा दिन खराब है |

661. पल पल हर पल तुमको पुकारू जनम जनम से बाट निहारु कर दे कृपा तोपे तन मन वारू अपने बाग का फूल समझ कर प्रेम करो कृष्णा प्रेम करो कृष्णा |

662. एक उम्र गुस्ताखियों के लिये भी नसीब हो, ये ज़िंदगी तो बस अदब में ही गुजर गई।

663. आज फिर दिल ने कहा आओ भुला दें यादें भूल जाना भी तो इक तरह की नेअमत है वरना इंसान को पागल न बना दें यादें |

664. मेरा आपकी कृपा से, सब काम हो रहा है, करते हो तुम कन्हैया, मेरा नाम हो रहा है पतवार के बिना हे, मेरी नाव चल रही है, बस होता रहे हमेशा, जो कुछ भी हो रहा हैं |

665. हर बात मानी है तेरी सिर झुका कर ऐ जिंदगी, हिसाब बराबर कर तू भी तो कुछ शर्तें मान मेरी।

666. इक रिश्ता जो है और नहीं भी बस कुछ लफ़्ज़ से हैं तेरे मेरे दरमियां कुछ पुरानी /कुछ ताज़ी यादें दो जोड़ी आंखों की वो गुफ्तगू और इक अभूली याद |

667. यशोदा का लाल, देते उसको सब दुलार माखन खाने की करता सबसे मनुहार गोपियों संग करता नित-नई लीला अपार कृष्णा जन्माष्टमी लाये आपके जीवन में बहार |

668. अब समझ लेता हूँ मीठे लफ़्ज़ों की कड़वाहट, हो गया है ज़िन्दगी का तजुर्बा थोड़ा थोड़ा।

669. तेरी तस्वीरों में कुछ यादें मेरी भी हैं कुछ पलों की बातें अधूरी भी हैं |

670. मन को भाये कान्हा की मनभावन मूरत हटती नहीं दिल से उसकी प्यारी सूरत यही तो है कान्हा की महिमा और प्यार मुबारक हो आपको कृष्णा जन्माष्टमी का त्योंहार |

671. मुझे जिंदगी का इतना तजुर्बा तो नहीं है दोस्तों, पर लोग कहते हैं यहाँ सादगी से कटती नहीं।

672. वो मोहब्बत ही क्या जिसमें यादें ही न हो और वो यादें ही क्या जिसमें तुम न हो |

673. सबको नाच नचाये प्यारे कान्हा का गान दिल को मोहित कर दे मुरली की मीठी तान राधा संग रास रचाए कृष्णा हर रात तभी तो रहती हर होठों पर कृष्णा की बात. सबको कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें |

674. ले दे के अपने पास फ़क़त एक नजर तो है, क्यूँ देखें ज़िन्दगी को किसी की नजर से हम।

675. यादें जब आती हैं बनजाते हैं रुसवाइयों के बवंडर आँखों से आँसुंओं की धार निकल जाती है अँधेरे उजले पथ पर चलते चलते एक टूटी तस्वीर उभर जाती है ।

676. प्यारा नंदकिशोर है मेरा माखनचोर इसने बांधी मुझ संग प्रीत की डोर मेरी पलकें झुकें तो नमन हो जाये याद उसको करूँ तो दर्शन हो जाये. सबको कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें |

677. कभी खोले तो कभी ज़ुल्फ़ को बिखराए है, ज़िंदगी शाम है और शाम ढली जाए है।

678. उतर जाती हैं जो जहन में तो फिर जल्दी नींद नहीं आती ये कॉफ़ी और तुम्हारी यादें एक जैसी हैं |

679. पवित्र पावन मनभावन दिन आया है गोपियों संग कान्हा ने रास रचाया है हुआ आज कृष्ण कन्हाई का जन्म है जय कृष्ण जय कृष्ण मेरा वन्दन है. बधाई हो कृष्णा जन्म की |

680. मंजिलें मुझे छोड़ गयी रास्तों ने संभाल लिया, जिंदगी तेरी जरूरत नहीं मुझे हादसों ने पाल लिया।

681. एक मुख़्तसर लम्हा ही तो था अपने पीछे ना जाने कितनी यादें छोड़ गया |

682. यमुना के तट पर घुमे मेरा चंचल कान्हा उसका मेरा प्यार जाने ये सारा जमाना मैं हूँ उसकी सदा से वो तो है मेरा मीत सुन ले आज चारों दिशाएं ख़ुशी के गीत. सबको कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें |

683. है अजीब शहर की ज़िंदगी न सफर रहा न क़याम है कहीं कारोबार सी दोपहर कहीं बदमिजाज़ सी शाम है।

684. तेरी यादें अक्सर छेड़ जाया करती हैं कभी अा़ँखों का पानी बनकर कभी हवा का झोंका बनकर |

685. दुनिया को जिसने करना प्यार बेशुमार सिखाया सबके दिलों पर एकछत्र राज करना सिखाया उसकी मुरली की तान दीवाना मस्ताना बनाती है हर इक चाहने वाली रातों में सपने उसके सजाती है. सबको कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें |

686. छोड़ ये बात कि मिले ज़ख़्म कहाँ से मुझको, ज़िन्दगी इतना बता कितना सफर बाकी है।

687. ले लो ना वापिस वो तड़प वो आंसू वो यादें सारी, नही कोई जुर्म मेरा तो फिर ये सजायें कैसी |

688. तुम न जानो कान्हा कितना तुम्हे हम चाहते हैं तडपते दिल को मेरे बस तुमसे ही तो राहतें हैं तुम आ भी जाओ आँखों में अब आंसू आ पड़े हैं हो गयी अब रात राहों में तेरी हम खड़े हैं सबको कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनायें |

689. देखा है ज़िन्दगी को कुछ इतना करीब से, चेहरे तमाम लगने लगे हैं अब तो अजीब से।

690. ज़िन्दगी मे कुछ हसीन पल बस यूँही गुज़र जाते है रह जाती है यादें इंसान बिछड़ जाते है |

691. तेरे दर्शन से हो जाऊं ओ कान्हा मैं पल-पल निहाल तेरी मुझ पर असीम इनायत है यशोदा के लाल इक वो जगह बता दो कन्हाई जहाँ तुम नहीं हो जिधर भी जाये नजर मेरी तुम तो बस वहीँ हो |

692. ज़िन्दगी से पूछिये ये क्या चाहती है, बस एक आपकी वफ़ा चाहती है, कितनी मासूम और नादान है ये, खुद बेवफा है और वफ़ा चाहती है।

693. गुज़र जायेगा ये दौर भी चंद लम्हो में कुछ अजनबियों से ही सही यादें तो बना लीजिये जनाब |

694. मेरी नींद चुराई तुमने ओ कान्हा मेरा चैन चुराया तुमने ओ कान्हा अब तो आ जाओ मेरी निगाहों के सामने धडकन भी बढने लगी, दिल लगा थामने. कान्हा तुम मेरी हो जान |

695. शतरंज‬ खेल रही है मेरी ‪जिंदगी‬ कुछ इस तरह, कभी तेरी मोहब्बत मात देती है कभी मेरी ‪किस्मत‬।‬‬

696. इंतज़ार रहता है हर शाम तेरा; यादें काटती हैं ले-ले के नाम तेरा; मुद्दत से बैठे हैं तेरे इंतज़ार में; कि आज आयेगा कोई पैगाम तेरा |

697. कान्हा तुम जो मिल गए तो ये लगता है के खुदाई मिल गयी साँसों में ऐसे राम गए हो की जैसे फूलों में खुशबू मिल गयी. हैप्पी जन्माष्टमी |

698. जो लम्हा साथ है उसे जी भर के जी लेना, ये कम्बख्त जिंदगी भरोसे के काबिल नहीं है।

699. यादें उन्हीं की आती है जिनसे कुछ ताल्लुक हो ! हर शख्स मुहब्बत की नजर से देखा नही जाता |

700. मेरा कृष्ण कन्हैया बड़ा नटखट है मतवाला गोकुल का रखवारा है कोई कहे इसे कृष्णा कन्हैया कृष्ण जन्माष्टमी की बधाई हो सबको |

701. अब तो अपनी तबियत भी जुदा लगती है, सांस लेता हूँ तो ज़ख्मों को हवा लगती है, कभी राजी तो कभी मुझसे खफा लगती है, जिंदगी तू ही बता तू मेरी क्या लगती है।

702. ख़र्च जितना भी करूँ, बढ़ती जाती है ये यादें तेरी अजीब दौलत है !

703. मेरी आंखे ढूंढे कन्हा चारों ओर कहाँ छुप गया रे मेरा माखनचोर कन्हैया उड़ गया ऐसे जैसे पुरवैया क्या करेगी अब प्यारी यशोदा मैया |

704. फुर्सत मिले जब भी तो रंजिशे भुला देना, कौन जाने साँसों की मोहलतें कहाँ तक हैं।

705. इतनी यादें तेरी पर तू ही मेरे पास नहीं इतनी बातें है पर करने को तू ही साथ नहीं |

706. सांवरिया बंसीवाला है तू नंदलाला तू है रंगीला, छेल-छबीला, मुरली बजैया तू है अलबेला, मनमोहन, मतवाला तेरी दीवानी हर इक ब्रिज बाला. कृष्णा तेरी जय हो |

707. ज़िन्दगी एक हसीन ख़्वाब है, जिसमें जीने की चाहत होनी चाहिये, ग़म खुद ही ख़ुशी में बदल जायेंगे, सिर्फ मुस्कुराने की आदत होनी चाहिये।

708. इस दुनियाँ में सब कुछ बिकता है, फिर जुदाई ही रिश्वत क्युँ नही लेती? मरता नहीं है कोई किसी से जुदा होकर, बस यादें ही हैं जो जीने नहीं देती |

709. कोरे कागज पर हमने अपनी कहानी लिख दी, मिला जाे दुनिया से हमें, उससे हमने शायरी लिख दी, फिर क्यों अाखों के आसुओं में तेरी कमी है दिखती, अाैर मेरे जिंदगी की किताब पर तेरे एहसास की निशानी दिखती |

710. हो के मायूस न यूं शाम से ढलते रहिये, ज़िन्दगी भोर है सूरज सा निकलते रहिये, एक ही पाँव पे ठहरोगे तो थक जाओगे, धीरे-धीरे ही सही राह पे चलते रहिये।

711. क्या खूब होता अगर यादें रेत होती मुठी से गिरा देते, पाँव से उड़ा देते |

712. कहाँ वो नई गहिरायाँ हसने -हँसाने में, मिलेंगी जो किसी के साथ दो आंसू बहने में , तुम आये तो खुशी आई लेकिन हंसु अभी केसे , कुछ देर तो लगती है रो कर मुस्कराने में |

713. चलो बिखरने देते है जिंदगी को अब, सँभालने की भी तो एक हद होती है।

714. जीना चाहते हैं ज़िन्दगी रास नहीं आती मरना चाहते हैं मौत पास नहीं आती बहुत उदास हैं हम इस ज़िन्दगी से उनकी यादें तो तड़पाने से बाज़ नहीं आती |

715. ना जाने क्यूँ नज़र लगी ज़माने की, अब वजह मिलती नहीं मुस्कुराने की, तुम्हारा गुस्सा होना तो जायज़ था, हमारी आदत छूट गयी मनाने की |

716. थक गया हूँ तेरी नौकरी से ऐ जिन्दगी, मुनासिब होगा मेरा हिसाब कर दे।

717. यूँ ही गुजर जाते हैं मीठे लम्हे किसी मुसाफिर की तरह .. और यादें वहीँ खड़ी रह जाती हैं रुके रास्तों की तरह |

718. तक़दीर के आईने में मेरी तस्वीर खो गई, आज हमेशा के लिए मेरी रूह सो गई, मोहब्बत करके क्या पाया मैंने, वो कल मेरी थी आज किसी और की हो गई |

719. जन्नत-ए-इश्क में हर बात अजीब होती है, किसी को आशिकी तो किसी को शायरी नसीब होती है।

720. जहन में हर शाम यादें तुम्हारी आ बैठती हैं ऐसे किसी दीवार पर दोपहर की धूप चढ़ी हो जैसे |

721. उलझी शाम को पाने की ज़िद न करो, जो ना हो अपना उसे अपनाने की ज़िद न करो, इस समंदर में तूफ़ान बहुत आते है, इसके साहिल पर घर बनाने की ज़िद न करो |

722. रोज साहिल से समंदर का नजारा न करो, अपनी सूरत को शबो-रोज निहारा न करो, आओ देखो मेरी नजरों में उतर कर खुद को, आइना हूँ मैं तेरा मुझसे किनारा न करो।

723. कुछ जख्म कुछ दर्द कुछ यादें ” कुछ अधुरे ख्वाब ” कुछ झूठे वादे ! शुक्रिया मोहब्बत तेरा ” तुमने खाली हाथ नही भेजा अपने दर से |

724. ज़िंदगी है बड़ी नादान इसलिए चुप हूँ, दर्द ही दर्द सुबह शाम इसलिए चुप हूँ, कहो तो कह दूं ज़माने से दास्तान अपनी, उसमे आएगा तुम्हारा नाम इसलिए चुप हूँ |

725. बहुत सोचा बहुत समझा बहुत ही देर तक परखा, कि तन्हा हो के जी लेना मोहब्बत से तो बेहतर है।

726. मेरे दिल की सिम्त न देख तू,। किसी और का ये मुक़ाम है, यहाँ उसकी यादें मुक़ीम हैं, ये किसी को मैने दिया नही|

727. वो कह कर गया था मैं लौटकर आउंगा, मैं इंतजार ना करता तो क्या करता, वो झूठ भी बोल रहा था बड़े सलीके से, मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता |

728. कहने लगी है अब तो मेरी तन्हाई भी मुझसे, मुझसे कर लो मोहब्बत मैं तो बेवफा भी नहीं।

729. प्यार का रिश्ता भी कितना अजीब होता है.. मिल जाये तो बातें लंबी और बिछड़ जायें तो यादें लंबी |

730. कहाँ कोई ऐसा मिला जिस पर हम दुनिया लुटा देते, हर एक ने धोखा दिया, किस-किस को भुला देते, अपने दिल का ज़ख्म दिल में ही दबाये रखा, बयां करते तो महफ़िल को रुला देते |

731. एहतियातन देखता चल अपने साए की तरफ, इस तरह शायद तुझे एहसास-ए-तन्हाई न हो।

732. रूबरू मिलने का मौका मिलता नहीं है रोज, इसलिए लफ्ज़ों से तुमको छू लिया मैंने।

733. उड़ता हुआ गुबार सर-ए-राह देख कर, अंजाम हमने इश्क़ का सोचा तो रो दिए, बादल फिजा में आप की तस्वीर बन गए, साया कोई ख्याल से गुजरा तो रो दिए।

734. कुदरत के इन हसीन नजारों का हम क्या करें, तुम साथ नहीं तो इन चाँद सितारों का क्या करें।

735. टपकती है निगाहों से बरसती है अदाओं से, मोहब्बत कौन कहता है कि पहचानी नहीं जाती।

736. हम रूठे तो किसके भरोसे, कौन आएगा हमें मनाने के लिए, हो सकता है, तरस आ भी जाए आपको, पर दिल कहाँ से लाये आप से रूठ जाने के लिए |

737. कितना भी दुनिया के लिए हँस के जी लें हम, रुला देती है फिर भी किसी की कमी कभी-कभी।

738. मोहब्बत नाम है जिसका वो ऐसी क़ैद है यारों, कि उम्रें बीत जाती हैं सजा पूरी नहीं होती।

739. प्यार कोई दीया नहीं,जब चाहा जला दिया बुझा दिया, ये बालू का महल नहीं,जब चाहा बना लिया मिटा दिया, ये रस है जो दिल की गहराइयों से लिकलता है, ये बच्चों का खेल नहीं,जिसे चाहा हरा दिया जिता दिया |

740. कभी सोचा न था तन्हाइयों का दर्द यूँ होगा, मेरे दुश्मन ही मेरा हाल मुझसे पूछते हैं।

741. संभाले नहीं संभलता है दिल, मोहब्बत की तपिश से न जला, इश्क तलबगार है तेरा चला आ, अब ज़माने का बहाना न बना।

742. मेरे अस्कों से भीगी हैं, जाने कितनी तस्वीर तुम्हारी, तुम झलक दिखाकर चली गयी, और बदल गयी तकदीर हमारी |

743. देख कर चेहरा पलट देते हैं अब वो आइना, मौसम-ए-फुरकत उन्हें सूरत कोई भाती नहीं।

744. यही बहुत है कि तुमने पलट के देख लिया, ये लुत्फ़ भी मेरी उम्मीद से कुछ ज्यादा है।

745. सिर्फ मोहब्बत को पाना ही मोहब्बत नहीं होती, कभी तुम भी कर लेते ऐतबार तो ये दुरी न होती, माफ़ कर देना गलतियों को मेरे, तुम्हे चोट पोहचे ऐसी कभी मेरी तमन्ना नहीं होती |

746. क्या करेंगे महफिलों में हम बता, मेरा दिल रहता है काफिलों में अकेला।

747. राज़ खोल देते हैं नाजुक से इशारे अक्सर, कितनी खामोश मोहब्बत की जुबान होती है।

748. दुनिया में तेरे इश्क़ का चर्चा ना करेंगे, मर जायेंगे लेकिन तुझे रुस्वा ना करेंगे, गुस्ताख़ निगाहों से अगर तुमको गिला है, हम दूर से भी अब तुम्हें देखा ना करेंगे।

749. तन्हाई रही साथ ता-जिंदगी मेरे, शिकवा नहीं कि कोई साथ न रहा।

750. आ जाओ किसी रोज़ तुम तो तुम्हारी रूह मे उतर जाऊँ ! साथ रहूँ मैं तुम्हारे ना किसी और को नज़र आऊँ ! चाहकर भी मुझे कोई छू ना सके मुझे कोई इस तरह ! तुम कहो तो यूं तुम्हारी बाहों में बिखर जाऊँ |

751. उसके इंतजार के मारे है हम, बस उसकी यादों के सहारे है हम, दुनियाँ जीत के कहना क्या है अब, जिसे दुनियाँ से जीतना था आज उसी से हारे है हम |

752. उसे पाना उसे खोना उसी के हिज्र में रोना, यही गर इश्क है तो हम तन्हा ही अच्छे हैं।

753. इश्क ओर दोस्ती मेरे दो जहान है, इश्क मेरी रुह, तो दोस्ती मेरा ईमान है, इश्क पर तो फिदा करदु अपनी पुरी जिंदगी, पर दोस्ती पर, मेरा इश्क भी कुर्बान है |

754. हसरत थी सच्चा प्यार पाने की, मगर चल पडी आँधियां जमाने की, मेरा गम कोई ना समझ पाया, क्युँकी मेरी आदत थी सबको हसाने की |

755. ख्वाब बोये थे और अकेलापन काटा है, इस मोहब्बत में यारों बहुत घाटा है।

756. प्यार की जंग में जो खुद ही हार जाते हैं वही तो जिंदगी में अपना प्यार पाते हैं। दुनिया कहती रहे बातें इधर -उधर की मुहब्बत को पाकर वह खुद मुस्कराते हैं।

757. जख्म जब मेरे सीने से बहार आयेंगे, आंसू भी मोती बनकर बिखर जायेंगे, ये न पूछों कि किसने कितना दर्द दिया है, वर्ना कई अपनो के चेहरे उतर जायेंगे |

758. कितनी फ़िक्र है कुदरत को मेरी तन्हाई की, जागते रहते हैं रात भर सितारे मेरे लिए।

759. बस तेरे नाम से मेरा नाम जुडा रहे । इससे नहीं फर्क बेवफाई या वफा करे । कुछ तो हो तेरे नाम का पास मेरे । तेरे गम से ही बेशक मेरा दिल भरा रहे ।

760. कभी तुम पूछ लिया करना कभी हम भी ज़िक्र कर लिया करेंगे.. छुपाकर दिल के दर्द को.. एक दूसरे की फ़िक्र कर लिया करेंगे |

761. मेरी तन्हाइयां करती हैं जिन्हें याद सदा, उन को भी मेरी ज़रुरत हो ज़रूरी तो नहीं।

762. सारे शहर को इस बात की खबर हो गयी, क्यो ना सजा दे इस कमबख्त दिल को, दोस्ती का इरादा था और महोब्बत हो गयी |

763. कोई रास्ता नही दुआ के सिवा, कोई सुनता नही खुदा के सिवा, मैने भी ज़िंदगी को करीब से देखा है मेरे दोस्त, मुस्किल मे कोई साथ नही देता आँसू के सिवा |

764. वो जोश-ए-तन्हाई शब-ए-ग़म, वो हर तरफ बेकसी का आलम, कटी है आँखों में रात सारी, तड़प तड़प कर सहर हुयी।

765. खुदा की रहमत में अर्जियाँ नहीं चलतीं, दिलों के खेल में खुदगर्जियाँ नहीं चलतीं, चल ही पड़े हैं तो ये जान लीजिए हुजुर, इश्क़ की राह में मनमर्जियाँ नहीं चलतीं |

766. वो रूठे इस कदर की मनाया ना गया, दूर इतने हो गए कि पास बुलाया ना गया, दिल तो दिल था समुद्र का साहिल नहीं, लिख दिया नाम तो फिर मिटाया ना गया |

767. मेरा और उस चाँद का मुकद्दर एक जैसा है, वो तारों में तन्हा है और मैं हजारों में तन्हा।

768. आग सूरज में होती है जलना ज़मीन को परता हैं मोब्बत निगाहैं करती हैं तरपना दिल को परता हैं |

769. उल्फत की जंजीर से डर लगता हैं, कुछ अपनी ही तकदीर से डर लगता हैं, जो जुदा करते हैं, किसी को किसी से, हाथ की बस उसी लकीर से डर लगता हैं |

770. एक पुराना मौसम लौटा याद भरी पुरवाई भी, ऐसा तो कम ही होता है वो भी हो तन्हाई भी।

771. रंजिश ही सही दिल को दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे छोड़ जाने के लिए आ, कुछ तो मेरे इश्क़ का रहने दे भरम, तू भी तो कभी मुझे मनाने के लिए आ।

772. अब तो तेरे लिये हम अजनबी हो गये, बातों के सिलसिले भी कम हो गये, खुशियो से ज्यादा गम हो गये, क्या पता ये वक्त बुरा हे या बुरे हम हो गये |

773. ऐ शम्मा तुझपे ये रात भारी है जिस तरह, हमने तमाम उम्र गुजारी है उस तरह।

774. कश्ती के मुसाफिर ने समन्दर नहीं देखा, आँखों को देखा पर दिल मे उतर कर नहीं देखा, पत्थर समझते है मेरे चाहने वाले मुझे, हम तो मोम है किसी ने छूकर नहीं देखा।

775. तपिश से बच कर घटाओं में बैठ जाते हैं, गए हुए की सदाओं में बैठ जाते हैं, हम अपनी उदासी से जब भी घबराये, तेरे ख़याल की छाँव में बैठ जाते हैं |

776. तुम्हारे बगैर ये वक़्त ये दिन और ये रात, गुजर तो जाते हैं मगर गुजारे नहीं जाते।

777. किसी के साथ जो की थीं वफ़ाएं याद करती हैं, हमारी धूप को ठंडी हवाएं याद करती हैं. कभी होंठों से हमने उनकी बूंदों को नहीं छूआ, हमारी प्यास को अब वो घटाएं याद करती हैं |

778. जिनके दिल पे लगती है चोट वो आँखों से नही रोते, जो अपनो के ना हुए किसी के नही होते, मेरे हालातों ने मुझे ये सिखाया है, की सपने टूट जाते हैं पर पूरे नही होते |

779. उसके दिल में थोड़ी सी जगह माँगी थी मुसाफिरों की तरह, उसने तन्हाईयों का एक शहर मेरे नाम कर दिया।

780. हमेशा के लिए अपने पास रख लो ना मुझे कोई पूछे तो कह देना किरायेदार है दिल का |

781. यूं तन्हाई मे बैठे ही मुस्करा लेते थे, जानते थे कि तुम साथ नहीं हो, आज सही मायनों मे साथ हो पर, मुस्कराने की वजह साथ नही |

782. जब महफ़िल में भी पास हो, रोशनी में भी अँधेरे का एहसास हो, तब किसी खास की याद में मुस्कुरा दो, शायद वो भी आपके इंतजार में उदास हो।

783. हुआ था शोर पिछली रात को दो “चाँद” निकले हैं, बताओ क्या ज़रूरत थीं “तुम्हे” छत पर टहलने की |

784. हर आहट पर तेरी ही तलाश है, आंखो को तेरी ही प्यास है, ना यााद आओ हमें इतना कि दिल हमेशा पूछे, धड़कन किसके पास है |

785. हम अंजुमन में सबकी तरफ देखते रहे, अपनी तरह से कोई हमें अकेला नहीं मिला।

786. मेरे आसु कुछ नही तेरी हसी के आगे मेरा गम कुछ नही तेरी खुशी के आगे तु कहे तो मर जाये हम मगर मेरी मौत भी कुछ नही तेरी जिंदगी के आगे |

787. ख़ामोश फ़ज़ा थी कहीं साया भी नहीं था, इस शहर में हमसा कोई तनहा भी नहीं था, किस जुर्म पे छीनी गयी मुझसे मेरी हँसी, मैंने किसी का दिल तो दुखाया भी नहीं था |

788. वो भी बहुत अकेला है शायद मेरी तरह, उस को भी कोई चाहने वाला नहीं मिला।

789. हर दिन, रात होने का इंतज़ार करता हूँ, हर रात तेरे साथ होने का इंतज़ार करता हूँ।

790. कागज़ पे हमने भी ज़िन्दगी लिख दी, अश्क से सींच कर उनकी खुशी लिख दी, दर्द जब हमने उबारा लफ्जों पे, लोगों ने कहा वाह क्या गजल लिख दी |

791. मेरी यादें मेरा चेहरा मेरी बातें रुलायेंगी, हिज़्र के दौर में गुज़री मुलाकातें रुलायेंगी, दिनों को तो चलो तुम काट भी लोगे फसानों में, जहाँ तन्हा मिलोगे तुम तुम्हें रातें रुलायेंगी।

792. ये लब चाहे खामोश रहें आँखों से पता चल जाता है कोई लाख छुपा ले इश्क मगर दुनिया को पता चल जाता है |

793. जो लोग एक तरफा प्यार करते है, अपनी ज़िन्दगी को खुद बर्बाद करते है, नहीं मिलता बिना नसीब के कुछ भी, फिर भी लोग खुद पर अत्याचार करते है |

794. क्या लाजवाब था तेरा छोड़ के जाना, भरी भरी आँखों से मुस्कुराये थे हम, अब तो सिर्फ मैं हूँ और तेरी यादें हैं, गुजर रहे हैं यूँ ही तन्हाई के मौसम।

795. सैकड़ों शिकायतें रट रखी थी, उन्हें सुनाने को किताबों की तरह वो मुस्कुरा के ऐसे मिले कि एक भी याद नहीं आई |

796. आँखों में रहा दिल में उतर कर नहीं देखा, कश्ती के मुसाफिर ने समंदर नहीं देखा, पत्थर मुझे कहता है मेरा चाहने वाला, मैं मोम हूँ उसने मुझे छू कर नहीं देखा |

797. ना जाने क्यूँ खुद को अकेला सा पाया है, हर एक रिश्ते में खुद को गँवाया है। शायद कोई तो कमी है मेरे वजूद में, तभी हर किसी ने हमें यूँ ही ठुकराया है।

798. अगर मै हद से गुज़र जाऊ तो मुझे माफ़ करना, तेरे दिल में उत्तर जाऊ तो मुझे माफ़ करना, रात में तुझे देख के तेरे दीदार के खातिर, पल भर जो ठहर जाऊ तो मुझे माफ़ करना |

799. सदीयो से जागी आँखो को एक बार सुलाने आ जाओ, माना की तुमको प्यार नहीं नफरत ही जताने आ जाऔ, जिस मोङ पे हमको छोङ गये हम बैठे अब तक सोच रहे, क्या भुल हुई क्यो जुदा हुए बस यह समझाने आ जाओ |

800. सौ बार चमन महका सौ बार बहार आई, दुनिया की वही रौनक दिल की वही तन्हाई।

801. वादे उनके और यादें उनकी हैं दिन हैं उनके और रातें उनकी हैं इंतजार उनका मुलाकात उनकी है खुशियां उनसे और सांसे उनकी हैं |

802. तू जो नहीं तो बिन तेरे शामें उदास हैं, ढूंढें तुझे कहाँ कहाँ आँखें उदास हैं , इक चाँद ही नहीं है जो पूछे तेरा पता, देखा नहीं है जो तुझे मेरी राहें उदास हैं |

803. तेरे जल्वों ने मुझे घेर लिया है ऐ दोस्त, अब तो तन्हाई के लम्हे भी हसीं लगते हैं।

804. कल रात को सपने में तुमसे मुलाकात हुई थी कुदरत के नजारों के बीच बहुत सारी बात हुई थी हमने रावी के किनारे पे खूब ठहाके मारे थे भीग गए थे अंदर तक प्यार की इतनी बरसात हुई थी |

805. काश यह जालिम जुदाई न होती, ऐ खुदा तूने यह चीज़ बनायीं न होती, न हम उनसे मिलते न प्यार होता, ज़िन्दगी जो अपनी थी वो परायी न होती |

806. कहने को ही मैं अकेला हूं पर हम चार है एक मैं मेरी परछाई मेरी तन्हाई और तेरा एहसास |

807. अगर तुम न होते तो ग़ज़ल कौन कहता! तुम्हारे चहरे को कमल कौन कहता! यह तो करिश्मा है मोहब्बत का! वरना पत्थर को ताज महल कौन कहता |

808. काश कोई करता प्यार हमसे इतना, कि मरने के बाद भी ख्वाबों मे आया करते, जब गिरते आंखों से हमारे आंसू, तो वो भी साथ मे रोया करते |

809. जिन्हें पता है कि अकेलापन क्या होता है, वो लोग दूसरों के लिए हमेशा हाजिर रहते हैं |

810. शिकवे भी हजारों हैं, शिकायतें भी बहुत हैं, इस दिल को मगर उनसे मुहाब्बत भी बहुत है, ये भी है तम्मना की उनको दिल से भुला दें, इस दिल को मगर उनकी जरुरत भी बहुत है |

811. ग़म नहीं ये कि क़सम अपनी भुलाई तुमने, ग़म तो ये है कि रकीबों से निभाई तुमने, कोई रंजिश थी अगर तुमको तो मुझसे कहते, बात आपस की थी क्यूँ सब को बताई तुमने |

812. कभी जो थक जाओ तुम दुनिया की महफिलों से, हमें आवाज दे देना, हम अकसर अकेले होते हें |

813. जो जितना दूर होता है नज़रो से, उतना ही वो दिल के पास होता है, मुस्किल से भी जिसकी एक ज़लक देखने को ना मिले, वही ज़िंदगी मे सबसे ख़ास होता है |

814. इस अजनबी दुनिया में अकेली ख्वाब हूँ मैं, सवालो से खफा छोटी सी जवाब हूँ मैं, आँख से देखोगे तो खुश पाओगे, दिल से पूछोगे तो दर्द की सैलाब हूँ मैं |

815. किन लफ़्ज़ों में बंया करूँ मैं अपने दर्द को, सुनने वाले तो बहुत है मगर समझने वाला कोई नहीं |

816. इतनी खूबसूरती कभी नही देखी, बनाने वाला भी बना के हैरान होगा आपको, खूबसूरती की जिंदा मिसाल हो तुम, खुदा भी देखकर हैरान होगा आपको |

817. आसुओ को पलकों में लाया न कीजिये, दिल की बात हर किसी को बताया न कीजिये, मुट्ठी में नमक लेकर गुमते है लोग, अपने ज़ख़्म हर किसी को दिखाया न कीजिये |

818. बुजी शमा भी जल सकती है तूफानों से कश्ती भी निकल सकती है हो के मायूस यूँ ना अपने इरादे बदल तेरी किस्मत कभी भी बदल सकती है |

819. वो मिसाल हम इश्क़ मे बनाएँगें; की आँखे जब तुम बंद करोगें तो बसइतना प्यार हम भर देंगे आपके दिल मे की; हम आएँगें; बस सब से पहले हम ही याद आएँगें |

820. बेगानों से गुजर जाते है कोई बात नहीं होती, हम उनसे रोज मिलते हैं मगर मुलाक़ात नहीं होती, सूखे बंजर खेत जैसी जिंदगी बेहाल है, घटाएं घिर तो आती है मगर बरसात नहीं होती |

821. हौंसले के तरकश में , कोशिश का वो तीर ज़िंदा रख , हार जा चाहे ज़िन्दगी में सब कुछ , मगर फिर से जीतने की उम्मीद ज़िंदा रख |

822. शायरी पढ़ते पढ़ते खुद लिखना सीख गये, जीते जीते किसी और के लिए जीना सीख गए, आँखों आँखों में भी बातें होती है, आज कल उन बातों को भी पढ़ना सीख गए |

823. जिनकी याद में हम दीवाने हो गए, वो हम ही से बेगाने हो गए, शायद उन्हें तालाश है अब नये प्यार की, क्यूंकि उनकी नज़र में हम पुराने हो गए |

824. नसीब जिनके ऊँचे और मस्त होते है , इम्तिहान भी उनके जबरदस्त होते है।

825. हर शाम किसी के लिए सुहानी नही होती, हर प्यार के पीछे कोई कहानी नही होती, कुछ तो असर होता है दो आत्मा के मेल का, वरना गोरी राधा, सावले कान्हा की दीवानी न होती |

826. तेरा ख़याल तेरी आरजू न गयी, मेरे दिल से तेरी जुस्तजू न गयी, इश्क में सब कुछ लुटा दिया हँसकर मैंने, मगर तेरे प्यार की आरजू न गयी |

827. सीढियाँ उन्हें मुबारक हो जिन्हे सिर्फ छत तक जाना है , मेरी मंज़िल तो आसमान है रास्ता मुझे खुद बनाना है |

828. मोहब्बत का मतलब इंतज़ार नही होता, हर किसी को देखना प्यार नही होता, यू तो मिलता है रोज़ मोहब्बत-ए-पैगाम, प्यार है ज़िंदगी जो हर बार नही होता |

829. मौत तो मोहब्बत है एक दिन गले जरूर लगायेगी, दिल धड़कता है तो बस इस बात पे क्या उस दिन, तेरी सूरत नज़रो के सामने कयामत बन के आयेगी, छोड देंगे ये जहाॅ पर रूह तेरी गलीयो मे रह जायेगी |

830. मत सोच की तेरा सपना क्यों पूरा नहीं होता हिम्मत वालों का इरादा कभी अधूरा नहीं होता जिस इंसान के करम अच्छे होते है उसके जीवन में कभी अँधेरा नहीं होता |

831. लगता है तुम्हें नज़र में बसा लूँ , औरों की नजरों से तुम्हें बचा लूँ, कहीं चूरा ना ले तुम्हें मुझसे कोई, आ तुझे मैं अपनी धड़कन में छुपा लूँ |

832. लिखो तो पैगाम कुछ ऐसा लिखो की, कलम भी रोने को मजबूर हो जाये, हर लफ्ज में वो दर्द भर दो की, पढने वाला प्यार करने पर मजबूर हो जाये |

833. परिंदों को मंज़िल मिलेगी यक़ीनन ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं वो लोग रहते हैं खामोश अक्सर जमाने में ज़िनके हुनर बोलते हैं |

834. दिल‬ होना चाहिए जिगर होना चाहिए, आशिकी के लिए हुनर होना चाहिए, नजर से नजर मिलने पर ‪‎इश्क‬ नहीं होता, ‪नजर‬ के उस पार भी एक असर होना चाहिए।‬‬

835. हम अपना दर्द किसी को कहते नही, वो सोचते हैं की हम तन्हाई सहते नही, आँखों से आँसू निकले भी तो कैसे, क्योकि सूखे हुवे दरिया कभी बहते नही |

836. नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते है , सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते है , कश्तियाँ बदलने की जरूरत नहीं , दिशा को बदलो तो किनारे ख़ुद ब खुद बदल जाते है |

837. तेरी धड़कन ही ‪ज़िंदगी‬ का किस्सा है मेरा, तू ज़िंदगी का एक अहम् हिस्सा है मेरा, मेरी ‪‎मोहब्बत‬ तुझसे, सिर्फ़ लफ्जों की नहीं है, तेरी रूह से रूह तक का रिश्ता है मेरा |‬‬

838. ऐसे गये दिल की ज़मी बंजर कर के, आज तक कोई फूल ना खिल सका, बस्ती बस्ती लोग मिले हमराह मगर, फिर कभी तेरा पता ना मिल सका |

839. निगाहों में मंजिल थी , गिरे और गिरकर संभलते रहे , हवाओं ने बहुत कोशिश की , मगर चिराग आँधियों में जलते रहे ।

840. ख्वाब तो वो है जिसका हकीकत मे भी दीदार हो, कोई मिले तो इस कदर मिले, जिसे मुझ से ही नही मेरी रूह से भी प्यार हो |

841. जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है, मेरा दिल तोड़कर मुझे ही हसाना चाहता है, जाने क्या बात झलकती है मेरे इस चेहरे से, हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है |

842. खुदी को कर बुलन्द इतना कि हर तकदीर से पहले खुदा बंदे से खुद पूछे बता तेरी रजा क्या है |

843. आपने नज़र से नज़र कब मिला दी, हमारी ज़िन्दगी झूमकर मुस्कुरा दी, जुबां से तो हम कुछ भी न कह सके, पर निगाहों ने दिल की कहानी सुना दी |

844. पलकों में आँसू और दिल में दर्द सोया है, हँसने वालो को क्या पता रोने वाला किस कदर रोया है, ये तो बस वोही जान सकता है, मेरी तन्हाई का आलम, जिसने ज़िंदगी में, किसी को पाने से पहले खोया हो |

845. अभी को असली मंजिल पाना बाकी है अभी तो इरादों का इम्तिहान बाकी है अभी तो तोली है मुट्ठी भर जमीन अभी तोलना आसमान बाकी है |

846. तेरी चुप्पी का सबब हम जानते है , लरज़ते होंठों की शिकायत हम जानते है , मेरी हिचकी भी दे रही है गवाही मुहब्बत की, तेरे पलकों की हरकत भी हम जानते है ।

847. ये तुम किस बात से बिगड़ गये हो इतना, कोई झूठा सा इल्ज़ाम इस दिल पर लगा जाते, तुम्हे था रूठना हमसे, तो रूठने से ज़रा पहेले, कुछ हमसे सुना होता, कुछ अपनी सुना जाते |

848. आज बादलों ने फिर साजिश की जहाँ मेरा घर था वहीं बारिश की अगर फलक को जिद है बिजलियाँ गिराने की तो हमें भी जिद है वहीं पर आशियाँ बसाने की |

849. धडकनों को कुछ तो काबू में कर ए दिल, अभी तो पलकें झुकाई है मुस्कुराना अभी बाकी है उनका |

850. टूटा हो दिल तो दुःख होता है, करके मोहह्बत ये दिल रोता है, दर्द का एहसास तो तब होता है, जब किसी से मोहह्बत हो और उसके दिल में कोई और होता है |

851. ना पूछो कि मेरी मंजिल कहाँ है अभी तो सफर का इरादा किया है ना हारूंगा हौंसला उम्र भर ये मैंने किसी से नहीं खुद से वादा किया है |

852. कई चेहरे लेकर लोग यहाँ जिया करते हैं , हम तो बस एक ही चेहरे से प्यार करते हैं , ना छुपाया करो तुम इस चेहरे को, क्योंकि हम इसे देख के ही जिया करते हैं |

853. कभी आसूं तो कभी खुशी देखी, हमने अक्सर मजबूरी और बेकसी देखी, उनकी नाराजगी को हम क्या समझे, हमने खुद कि तकदीर की बेबसी देखी |

854. होके मायूस ना आँगन से उखाड़ो ये पौधे धूप बरसी है यहाँ तो बारिश भी यही पे होगी।

855. अपनी मोहब्बत कि खुशबु से नुर कर दे, जुदा न हो सकु इतना मगरुर कर दे, मेरे दिल मे बस जाए वफ़ा तेरी , किसी और को ना देखु मुझे इतना मजबुर कर दे |

856. आँखो को इंतजार की सोगात सोप कर, मोहब्बत खुद आराम से कही सो जाती है, ज़िस्म करवट बदलता है रात भर अकेला , रूह तेरी गलीयो की बंजारन हो जाती है |

857. जिंदगी में कभी उदास ना होना कभी किसी बात पर निराश ना होना ये जिंदगी एक संघर्ष है चलती ही रहेगी कभी अपने जीने का अंदाज ना खोना |

858. आँखो के रास्ते दिल मे उतर कर नही देखा, तुने मेरे सिने मे अपनी यादों का घर नही देखा, तेरे इश्क की वहशत ने पागल बना दिया है मुझे, तेरी गलीयो की ख़ाक के सिवा मेने कुछ नही देखा |

859. उसे बेवफा कहकर हम अपनी ही नजरो में गिर जाते क्यूंकि वो प्यार भी अपना था और पसंद भी अपनी |

860. अगर सीखना है दिए से तो जलना नहीं, मुस्कुराना सीखो अगर सीखना है सूर्य से तो डूबना नहीं उठना सीखो अगर पहुंचना हो शिखर पर तो राह पर चलना नहीं राह का निर्माण सीखो |

861. तुम्हारी प्यारी सी नज़र अगर इधर नहीं होती, नशे में चूर फ़िज़ा इस कदर नहीं होती, तुम्हारे आने तलक हम को होश रहता है, फिर उसके बाद हमें कुछ ख़बर नहीं होती.

862. आप तो चाँद हे जिसे सब याद करते हे, हमारी किस्मत तो तारों जेसी हे, याद तो दूर, लोग अपनी ख्वाहिश के लिए हमारी टूटने की फरियाद करते हे |

863. कोशिश के बावजूद हो जाती है कभी हार होके निराश मत बैठना ऐ यार बढ़ते रहना आगे हो जैसा भी मौसम पा लेती मंजिल चींटी भी गिर गिर कर कई बार |

864. एक शाम आती है तुम्हारी याद लेकर, एक शाम जाती है तुम्हारी याद देकर, पर मुझे तो उस शाम का इंतेज़ार है, जो आए तुम्हे अपने साथ लेकर |

865. अब ये न पूछना की ये अल्फ़ाज़ कहाँ से लाती हूँ, कुछ चुराती हूँ दर्द दूसरों के, कुछ अपने सुनाती हूँ|

866. परिंदों को मंजिल मिलेगी यकीनन ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं अक्सर वो लोग खामोश रहते हैं ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं |

867. मेरे जीने में, मरने में, तुम्हारा नाम आयेगा, मैं साँसे रोक लू फिर भी यही इल्ज़ाम आयेगा, हर एक धड़कन में जब तुम हो तो फिर अपराध क्या मेरा, अगर राधा पुकारेगी तो फिर घनश्याम आयेगा |

868. कांटो सी चुभती है तन्हाई, अंगारों सी सुलगती है तन्हाई, कोई आ कर हम दोनों को ज़रा हँसा दे, मैं रोता हूँ तो रोने लगती है ‪‎तन्हाई‬ |‬

869. सामने हो मंजिल तो रास्ते ना मोड़ना जो भी मन में हो वो सपना मत तोड़ना कदम कदम पर मिलेगी मुश्किल आपको बस सितारे छूने के लिए जमीन मत छोड़ना |

870. तूफान मे लोगों को किनारे मिलते हैं, जहाँ मे लोगों को सहारे भी मिलते हैं, दुनिया मे सबसे प्यारी है ज़िंदगी, कुछ लोग ज़िंदगी से भी प्यारे मिलते हैं |

871. दिल के समंदर की सतह पे आके सुन, खामोशीया किस कदर सौर मचाती है, दर्द को बहुत मनाया ऑखो से ना छलके, दुनिया बेकार मे झुटी बाते बनाती है।

872. हवाओं से कह दो अपनी औकात में रहे हम परों से नहीं हौसलों से उड़ते हैं |

873. शायर होना भी कहा आसान है, बस कुछ लफ़जो मे दिल का अरमान है, कभी तेरे ख्याल से महक जाती है मेरी गज़ल, कभी हर शब्द परेशान है |

874. मेरी चाहत की तू आजमाइश ना कर । ये इश्क है इबादत तू नुमाइश ना कर।। रहने दे ये भ्रम के तू साथ है हमेशा। भूल जाऊँ मैं तुझे, तू फरमाइश ना कर।

875. नजर को बदलो तो नजारे बदल जाते हैं सोच को बदलो तो सितारे बदल जाते हैं कश्तियाँ बदलने की जरूरत नहीं दिशा को बदलो किनारे खुद ब खुद बदल जाते हैं |

876. अपनी हर आरज़ू में, अपनी हर दुआ में आपकी ख़ुशी मांगते हैं, जब सोचते हैं क्या तोहफा मांगें आपसे, तो आपसे उमर भर कि आपकी महोब्बत मांगते हैं |

877. मैं आईना हूँ टूटना मेरी फितरत है, इसलिए पत्थरों से मुझे कोई गिला नहीं, मेरी किस्मत में तो कुछ यूँ लिखा है, किसी ने वक्त गुज़ारने के लिए अपना बनाया, तो किसी ने अपना बनाकर वक्त गुजार लिया |

878. अगर अब भी खून ना खौला तो खून नहीं वो पानी है जो जवानी अपने देश और माँ बाप के काम ना आए बेकार वो जवानी है |

879. शाम भी खास है, वक़्त भी खास है, तुझको भी एहसास है, तो मुझको भी एहसास है, इससे जयादा मुझे और क्या चाहिए, जब मैं तेरे पास, और तु मेरे पास है |

880. प्यासी ये निगाहें तरसती रहती हैं; तेरी याद में अक्सर बरसती रहती हैं; हम तेरे ख्यालों में डूबे रहते हैं; और ये ज़ालिम दुनिया हम पे हँसती रहती है।

881. पानी में तस्वीर बना सकते हो तुम कलाम को शमशेर बना सकते हो तुम कायर हैं जो तकदीर पे रोते हैं जैसी चाहो वैसी तकदीर बना सकते हो तुम |

882. जज़्बात बहकता है, जब तुमसे मिलती हूँ, अरमां मचलता है, जब तुमसे मिलती हूँ, हाथों से हाथ और होठों से होंठ मिलते हैं, दिल से दिल मिलते हैं, जब तुमसे मिलती हूँ |

883. मोहबत को जो निभाते हैं उनको मेरा सलाम है, और जो बीच रास्ते में छोड़ जाते हैं उनको ये पैगाम हैं, वादा-ए-वफ़ा करो तो फिर खुद को फ़ना करो, वरना खुदा के लिए किसी की ज़िंदगी ना तबाह करो |

884. मंजिल उन्हीं को मिलती है जिनके सपनों में जान होती है पंखों से कुछ नहीं होता हौसलों से उड़ान होती है |

885. चाँद की एहमियत चाँदनी ही जाने, सागर की लहरों की एहमियत किनारा ही जाने, आपकी ज़िंदगी मे हमारी एहमियत क्या है, वो तो आपका प्यार भरा दिल ही जाने |

886. जब जब तुमसे मिलने की उम्मीद नजर आई, मेरे पाँव मे जजीर नजर आई, गिर पडे आँसू आँख से, और हर एक आँसू मे आपकी तस्वीर नजर आई।

887. मिल ही जाएगी मंजिल भटकते भटकते गुमराह तो वो हैं जो घर से निकले ही नहीं |

888. अरमान कोई सीने में आग लगा देता है, ख्वाब कोई आकर रातों की नींद उड़ा देता है, पूंछता हूँ जिससे भी मंज़िल का पता अब तो, वो रास्ता तेरे घर का ही बता देता है |

889. मुझको ऐसा ‪दर्द‬ मिला जिसकी ‪दवा‬ नहीं, फिर भी खुश हूँ मुझे उस से कोई गिला नहीं, और कितने आंसू बहाऊँ उस के लिए, जिसको ‪खुदा‬ ने मेरे ‪‎नसीब‬ में लिखा ही नहीं।‬‬‬‬

890. मुश्किलों से भाग जाना आसान होता है हर पहलू जिंदगी का इम्तिहान होता है डरने वालों को मिलता नहीं कुछ जिंदगी में लड़ने वालों के कदमों में जहान होता है |

891. दिल में हो आप तो कोई और खास कैसे होगा, यादों में आपके सिवा कोई पास कैसे होगा, हिचकियां कहती हैं आप याद करते हो, पर बोलोगे नहीं तो हमें एहसास कैसे होगा |

892. शख्सियत‬ हमारी भी अजीब हैं यारों, ना वो थकते हैं ना हम बाज़ आते हैं, यूँहीं एक-दूसरे को आजमाते हैं, वो रोज़ चोट पे ‪चोट‬ करते हैं, हम भी रोज़ टूटते बिखरते हुए, संभल जाते हैं।‬

893. अपनी जमीन अपना नया आसमान पैदा कर मांगने से जिंदगी कब मिली है ऐ दोस्त खुद ही अपना नया इतिहास पैदा कर |

894. इत्तेफ़ाक़ से ही सही मगर मुलाकात हो गयी, ढूंढ रहे थे हम जिन्हें उन से बात हो गयी, देखते ही उन को जाने कहाँ खो गए हम, बस यूँ समझो वहीं से हमारे प्यार की शुरुआत हो गयी |

895. तेरी दोस्ती की आदत सी पड़ गयी है मुझे, कुछ देर तेरे साथ चलना बाकी है। शमसान मैं जलता छोड़ कर मत जाना, वरना रूह कहेगी कि रुक जा, अभी तेरे यार का दिल जलना बाकी है।

896. सफलता एक चुनौती है इसे स्वीकार करो क्या कमी रह गई देखो और सुधार करो कुछ किए बिना ही जय जयकार नहीं होती कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती |

897. आरज़ू मेरी, चाहत तेरी, तमन्ना मेरी, उल्फत तेरी, इबादत मेरी, मोहब्बत तेरी, बस तुझ से तुझ तक है दुनिया मेरी|

898. दुनिया में किसी से कभी प्यार मत करना, अपने अनमोल आँसू इस तरह बेकार मत करना, कांटे तो फिर भी दामन थाम लेते हैं, फूलों पर कभी इस तरह तुम ऐतबार मत करना |

899. बुझी शमां भी जल सकती है तूफान से कश्ती भी निकल सकती है होके मायूस यूं ना अपने इरादे बदल तेरी किस्मत कभी भी बदल सकती है |

900. लम्हें ये सुहाने साथ हो ना हो, कल मे आज जैसी बात हो ना हो, आपका प्यार हमेशा इस दिल में रहेगा, चाहे पूरी उम्र मुलाकात हो ना हो |

901. तुम शब्दों की जादूगर हो, मै ख़ामोशी का सौदागर हू, तुम ने जब चाहा, जो चाहा, कह दिया, मै हर बार, हर बात हंस कर सह गया।

902. गम के अंधेरों में खुद को बेकरार ना कर सुबह जरूर आएगी सुबह का इंतजार कर |

903. यूँ पलके बिछा कर तेरा इंतज़ार करते है, यह वो गुनाह है जो हम बार बार करते है, जलकर हसरत की राह पर चिराग, हम सुबह और शाम तेरे मिलने का इंतज़ार करते है |

904. ना जाने कौन सी बात आखरी होगी, ना जाने कौन सी रात आखरी होगी, करनी हैं तो कर लो जी भरकर बाते, ना जाने हमारी कौन सी सास आखरी होगी ।

905. यह मुस्कुराती हुई आँखें जिनमें रक्स करती है बहार, शफक की, गुल की, बिजलियों की शोखियाँ लिये हुए।

906. हमारी गलतियों से कही टूट न जाना, हमारी शरारत से कही रूठ न जाना, तुम्हारी चाहत ही हमारी जिंदगी हैं, इस प्यारे से बंधन को भूल न जाना |

907. वादे पे वो ऐतबार नहीं करते, हम जिक्र मौहब्बत सरे बाजार नहीं करते, डरता है दिल उनकी रुसवाई से, और वो सोचते हैं हम उनसे प्यार नहीं करते।

908. उस घड़ी देखो उनका आलम नींद से जब हों बोझल आँखें, कौन मेरी नजर में समाये देखी हैं मैंने तुम्हारी आँखें।

909. तुझे कुछ इस तरह सजाएंगे, चाँद नहीं अपनी कायनात बनाएंगे, तोड़ना-टूटना, ये दिल की अदा है, तुझे हम अपनी रूह मे समाएंगे |

910. एक अजीब दास्तान है मेरे अफसाने की, मैने पल पल कोशिश उसके की पास जाने की, किस्मत थी मेरी या साजिश थी ज़माने की, दूर हुई मुझसे इतना जितनी उमीद थी करीब आने की |

911. जाने क्यों डूब जाता हूँ हर बार इन्हें देख कर, इक दरिया हैं या पूरा समंदर हैं तेरी आँखें।

912. राज ये दिल मै छुपा रखा है, तुम्हे अपना बना रखा है, कैसे हो जुदा तुमसे हम, तुम्हे ज़िन्दगी बना रखा है|

913. पास आकर सभी दूर चले जाते हैं; अकेले थे हम, अकेले ही रह जाते हैं; इस दिल का दर्द दिखाएँ किसे; मल्हम लगाने वाले ही जखम दे जाते हैं |

914. निगाहों से कत्ल कर दे न हो तकलीफ दोनों को, तुझे खंजर उठाने की मुझे गर्दन झुकाने की।

915. दिल की यादो मै सवारूँ तुझे, तू दिखे तो आँखो मै उतारू तुझे, तेरे नाम को लबो पर ऐसे सजाऊ, सो जाऊ तो ख्वाबो मे पुकारू तुझे |

916. और कोई गम नहीं एक तेरी जुदाई के सिवा, मेरे हिस्से में क्या आया तन्हाई के सिवा, यूँ तो मिलन की रातें मिली बेशुमार, प्यार में सब कुछ मिला शहनाई के सिवा |

917. एक सी शोखी खुदा ने दी है हुस्नो-इश्क को, फर्क बस इतना है वो आंखों में है ये दिल में है।

918. रात हुई जब शाम के बाद, तेरी याद आई हर बात के बाद, हमने खामोश रहकर भी देखा, तेरी आवाज़ आई हर सांस के बाद |

919. जीना चाहा तो जिंदगी से दूर थे हम मरना चाहा तो जीने को मजबूर थे हम सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम।

920. उसकी कुदरत देखता हूँ तेरी आँखें देखकर, दो पियालों में भरी है कैसे लाखों मन शराब।

921. शक का कोई ईलाज नहीं होता, जो यकीं करता है कभी नराज नहीं होता, वो पूछते है हमसे कितना प्यार करते हो, उन्हे क्या पता मौहाबत का हिसाब नहीं होता |

922. उल्फत का अक्सर यही दस्तूर होता है! जिसे चाहो वही अपने से दूर होता है! दिल टूटकर बिखरता है इस कदर! जैसे कोई कांच का खिलौना चूर-चूर होता है!

923. रात बड़ी मुश्किल से खुद को सुलाया है मैंने, अपनी आँखों को तेरे ख्वाब का लालच देकर।

924. छुपा लूंगा तुझे इसतरह से बाहों में, हवा भी गुज़रने के लिए इज़ाज़त मांगे, हो जाऊं तेरे इश्क़ में मदहोश इस तरह, कि होश भी वापस आने के इज़ाज़त मांगे |

925. कभी कभी मेरी आँखे यूँ ही रो पडती है, मै इनको कैसे समझाऊँ, कि कोई शक्स सिर्फ चाहने से ही अपना नही हो जाता, किस्मत की लकीरें भी चाहिए |

926. खुलते हैं मुझ पे राज कई इस जहान के, उसकी हसीन आँखों में जब झाँकता हूँ मैं।

927. एक लहर तेरे ख़्यालों की, मेरे वजूद को भिगो जाती हैं, एक बूंद तेरी याद की, मुझे इश़्क के दरिया में डुबो जाती हैं|

928. कब उनकी आँखों से इज़हार होगा दिल के किसी कोने में हमारे लिए प्यार होगा गुज़र रही हे रात उनकी याद में कभी तो उनको भी हमारा इंतज़ार होगा |

929. मेरी आँखों में झाँकने से पहले, जरा सोच लीजिये ऐ हुजूर जो हमने पलके झुका ली तो कयामत होगी, और हमने नजरें मिला ली तो मुहब्बत होगी।

930. फूल बिछा दूँ या आँखे बिछा दूँ, करूँ क्या ये समझ ना आये, कंही ये दिल मेरा तुम्हे देखकर, तुम्हारा बने,और मुझे भूल जाय |

931. जिन्दगी तो है पर कुछ खास नहीं, होठो पे उनका नाम तो है पर उन्हें एहसास नहीं, दिल में उनके लिए प्यार तो है पर उन्हें आभास नहीं, अपना बनाना चाहते हैं पर अब उन्हें अपना बनाने की उम्मीद भी हमारे पास नहीं।

932. फिर न कीजे मेरी गुस्ताख निगाहों का गिला, देखिये आपने फिर प्यार से देखा मुझको।

933. सुर्ख आँखो से जब वो देखती है, हम घबराकर आँखे झुका लेते है, क्यू मिलाए उन आँखो से आखे, सुना है वो आखो से अपना बना लेती है |

934. देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं |

935. सौ सौ उम्मीदें बंधती है, इक-इक निगाह पर, मुझको न ऐसे प्यार से देखा करे कोई।

936. नाराज मत हुआ करो कुछ अच्छा नहीं लगता है, तेरे हसीन चेहरे पर यह गुस्सा नहीं सजता है, हो जाती है कभी कभी गलती माफ कर दिया करो, हो जाती है कभी कभी गलती माफ कर दिया करो, चाहने वालों से बेदर्दी यह नुस्खा नहीं जंजता है |

937. दिल में छुपाया राज हर खोला नहीं जाता गर घाव दे कोई लफ्ज वो बोला नहीं जाता कुछ तो यकीन किजिए इन चाहतों पे भी अविश्वास पे हर रिश्ता कभी तोला नहीं जाता।

938. मैं उम्र भर जिनका न कोई दे सका जवाब, वह इक नजर में, इतने सवालात कर गये।

939. जब से समझा क्या हैं ये प्यार, करने लगे तबसे किसी का इंतज़ार, मांगने लगे उन्हें दुआओं में रब से, न जाने कब होगा उस चाँद का दीदार |

940. उल्फत का यह दस्तूर होता है, जिसे चाहो वही हमसे दूर होता है, दिल टूट कर बिखरता है इस क़द्र जैसे, कांच का खिलौना गिरके चूर-चूर होता है |

941. बस इक लतीफ तबस्सुम बस इक हसीन नजर, मरीजे-गम की हालत सुधर तो सकती है।

942. मेरी किसमत के हीरों का तुम इक ताज बन जाओ, कल की बात छोडो तुम मेरा आज बन जाओ, मै तो रोज करता हू मुहोब्बत डूब कर तुम से, मेरी इक बात मानो तुम मेरे हमराज़ बन जाओ |

943. अक्सर भूल भी जाता हूँ मैं तुझे, अक्सर भूल भी जाता हूँ मैं तुझे, फिर जिंदगी का फिकापन तेरी कमी का अहसास दिला देता है |

944. होता है राजे-इश्को-मुहब्बत इन्हीं से फाश, आंखें जुबाँ नहीं है मगर बेजुबाँ नहीं।

945. ख्वाइश तो यही है कि तेरे बाँहों में पनाह मिल जाये, शमा खामोश हो जाये और शाम ढल जाये, प्यार तू इतना करे कि इतिहास बन जाये, और तेरी बाँहों से हटने से पहले शाम हो जाये |

946. आंसुओं की बूँदें हैं या आँखों की नमी है न ऊपर आसमां है न नीचे ज़मी है यह कैसा मोड़ है ज़िन्दगी का उसी की ज़रूरत है और उसी की कमी है।

947. कोई दीवाना दौड़ के लिपट न जाये कहीं, आंखों में आंखें डालकर देखा न कीजिए।

948. जो एक बार दिल में बस जाये उसे हम निकाल नहीं सकते, जिसे दिल अपना बना ले उसे फिर कभी भुला नहीं सकते, वो जहाँ भी रहे ऐ खुदा हमेशा खुश रहे, उनके लिए कितना प्यार है हमें ये कभी हम जता नहीं सकते |

949. तक़दीर के आईने में मेरी तस्वीर खो गई; आज हमेशा के लिए मेरी रूह सो गई; मोहब्बत करके क्या पाया मैंने; वो कल मेरी थी आज किसी और की हो गई |

950. जो उनकी आँखों से बयां होते हैं, वो लफ्ज़ शायरी में कहाँ होते हैं।

951. सून पगली ये जो तुमसे इश्क़ बेपनाह है, यही मेरा गुनाह है, होंगे औरो के ख़ुदा लाखो लेकिन, मेरी तो बस एक तू ही मुमताज है |

952. ना मिलता गम तो बर्बादी के अफसाने कहाँ जाते, दुनिया अगर होती चमन तो वीराने कहाँ जाते, चलो अच्छा हुआ अपनों मैं कोई ग़ैर तो निकला, सभी अगर अपने होते तो बेगाने कहाँ जाते |

953. पैगाम लिया है कभी पैगाम दिया है, आंखों ने मुहब्बत में बड़ा काम किया है।

954. तुम्हारी इस अदा पे क्या जवाब दूँ, अपने यार को क्या तोहफा दूँ, कोई अच्छा सा फूल होता तो मंगवाता, जो खुद गुलाब है उसको क्या गुलाब दूँ |

955. लोग अपना बना के छोड़ देते हैं, अपनों से रिशता तोड़ कर गैरों से जोड़ लेते हैं, हम तो एक फूल ना तोड़ सके, नाजाने लोग दिल कैसे तोड़ देते हैं |

956. नशीली आँखों से वो जब हमें देखते हैं, हम घबरा कर आँखें झुका लेते हैं, कौन मिलाये उन आँखों से आँखें, सुना है वो आँखों से अपना बना लेते हैं।

957. प्यार कहो तो दो ढाई लफ्ज़, मानो तो बन्दगी , सोचो तो गहरा सागर, डूबो तो ज़िन्दगी , करो तो आसान , निभाओ तो मुश्किल , बिखरे तो सारा जहाँ ,और सिमटे तो तुम |

958. प्यार करके कोई जताए ये जरूरी तो नही, याद करके कोई बताये ये जरूरी तो नही, रोने वाला तो दिल में ही रो लेता है, आँख में आंसू आये ये जरूरी तो नही |

959. ज़ीना मुहाल कर रखा है मेरी इन आँखों ने, खुली हो तो तलाश तेरी बंद हो तो ख्वाब तेरे।

960. हम साँस लेते हैं तुम पे मरके, हम जीते हैं तुम्हारी इबादत करके, खो ना दे रहते हैं हमेशा डरते, हमे ना चाहिए इस दुनिया से कुछ भी, अब बस तुम ही हो रब से बढ़ के |

961. उन लोगों का क्या हुआ होगा. जिनको मेरी तरह गम ने मारा होगा. किनारे पर खड़े लोग क्या जाने. डूबने वाले ने किस किस को पुकारा होगा |

962. क्या कशिश थी उस की आँखों में मत पूछो. मुझ से मेरा दिल लड़ पड़ा मुझे यही चाहिये |

963. एक हसीन सा खाब हो तुम, गुज़रे कल की याद हो तुम, बहती नदी की धरा हो तुम, साहील में डूबी किस्ती का किनारा हो तुम |

964. रात को जब चाँद सितारे चमकते हैं, हम हरदम फिर तेरी याद में तड़पते हैं, आप तो चले गए हो छोड़कर हम को, मगर हम मिलने को तरसते है।

965. क़ैद ख़ानें हैं, बिन सलाख़ों के, कुछ यूँ चर्चें हैं , तुम्हारी आँखों के |

966. सब कुछ मिला सुकून की दौलत न मिली, एक तुझको भूल जाने की मोहलत न मिली, करने को बहुत काम थे अपने लिए मगर, हमको तेरे ख्याल से कभी फुरसत न मिली |

967. अब ये न पूछना की ये अल्फ़ाज़ कहाँ से लाता हूँ , कुछ चुराता हूँ दर्द दूसरों के , कुछ अपना हाल सुनाता हूँ |

968. मैं जिसे ओढ़ता-बिछाता हूँ वो ग़ज़ल आपको सुनाता हूँ. एक जंगल है तेरी आँखों में मैं जहाँ राह भूल जाता हूँ |

969. सुबह का नजारा भी क्या खूब है, फिर क्यों मुझसे दूर मेरा महबूब है, हमें आती है पल पल आपकी याद, ये आपकी निगाहों का कुसूर है |

970. तू मेरा सपना, मेरा अरमान है पर शायद तू अपनी अहमियत से अंजान है, मुझसे कभी भी रूठ मत जाना आप, क्यूंकि मेरी दुनिया आप के बिना वेरान है |

971. झील अच्छा, कँवल अच्छा के जाम अच्छा है, तेरी आँखों के लिए कौन सा नाम अच्छा है |

972. रख लू नज़र में चेहरा तेरा, दिन रात इस पे मैं मरती रहू, जब तक ये साँसे चलती रहे, मैं तुझसे मोहब्बत करती रहू|

973. बिछड़ के तुम से ज़िंदगी सज़ा लगती है, यह साँस भी जैसे मुझ से ख़फ़ा लगती है । तड़प उठता हूँ दर्द के मारे, ज़ख्मों को जब तेरे शहर की हवा लगती है । अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किस से करूँ, मुझ को तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफ़ा लगती है।

974. तुम्हारी याद में आँखों का रतजगा है, कोई ख़्वाब नया आए तो कैसे आए |

975. रब से आपकी खुशीयां मांगते है, दुआओं में आपकी हंसी मांगते है, सोचते है आपसे क्या मांगे, चलो आपसे उम्र भर की मोहब्बत मांगते है |

976. यूँ तो इस दर्द की इन्तहा कुछ नहीँ, गिला ये है कि जाते हुए कहा कुछ नहीँ, ताकते रहे बस जाने से पहले वो, लब कुछ तो कह रहे थे, क्यों सुना कुछ नहीँ |

977. यूँ ही गुजर जाती है शाम अंजुमन में, कुछ तेरी आँखों के बहाने कुछ तेरी बातो के बहाने |

978. दिल की किताब में गुलाब उनका था, रात की नींद में ख्वाब उनका था, कितना प्यार करते हो जब हमने पूछा, मर जायंगे तुम्हारे बिना ये जबाब उनका था |

979. खरीद सकते उन्हें तो अपनी जिंदगी देकर भी खरीद लेते , पर कुछ लोग “कीमत” से नही “किस्मत” से मिला करते हैं ।

980. ये आईने नही दे सकते तुम्हे तुम्हारी खूबसूरती की सच्ची ख़बर, कभी मेरी इन आँखों में झांक कर देखो की कितनी हसीन हो |

981. बरसात भी नहीं है बादल गरज रहे हैं, सुलझी हुई लटे हैं और हम उलझ रहे हैं, मदमस्त एक भँवरा क्या चाहता कली से, तुम भी समझ रहे हो हम भी समझ रहे हैं |

982. झूठ बोलते है वो जो कहते हैं, हम सब मिट्टी से बने हैं मैं कईं अपनों से वाक़िफ़ हूँ जो पत्थर के बने हैं |

983. मुझसे जब भी मिलो नजरें उठाकर मिलो, मुझे पसंद है अपनेआप को तुम्हारी आँखों में देखना |

984. मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो, मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो, दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात, मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो |

985. हम भी फूलों की तरह कितने बेबस हैं , कभी किस्मत से टूट जाते हैं , कभी लोग तोड़ जाते हैं |

986. साकी पिला रहा है और मैं पिए जा रहा हूँ, हर सांस पर बस नाम तेरा लिए जा रहा हूँ , ख्वाइश तो मरने की है फिर भी जिए जा रहा हूँ, जो आगाज़ तुम ने किया था मेरी बर्बादिओं का मैं उन्हें अंजाम दिए जा रहा हूँ |

987. तेरे होंठो की लाली आज मुझे बहका रही हैं तेरे बदन की खुशबू मुझे महका रही हैं मेरी जान तुझे वैलेंटाइन्स डे मुबारक हो, आजा करीब तुझे छूने को बेचेनी बढ़ रही है |

988. वो बेवफा नहीं है , हमको यकीन है बस इम्तहान लेने का खुदा शौकीन है न आने का सबब महज मजबूरियाँ रही होंगी वरना दोस्ती के कितने ही उनके लम्हे हसीन हैं |

989. मुलाक़ातें तो आज भी हो जाती है तुमसे ख़्वाब किसी “ताले” के मोहताज नही हैं तेरी आँखों से यून तो सागर भी पिए हैं मैने तुझे क्या खबर जुदाई के दिन कैसे जिए हैं मैने |

990. मोहब्बत में न जाने कैसी ये अनहोनी हो गयी पता ही नहीं चला कब किस से मोहब्बत हो गयी उन्होंने मेरे करीब आकर मुझे सीने से लगाया मौसम हसीं होते ही बिन मौसम बरसात हो गयी |

991. ज़िंदगी में कभी प्यार करने का मन हो तो, अपने दुखों से प्यार करना क्योंकि, दुनिया का दस्तूर है दुनिया का दस्तूर है |

992. अब ना बातो की जरुरत हैं, निगाहो से अब सारी बात कीजिये बड़ा उजाला हैं आपके नूर से, जुल्फे खोल के अब रात कीजिये बड़ी मुद्दत से इंतजार में हूँ, आपके सिरहाने नींद के लिए अपनी बाहों का सहारा दे के. मुझे ये हसीन खवाब दीजिये |

993. मोहब्बत के रास्ते कितने भी मखमली क्यो न हो, खत्म तन्हाई के कम्मबल मे ही होते है |

994. ठोकर ना लगा मुझे पत्थर नही हूँ मैं, हैरत से ना देख कोई मंज़र नही हूँ मैं, उनकी नज़र में मेरी कदर कुछ भी नही, मगर उनसे पूछो जिन्हें हासिल नही हूँ मैं|

995. तलाश हे एक ऐसे सख्स की, जो आँखों में उस वक्त दर्द देख ले जब दुनिया हमसे कहती हे क्या यार तुम मुस्कुराते बहुत हो |

996. मेरे होटों से तेरे होंठों को गीला कर दू तेरे होंटो को मैं और भी रसीला कर दू तू इस कदर प्यार करे के प्यार की इन्तहा हो जाए, तेरे होंठों को चूस कर तुझे और जोशीला कर दू |

997. कितनी आसानी से कह दिया तुमने, की बस अब तुम मुझे भूल जाओ, साफ साफ लफ्जो मे कह दिया होता, की बहुत जी लिये अब तुम मर जाओ |

998. मुझे ढूंढने की कोशिश अब न किया कर, तूने रास्ता बदला तो मैंने मंज़िल बदल ली |

999. मुझे तलाश है एक रुह की जो मुझे दिल से प्यार करे. वरना इंसान तो पैसों से भी मिल जाया करते हैं |

1000. उसके चेहरे पर इस क़दर नूर था, कि उसकी याद में रोना भी मंज़ूर था, बेवफा भी नहीं कह सकते उसको ज़ालिम, प्यार तो हमने किया है वो तो बेक़सूर था।

1. माना की दूरियाँ कुछ बढ़ सी गयीं हैं, लेकिन तेरे हिस्से का वक़्त आज भी तन्हा गुजरता है|

2. दिल में प्यार का आगाज हुआ करता है, बातें करने का अंदाज हुआ करता है, जब तक दिल को ठोकर नहीं लगती, सबको अपने प्यार पर नाज हुआ करता है|

3. दोस्ती चेहरे की मीठी मुस्कान होती है, दोस्ती सुख दुःख की पहचान होती है, रूठ भी जाये हम तो दिल से मत लगाना, क्योंकि दोस्ती थोड़ी सी नादान होती है।

4. धरती के गम छुपाने के लिए गगन होता है, दिल के गम छुपाने के लिए बदन होता है, मर के भी छुपाने होंगे गम शायद, इसलिए हर लाश पर कफ़न होता है।

5. न जिद है न कोई गुरूर है हमे, बस तुम्हे पाने का सुरूर है हमे, इश्क गुनाह है तो गलती की हमने, सजा जो भी हो मंजूर है हमे।

6. कही अँधेरा तो कहीं शाम होगी, मेरी हर ख़ुशी आपके नाम होगी, कुछ माँग कर तो देखो दोस्त होंठों पर हँसी और हथेली पर मेरी जान होगी।

7. रोते रहे तुम भी, रोते रहे हम भी, कहते रहे तुम भी और कहते रहे हम भी, ना जाने इस ज़माने को हमारे इश्क़ से क्या नाराज़गी थी, बस समझाते रहे तुम भी और समझाते रहे हम भी।

8. माना की तुम जीते हो ज़माने के लिये, एक बार जी के तो देखो हमारे लिये, दिल की क्या औकात आपके सामने, हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये!

9. दर्द था दिल में पर जताया कभी नहीं, आँसू थे आँखो में पर दिखाया कभी नहीं, यही फ़र्क है दोस्ती और प्यार में, इश्क़ ने हँसाया कभी नहीं और दोस्तों ने रुलाया कभी नहीं।

10. कुछ लोग कहते है की बदल गया हूँ मैं, उनको ये नहीं पता की संभल गया हूँ मैं, उदासी आज भी मेरे चेहरे से झलकती है, पर अब दर्द में भी मुस्कुराना सीख गया हूँ मैं|

11. कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है! कोई कहता है प्यार सज़ा बन जाता है! पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से, तो वो प्यार ही जीने की वजह बन जाता है|

12. महफ़िल में कुछ तो सुनाना पड़ता है, ग़म छुपाकर मुस्कराना पड़ता है, कभी हम भी थे उनके दोस्त आजकल उन्हें याद दिलाना पड़ता है।

13. अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिसने भी मोहब्बत की, मरने की दुआ माँगी जीने की सज़ा पाई।

14. मेरी मोहब्बत है वो कोई मज़बूरी तो नही, वो मुझे चाहे या मिल जाये, जरूरी तो नही, ये कुछ कम है कि बसा है मेरी साँसों में वो, सामने हो मेरी आँखों के जरूरी तो नही |

15. दोस्ती में किसी का इम्तिहान न लेना, निभा न सको वो किसी को वादा न देना, जिसे तुम बिन जीने की आदत न हो, उसे जिन्दगी जीने की दुआ न देना।

16. रास्ते खुद ही तबाही के निकाले हमने, कर दिया दिल किसी पत्थर के हवाले हमने, हमें मालूम है क्या चीज़ है मोहब्बत यारो, घर अपना जला कर किये हैं उजाले हमने।

17. तेरे बिना टूट कर बिखर जायेंगे, तुम मिल गए तो गुलशन की तरह खिल जायेंगे, तुम ना मिले तो जीते जी ही मर जायेंगे, तुम्हें जो पा लिया तो मर कर भी जी जायेंगे।

18. प्यार का रिश्ता इतना गहरा नहीं होता, दोस्ती के रिश्ते से बड़ा कोई रिश्ता नहीं होता, कहा था इस दोस्ती को प्यार में न बदलो, क्यूंकि प्यार में धोखे के सिवा कुछ नहीं होता।

19. हर बात में आंसू बहाया नहीं करते, दिल की बात हर किसी को बताया नहीं करते, लोग मुट्ठी में नमक लेके घूमते है दिल के जख्म हर किसी को दिखाया नहीं करते।

20. उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ, सामने न सही पर आस-पास हूँ, पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ|

21. मेरी दोस्ती का हिसाब जो लगाओगे तो मेरी दोस्ती को बेहिसाब पाओगे, पानी के बुलबुलों की तरह है हमारी दोस्ती, अगर जरा सी ठेस पहुँची तो ढूंढ़ते रह जाओगे।

22. गम ने हसने न दिया, ज़माने ने रोने न दिया! इस उलझन ने चैन से जीने न दिया! थक के जब सितारों से पनाह ली! नींद आई तो तेरी याद ने सोने न दिया|

23. दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बेठे, यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बेठे, वो हमे एक लम्हा न दे पाए अपने प्यार का, और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बेठे!

24. खुदा से एक फरियाद वाकी है, प्यार जिन्दा है क्यूंकि एक याद वाकी है, मौत आये तो कह देंगे लौट जाए, क्यूंकि अभी किसी ख़ास से मुलाकात वाकी है।

25. हमने भी किसी से प्यार किया था, हाथो मे फूल लेकर इंतेज़ार किया था, भूल उनकी नही भूल तो हमारी थी, क्यों की उन्हो ने नही, हमने उनसे प्यार किया था |

26. आ जाओ किसी रोज़ तुम तो तुम्हारी रूह मे उतर जाऊँ| साथ रहूँ मैं तुम्हारे ना किसी और को नज़र आऊँ| चाहकर भी मुझे कोई छू ना सके मुझे कोई इस तरह | तुम कहो तो यूं तुम्हारी बाहों में बिखर जाऊँ|

27. जिंदगी की राहों में बहुत से यार मिलेंगे, हम क्या हम से भी अच्छे हजार मिलेंगे, इन अच्छों की भीड़ में हमें न भूल जाना, हम कहाँ आपको बार बार मिलेंगे।

28. न पूछो हालत मेरी रूसवाई के बाद, मंजिल खो गयी है मेरी, जुदाई के बाद, नजर को घेरती है हरपल घटा यादों की, गुमनाम हो गया हूँ गम-ए-तन्हाई के बाद |

29. खुश नसीब होते हैं बादल, जो दूर रहकर भी ज़मीन पर बरसते हैं, और एक बदनसीब हम हैं, जो एक ही दुनिया में रहकर भी मिलने को तरसते हैं |

30. नन्हे से दिल में अरमान कोई रखना, दुनिया की भीड़ में पहचान कोई रखना, अच्छे नहीं लगते जब तुम रहते हो उदास, अपने होठों पे सदा मुस्कान कोई रखना।

31. कभी रो के मुस्कुराए, कभी मुस्कुरा के रोए, जब भी तेरी याद आई तुझे भुला के रोए, एक तेरा ही तो नाम था जिसे हज़ार बार लिखा, जितना लिख के खुश हुए उस से ज़यादा मिटा के रोए |

32. हम सिमटते गए उनमें और वो हमें भुलाते गए हम मरते गए उनकी बेरुखी से, और वो हमें आजमाते गए सोचा की मेरी बेपनाह मोहब्बत देखकर सीख लेंगी वफाएँ करना पर हम रोते गए और वो हमें खुशी-खुशी रुलाते गए |

33. खूबसूरत सा एक पल किस्सा बन जाता है, जाने कब कौन जिंदगी का हिस्सा बन जाता है, कुछ लोग ऐसे भी मिलते हैं जिंदगी में, जिनसे कभी न टूटने वाला रिश्ता बन जाता है।

34. क्या खूब ही होता अगर दुख रेत के होते, मुठ्ठी से गिरा देते पैरो से उड़ा देते।

35. हर दर्द की दवा हो तुम, आज तक जो मांगी मेरी एक लौटी दुआ हो तुम, तुम्हे मिलने की तमन्ना नहीं उठती कभी, क्यूंकि जो हर वक़्त साथ रहती है वो हवा हो तुम.

36. खुशी आपके लिए गम हमारे लिए, जिंदगी आपके लिए मौत हमारे लिए, हँसी आपके लिए रोना हमारे लिए, सबकुछ आपके लिए आप हमारे लिए।

37. नफरतें लाख मिलीं पर मोहब्बत न मिली, ज़िन्दगी बीत गयी मगर राहत न मिली, तेरी महफ़िल में हर एक को हँसता देखा, एक मैं था जिसे हँसने की इजाज़त न मिली।

38. आज मुझे ये बताने की इजाज़त दे दो, आज मुझे ये शाम सजाने की इजाज़त दे दो, अपने इश्क़ मे मुझे क़ैद कर लो, आज जान तुम पर लूटाने की इजाज़त दे दो.

39. दोस्तों से दूर होना मजबूरी होती है, हकीकत की दुनिया भी जरुरी होती है, ऐ दोस्त अगर तू साथ न हो तो, मेरी तो हर ख़ुशी अधूरी होती है।

40. उदास कर देती है हर रोज ये शाम मुझे, लगता है तू भूल रहा है मुझे धीर-धीरे।

41. बदलना आता नही हमे मौसम की तरह हर एक रुत में तेरा इंतज़ार करते है ना तुम समझ सकोगे जिसे कयामत तक कसम तुम्हारी तुम्हे हम इतना प्यार करते है |

42. जिंदगी ज़ख्मों से भरी है, वक़्त को मरहम बनाना सीख लो, हारना तो है एक दिन मौत से, फिलहाल दोस्तों के साथ जिंदगी जीना सीख लो।

43. नादानी की हद है जरा देखो तो उन्हें, मुझे खो कर वो मेरे जैसा ढूढ़ रहे हैं।

44. खुबसूरत इन्सान से मोहब्बत नही होती- बल्कि जिस इन्सान से मोहब्बत होती है वो खुबसूरत लगने लगता है |

45. करनी है खुदा से गुजारिश कि, तेरी दोस्ती के सिवा कोई बंदगी न मिले, हर जन्म में मिले दोस्त तेरे जैसा, या फिर कभी जिंदगी न मिले।

46. इस मोहब्बत की किताब के, बस दो ही सबक याद हुए, कुछ तुम जैसे आबाद हुए, कुछ हम जैसे बरबाद हुए।

47. प्यार हो जाता है करता कौन हैं| हम तो कर देंगे प्यार में जान भी कुरबान लेकिन पता तो चले कि हम से प्यार करता कौन हैं |

48. वो पूछते हैं इतने गम में भी खुश कैसे हो| मैने कहा, प्यार साथ दे न दे, यार साथ हैं|

49. अब तुम को भूल जाने की कोशिश करेंगे हम तुम से भी हो सके तो न आना ख़याल में।

50. तेरे ख्याल से ही एक रौनक आ जाती है दिल में तुम रूबरू आओगे तो जाने क्या आलम होगा |

51. आकाश में चमकते सितारे हो आप, चाँद के खूबसूरत नज़ारे हो आप, इस जिंदगी को जीने के सहारे हो आप, मेरे प्यार से भी प्यारे हो आप।

52. नजर बचा कर गुजर जाएँ वो मुझसे लेकिन, मेरे ख्याल से दामन वो बचा नहीं सकते।

53. पत्थर के दिल में भी जगह बना ही लेता है ये प्यार है अपनी मंजिल को पा ही लेता है |

54. बातें ऐसी करो कि जज्बात कम न हों, ख़यालात ऐसे रखो के कभी ग़म न हो, दिल में अपनी इतनी जगह देना हमें दोस्त, कि खाली खाली सा लगे जब हम न हों।

55. उसकी बाहों में सोने का अभी तक शौक है मुझको, मोहब्बत में उजड़ कर भी मेरी आदत नहीं बदली।

56. प्यार का तोफा हर किसी को नहीँ मिलता ये वो फूल है जो हर बाग मे नही खिलता इस फ़ूल को कभी टूटने मत देना क्योकि टूटा हुआँ फूल वापीस नहीँ खिलता |

57. खुशबू की तरह मेरी सांसों में रहना, लहू बनके मेरे आँसुओं में बहना, दोस्ती होती है रिश्तों का अनमोल गहना, इसीलिए दोस्त को कभी अलविदा न कहना।

58. लम्हों की दौलत से दोनों ही महरूम रहे, मुझे चुराना न आया, तुम्हें कमाना न आया।

59. इनकार करते करते इकरार कर बैठे हम तो एक बेवफा से प्यार कर बैठे |

60. केबल पानी से तस्वीर कहाँ बनती है, रूठे ख्वाबों से तकदीर कहां बनती है, किसी से दोस्ती करो तो सच्चे दिल से, क्यूँकि यह जिंदगी फिर कहाँ मिलती है।

61. ना जाने इस ज़िद का नतीजा क्या होगा, समझता दिल भी नहीं मैं भी नहीं और तुम भी नहीं।

62. विश्वास करने वाले से ज्यादा बेवकूफ विश्वास को तोड़ने वाला होता है क्योंकि वो सिर्फ एक छोटे से स्वार्थ के लिये एक प्यारे से मनुष्य को खो देता है |

63. दिल से दिल का गहरा रिश्ता है हमारा, दिल की हर धड़कन पर नाम है तुम्हारा, अगर हम आपके साथ नहीं तो क्या हुआ, जिंदगी भर साथ निभाने का वादा है हमारा।

64. बिखरी किताबें भीगे पलक और ये तन्हाई, कहूँ कैसे कि मिला मोहब्बत में कुछ भी नहीं।

65. बेवजह अब ज़िन्दगी में प्यार के बीज न बोए कोई. मोहब्बत के पेड़ हमेशा ग़म की बारिश ही लाते है |

66. बरसों बाद न जाने क्या समां होगा, हमसब दोस्तों में न जानें कौन कहाँ होगा, अगर मिलना हुआ तो मिलेंगें ख्वाबों में, जैसे सूखे हुये गुलाब मिलते हैं किताबों में।

67. ऐसा लगता है कि वो भूल गया है हमको, अब कभी खिड़की का पर्दा नहीं बदला जाता।

68. उनकी चाहत में हम कुछ इस तरह बंधे है की वो साथ भी नहीं और हमअकेले भी नहीं |

69. सबकी जिंदगी में खुशियाँ देने वाले दोस्त, तेरी जिंदगी में कोई गम ना हो, तुझे तब भी दोस्त मिलते रहें अच्छे अच्छे, जब इस दुनिया में हम ना हो।

70. हमें अपने घर से चले हुए, सरे राह उमर गुजर गई, न कोई जुस्तजू का सिला मिला, न सफर का हक ही अदा हुआ।

71. मैंने तुझे शब्दों में महसूस किया है लोग तो तेरी तस्वीर पसन्द करते है |

72. काश वो पल साथ बिताए ना होते, तो आँखों में ये आँसू आए ना होते, जिनसे रहा ना जाए एक पल भी दूर, काश ऐसे प्यारे दोस्त बनाए ना होते।

73. तू मेरी बरबादियों के जश्न में शामिल रहा, ये तसव्वुर ही बहुत आराम देता है मुझे।

74. कितना प्यार है तुमसे वो लफ्ज़ो के सहारे कैसे बताऊ| महसूस कर मेरे एहसास, गवाही कहाँ से लाऊ|

75. हर खुशी दिल के करीब नहीं होती, ग़मों से जिन्दगी दूर नहीं होती, ऐ मेरे दोस्त दोस्ती संजो के रखना, हर किसी को दोस्ती नसीब नहीं होती।

76. भूल जा अब तू मुझे आसान है तेरे लिए, भूलना तुझको नहीं आसां मगर मेरे लिए।

77. जो उनकी आँखों से बयाँ होते है वो लफ्ज़ किताबो में कहाँ होते है |

78. क्यूँ मुश्किलों में साथ देते हैं दोस्त, क्यूँ सारे ग़मों को बाँट लेते हैं दोस्त, न रिश्ता खून का न रिवाज से बंधा है, फिर भी ज़िन्दगी भर साथ देते हैं दोस्त।

79. इतना भी इख्तियार नहीं मुझको वज़्म में, शमाएँ अगर बुझें तो मैं दिल को जला सकूँ।

80. किसी को चाहो तो इस अंदाज़ से चाहो | कि वो तुम्हे मिले या ना मिले | मगर उसे जब भी प्यार मिले तो तुम याद आओ |

81. शायद फिर हमें वो तकदीर मिल जाये, जीवन के वो हसीं पल फिर मिल जाये, चल फिर से बैठें क्लास की लास्ट बैंच पे, शायद फिर से वो पुराने दोस्त मिल जाएँ।

82. गिला भी तुझ से बहुत है मगर मोहब्बत भी, वो बात अपनी जगह है ये बात अपनी जगह।

83. किया है प्यार तो धोखा नहीं देंगे | आपको आँसुओ का तोहफा नहीं देंगे | आप दिल से रोये हमें याद करके | ऐसा हम कभी आपको मौका नहीं देंगे |

84. न जाने किस मिट्टी से खुदा ने तुमको बनाया है, अनजाने में इक ख्वाब इन आँखों को दिखाया है, मेरी हसरत थी हमेशा से खुदा से मिलने की दोस्त, शायद इसीलिये किस्मत ने मुझे तुमसे मिलाया है।

85. ये तो न कह कि किस्मत की बात है, मेरी बरबादियों में तेरा भी हाथ है।

86. एक सच्चा प्यार चाहे दो “पल” के लिये क्यु ना हो | मगर जिन्दगी भर के लिये “ऐहसास” दे जाता है |

87. सफ़र दोस्ती का कभी ख़त्म न होगा, दोस्तों मेरा प्यार कभी कम न होगा, दूर रहकर भी रहेगी महक इसकी, हमें कभी बिछड़ने का ग़म न होगा।

88. कुछ कटी हिम्मत-ए-सवाल में उम्र, कुछ उम्मीद-ए-जवाब में गुजरी।

89. प्यार से तुमने जब हमारी तरफ देख लिया | हमकों लगा सारी दुनिया ने हमें देख लिया | तमन्ना बाकी नही है अब कुछ और देखने की | तुम्हारी आखों में हमने दुनिया को देख लिया|

90. कुछ लोग भूल के भी भुलाये नहीं जाते, ऐतबार इतना है कि आजमाये नहीं जाते, हो जाते हैं दिल में इस तरह शामिल कि, उनके ख्याल दिल से मिटाये नहीं जाते।

91. चंद कलियाँ निशात की चुनकर, मुद्दतों मायूस रहता हूँ, तेरा मिलना ख़ुशी की बात सही, तुझसे मिलकर उदास रहता हूँ।

92. तुझसे रूठ जाने का मजा ही कुछ ओर है एह सनम | अच्छा लगता है तेरा बार बार मनाना |

93. दोस्ती के लिए दोस्ती जैसा अहसास चाहिए, मुश्किल हो रहना जिसके बिना वो प्यास चाहिए, दोस्ती वही सच्ची होती है जो कायम रहे हमेशा, क्योंकि दोस्ती के लिए जगह दिल में खास चाहिए।

94. बस यही बात कि किसी को ना चाहों दिल से, तज़ुर्बे इस के सिवा उम्र को क्या देते हैं।

95. कभी हक़ीक़त में भी बढ़ाया करो ताल्लुक़ हमसे | अब ख़्वाबों की मुलाक़ातों से तसल्ली नहीं होती |

96. कुछ सितारों की चमक नहीं जाती, कुछ यादों की खनक नहीं जाती, कुछ लोगों से होता है ऐसा रिश्ता, कि दूर रहके भी उनकी महक नहीं जाती।

97. क़ब्रों में नहीं हम को किताबों में उतारो, हम लोग मोहब्बत की कहानी में मरे हैं।

98. कितना प्यार है तुमसे, वो लफ्ज़ो के सहारे कैसे बताऊँ, सिर्फ महसूस होते एहसासो की, गवाही कहाँ से लाऊँ |

99. ज़िन्दगी में किसी मोड़ पर खुद को तन्हा न समझना, साथ हूँ मैं आपके खुद से जुदा मत समझना, उम्र भर आपसे दोस्ती करने का वादा किया है, अगर जिंदगी साथ न दे तो हमें बेवफा मत समझना।

100. वो अँधेरा ही सही था कि कदम राह पर थे, रोशनी ले आई मुझे मंजिल से बहुत दूर।

101. वो ‎चाँद‬ है मगर आप से प्यारा तो नहीं | परवाने का शमा के बिन गुजारा तो नहीं | मेरे ‎दिल‬ ने सुनी है एक मीठी सी आवाज़ | लगता है कहीं आपने मुझे पुकारा तो नहीं |

102. न जाने क्यूँ हमें आँसू बहाना नहीं आता, न जाने क्यूँ हाले दिल बताना नहीं आता, क्यूँ सब दोस्त बिछड़ गए हमसे, शायद हमें ही साथ निभाना नहीं आता।

103. मैं पा नहीं सका इस कशमकश से छुटकारा, तू मुझे जीत भी सकता था मगर हारा क्यूँ।

104. फ़िज़ा में महकती शाम हो तुम | प्यार में छलकता जाम हो तुम | सीने में छुपाए फिरते हैं हम यादें तुम्हारी | इसीलिए मेरी ज़िंदगी का दूसरा नाम हो तुम |

105. ऐ ‎दोस्त‬ अब क्या लिखूं तेरी ‎तारीफ‬ में, बड़ा ‎खास‬ है तू मेरी ‎जिंदगी‬ में।‬‬‬‬

106. नतीजा एक ही निकला, कि थी किस्मत में नाकामी, कभी कुछ कहके पछताए, कभी चुप रहके पछताए।

107. कितना प्यार है तुमसे ये जान लो तुम ही हो जिंदगी मेरी तुम ये मान लो | तुम्हे देने को मेरे पास कुछ और तो नही बस एक जान है जब जी चाहे माँग लो |

108. नफरत को हम प्यार देते है, प्यार पे खुशियाँ वार देते है, बहुत सोच समझकर हमसे कोई वादा करना, ऐ दोस्त हम वादे पर ज़िन्दगी गुजार देते है।

109. मुमकिना फ़ैसलों में एक हिज्र का फ़ैसला भी था, हम ने तो एक बात की उस ने कमाल कर दिया।

110. मैं उसकी हूँ वो इस एहसास से इन्कार करता है | भरी महफ़िल मे भी रुसवा मुझे हर बार करता है | यक़ीन है सारी दुनिया को खफा है मुझसे वो लेकिन मुझे मालूम है फिर भी मुझी से प्यार करता हूँ |

111. दिन हुआ है तो रात भी होगी, हो मत उदास कभी बात भी होगी, इतने प्यार से दोस्ती की है, जिन्दगी रही तो मुलाकात भी होगी |

112. होशो-हवास और ताबो-तवाँ दाग़ जा चुके, अब हम भी जाने वाले हैं सामान तो गया।

113. क्या कहे कुछ कहा नही जाता, दर्द मीठा है पर रहा नही जाता, दोस्ती हो गई इस कदर आपसे, बिना याद किये बिना रहा नहीं जाता।

114. मुकम्मल है इबादत और मैं वतन ईमान रखता हूँ, वतन के शान की खातिर हथेली पे जान रखता हूँ | क्यु पढ़ते हो मेरी आँखों में नक्शा पाकिस्तान का, मुस्लमान हूँ मैं सच्चा, दिल में हिंदुस्तान रखता हूँ |

115. खाते रहे फरेब संभलते रहे कदम, चलते रहे जुनूं का सहारा लिये हुए।

116. दोस्ती वो नहीं होती, जो जान देती है दोस्ती वो नही होती जो मुस्कान देती है दोस्ती तो वो होती है जो दोस्ती को प्यार का नाम देती हैं|

117. ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई, मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता, नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई, मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता |

118. कहते हैं उम्मीद पे जीता है जमाना, क्या करे जिसकी कोई उम्मीद नहीं है।

119. वक्त की यारी तो हर कोई करता है मेरे दोस्त, मजा तो तब है जब वक्त बदल जाये पर यार ना बदले।

120. संस्कार और संस्कृति की शान मिले ऐसे,हिन्दू मुस्लिम और हिंदुस्तान मिले ऐसे हम मिलजुल के रहे ऐसे की मंदिर में अल्लाह और मस्जिद में राम मिले जैसे |

121. तुम अपना रंजो-गम अपनी परेशानी मुझे दे दो, तुम्हें मेरी कसम यह दुख यह हैरानी मुझे दे दो। ये माना मैं किसी काबिल नहीं इन निगाहों में, बुरा क्या है अगर इस दिल की वीरानी मुझे दे दो।

122. तू दूर है मुझसे और पास भी है, तेरी कमी का एहसास भी है, दोस्त तो हमारे लाखो है इस जहाँ में, पर तू प्यारा भी है और खास भी है।

123. दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान हैं |

124. बहुत खामोशी से गुजरी जा रही है जिन्दगी, ना खुशियों की रौनक ना गमों का कोई शोर, आहिस्ता ही सही पर कट जायेगा ये सफ़र, ना आयेगा दिल में उसके सिवा कोई और।

125. सच्ची है मेरी दोस्ती आजमा के देखलो, करके यकीं मुझ पे मेरे पास आके देखलो, बदलता नहीं कभी सोना अपना रंग, जितनी बार दिल करे आग लगा कर देखलो।

126. गंगा यमुना यहाँ नर्मदा, मंदिर मस्जिद के संग गिरजा, शांति प्रेम की देता शिक्षा, मेरा भारत सदा सर्वदा |

127. मुझे ये डर है तेरी आरजू न मिट जाये, बहुत दिनों से तबियत मेरी उदास नहीं।

128. दोस्त आपकी दोस्ती का क्या खिताब दे, करते है इतना प्यार की क्या हिसाब दे। अगर आपसे भी अच्छा फूल होता तो ला देते, लेकिन जो खुद गुलदस्ता हो उसे क्या गुलाब दे।

129. दे सलामी इस तिरंगे को जिस से तेरी शान हैं, सर हमेशा ऊँचा रखना इसका जब तक दिल में जान हैं।

130. बारिश में भीगने के ज़माने गुजर गए, वो शख्स मेरे शौक चुरा कर चला गया।

131. दोस्ती अच्छी हो तो रंग़ लाती है दोस्ती गहरी हो तो सबको भाती है दोस्ती नादान हो तो टूट जाती है पर अगर दोस्ती अपने जैसी हो तो इतिहास बनाती है।

132. अब तक जिसका खून न खौला,वो खून नहीं वो पानी है जो देश के काम ना आये, वो बेकार जवानी है|

133. अधूरी हसरतों का आज भी इलज़ाम है तुम पर, अगर तुम चाहते तो ये मोहब्बत ख़त्म ना होती।

134. खुश हूँ और सबको खुश रखता हूँ, लापरवाह हूँ फिर भी सबकी परवाह करता हूँ मालूम है कोई मोल नहीं मेरा, फिर भी, कुछ अनमोल लोगो से दोस्ती रखता हूँ।

135. जिस दिन रास्ते पर तिरंगा बैचने वाले बच्चे न दिखे उस दिन सोचना हम आज़ाद हो गये।

136. दस्त-ए-तक़दीर से हर शख्स ने हिस्सा पाया, मेरे हिस्से में तेरे साथ की हसरत आई।

137. सवाल पानी का नहीं. सवाल प्यास का है सवाल सांसो का नहीं. सवाल मौत का है दोस्त तो दुनिया में बहुत मिलते है सवाल दोस्ती का नहीं, सवाल ऐतवार का है|

138. बेबी को बेस पसन्द हैं, सलमान को केस पसन्द हैं, मोदी को विदेश पसन्द हैं, और मुझे मेरा देश पसंद हैं।

139. अपनी तबाहियों का मुझे कोई ग़म नहीं तुम ने किसी के साथ मोहब्बत निभा तो दी।

140. हमने अपने नसीब से ज्यादा, अपने दोस्तो पर भरोसा रखा है, क्यूँ की नसीब तो बहुत बार बदला है लेकिन मेरे दोस्त अभी भी वही है।

141. जिन की पत्नी वेकेशन करने मायके चली गई है, वो स्टेटस पर तिरंगा लगा कर अपनी आज़ादी का ऐलान कर सकते हैं।

142. तुम ना लगा पाओगे अंदाजा मेरी तबाही का, तुमने देखा ही कहाँ है मुझको शाम के बाद।

143. सादगी अगर हो लफ्जो में यकीन मानो, प्यार बेपनाह, और दोस्त बेमिसाल मिल ही जाते हैं ।

144. मैं भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नहीं है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ।

145. दुनिया की महफ़िलों से उकता गया हूँ या रब, क्या लुत्फ़ अंजुमन का जब दिल ही बुझ गया हो।

146. मुस्कराहट का कोई मोल नहीं होता, कुछ रिश्तों का कोई तोल नहीं होता, लोग तो मिल जाते है हर मोड़ पर लेकिन, हर कोई आपकी तरह अनमोल नहीं होता।

147. ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई, मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता, नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई, मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता |

148. क़ैद ए मौसम से तबीयत रही आज़ाद उसकी, काश गुलशन में समझता कोई फ़रियाद उसकी।

149. रिश्तों से बड़ी चाहत और क्या होगी, दोस्ती से बड़ी इबादत और क्या होगी, जिसे दोस्त मिल सके कोई आप जैसा, उसे ज़िंदगी से कोई और शिकायत क्या होगी।

150. अजब मौसम है, मेरे हर कदम पे फूल रखता है, मोहब्बत में मोहब्बत का फरिश्ता साथ चलता है, मैं जब सो जाऊँ, इन आँखों पे अपने होंठ रख देना, यकीं आ जायेगा, पलकों तले भी दिल धड़कता है।

151. अपना तो आशिकी का किस्सा-ए-मुख्तसर है, हम जा मिले खुदा से दिलबर बदल-बदल कर।

152. अपनी ज़िंदगी के कुछ अलग ही उसूल हैंदोस्ती की खातिर हमें काँटे भी क़बूल हैं, हँस कर चल देंगे काँच के टुकड़ों पर भी, अगर दोस्त कहे यह दोस्ती में बिछाये फूल हैं।

153. इजाजत हो अगर तो पूछ लूँ मैं तेरी ज़ुल्फ़ों से, सुना है ज़िंदगी एक खूबसूरत जाल है साकी।

154. जीना भी आ गया, मुझे मरना भी आ गया, पहचानने लगा हूँ, तुम्हारी नजर को मैं।

155. दोस्ती दर्द नहीं खुशियों की सौगात है, किसी अपने का ज़िंदगी भर का साथ है, ये तो दिलों का वो खूबसूरत एहसास है, जिसके दम से रोशन ये सारी कायनात है।

156. हमें तुमसे मोहब्बत है हमारा इम्तिहान ले लो, अगर चाहो तो दिल ले लो अगर चाहो तो जान ले लो।

157. जब कि पहलू से यार उठता है, दर्द बे-इख़्तियार उठता है।

158. ज़िंदगी के तूफानों का साहिल है दोस्ती, दिल के अरमानों की मंज़िल है दोस्ती, ज़िंदगी भी बन जाएगी अपनी तो जन्नत, अगर मौत आने तक साथ दे दोस्ती।

159. मोहब्बत की कहूँ देवी या तुमको बंदगी कह दूँ, बुरा मानो न गर हमदम तो तुमको ज़िन्दगी कह दूँ।

160. ज़ख़्म झेले दाग़ भी खाए बहुत, दिल लगा कर हम तो पछताए बहुत।

161. होंठों पे उल्फत के फ़साने नहीं आते, जो बीत गए फिर वो ज़माने नहीं आते, दोस्त ही होते हैं दोस्तों के हमदर्द,कोई फ़रिश्ते यहाँ साथ निभाने नहीं आते।

162. मेरे आँखों के ख्वाब, दिल के अरमान हो तुम, तुम से ही तो मैं हूँ, मेरी पहचान हो तुम, मैं ज़मीन हूँ अगर तो मेरे आसमान हो तुम, सच मानो मेरे लिए तो सारा जहां हो तुम।

163. न गुल खिले हैं न उन से मिले न मय पी है, अजीब रंग में अब के बहार गुज़री है।

164. दुनियादारी में हम थोड़े कच्चे हैं, पर दोस्ती के मामले में सच्चे हैं, हमारी सच्चाई बस इस बात पर कायम है, कि हमारे दोस्त हमसे भी अच्छे हैं।

165. मेरी ज़िन्दगी की ये सबसे बड़ी तमन्ना हैं, मेरे पास रहो तुम हमेशा मेरी साँस बनके।

166. जुदा थे हम तो मयस्सर थीं क़ुर्बतें कितनी, बहम हुए तो पड़ी हैं जुदाइयाँ क्या क्या।

167. हर ख़ुशी से ख़ूबसूरत तेरी शाम कर दूँ, अपना प्यार और दोस्ती तेरे नाम कर दूँ, मिल जाये अगर दुबारा यह ज़िन्दगी दोस्त, हर बार मैं ये ज़िन्दगी तुझ पर कुर्बान कर दूँ ।

168. खुशबू की तरह आसपास बिखर जायेंगे, सुकून बनकर दिल में उतर जायेंगे, महसूस करने की कोशिश कीजिये, दूर होकर भी आपके पास नजर आएंगे।

169. एक कहानी सी दिल पर लिखी रह गयी, वो नजर जो उसे देखती रह गयी, वो बाजार में आकर बिक भी गए, मेरी कीमत लगी की लगी रह गयी।

170. हंसी छुपाना किसी को गवारा नहीं होता, हर मुसाफिर ज़िन्दगी का सहारा नहीं होता, मिलते है लोग इस तनहा ज़िन्दगी में पर, हर कोई दोस्त तुमसा प्यारा नहीं होता ।

171. जब कभी सिमटोगे तुम मेरी इन बाहों में आकर, मोहब्बत की दास्तां मैं नहीं मेरी धड़कने सुनाएंगी।

172. इधर से आज वो गुजरे तो मुँह फेरे हुए गुजरे, अब उन से भी हमारी बेकसी देखी नहीं जाती।

173. दोस्त समझते हो तो दोस्ती निभाते रहना, हमें भी याद करना खुद भी याद आते रहना, हमारी तो हर ख़ुशी दोस्तों से ही है, हम खुश रहें या ना आप यूँ ही मुस्कुराते रहना।

174. आ जाओ किसी रोज तुम्हारी रूह मे उतर जाऊँ, साथ रहूँ मैं तुम्हारे ना किसी और को नज़र आऊँ, चाहकर भी मुझे छू ना सके कोई इस तरह, तुम कहो तो यूँ तुम्हारी बाहों में बिखर जाऊँ।

175. वो कब का भूल चुका होगा हमारी वफ़ा का किस्सा, बिछड़ के किसी को किसी का ख्याल कब रहता है।

176. किस हद तक जाना है ये कौन जानता है, किस मंजिल को पाना है ये कौन जानता है । दोस्ती के दो पल जी भर के जी लो, किस रोज़ बिछड जाना है ये कौन जानता है ।

177. तड़प रहीं हैं मेरी साँसें तुझे महसूस करने को, खुशबू की तरह बिखर जाओ तो कुछ बात बने।

178. ज़ख्म सब भर गए बस एक चुभन बाकी है, हाथ में तेरे भी पत्थर था हजारों की तरह, पास रहकर भी कभी एक नहीं हो सकते, कितने मजबूर हैं दरिया के किनारों की तरह।

179. हम दोस्त बनाकर किसी को रुलाते नही, दिल में बसाकर किसी को भुलाते नही, हम तो दोस्त के लिए जान भी दे सकते हैं, पर लोग सोचते हैं की हम दोस्ती निभाते नहीं।

180. कब आपकी आँखों में हमें मिलेगी पनाह, चाहे इसे समझो दिल्लगी या समझो गुनाह, अब भले ही हमें कोई दीवाना करार दे, हम तो हो गए हैं आपके प्यार में फ़ना।

181. क्या अजीब था उनका मुझे छोड़ के जाना, सुना कुछ नहीं और कहा भी कुछ नहीं, कुछ इस तरह बर्बाद हुए उनकी मोहब्बत में, लुटा भी कुछ नहीं और बचा भी कुछ नहीं।

182. सबसे अलग सबसे न्यारे हो आप, तारीफ कभी पुरी ना हो इतने प्यारे हो आप। आज पता चला जमाना क्यों जलता है हमसे, क्यों कि दोस्त तो आखिर हमारे हो आप।

183. अपने दिल की जमाने को बता देते हैं, हर एक राज से परदे को उठा देते हैं, आप हमें चाहें न चाहें गिला नहीं इसका, जिसे चाह लें हम उसपे जान लुटा देते हैं।

184. रंज़िश ही सही दिल को दुखाने के लिए आ, आ फिर से मुझे छोड़ जाने के लिए आ।

185. दावे मोहब्बत के मुझे नहीं आते यारो, एक जान है जब दिल चाहे माँग लेना।

186. चाहा है तुम्हें अपने अरमान से भी ज्यादा, लगती हो हसीन तुम मुस्कान से भी ज्यादा, मेरी हर धड़कन हर साँस है तुम्हारे लिए, क्या माँगोगे जान मेरी जान से भी ज्यादा।

187. इक झलक देख लें तुझको तो चले जाएंगे, कौन आया है यहाँ उम्र बिताने के लिए।

188. हम वो फूल हैं जो रोज़ रोज़ नहीं खिलते, यह वो होंठ हैं जो कभी नहीं सिलते, हम से बिछड़ोगे तो एहसास होगा तुम्हें, हम वो दोस्त हैं जो रोज़ रोज़ नहीं मिलते।

189. अब आ गए हो आप तो आता नहीं कुछ याद, वरना कुछ हमको आप से कहना ज़रूर था।

190. हमने प्यार मोहब्बत नहीं इबादत की है, रस्मों और रिवाजों से बगावत की है, माँगा था हमने जिसे अपनी दुआओं में, उसी ने मुझसे जुदा होने की चाहत की है।

191. तेरे हर गम को अपनी रूह में उतार लूँ, ज़िन्दगी अपनी तेरी चाहत में संवार लूँ, मुलाकात हो तुझसे कुछ इस तरह मेरी, सारी उम्र बस एक मुलाकात में गुज़ार लूँ।

192. पलके झुका के नमन करे, मस्तक झुका के वंदना करे, ऐसी नज़र दे दे मेरे कान्हा जो बंद होते ही आपके दीदार करे. कृष्णा जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाये |

193. कुछ यादगार-ए-शहर-ए-सितमगर ही ले चलें, आये हैं तो फिर गली में से पत्थर ही ले चलें, रंज-ए-सफ़र की कोई निशानी तो पास हो, थोड़ी सी ख़ाक-ए-कूचा-ए-दिलबर ही ले चलें।

194. सपनों की दुनिया में हम खोते चले गए, मदहोश न थे पर मदहोश होते चले गए, ना जाने क्या बात थी उस चेहरे में, ना चाहते हुए भी उसके होते चले गए।

195. श्री कृष्ण के कदम आपके घर आये, आप खुशियो के दीप जलाये, परेशानी आपसे आँखे चुराए, कृष्ण जन्मोत्सव की आपको शुभकामनायें .

196. तेरी वफ़ा के तकाजे बदल गये वरना, मुझे तो आज भी तुझसे अजीज कोई नहीं।

197. चलते चलते राह में उन से मुलाकात हुई, वो कुछ शरमाई फिर सहम सी गई, दिल तो हमारा भी किया कि कह दे उनसे अपने दिल की बात पर कम्बखत इस दिल की इतनी हिम्मत ही न हुई |

198. दही की हांड़ी, बारिश का फुहार, माखन चुराने आये नन्दलाल |

199. क्या अजीब खेल है इस मोहब्बत का भी, किसी को हम न मिले और कोई हमें न मिला।

200. अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का, बस इक निगाह पे ठहरा है फ़ैसला दिल का।

201. वृंदावन का रास रचाये, आ गया नन्द लाल कृष्ण कन्हैया |

202. तमाम उम्र उसी के ख्याल में गुजरी, जिसे उम्र भर मेरा ख्याल न आया।

203. यार पहलू में है, तन्हाई है, कह दो निकले, आज क्यूँ दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी।

204. जन्माष्टमी के इस अवसर पर, हम ये कामना करते हैं कि श्री कृष्ण की कृपा आप पर, और आपके पूरे परिवार पर हमेशा बनी रहे। शुभ जन्मआष्टमी |

205. तेरी ख़ामोशी, अगर तेरी मज़बूरी है, तो रहने दे इश्क़ कौन सा जरुरी है।

206. मजा आता अगर गुजरी हुई बातों का अफसाना, कहीं से तुम बयाँ करते, कहीं से हम बयाँ करते।

207. आओ मिलकर सजाये नन्दलाल को, आओ मिलकर करें उनका गुणगान! जो सबको राह दिखाते हैं, और सबकी बिगड़ी बनाते हैं! शुभ जन्मआष्ट्मी |

208. पल पल उसका साथ निभाते हम, एक इशारे पर दुनिया छोड़ जाते हम, समन्दर के बीच में फरेब किया उसने, कहते तो किनारे पर ही डूब जाते हम।

209. ये आलम शौक़ का देखा न जाये, वो बुत है या ख़ुदा देखा न जाये, ये किन नज़रों से तुम ने आज देखा, कि तेरा देखना देखा ना जाये।

210. राधा की भक्ति, मुरली की मिठास, माखन का स्वाद और गोपियों का रास, सब मिलके बनाते हैं जन्माष्टमी का दिन ख़ास।

211. वो मायूसी के लम्हों में ज़रा भी हौसला देता, तो हम कागज़ की कश्ती पे समंदर उतर जाते।

212. बहके बहके ही अंदाज-ए-बयां होते हैं, आप जब होते हैं तो होश कहाँ होते हैं।

213. नन्द के घर आनंद भयो, हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की! शुभ जन्मआष्टमी|

214. अगर तुम समझ पाते मेरी चाहत की इन्तेहा, तो हम तुमसे नहीं, तुम हमसे मोहब्बत करते।

215. आपसे रोज़ मिलने को दिल चाहता है, कुछ सुनने सुनाने को दिल चाहता है, था आपके मनाने का अंदाज़ ऐसा, कि फिर रूठ जाने को दिल चाहता है।

216. प्रेम से श्री कृष्ण का नाम जपो, दिल की हर इच्छा पूरी होगी, कृष्ण आराधना में लीन हो जाओ, उनकी महिमा जीवन खुशहाल कर देगी।

217. अपनी तस्वीर को आँखों से लगाता क्या है, एक नज़र मेरी तरफ देख तेरा जाता क्या है, मेरी बर्बादी में तू भी है बराबर का शामिल, मेरे किस्से तू गैरों को सुनाता क्या है।

218. तुम्हारी ज़ुल्फ़ों के साये में शाम कर लूंगा, सफर इस उम्र का पल में तमाम कर लूंगा।

219. कृष्ण जिनका नाम, गोकुल जिनका धाम, ऐसे श्री कृष्ण भगवान को हम सब का प्रणाम, जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं कृष्ण जन्माष्टमी की बधाई|

220. मैं ख़ामोशी हूँ तेरे मन की, तू अनकहा अलफ़ाज़ मेरा, मैं एक उलझा लम्हा हूँ, तू रूठा हुआ हालात मेरा।

221. जो मैं वक़्त बन जाऊं तू बन जाना लम्हा, मैं तुझमें गुजर जाऊं तू मुझमें गुजर जाये।

222. माखन चोर नन्द किशोर,बांधी जिसने प्रीत की डोर. हरे कृष्ण हरे मुरारी,पूजती जिन्हें दुनिया सारी, आओ उनके गुण गाएं सब मिल के जन्माष्टमी मनाये|

223. कोई अच्छा लगे तो उनसे प्यार मत करना, उनके लिए अपनी नींदे बेकार मत करना, दो दिन तो आएँगे खुशी से मिलने, तीसरे दिन कहेंगे इंतज़ार मत करना।

224. मुझ को मज़ा है छेड़ का, दिल मानता नहीं, गाली सुने बग़ैर सितमगर कहे बग़ैर।

225. माखन चुराकर जिसने खाया, बंसी बजाकर जिसने नचाया, खुशी मनाओ उसके जन्म दिन की, जिसने दुनिया को प्रेम का रास्ता दिखाया.हैप्पी जन्माष्टमी |

226. न कोई इल्जाम, न कोई तंज, न कोई रुसवाई, दिन बहुत हो गए यार ने कोई इनायत नहीं की।

227. कुछ दूर हमारे साथ चलो हम दिल की कहानी कह देंगे, समझे ना जिसे तुम आँखों से वो बात जुबानी कह देंगे।

228. श्री कृष्ण जन्माष्टमी मंगलमय हो, ओम नमो भगवते वासुदेवाय, जय हो श्री राधे जय हो श्री कृष्ण, हैप्पी जन्माष्टमी|

229. कहानी बन के जियें हैं वो दिल के आशियानों में, हमको भी लगेगी सदियाँ शायद उन्हें भुलाने में।

230. मैं देखूँ तो सही यह दुनिया तुझे कैसे सताती है, कोई दिन के लिए तुम अपनी निगहबानी मुझे दे दो।

231. जय श्री कृष्ण! मंगल मूरत आपकी कृपा अपरम्पार; ऐसे श्री कृष्ण जी को, हम सबका नमस्कार|

232. करना ही तंज़ है तो हंसने का क्या तकल्लुफ, क्यूँ ज़हर दे रहे हो मोहब्बत मिला मिला कर।

233. तुम मुझे कभी दिल से कभी आँखों से पुकारो, ये होठों के तकल्लुफ तो ज़माने के लिए होते हैं।

234. कृष्ण की महिमा, कृष्ण का प्यार; कृष्ण में श्रद्धा, कृष्ण से ही संसार; मुबारक हो आप सबको जन्माष्टमी का त्योहार|

235. न सर-ए-बाजार देखूँगा न उसको तन्हा सोचूंगा, उसे कहना कि लौट आये मोहब्बत छोड़ दी मैंने।

236. हम दिलफेक आशिक़ हर काम में कमाल कर दे, जो वादा करे वो पूरा हर हाल में कर दे, क्या जरुरत है जानू को लिपस्टिक लगाने की, हम चूम-चूम के ही होंठ लाल कर दें।

237. तेरे पास से जो गुजरे तो बेखुदी में थे हम, कुछ दूर जाके संभले तुझे याद करके रोये।

238. बगैर जिसके एक पल भी गुजारा नही होता, सितम तो देखिए. बस वही शख्स हमारा नही होता।

239. ऐसा क्या लिखूँ की तेरे दिल को तस्सली हो जाए, क्या ये बताना काफी नहीं की मेरी ज़िन्दगी हो तुम।

240. नजरें उन्हें देखना चाहे तो आँखों का क्या कसूर, हर पल याद उनकी आये तो साँसों का क्या कसूर, वैसे तो सपने पूछकर नहीं आते, पर सपने उनके ही आये तो हमारा क्या कसूर।

241. तू बेरूख हवा में चाहतों का दिया, जलाने की ज़िद न कर, ये क़ातिलों का शहर है, यहाँ मुस्कुराने की ज़िद न कर।

242. जी चाहे की दुनिया की हर एक फ़िक्र भुला कर, दिल की बातें सुनाऊं तुझे मैं पास बिठाकर।

243. आँखों में कुछ अरमान दिया करते हैं, हम सबकी नींद चुरा लिया करते हैं, इतनी बार आप साँस भी न लेते होंगे, जितनी बार हम आपको याद किया करते हैं।

244. नज़र अंदाज़ करने की वज़ह क्या है बता भी दो, मैं वही हूँ जिसे तुम दुनिया से बेहतर बताती थी।

245. मेरी हर नज़र में बसी है तू, मेरी हर क़लम पे लिखी है तू, तुझे सोच लूँ तो ग़ज़ल मेरी, न लिख सकूँ तो वो ख्याल है तू ।

246. एक अजीब सी जंग छिड़ी है तेरी यादों को लेकर, आँखे कहती हैं सोने दे दिल कहता है रोने दे।

247. आस पास तेरा एहसास अब भी लिये बैठें हैं, तू ही नज़र अंदाज़ करे तो शिकवा किससे करें।

248. कब तक वो मेरा होने से इंकार करेगा, खुद टूट कर वो एक दिन मुझसे प्यार करेगा, इश्क़ की आग में उसको इतना जला देंगे, कि इज़हार वो मुझसे सर-ए-बाजार करेगा।

249. तड़पते हैं, न रोते हैं, न हम फ़रियाद करते हैं, सनम की याद में हरदम खुदा को याद करते हैं, उन्हीं के इश्क़ में हम दर्द की फरियाद करते हैं, अब देखते हैं किस दिन हमें वो याद करते हैं।

250. इश्क करना तो लगता है जैसे, मौत से भी बड़ी एक सजा है, क्या किसी से शिकायत करें हम, जब अपनी तकदीर ही बेवफा है।

251. संगमरमर के महल में तेरी तस्वीर सजाऊंगा, अपने इस दिल में तेरे ही ख्वाब जगाऊंगा, यूँ एक बार आजमा के देख तेरे दिल में बस जाऊंगा, मैं तो प्यार का हूँ प्यासा तेरे आगोश में मर जाऊॅंगा।

252. तेरे गम में भी नायाब खजाना ढूँढ लेते हैं, हम तुम्हें याद करने का बहाना ढूँढ लेते हैं।

253. मेरी आँखों में देख आकर हसरतों के नक्श, ख़्वाबों में भी तेरे मिलने की फ़रियाद करते हैं।

254. तुम्हारी प्यार भरी निगाहों को हमें कुछ ऐसा गुमान होता है देखो ना मुझे इस कदर मदहोश नज़रों से कि दिल बेईमान होता है।

255. याद आती है तो याद में खो लेते हैं, आँसू आँखों में उतर आयें तो रो लेते हैं, नींद तो नहीं आती आँखों में लेकिन, आप सपनों में आयेंगे इस लिए सो लेते हैं।

256. मुस्कुरा कर उन का मिलना और बिछड़ना रूठ के, बस यही दो लफ़्ज़ एक दिन दास्ताँ हो जायेंगे।

257. तुम मेरी ज़िंदगी में शामिल हो ऐसे, मंदिर के दरवाज़े पर मन्नत के धागे हों जैसे।

258. जीना चाहते हैं मगर ज़िंदगी रास नहीं आती, मरना चाहते हैं मगर मौत पास नहीं आती, बहुत उदास है ये ज़िंदगी उसके बिना, उसकी याद भी तड़पाने से बाज नहीं आती।

259. ज़माना खड़ा है हाथों में पत्थर लेकर, कहाँ तक भागूं शीशे का मुक़द्दर लेकर।

260. तुम हसीन हो, गुलाब जैसी हो, बहुत नाज़ुक हो ख़्वाब जैसी हो, होठों से लगाकर पी जाऊं तुम्हे, सर से पाँव तक शराब जैसी हो।

261. आज भीगी है पलकें किसी की याद में, आकाश भी सिमट गया है अपने आप में, ओस कि बूदें ऐसी गिरी है जमीन पर, मानो चाँद भी रोया हो उसकी याद में।

262. मत पूछ शीशे से उसके टूटने की वजह, उसने भी किसी पत्थर को अपना समझा होगा।

263. लाखों में इंतिख़ाब के क़ाबिल बना दिया, जिस दिल को तुमने देख लिया दिल बना दिया, पहले कहाँ ये नाज़ थे, ये इश्वा-ओ-अदा, दिल को दुआएँ दो तुम्हें क़ातिल बना दिया।

264. अगर खता हो गयी तो फिर सज़ा सुना दो, दिल में इतना दर्द क्यूँ है वजह बता दो, देर हो गयी आपको याद करने में जरूर, लेकिन तुमको भुला देंगे ये ख्याल मिटा दो।

265. तुम दिल में न समाते तो भुला देते तुम्हें, तुम इतना पास न आते तो भुला देते तुम्हें, यह कहते हुए मेरा ताल्लुक नहीं तुमसे कोई, आँखों में आंसू न आते तो भुला देते तुम्हें।

266. आप पहलू में जो बैठें तो संभल कर बैठें, दिल-ए-बेताब को आदत है मचल जाने की।

267. जख्म ऐसा दिया कोई दवा काम न आयी, आग ऐसी लगी की पानी से भी बुझ न पायी, आज भी रोते हैं उनकी याद में… जिन्हें हमारी याद आज तक नहीं आई।

268. न ख़ुशी की तलाश है न ग़म-ए-निजात की आरज़ू, मैं खुद से भी नाराज हूँ तेरी नाराज़गी के बाद।

269. खुशबू की तरह मेरी हर साँस में, प्यार अपना बसाने का वादा करो, रंग जितने तुम्हारी मोहब्बत के हैं, मेरे दिल में सजाने का वादा करो।

270. यूँ दूर रहकर दूरियों को बढ़ाया नहीं करते, अपने दीवानों को ऐसे सताया नहीं करते, हर वक़्त बस जिसे तुम्हारा हो ख्याल, उसे अपनी आवाज़ के लिए तड़पाया नहीं करते।

271. पूछा था हाल उन्होंने मेरा बड़ी मुद्दतों के बाद, कुछ गिर गया है आँख में कह कर हम रो पड़े।

272. मैं तमाम दिन का थका हुआ, तू तमाम शब का जगा हुआ.. ज़रा ठहर जा इसी मोड़ पर, तेरे साथ शाम गुज़ार लूँ ।

273. कभी कभी इतनी शिद्दत से उसकी याद आती है, जो मैं पलकों को मिलाता हूँ तो आँखें भीग जाती हैं।

274. सिमट गयी मेरी ग़ज़ल भी चंद अल्फाजों में, जब उसने कहा मोहब्बत तो है पर तुमसे नहीं।

275. जज़्बात बहक जाते हैं जब तुमसे मिलते हैं, अरमान मचल जाते हैं जब तुमसे मिलते हैं, मिल जाते हैं आँखों से आँखें, हाथों से हाथ, दिल से दिल, रूह से रूह जब तुमसे मिलते हैं।

276. याद जब उस लम्हे की जेहन में आती है, मोहब्बत दिल में कसक बनकर उभर आती है।

277. अब सोच रहे हैं सीख ही लें हम भी बेरुखी करना, मोहब्बत देते देते सबको हमने अपनी ही कदर खो दी।

278. मुझे सहल हो गई मंजिलें वो हवा के रुख भी बदल गये, तेरा हाथ, हाथ में आ गया कि चिराग राह में जल गये ।

279. खुल जाता है तेरी यादों का बाजार सरेआम, फिर मेरी रात इसी रौनक में गुजर जाती है।

280. दिल्लगी थी उसे हम से मोहब्बत कब थी, महफ़िल-ए-गैर से उस को फुर्सत कब थी, कहते तो हम मोहब्बत में फनाह हो जाते, उस के वादों में पर वो हकीक़त कब थी।

281. ख्वाहिश-ए-ज़िंदगी बस इतनी सी है अब मेरी, कि साथ तेरा हो और ज़िंदगी कभी खत्म न हो ।

282. आया ही था खयाल कि आँखें छलक पड़ीं, आँसू किसी की याद के कितने करीब हैं।

283. नहीं होता यकीन फिर भी कर ही लेता हूँ, जहाँ इतने हुए एक और फरेब हो जाने दो।

284. साँसों की माला में पिरो कर रखे हैं तेरी चाहतो के मोती, अब तो तमन्ना यही है कि, बिखरूं तो सिर्फ तेरे आगोश में।

285. खामोशी और तन्हाई हमें प्यारी हो गई है, आजकल रातों से यारी हो गई है, सारी सारी रात तुम्हें याद करते हैं, शायद तुम्हें याद करने की बीमारी हो गई है।

286. शायद इसी को कहते हैं मजबूरी-ए-हयात, रुक सी गयी है उम्र-ए-गुरेजां तेरे बगैर।

287. मिली जब भी नजर उनसे, धड़कता है हमारा दिल, पुकारे वो उधर हमको, इधर दम क्यों निकलता है।

288. तुम्हारी याद में यूँ जलने से अच्छा है कि सिगरेट जला कर ही जल लेता हूँ।

289. मुझ पर करो सितम तो तरस मत खाना, क्योकि खता मेरी है मोहब्बत मैंने की है।

290. मोहब्बत की शमा जला कर तो देखो, जरा दिल की दुनियाँ सजा कर तो देखो, तुम्हें हो ना जाऐ मोहब्बत तो कहना, जरा हमसे नजरें मिलाकर तो देखो।

291. याद उस लम्हे की जब भी जेहन में आती है, मोहब्बत कसक बनके उभर आती है।

292. मुझे मंज़ूर था हर सितम तेरा मेरे दिल पर, पर तेरा छोड़ के जाना सजा-ए-मौत हो गयी।

293. गर मेरी चाहतों के मुताबिक ज़माने की हर बात होती, तो बस मैं होता तुम होती और सारी रात बरसात होती ।

294. मुझे नींद की इजाज़त भी उनकी यादों से लेनी पड़ती है, जो खुद आराम से सोये हैं मुझे करबटों में छोड़ कर।

295. तवारीखों में कुछ ऐसे भी मंजर हमने देखे है, कि लम्हों ने खता की थी और सदियों ने सजा पाई।

296. कुछ मतलब के लिए ढूँढते हैं मुझको, बिन मतलब जो आए तो क्या बात है, कत्ल कर के तो सब ले जाएँगे दिल मेरा, कोई बातों से ले जाए तो क्या बात है।

297. तकिये के लिहाफ में छुपाकर रखी हैं तेरी यादें, जब भी तेरी याद आती है मुँह छुपा लेता हूँ।

298. देखा तो वो शख्स भी मेरे दुश्मनों में था, नाम जिसका शामिल मेरी धड़कनों में था।

299. मेरे दिल की हर धड़कन तुम्हारे लिए है, मेरी हर दुआ तुम्हारी मुस्कराहट के लिए है । तुम्हारी हर अदा मेरे दिल को चुराने के लिए है, अब तो मेरी जिंदगी तुम्हारे इंतज़ार के लिए है ।

300. मेरे क़ाबू में न पहरों दिले-नाशाद आया, वो मेरा भूलने वाला जो मुझे याद आया।

301. रात भर मुझको ग़म-ए-यार ने सोने न दिया, सुबह को खौफ़-ए-शब-ए-तार ने सोने न दिया, शमा की तरह मेरी रात कटी सूली पर, चैन से याद-ए-कद-ए-यार ने सोने न दिया।

302. मेरी चाहतें तुमसे अलग कब हैं, दिल की बातें तुमसे छुपी कब हैं । तुम साथ रहो दिल में धड़कन की जगह, फिर ज़िन्दगी को साँसों की ज़रुरत कब है ।

303. थक गया है दिल-ए-वहशी मेरा फ़रियाद से भी, जी बहलता नहीं ऐ सनम तेरी याद से भी।

304. ज़माने से सुना था कि मोहब्बत हार जाती है, जो चाहत एक तरफ हो वो चाहत हार जाती है। कहीं दुआ का एक लफ्ज़ असर कर जाता हैं, और कभी बरसों की इबादत भी हार जाती है।

305. दिल के सागर में लहरें उठाया ना करो, ख्वाब बनकर नींद चुराया ना करो, बहुत चोट लगती है मेरे दिल को, तुम ख्वाबो में आ कर यूँ तड़पाया ना करो।

306. मैंने तो तुझे भुला दिया फिर क्यों तेरी यादों ने मुझे रुला दिया।

307. ताबीर जो मिल जाती तो एक ख्वाब बहुत था, जो शख्स गँवा बैठे है नायाब बहुत था, मै कैसे बचा लेता भला कश्ती-ए-दिल को, दरिया-ए-मुहब्बत मे सैलाब बहुत था।

308. तेरी आँखों के जादू से तू ख़ुद नहीं है वाकिफ़ ये उसे भी जीना सिखा देती हैं जिसे मरने का शौक़ हो ।

309. प्यार ने ये कैसा तोहफा दे दिया, मुझको ग़मों ने पत्थर बना दिया, तेरी यादों में ही कट गयी ये उम्र, कहता रहा तुझे कब का भुला दिया।

310. मुझे तुझसे कोई शिकवा या शिकायत नहीं, शायद मेरे नसीब में तेरी चाहत नहीं है, मेरी तकदीर लिखकर खुदा भी मुकर गया, मैंने पूछा तो बोला ये मेरी लिखावट नहीं है।

311. दर्द के लम्हे कब हम पर आसान बने, जो दर्द आँसू न बन सके वो तूफ़ान बने।

312. याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ, भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है।

313. दिल से रोये मगर होंठो से मुस्कुरा बैठे, यूँ ही हम किसी से वफ़ा निभा बैठे, वो हमे एक लम्हा न दे पाए प्यार का, और हम उनके लिये जिंदगी लुटा बैठे।

314. उदासी जब तुम पर बीतेगी तो तुम भी जान जाओगे, कोई नजर-अंदाज़ करता है तो कितना दर्द होता है।

315. डरते है आग से कही जल न जाये, डरते है ख्वाब से कहीं टूट न जाये, लेकिन सबसे ज़्यादा डरते है आपसे, कहीं आप हमें भूल न जाये। दुआ में याद रखना |

316. क्या बताऊँ कैसे खुद को दर-ब-दर मैंने किया, उम्र भर किस किस के हिस्से का सफ़र मैंने किया, तू तो नफरत भी न कर पायेगा इस शिद्दत के साथ, जिस बला का प्यार बेखबर तुझसे मैंने किया।

317. कोई हँसे तो तुझे ग़म लगे खुशी न लगे, ये दिल की लगी थी दिल को दिल्लगी न लगे, तू रोज उठ कर रोया करे चाँदनी रातों में, खुदा करे कि तेरा भी मेरे बिना दिल न लगे।

318. तुझे रातों को इस कदर याद करता हूँ, जैसे कल इम्तिहान हो मेरा तेरी यादों का।

319. ख़त्म हो गई कहानी बस कुछ अलफाज बाकी हैं, एक अधूरे इश्क की एक मुकम्मल सी याद बाकी है।

320. जितनी शिद्दत से मुझे ज़ख्म दिए है उसने, इतनी शिद्दत से तो मैंने उसे चाहा भी नहीं था।

321. दिल को दिल समझो तो इश्क़ करो वादे को वादा समझो तो पूरा करो, और हमको अपना समझो तो प्यार करो|

322. बहुत थे मेरे भी इस दुनिया में अपने, फिर हुआ इश्क और हम लावारिस हो गए।

323. बज़्म-ए-वफ़ा में हमारी गरीबी न पूछिये, एक दर्द-ए-दिल था वो भी किसी का दिया हुआ।

324. दिल से तेरी याद को जुदा तो नहीं किया, रखा जो तुझे याद कुछ बुरा तो नहीं किया, हम से तू नाराज़ हैं किस लिये बता जरा, हमने कभी तुझे खफा तो नहीं किया।

325. ये सिलसिला उल्फत का चलता ही रह गया, दिल चाह में दिलबर के मचलता ही रह गया, कुछ देर को जल के शमां खामोश हो गई, परवाना मगर सदियों तक जलता ही रह गया।

326. वो खून बनके मेरी रगों में मचलता है, करूँ जो आह तो लब से धुँआ निकलता है, मोहब्बत का रिश्ता भी अजीब है यारों, ये ऐसा घर है जो बरसात में भी जलता है।

327. जब से तेरी चाहत अपनी ज़िन्दगी बना ली है, हम ने उदास रहने की आदत बना ली है, हर दिन हर रात गुजरती है तेरी याद में, तेरी याद हमने अपनी इबादत बना ली है|

328. आप होते जो मेरे साथ तो अच्छा होता, बात बन जाती अगर बात तो अच्छा होता, सबने माँगा है मुझसे मुहब्बत का जवाब, आप करते जो सवालात तो अच्छा होता।

329. किस्मत में लिखा थाआशना दर्द से होना, तू ना मिलता तो किसी और से बिछड़े होते।

330. सारी उम्र आँखों में एक सपना याद रहा, सदियाँ बीत गयी पर वो लम्हा याद रहा, ना जाने क्या बात थी उनमे और हम में, सारी महफ़िल भूल गए बस वो चेहरा याद रहा।

331. जाने क्या कमी है हम में या खुदा, जाने क्यूँ सब हम से खफा रहते हैं, हमने तो चाहा बनाना सब को अपना, जाने क्यूँ सब हमसे जुदा रहते हैं।

332. महफ़िल भी रोएगी हर दिल भी रोयेगा, डुबा कर मेरी कश्ती साहिल भी रोयेगा, इतना प्यार बिखेर देंगे दुनिया में हम, कत्ल करके हमारा कातिल भी रोयेगा।

333. वो वक़्त वो लम्हे कुछ अजीब होंगे, दुनिया में हम सबसे खुशनसीब होंगे, दूर से जब इतना याद करते हैं आपको, क्या होगा जब आप हमारे करीब होंगे|

334. जाने क्या मुझसे ज़माना चाहता है, मेरा दिल तोड़कर मुझे हँसाना चाहता है, जाने क्या बात है मेरे इस चेहरे से, हर शख्स मुझे आज़माना चाहता है।

335. दिल पर ज़ख्म कुछ ऐसे मिले, फूलों पर भी सोया न गया, दिल तो जलकर राख हो गया, और आँखों से रोया भी न गया।

336. दोस्तों ये यादें भी बहुत ही जालिम चीज़ होती है, कभी ये हंसाती हैं ख़ुशियों के पलों के साथ। कभी ये रुलाती हैं गम की बातो के साथ।

337. तेरी ज़ुबान ने कुछ कहा तो नहीं था, फिर ना जाने क्यों मेरी आँख नम हो गयी।

338. खामोश फ़िज़ा थी कोई साया न था, इस शहर में मुझसा कोई आया न था, किसी ज़ुल्म ने छीन ली हम से हमारी मोहब्बत, हमने तो किसी का दिल दुखाया न था।

339. अहसास मिटा, तलाश मिटी, मिट गई उम्मीदें भी, सब मिट गया पर, जो न मिट सका वो है यादें तेरी।

340. नाम उसका ज़ुबान पर आते आते रुक जाता है, जब कोई मुझसे मेरी आखिरी ख्वाहिश पूछता है।

341. अगर मैं लिखूं तो पूरी किताब लिख दूँ, तेरे दिए हर दर्द का हिसाब लिख दूँ, डरती हूँ कहीं तू बदनाम ना हो जाए, वरना तेरे हर दर्द की कहानी मेरा हर ख्वाब लिख दूँ।

342. कुछ खूबसूरत पलों की महक सी हैं तेरी यादें, सुकून ये भी है कि ये कभी मुरझाती नहीं।

343. जब भी उनकी गली से गुज़रते हैं, मेरी आँखें एक दस्तक दे देती हैं, दुःख ये नहीं वो दरवाजा बंद कर देते हैं, ख़ुशी ये है कि वो मुझे पहचान लेते हैं।

344. टूटे हुए सपने को सजाना आता है, रूठे हुए दिल को मनाना आता है, उसे कह दो हमारे जख्म की फ़िक्र न करे, हमें दर्द में भी मुस्कुराना आता है।

345. जब तक जान हैं बस याद तुम्हारी आयेगी, आकर हर खुशी में मेरे दिल को रुलाएगी।

346. ना तो तुम बुरे सनम, ना ही हम बुरे हैं, कुछ किस्मत बुरी है और कुछ वक्त बुरा है।

347. जो एक ज़रा सी बात पर रूठ गए हमसे, वो हमारे दर्द की दास्तान क्या सुनते।

348. मजबूर नही करेंगे तुझे वादे निभानें के लिए, बस एक बार आ जा, अपनी यादें वापस ले जाने के लिए।

349. लोग कहते हैं वक्त किसी का गुलाम नही होता, फिर क्यूँ थम सा जाता है ग़मों के दौर में|

350. जब किसी का दर्द हद से गुजर जाता है तो समंदर का पानी आँखों में उतर आता है, कोई बना लेता है रेत से आशियाना तो, किसी का लहरों में सबकुछ बिखर जाता है।

351. उसकी यादों को किसी कोने में छुपा नहीं सकता, उसके चेहरे की मुस्कान कभी भुला नहीं सकता, मेरा बस चलता तो उसकी हर याद को भूल जाता, लेकिन इस टूटे दिल को मैं समझा नहीं सकता।

352. वफ़ा मैंने नहीं छोड़ी मुझे इलज़ाम मत देना, मेरा सबूत मेरे अश्क हैं मेरा गवाह मेरा दर्द है।

353. एक दो ज़ख्म नहीं जिस्म है सारा छलनी दर्द बेचारा परेशाँ है कहाँ से निकले।

354. फिर पलट रही हैं सर्दियों की सुहानी रातें, फिर तेरी याद में जलने के जमाने आ गए।

355. बस यही सोचकर कोई सफाई नहीं दी हमने। कि इलज़ाम झूठे ही सही पर लगाये तो तुमने हैं।

356. मिले न फूल तो काँटों से जख्म खाना है, उसी गली में मुझे बार-बार जाना है, मैं अपने खून का इल्जाम दूँ तो किसको दूँ, लिहाज ये है कि क़ातिल से दोस्ताना है।

357. जहाँ भूली हुई यादें दामन थाम लें दिल का, वहां से अजनबी बन कर गुज़र जाना ही अच्छा है।

358. छूटा जो तेरा हाथ तो हम टूट के रोये, तुम जो ना रहे साथ तो हम टूट के रोये, चाहत की तमन्ना थी और ज़ख़्म दिए तुमने, पायी जो यह सौगात तो हम टूट के रोये।

359. लोग तो अपना बना कर छोड़ देते हैं, कितनी आसानी से गैरों से रिश्ता जोड़ लेते हैं, हम एक फूल तक ना तोड़ सके कभी, कुछ लोग बेरहमी से दिल तोड़ देते हैं।

360. जरूरी तो नहीं है कि तुझे आँखों से ही देखूँ, तेरी याद का आना भी तेरे दीदार से कम नहीं।

361. एक बार देख तो लेते आँखों की उदासियाँ, मेरी मुस्कराहट से तुम क्यूँ फरेब खा गए।

362. जब्त कहता है खामोशी से बसर हो जाये, दर्द की ज़िद है कि दुनिया को खबर हो जाये।

363. बरसों हुए न तुम ने किया भूल कर भी याद, वादे की तरह हम भी फ़रामोश हो गए।

364. जो हो सके तो चले आओ आज मेरी तरफ़, मिले भी देर हो गई और जी भी उदास है।

365. जो दो लफ्जों की हिफाजत न कर पाए, उनके हाथों में जिंदगी की किताब क्या देता।

366. आता नहीं ख़याल अब अपना भी ऐ ‘जलील’ एक बेवफ़ा की याद ने सब कुछ भुला दिया।

367. दुनिया में कहाँ वफा का सिला देते हैं लोग, अब तो मोहब्बत की सजा देते हैं लोग, पहले सजाते हैं दिलो में चाहतों का ख्वाब, फिर ऐतबार को आग लगा देते हैं लोग।

368. टूटे हुए काँच की तरह चकना-चूर हो गया हूँ किसी को चुभ न जाऊँ इसलिए सबसे दूर हो गया हूँ।

369. कहते हैं कि जब कोई किसी को बहुत करता है तो एक तारा टूट के गिरता है। एक दिन सारा आसमान खाली हो जायेगा और इल्ज़ाम हमारे सर आयेगा।

370. अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे, बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे, वो वक़्त भी ख़ुदा न दिखाए कभी मुझे, कि उन की नदामतों पे हो शर्मिंदगी मुझे।

371. दर्द में जीने की हमें आदत कुछ ऐसी पड़ी, कि अब दर्द ही अपना हमदर्द लगने लगा।

372. कोई पुरानी कहानी याद आ रही है, किसी की याद आज फिर सता रही है, अब ऐसी सूरत में ना जाने वो कैसे आएगी, नही शायद आज फिर नींद नहीं आएगी ।

373. कितना इख़्तियार था उसे अपनी चाहत पर, जब चाहा याद किया जब चाहा भुला दिया, जानता है वो मुझे बहलाने के तरीके, जब चाहा हँसा दिया जब चाहा रुला दिया।

374. मसला ये नहीं है कि दर्द कितना है, मुद्दा ये है कि परवाह किसको है।

375. ना चाहकर भी मेरे लब पर ये फ़रियाद आ जाती है । ऐ चाँद सामने न आ किसी की याद आ जाती है ।

376. किसी की याद को दिल में बसा के रोये हैं, किसी की तस्बीर को सीने से लगा के रोये हैं।

377. दर्द से हाथ न मिलाते तो और क्या करते, गम के आँसू न बहाते तो और क्या करते, उसने माँगी थी हमसे रौशनी की दुआ, हम अपना घर न जलाते तो और क्या करते।

378. सजा बन जाती है गुज़रे हुए वक़्त की यादें, न जाने क्यों छोड़ जाने के लिए ज़िन्दगी में आते है लोग ।

379. जो वादा किया था हम ने किसी के साथ, उस वादे को दिल से निभा के रोये हैं।

380. ये क्या है जो आँखों से रिसता है, कुछ है भीतर जो यूं ही दुखता है, कह सकता हूँ पर कहता भी नहीं, कुछ है घायल जो यहाँ सिसकता है।

381. तेरे नाम से मुहब्बत की है, तेरे एहसास से मुहब्बत की है, तू मेरे पास नही फिर भी, तेरे याद से मुहब्बत की है ।

382. तोहमतें तो लगती रही रोज़ नयी नयी हम पर, मगर जो सबसे हसीन इलज़ाम था वो तेरा नाम था।

383. दिल के तड़पने का कुछ तो सबब है आख़िर या दर्द ने करवट ली है या तुमने इधर देखा है।

384. दिल में आप हो और कोई खास कैसे होगा, यादों में आपके सिवा कोई पास कैसे होगा, हिचकियॉं कहती हैं आप याद करते हो, पर बोलोगे नहीं तो मुझे एहसास कैसे होगा।

385. मोहब्बत की सजा बेमिसाल दी उसने, उदास रहने की आदत सी डाल दी उसने, मैंने जब अपना बनाना चाहा उसको, बातों बातों में बात टाल दी उसने।

386. यूँ तो हमेशा के लिए यहाँ आता नहीं कोईपर आप जिस तरह से गए वैसे जाता नहीं कोई।

387. मेरी चाहत में कोई कमी तो नहीं है, फिर क्यों वो बार-बार आज़माए मुझे, दिल उसकी याद से एक पल भी नहीं जुदा, फिर कैसे मुमकिन है वो भूल जाए मुझे।

388. ज़िद मत किया करो मेरी दास्तान सुनने की, मैं हँस कर भी कहूँगा तो तुम रोने लगोगे।

389. अपनी तो जिंदगी की अजब कहानी है, जिसे हमने चाहा वही हमसे बेगानी है, हँसता हूँ दोस्तों को हँसाने के लिए, वरना इन आँखों में पानी ही पानी है।

390. फूलो की तरह हंसती रहो, कलियोँ की तरह मुस्कुराती रहो, खुदा से सिर्फ इतना मांगता हूँ, कि तुम मुझे हमेशा याद आती रहो ।

391. हम पर जो गुजरी है, तुम क्या सुन पाओगे, नाजुक सा दिल रखते हो, रोने लग जाओगे।

392. ये क्या है, जो आँखों से रिसता है, कुछ है भीतर, जो यूँ ही दुखता है, कह सकता हूं, पर कहता भी नहीं, कुछ है घायल, जो यहाँ सिसकता है।

393. भीगते हैं जिस तरह से तेरी यादों में डूब कर इस बारिश में कहाँ वो कशिश तेरे खयालों जैसी।

394. मिल गया था जो मुकद्दर वो खो के निकला हूँ, मैं एक लम्हा हूँ बस रो रो के निकला हूँ, राह-ए-दुनिया में मुझे कोई भी दुश्वारी नहीं, मैं तेरी ज़ुल्फ़ के पेंचों से हो के निकला हूँ।

395. दर्द की दीवार पर अपनी फरियाद लिखा करते है, ऐ खुदा उन्हें खुश रखना जिन्हें हम प्यार किया करते हैं।

396. रख लो दिल में संभाल कर थोड़ी सी यादें हमारी, रह जाओगे जब तन्हा बहुत काम आयेंगे हम।

397. ता हम को शिकायत की भी बाक़ी न रहे जा, सुन लेते हैं गो ज़िक्र हमारा नहीं करते। ग़ालिब तेरा अहवाल सुना देंगे हम उनको, वो सुन के बुला लें ये इजारा नहीं करते।

398. आ गई फिर वही एक और अशिक की बरबादी की तारीख। यही दिन था वह जब दिल टूटा और मोहब्बत क़त्ल सरेआम हुई थी।

399. अकेलेपन का इलाज़ होती हैं यादें, बहुत ही हसीन सी होती हैं यादें, यूँ तो बोलने को कुछ भी नहीं हैं, पर मानने को अपना ही साया हैं यादें।

400. इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना, दर्द का हद से गुज़रना है दवा हो जाना।

401. धीरे धीरे से अब तेरे प्यार का दर्द कम हुआ, ना तेरे आने के खुशी ना तेरे जाने का गम हुआ, जब लोग मुझसे पूछते हैं हमारे प्यार की दास्तान, कह देता हूँ एक फसाना था जो अब खत्म हुआ।

402. दिल की हालत बताई नहीं जाती, हमसे उनकी चाहत छुपाई नहीं जाती, बस एक याद बची है उनके जाने के बाद, वो याद भी दिल से निकाली नहीं जाती।

403. सिसकियाँ लेता है वजूद मेरा गालिब, नोंच नोंच कर खा गई तेरी याद मुझे।

404. कितना और दर्द देगा बस इतना बता दे, ऐसा कर ऐ खुदा मेरी हस्ती मिटा दे, यूं घुट घुट के जीने से तो मौत बेहतर है, मैं कभी न जागूं मुझे ऐसी नींद सुला दे।

405. अजीब जुल्म करती हैं तेरी यादें मुझ पर, सो जाऊं तो उठा देती हैं जाग जाऊँ तो रुला देती है ।

406. माना कि गलत हम ही थे जो तुमसे मोहब्बत कर बैठे, पर रोयोगे तुम भी बहुत ऐसी वफ़ा की तलाश में।

407. दोस्त बन बन के मिले मुझको मिटाने वाले, मैंने देखे हैं कई कई रंग बदलने वाले, तुमने चुप रहकर सितम और भी ढाया मुझ पर, तुमसे अच्छे हैं मेरे हाल पे हँसने वाले।

408. तड़प कर गुजर जाएगी यह रात भी आखिर, तुम याद नहीं करोगे तो क्या सुबह नहीं होगी ।

409. वो साथ थी तो मानो जन्नत थी जिंदगी दोस्तों, अब तो हर सांस जिंदा रहने कि वजह पूछती है।

410. चलो उनको मोहब्बत का खिताब दिया जाये, कि उनके दिए हर ज़ख्म का हिसाब किया जाये।

411. लफ्ज़, अल्फाज़, कागज़ और किताब, कहाँ कहाँ नहीं रखता मैं तेरी यादों का हिसाब ।

412. वो जिसका तीर चुपके से जिगर के पार होता है, वो कोई गैर होता नहीं अपना रिश्तेदार होता है, किसी से अपने दिल बात तू कहना न भूले से, यहाँ ख़त भी ज़रा सी देर में अखबार होता है।

413. दिल के सारे अरमान ले जाते हैं, हमसे हमारी पहचान ले जाते हैं, ना करना किसी से मोहब्बत दोस्त, जान कहने वाले जान ले जाते हैं।

414. जाने उस शख्स को कैसे ये हुनर आता है, रात होती है तो आँखों में उतर आता है । मैं उस के खयालो से बच के कहाँ जाऊं, वो मेरी सोच के हर रस्ते पे नजर आता है ।

415. मुझे यकीन है मोहब्बत उसी को कहते हैं, कि जख्म ताज़ा रहे और निशान चला जाये।

416. बहुत ईमानदार हो गया है ये बेईमान शहर, दर्द की थैली से किसी ने सिक्का न उठाया।

417. बड़ी तब्दीलियां लाया हूँ मैं अपने आप में लेकिन, बस तुमको याद करने की वो आदत अब भी वाकी है ।

418. मौहब्बत की मिसाल में, बस इतना ही कहूँगा। बेमिसाल सज़ा है, किसी बेगुनाह के लिए।

419. जीत ले जो दिल वो नजर हम भी रखते हैं, भीड़ में भी नजर आये वो असर हम भी रखते हैं, यूँ तो हमने किसी को मुस्कुराने को कसम दी है, वरना इन बदनसीब आँखों में समंदर हम भी रखते हैं।

420. अगर रुक जाये मेरी धड़कन तो इसे मौत न समझना, ऐसा हुआ है अक्सर तुझे याद करते करते ।

421. तजुर्बा कहता है, मोहब्बत से किनारा कर लूँ, और दिल कहता है, ये तज़ुर्बा दोबारा कर लूँ।

422. जख्म जब मेरे सीने के भर जाएंगे, आँसू भी मोती बन के बिखर जाएंगे, ये मत पूछना किसने दर्द दिया, वरना कुछ अपनों के चेहरे उतर जाएंगे।

423. याद आयेगी हमारी तो बीते कल की किताब पलट लेना, यूँ ही किसी पन्ने पर मुस्कराते हुए हम मिल जायेंगे।

424. इस इश्क की परवाह में, हम तन्हा हो गये, सही कहते थे लोग, मोहब्बत तनहा कर जाती है।

425. दूर जाकर भी हम दूर जा न सकेंगे, कितना रोयेंगे हम बता न सकेंगे, ग़म इसका नहीं की आप मिल न सकोगे, दर्द इस बात का होगा कि हम आपको भुला न सकेंगे।

426. दुनिया के ज़ोर प्यार के दिन याद आ गये, दो बाज़ुओ की हार के दिन याद आ गये, गुज़रे वो जिस तरफ से फिजायें महक उठी, सबको भरी बहार के दिन याद आ गये ।

427. सारी दूनिया के रूठ जाने से मुझे कोई फर्क नहीं पड़ता, बस एक तेरा खामोश रहना बहुत तकलीफ देता है।

428. कागज की कश्ती से पार जाने की ना सोच, उड़ते हुए तूफानों को हाथ लगाने की ना सोच, ये मोहब्बत बड़ी बेदर्द है इससे खेल ना कर, मुनासिब हो जहाँ तक दिल बचाने की सोच।

429. हद-ए-शहर से निकली तो गाँव गाँव चली, कुछ यादें मेरे संग पाँव पाँव चली । सफ़र जो धूप का किया तो तजुर्बा हुआ, वो जिंदगी ही क्या जो छाँव छाँव चली ।

430. तुम्हें ग़ैरों से कब फुर्सत हम अपने ग़म से कब ख़ाली, चलो बस हो चुका मिलना न तुम ख़ाली न हम ख़ाली।

431. जिंदगी ने मेरे दर्द का क्या खूब इलाज सुझाया, वक्त को दवा बताया, ख्वाहिशों से परहेज बताया।

432. यादें उनकी ही आती है, जिनसे कोई ताल्लुक हो, हर शख्श मौहब्बत की, नज़र से देखा नहीं जाता ।

433. न चाहत न मोहब्बत न इश्क़ और न वफ़ा, कुछ भी तो नहीं था उस के पास इक हुस्न के सिवा।

434. सजा कैसी मिली मुझको तुमसे दिल लगाने की, रोना ही पड़ा है जब कोशिश की मुस्कुराने की, कौन बनेगा यहाँ मेरी दर्द-भरी रातों का हमराज, दर्द ही मिला जो तुमने कोशिश की आजमाने की।

435. बादलो से कह दो जरा सोच समझकर बरसे, अगर मुझे उसकी याद आ गयी तो मुकाबला बराबरी का होगा ।

436. तेरे हुस्न पे तारीफों भरी किताब लिख देता, काश तेरी वफ़ा तेरे हुस्न के बराबर होती।

437. एक फ़साना सुन गए एक कह गए, हम जो रोये तो मुस्कुराकर रह गए।

438. हर रात एक नाम याद आता है, कभी सुबह कभी शाम याद आता है, जब सोचते हैं कर लें दूसरी मोहब्बत, तब पहली मोहब्बत का अंजाम याद आता है ।

439. प्यास इतनी है मेरी रूह की गहराई में, अश्क गिरता है तो दामन को जला देता है।

440. बहारों के फूल एक दिन मुरझा जायेंगे, भूले से कहीं याद तुम्हें हम आ जायेंगे, अहसास होगा तुमको हमारी मोहब्बत का, जब कहीं हम तुमसे बहुत दूर चले जायेंगे।

441. ना कर जिद अपनी हद मे रह ए दिल, वो बड़े लोग है मर्जी से याद करते है।

442. सीख कर गया है वो मोहब्बत मुझसे, जिस से भी करेगा बेमिसाल करेगा।

443. आशियाँ बस गया जिनका, उन्हें आबाद रहने दो, पड़े जो दर्द भरे छाले, जिगर में यूँ ही रहने दो, कुरेदो ना मेरे दिल को, ये अर्जी है जहां वालों, छिपा है राज अब तक जो, राज को राज रहने दो।

444. कोई चला गया दूर तो क्या करें, कोई मिटा गया सब निशान तो क्या करें, याद आती है उनकी हमें हद से ज्यादा, मगर वो याद ना करें तो क्या करें।

445. दिल से मिले दिल तो सजा देते हैं लोग, प्यार के जज्बातों को डुबा देते हैं लोग, दो इँसानो को मिलते कैसे देख सकते हैं, साथ बैठे दो परिन्दो को उड़ा देते हैं लोग।

446. कहीं किसी रोज़ यूँ भी होता, हमारी हालत तुम्हारी होती, जो रात हमने गुज़ारी तड़प कर, वो रात तुमने गुज़ारी होती।

447. तन्हाई मेरे दिल में समाती चली गयी, किस्मत भी अपना खेल दिखाती चली गयी, महकती फ़िज़ा की खुशबू में जो देखा प्यार को, बस याद उनकी आई और रुलाती चली गयी।

448. मेरी लड़खड़ाहट तुम, मुझ तक ही रहने दो, जो बात होश की कर दी, तो बेहोश हो जाओगे।

449. बिखरे अरमान, भीगी पलकें और ये तन्हाई, कहूँ कैसे कि मिला मोहब्बत में कुछ भी नहीं।

450. बन कर अजनबी मिले थे ज़िंदगी के सफ़र में, इन यादों के लम्हों को मिटायेंगे नहीं, अगर याद रखना फितरत है आपकी, तो वादा है हम भी आपको भुलायेंगे नहीं।

451. मैं क़ाबिल-ए-नफ़रत हूँ तो छोड़ दो मुझको, यूं मुझसे दिखावे की मोहब्बत ना किया करो।

452. खुद को औरों की तवज्जो का तमाशा न करो, आइना देख लो अहबाब से पूछा न करो, शेर अच्छे भी कहो, सच भी कहो, कम भी कहो, दर्द की दौलत-ए-नायाब को रुसवा न करो।

453. अभी मशरूफ हूँ काफी, कभी फुर्सत से सोचूंगा, कि तुझको याद रखने में, मैं क्या क्या भूल जाता हूँ ।

454. हमें भी याद रखें जब लिखें तारीख गुलशन की, कि हमने भी लुटाया है चमन में आशियां अपना।

455. बदले तो नहीं हैं वो दिल-ओ-जान के करीने, आँखों की जलन, दिल की चुभन अब भी वही है।

456. जब रूह किसी बोझ से थक जाती है, एहसास की लौ और भी बढ़ जाती है, मैं बढ़ता हूँ ज़िन्दगी की तरफ लेकिन, ज़ंजीर सी पाँव में छनक जाती है।

457. ज़िन्दगी से मेरी आदत नहीं मिलती, मुझे जीने की सूरत नहीं मिलती, कोई मेरा भी कभी हमसफ़र होता, मुझे ही क्यूँ मुहब्बत नहीं मिलती।

458. रास्ते वही होंगे और नज़ारे वही होंगे, पर हमसफ़र अब हम तुम्हारे नहीं होंगे।

459. कल न हम होंगे न कोई गिला होगा, सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा, जो लम्हे हैं चलो हँसकर बिता लें, जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।

460. जीना तो पड़ेगा फ़क़त दुनियाँ को दिखाने के लिये, वरना मैनें कब चाही थी उसके बगैर जिदंगी।

461. वो जो तुमसे रुबरु करवाता है, आजकल वो आइना भी हमसे रूठा है।

462. मौत से कैसा डर मिनटों का खेल है, आफत तो जिंदगी है बरसों चला करती है।

463. खुद को लिखते हुए हर बार लिखा है तुमको, इससे ज्यादा कोई जिंदगी को क्या लिखता|

464. रिहाई दे दो हमें अपनी मोहब्बत की कफस से, कि अब ये दर्द हमसे और सहा नहीं जाता।

465. तुझसे कोई शिकायत नहीं है ऐ जिदंगी जो भी दिया है वही बहुत है।

466. कुछ लोग पसंद करने लगे हैं अल्फाज मेरे, मतलब मोहब्बत में बरबाद और भी हुए हैं।

467. मोहब्बत का घना बादल बना देता तो अच्छा था, मुझे तेरी आँख का काजल बना देता तो अच्छा था, तुझे पाने की ख्वाइश अब जीने नहीं देती, खुदा तू मुझे पागल बना देता तो अच्छा था।

468. चूम लेता हूँ हर मुश्किल को अपना मान कर मैं, क्यूँकि ज़िन्दगी कैसी भी है है तो मेरी ही।

469. तेरी हालत से लगता है तेरा अपना था कोई, इतनी सादगी से बरबाद कोई गैर नहीं करता।

470. क्या बताऊँ अपना हाल ए दिल मैं तुम्हें, देखूं जिधर बस एक ही नूर नज़र आये, अब बता भी दो दवा ए दर्द क्या है इसकी, या फिर किसी जाल में फसाया है तुमने हमें।

471. कभी धूप दे कभी बदलियाँ, दिलो जान से दोनों क़बूल हैं, मगर उस नगर में न कैद कर, जहाँ जिंदगी की हवा न हो।

472. उसको चाहा तो मोहब्बत की तकलीफ नजर आई, वरना इस मोहब्बत की बस तारीफ़ सुना करते थे।

473. ज़िक्र उस का ही सही बज़्म में बैठे हो फ़राज़, दर्द कैसा भी उठे हाथ न दिल पर रखना।

474. एक साँस सबके हिस्से से हर पल घट जाती है, कोई जी लेता है जिंदगी किसी की कट जाती है।

475. बिछड़ा इस कदर से के रुत ही बदल गयी, एक शख्स सारे शहर को वीरान कर कर गया।

476. दुनिया बहुत मतलबी है, साथ कोई क्यों देगा, मुफ्त का यहाँ कफ़न नहीं मिलता, तो बिना गम के प्यार कौन देगा।

477. लोग डूबते हैं तो समंदर को दोष देते हैं, मंजिल न मिले तो मुकद्दर को दोष देते हैं, खुद तो संभल कर चल नहीं सकते, जब ठेस लगती है तो पत्थर को दोष देते हैं।

478. कुछ इस अदा से तोड़े है ताल्लुक उसने, एक मुद्दत से ढूंढ़ रहा हूँ कसूर अपना।

479. बिजलियाँ टूट पड़ी जब वो मुकाबिल से उठा, मिल के पलटी थीं निगाहें कि धुआँ दिल से उठा।

480. शुक्रिया ज़िन्दगी…जीने का हुनर सिखा दिया, कैसे बदलते हैं लोग चंद कागज़ के टुकड़ो ने बता दिया, अपने परायों की पहचान को आसान बना दिया, शुक्रिया ऐ ज़िन्दगी जीने का हुनर सिखा दिया।

481. एक तुम ही न मिल सके वरना मिलने वाले तो बिछड़ बिछड़ के मिले।

482. ख्वाहिश तो ना थी किसी से दिल लगाने की, मगर जब किस्मत में ही दर्द लिखा था तो मोहब्बत कैसे ना होती।

483. बारिश में रख दूँ जिंदगी को ताकि धुल जाए पन्नो की स्याही, ज़िन्दगी फिर से लिखने का मन करता है कभी-कभी।

484. जिंदगी में ये हुनर भी आजमाना चाहिए, अपनों से हो जंग तो हार जाना चाहिए।

485. इलाजे-दर्दे-दिल तुमसे मसीहा हो नहीं सकता, तुम अच्छा कर नहीं सकते मैं अच्छा हो नहीं सकता।

486. अजीब तरह से गुजर गयी मेरी जिंदगी, सोचा कुछ, किया कुछ, हुआ कुछ, मिला कुछ।

487. किसी के प्यार को पा लेना ही मोहब्बत नही होती किसी के दूर रहने पर उसको पल पल याद करना भी मोहब्बत होती है|

488. एक हसरत थी कि उनके दिल में पनाह मिलेगी, क्या पता था उनसे मोहब्बत की सज़ा मिलेगी, न अपनों ने समझा न गैरों ने जाना, क्या पता था मेरी तक़दीर ही मुझे बेवफा मिलेगी।

489. शम्मा परवाने को जलना सिखाती है, शाम सूरज को ढलना सिखाती है, क्यों कोसते हो पत्थरों को जबकि ठोकरें ही इंसान को चलना सिखाती हैं।

490. बस रिश्ता ही तो टूटा है मोहब्बत तो आज भी हमे उनसे ही है|

491. ज़िस्म से मेरे तड़पता दिल कोई तो खींच लो, मैं बगैर इसके भी जी लूँगा मुझे अब ये यकीन है।

492. जिन्दगी लत है, हर लम्हे से बेपनाह मोहब्बत है, मुश्किल और सुकून की कशमकश में, जिंदगी यूं ही जिये जाता हूँ |

493. जहर से अधिक खतरनाक हैं यह प्यार जो भी चख ले मर मर के जीता हें|

494. जो नजर से गुजर जाया करते हैं, वो सितारे अक्सर टूट जाया करते हैं, कुछ लोग दर्द को बयां नहीं होने देते, बस चुपचाप बिखर जाया करते हैं।

495. ज़िंदादिली होती है जिन्दगी, इश्क मे घुली होती है जिन्दगी, तुमसे मिलने कि चाहत रखती है जिन्दगी, लेकिन तक़दीर नही मिलने देती है जिन्दगी |

496. मोहब्बत कैसी भी हो कसम से सजदा करना सिखा देती है|

497. तू तब तक रूला सकती है हमें, जब तक हम दिल मे बसाये हैं तुझे |

498. इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया ए ज़िन्दगी, चलने का न सही सम्भलने का हुनर तो आ गया।

499. प्यार मोहब्बत आशिकी.ये बस अल्फाज थे. मगर जब तुम मिले तब इन अल्फाजो को मायने मिले |

500. सीख रहा हूँ मै भी अब मीठा झूठ बोलने का हुनर, कड़वे सच ने हमसे, ना जाने, कितने अज़ीज़ छीन लिए।

501. धूप और छाँव कि पतली लकीर पर खड़ा हूँ, दोनों पार यादें हैं सपने हैं उम्मीदें हैं और है बहता हुआ वक्त भी।

502. ना जाने मुहब्बत में कितने अफसाने बन जाते है शमां जिसको भी जलाती है वो परवाने बन जाते है कुछ हासिल करना ही इश्क कि मंजिल नही होती किसी को खोकर भी कुछ लोग दिवाने बन जाते है |

503. ज़िन्दगी सिर्फ मोहब्बत नहीं कुछ और भी है, ज़ुल्फ़-ओ-रुखसार की जन्नत नहीं कुछ और भी है, भूख और प्यास की मारी हुई इस दुनिया में, इश्क ही इक हकीकत नहीं कुछ और भी है।

504. यह ज़िन्दगी बस सिर्फ पल दो पल है, जिसमें न तो आज और न ही कल है, जी लो इस ज़िंदगी का हर पल इस तरह, जैसे बस यही ज़िन्दगी का सबसे हसीं पल है।

505. मोहब्बत की आजमाइश दे दे कर थक गया हूँ ऐ खुदा. किस्मत मेँ कोई ऐसा लिख दे.जो मौत तक वफा करे |

506. हो सके तो पहचान लो मेरे दर्द का सबब मेरी नज़र से ऐ दोस्तों मै ज़ुबान से कहूंगा तो कुछ लोग रुसवा हो जायेंगे।

507. इतनी बदसलूकी ना कर, ऐ जिंदगी हम कौन सा यहाँ बार बार आने वाले हैं।

508. वादो से बंधी जंजीर थी जो तोड दी मैँने अब से जल्दी सोया करेंगे, मोहब्बत छोड दी मैँने |

509. ज़िन्दगी देने वाले यूँ मरता छोड़ गए, अपनापन जताने वाले यूँ तनहा छोड़ गए, जब पड़ी जरुरत हमें अपने हमसफ़र की, तो साथ चलने वाले अपना रास्ता मोड़ गए |

510. जिंदगी भी तवायफ की तरह होती है, कभी मज़बूरी में नाचती है कभी मशहूरी में ।

511. वो जिस दिन करेगा याद मेरी मोहब्बत को रोयेगा बहुत खुद को बेवफा कह कर |

512. दर्द तो बहुत है दिल में पर दिखा नही सकते, करते है मोहब्बत तुमसे पर बता नही सकते।

513. यूँ ही खत्म हो जायेगा जा़म की तरह जिन्दगी का सफ़र, कड़वा ही सही एक बार तो नशे में होकर इसे पिया जाये।

514. उतर जाते है दिल मे कुछ लोग इस कदर उनको निकालो तो जान निकल जाती है |

515. दर्द होता है मगर शिकवा नहीं करते, कौन कहता है कि हम वफा नही करते, आखिर क्युँ नहीं बदलती तकदीर “आशिक” की क्या मुझको चाहने वाले मेरे लिए दुआ नहीं करते।

516. खुशी में भी आँखें आँसू बहाती रही, ज़रा सी बात देर तक रूलाती रही, कोई खो के मिल गया तो कोई मिल के खो गया, ज़िंदगी हम को बस ऐसे ही आज़माती रही।

517. बहुत रोका लेकिन रोक ही नहीं पाया, मुहब्बत बढ़ती ही गयी मेरे गुनाहों की तरह |

518. जब कभी तेरा नाम लेते हैं, दिल से हम इन्तेकाम लेते हैं, मेरी बरबादियों के अफसाने मेरे यारों का नाम लेते हैं।

519. आराम से तनहा कट रही थी तो अच्छी थी,जिंदगी तू कहाँ दिल की बातों में आ गयी ।

520. ना हीरो की तमन्ना है और ना परियो पे मरता हूँ वो एक भोली सी लड़की है जिससे मे मोहब्बत करता हूँ |

521. भुला कर हमें क्या वो खुश रह पाएंगे, साथ में नही तो मेरे जाने के बाद मुस्कुरायेंगे, दुआ है खुदा से की उन्हें कभी दर्द न देना, हम तो सह गए पर वो टूट जायेंगे।

522. मोहब्बत करने वालों की कमी नहीं है दुनिया में, अकाल तो निभाने वालों का पडा है साहब |

523. दुःख में ख़ुशी की वजह बनती है मोहब्बत दर्द में यादों की वजह बनती है मोहब्बत जब कुछ भी अच्छा ना लगे हमें दुनिया में तब हमारे जीने की वजह बनती है मोहब्बत |

524. दर्द को छुपाए बैठा रहा, आंखों की नमी को छुपाए बैठा रहा, उम्मीद टूटी नहीं है अभी भी, तेरे लौट आने की खुशी में बैठा रहा।

525. मिलने को तो दुनियाँ मे कई चेहरे मिले पर तुझ सी मोहब्बत तो हम खुद से भी ना कर पाये |

526. ज़िन्दगी के उलझे सवालो के जवाब ढूंढता हु, कर सके जो दर्द कम, वोह नशा ढूंढता हु, वक़्त से मजबूर, हालात से लाचार हु मैं, जो देदे जीने का बहाना ऐसी राह ढूंढता हु |

527. ना कर तू इतनी कोशिशे, मेरे दर्द को समझने की, पहले इश्क़ कर, फिर चोट खा, फिर लिख दवा मेरे दर्द की।

528. कमाल की मोहब्बत थी उनको हमसे अचानक सुरू हुई अचानक ख़त्म हो गई |

529. छु ले आसमान जमीन की तलाश न कर, जी ले जिंदगी खुशी की तलाश न कर, तकदीर बदल जाएगी खुद ही मेरे दोस्त, मुस्कुराना सीख ले वजह की तलाश न कर |

530. बहुत हो चुका इंतज़ार उनका, अब और ज़ख़्म सहे जाते नही, क्या बयान करें उनके सितम को, दर्द दिल के हैं कहे जाते नही।

531. मेरी महोब्बत के अपने ही उसुल है. तुम करो न करो पर मुझे साँसो के टुटने तक रहेगी |

532. जिंदगी हमारी युं सितम हो गई खुशी ना जानें कहा दफन हो गई, लिखी खुदा ने मुहब्बत सबकी तकदीर में, हमारी बारी आई तो स्याही खत्म हो गई |

533. मेरी हर आह को वाह मिली है यहाँ, कौन कहता है दर्द बिकता नहीं है। रात को कह दो, कि जरा धीरे से गुजरे; काफी मिन्नतों के बाद, आज दर्द सो रहा है।

534. बड़ा गजब किरदार है मोहब्बत का, अधूरी हो सकती है मगर ख़तम नहीं |

535. दिल मैं हर राज़ दबा कर रखते है, होंटो पर मुस्कराहट सजाकर रखते है, ये दुनिया सिर्फ़ खुशी मैं साथ देती है, इसलिए हम अपने आँसुओ को छुपा कर रखते है |

536. ना किया कर अपने दर्द को शायरी में बयान ऐ दिल, कुछ लोग टूट जाते हैं इसे अपनी दास्तान समझकर।

537. कमाल की मोहब्बत थी उसको हम से अचानक ही शुरू हुई और बिन बतायें ही ख़त्म |

538. लडखडाया है जीतना वो संभल जायेगा, वक्त आनें पे वो भी जाहिर बदल जायेगा, आज कहते हो ये क्या-क्या लिखते हो तुम, देखना जमाना मेरे गीत जब कल गायेगा।

539. दर्द है दिल में पर इसका एहसास नहीं होता, रोता है दिल जब वो पास नहीं होता, बर्बाद हो गए हम उसके प्यार में, और वो कहते हैं इस तरह प्यार नहीं होता।

540. मुहब्बत में झुकना कोई अजीब बात नहीं, चमकता सूरज भी तो ढल जाता है चाँद के लिए |

541. लाजवाब है मेरी जिंदगी का फसाना, कोई सीखे मुझसे हर पल मुस्कुराना, पर कोई मेरी हंसी को नजर न लगाना, बहुत दर्द सहकर सीखा है हम ने मुस्कुराना।

542. कितना लुत्फ ले रहे हैं लोग मेरे दर्द-ओ-ग़म का, ऐ इश्क देख तूने तो मेरा तमाशा ही बना दिया।

543. मोहब्बत करने में चंद लम्हे लगते है | चोट खा कर भूलने में पूरी जिन्दगी लग जाती है |

544. सबकी अपनी अपनी जीने की शैली है, किसी की चादर साफ किसी की मैली है, आज तक सुलझा नहीं पाया है कोई, जिंदगी तो बस एक अनसुलझी पहेली है।

545. ना तस्वीर है तुम्हारी जो दीदार किया जाये, ना तुम हो मेरे पास जो प्यार किया जाये, ये कौन सा दर्द दिया है तुमने ऐ सनम, ना कुछ कहा जाये ना तुम बिन रहा जाये।

546. काश कही से मिल जाते वो अल्फ़ाज़ हमे भी जो तुझे बता सकते की हम शायर कम तेरे आशिक ज्यादा है |

547. याद करते है तुम्हे तनहाई में, दिल डूबा है गमो की गहराई में, हमें मत ढूंढना दुनिया की भीड़ में, हम मिलेंगे में तुम्हे तुम्हारी परछाई में।

548. बेनाम सा यह दर्द ठहर क्यों नहीं जाता, जो बीत गया है वो गुज़र क्यों नहीं जाता, वो एक ही चेहरा तो नहीं सारे जहाँ में, जो दूर है वो दिल से उतर क्यों नहीं जाता।

549. मोहब्बत की मंजिल आसान नहीं है | इससे ऊंचा कोई आसमान नहीं है | भटकते हैं वह जो बेवफाई करते हैं | दिल में जिनके प्यार का अरमान नहीं है |

550. कश्ती है पुरानी मगर दरिया बदल गया, मेरी तलाश का भी तो जरिया बदल गया, ना शक्ल बदली ना अक्ल बदली, बस लोगों के देखने का नजरिया बदल गया।

551. कब ठहरेगा दर्द ऐ दिल कब रात बसर होगी, सुनते थे कि वो आयेंगे सुनते थे सुबह होगी । कब जान लहू होगी, कब अश्क गुहर होगा, किस दिन तेरी शुनवाई, ऐ दीद-ए-तर होगी।

552. एक चाहत थी तेरे साथ जीने की | वरना मोहब्बत तो किसी से भी हो सकती थी |

553. जाना कहा था और कहां आ गए, दुनिया में बन कर मेहमान आ गए, अभी तो प्यार की किताब खोली थी, और न जाने कितने इम्तिहान आ गए।

554. रोज़ पिलाता हूँ एक ज़हर का प्याला उसे एक दर्द जो दिल में है मरता ही नहीं है ।

555. जिस्म से होने वाली मोहब्बत आसान होती है और रूह से हुई मोहब्बत को समझने में जिंदगी गुजर जाती है |

556. ना जाने क्यों ए जिंदगी मुझे तेरी तलाश है, माना करोड़ पल है इस जिंदगी मैं, पर तेरे साथ बीताया एक पल उन करोड़ों से खास है, इस लिए ए जिंदगी मुझे तेरी तलाश है।

557. चंद साँसे बची हैं आखिरी बार दीदार दे दो, झूठा ही सही एक बार मगर तुम प्यार दे दो, जिंदगी वीरान थी और मौत भी गुमनाम ना हो, मुझे गले लगा लो फिर मौत मुझे हजार दे दो।

558. एक पत्नी के सुविचार: काश तुम अदरक होते कसम से, जी भर के कूटती |

559. प्यार वो हम को बेपनाह कर गये, फिर ज़िन्दगी में हम को तन्नहा कर गये, चाहत थी उनके इश्क में फ़नाह होने की, पर वो लौट कर आने को भी मना कर गये।

560. बयाँ करना मोहब्बत को आसान ना हुआ था । ये तो दर्द है कैसे कह दूँ कि ये तुमने दिया है ।

561. चम चम करती चाँदनी टिम टिम करते तारे कोई मेसेज़ नहि भेज रिया गणपति जी बिठारे क्या सारे|

562. किसी ने क्या खूब लिखा है: कल न हम होंगे न गिला होगा, सिर्फ सिमटी हुई यादों का सिललिसा होगा, जो लम्हे हैं चलो हंसकर बिता लें, जाने कल जिंदगी का क्या फैसला होगा।

563. मोहब्बत का मेरे सफर आख़िरी है, ये कागज कलम ये गजल आख़िरी है । मैं फिर ना मिलूँगा कहीं ढूंढ लेना, तेरे दर्द का ये असर आख़िरी है ।

564. लालू चाचा दूर के चारा खाये चूर के नितीश को दिया प्याली में समधी को दिया थाली में नितीश गए रूठ गठबंधन गया टूट|

565. रूठी जो जिदंगी तो मना लेंगे हम, मिले जो गम वो सह लेंगे हम, बस आप रहना हमेशा साथ हमारे तो, निकलते हुए आंसूओ में भी मुस्कुरा लेंगे हम।

566. हकीकत में खामोशी कभी भी चुप नहीं रहती, कभी तुम ग़ौर से सुनना बहुत किस्से सुनाती है ।

567. दुश्मनों की महफ़िल में चल रही थी मेरे कत्ल की तैयारी मैं पहुंचा तो बोलें यार बहुत लम्बी उम्र हे तुम्हारी |

568. रोया हूँ बहुत तब जरा करार मिला है, इस जहाँ में किसे भला सच्चा प्यार मिला है, गुजर रही है जिंदगी इम्तिहान के दौर से, एक ख़तम तो दूसरा तैयार मिला है।

569. हम ने कब माँगा है तुम से अपनी वफ़ाओं का सिला, बस दर्द देते रहा करो मोहब्बत बढ़ती जाएगी ।

570. पलट दूँगा सारी दुनिया मैं ए खुदा | बस रजाई में से निकलने की ताकत दे दे |

571. साथ रहते यूँ ही वक़्त गुज़र जायेगा, दूर होने के बाद कौन किसे याद आयेगा, जी लो ये पल जब हम साथ हैं, कल क्या पता वक़्त कहाँ ले जायेगा।

572. लोग जलते रहे मेरी मुस्कान पर, मैंने दर्द की अपने नुमाईश न की जब जहाँ जो मिला अपना लिया, जो न मिला उसकी ख्वाहिश न की।

573. उमरे दराज़ मांग कर लाये थे चार दिन।। दो कमाने में लग गए, और दो बदलवाने में। बदलवा दे मेरे नोट ए ग़ालिब, या वो जगह बता दे जहाँ कतार नहीं है|

574. सच्चे किस्से शराबखाने में सुने, वो भी हाथ मे जाम लेकर, झूठे किस्से अदालत में सुने, वो भी हाथ मे गीता-कुरान लेकर।

575. नफ़रत करना तो हमने कभी सिखा ही नहीं, मैंने तो दर्द को भी चाहा है अपना समझ कर।

576. आज का ज्ञान: जब पाप का घड़ा भर जाये तो. घड़ा हटाकर ड्रम लगा देना चाहिये।

577. फ़िज़ा में ज़हर भरा है जरा संभल कर चलो, मुखालिफ आज हवा है जरा संभल कर चलो, कोई देखे न देखे बुराइयां अपनी खुदा तो देख रहा है जरा संभल कर चलो।

578. इसी ख्याल से गुज़री है शाम-ए-ग़म अक्सर, कि दर्द हद से जो गुज़रेगा तो मुस्कुरा दूंगा |

579. जिनको हम चुनते हैं वो ही हमें धुनते हैं चाहे बीवी हो या नेता दोनो कहाँ सुनते हैं |

580. आज हम हैं, कल हमारी यादें होंगी, जब हम ना होंगे, तब हमारी बातें होंगी, कभी पलटो गे जिंदगी के ये पन्ने तो शायद आप की आँखों से भी बरसातें होंगी।

581. खुशियों से नाराज़ है मेरी ज़िन्दगी, बस प्यार की मोहताज़ है मेरी ज़िन्दगी, हँस लेता हूँ लोगों को दिखाने के लिए, वैसे तो दर्द की किताब है मेरी ज़िन्दगी।

582. गिटार सीखा था,यारो उसको पटाने के लिए, आज ऑफर आया है, उसकी शादी में बजाने के लिये |

583. चलते रहे कदम.. किनारा जरुर मिलेगा, अन्धकार से लड़ते रहे सवेरा जरुर खिलेगा, जब ठान लिया मंजिल पर जाना रास्ता जरुर मिलेगा, ए राही न थक चल एक दिन समय जरुर फिरेगा।

584. बुद्धि जिसके पास है उसी के पास बल होता है |

585. चम चम करती चाँदनी टिम टिम करते तारे कोई मेसेज़ नहि भेज रिया उज्जैन गए क्या सारे |

586. मेरी जिन्दगी को तन्हाई ढूँढ लेती है, मेरी हर खुशी को रुसवाई ढूँढ लेती है, ठहरी हुई हैं मंजिलें अंधेरों में कबसे, मेरे जख्म को गमे-जुदाई ढूँढ लेती है|

587. हाथी जैसे विशाल जानवर को एक छोटे से अंकुश से वश में किया जा सकता है ये इसी बात का प्रमाण है कि बुद्धि और तेज में ज्यादा शक्ति होती है।

588. मेरे कमरे में उड़ते हैं बादल; मेरे कमरे में उड़ते हैं बादल; मैं कुछ भी लिखूं पढ़ते हैं पागल।

589. उजड़ी हुई दुनिया को तू आबाद न कर, बीते हुए लम्हों को तू याद न कर, एक कैद परिंदे ने ये कहा हम से मैं भुल चुका हूं उड़ना मुझे आजाद न कर|

590. अँधेरा चाहे कितना भी घना हो लेकिन एक छोटा सा दीपक अँधेरे को चीरकर प्रकाश फैला देता है वैसे ही जीवन में चाहे कितना भी अँधेरा हो जाये विवेक रूपी प्रकाश अन्धकार को मिटा देता है |

591. इस गर्मी का आलम बस इतना समझले ग़ालिब कपडे धोते ही सुख जाते हैं और पहनते ही गीले हो जाते हैं|

592. मेरी चाहत ने उसे खुशी दे दी, बदले में उसने मुझे सिर्फ खामोशी दे दी, खुदा से दुआ मांगी मरने की लेकिन, उसने भी तड़पने के लिए जिन्दगी दे दी |

593. वज्र पर्वत से बहुत छोटा है लेकिन वज्र के प्रभाव से बड़े से बड़े पर्वत भी चकनाचूर हो जाते हैं |

594. बरसात हुई और भीग गए हम, वाह वाह| वाह वाह बरसात हुई और भीग गए हम, रजनीकांत ने फूँक मारी और सुख गए हम |

595. नदी जब किनारा छोर देती हैं, राह की चट्टान तक तोर देती हैं, बात छोटी सी अगर चुभ जाए दिल में तो, जिंदगी के रास्तों को भी मोर देती हैं।

596. नीम के पेड़ को अगर दूध और घी से भी सींचा जाये तो भी नीम का वृक्ष मीठा नहीं हो जाता, उसी प्रकार दुष्ट व्यक्ति को कितना भी ज्ञान दे दो वो अपनी दुष्टता नहीं त्यागता |

597. आज का देर से आया विचार रोज़गार है तो सोमवार है, वर्ना सातों दिन रविवार है |

598. कोशिश न कर तू सभी को ख़ुश रखने की, नाराज तो यहाँ कुछ लोग भगवान से भी हैं, मन की बात कह देने से फैसले हो जाते हैं, और मन में रख लेने से फासले हो जाते हैं|

599. जिसने अपनी इच्छाओं पर काबू पा लिया, उस मनुष्य ने जीवन के दुखों पर काबू पा लिया |

600. पत्नी घर की रानी है करती अपनी मनमानी है काम बताओ तो चिड जाएगी शॉपिंग कराओ तो खिल जायेगी |

601. जब भी करीब आता हूँ बताने के लिये, जिंदगी दूर रखती हैं सताने के लिये, महफ़िलों की शान न समझना मुझे, मैं तो अक्सर हँसता हूँ गम छुपाने के लिये।

602. संकट के समय धैर्य धारण करना मानो आधी लड़ाई जीत लेना है |

603. इश्क़ में ये अंजाम पाया है, हाथ पैर टूटे, मुँह से खून आया है! हॉस्पिटल पहुंचे तो नर्स ने फ़रमाया बहारों फूल बरसाओ, किसी का आशिक़ आया है |

604. कितनी जल्दी ज़िन्दगी गुज़र जाती है, प्यास भुझ्ती नहीं बरसात चली जाती है, तेरी याद कुछ इस तरह आती है, नींद आती नहीं मगर रात गुज़र जाती है।

605. बिना कुछ किये ज़िन्दगी गुज़ार देने से कहीं अच्छा है ज़िन्दगी को गलतियां करते गुज़ार देना |

606. कागज़ पे लिखी गज़ल, बकरी चबा गयी | चर्चा पुरे शहर में हुई, के बकरी शेर खा गयी |

607. एक दिन जब उम्र ने तलाशी ली, तो जेब से लम्हे बरामद हुए कुछ ग़म के थे, कुछ नम से थे कुछ टूटे हुए थे, बस कुछ ही सही सलामत मिले जो बचपन के थे |

608. पाप एक प्रकार का अँधेरा है, जो ज्ञान का प्रकाश होते ही मिट जाता है |

609. चम चम करदी चांदनी टीम टीम करदे तारे कोई मेसेज नही भेज रहा सोयाबीन काट रहे क्या सारे |

610. हँसी आपकी कोई चुरा ना पाये, आपको कभी कोई रुला ना पाये, खुशियों का दीप ऐसे जले ज़िंदगी में कि कोई तूफ़ान भी उसे बुझा ना पाये।

611. क्रोध हमेशा मनुष्य को तब आता है जब वह अपने आप को कमज़ोर और हारा हुआ पाता है |

612. हमारे दरमियाँ ग़र ताल्लुक नहीं तो अनजान बनकर हम गुज़रते क्यूँ नहीं |

613. रोने से किसी को पाया नहीं जाता, खोने से किसी को भुलाया नहीं जाता, वक्त सबको मिलता है जिन्दगी बदलने के लिए, पर जिन्दगी नहीं मिलती वक्त बदलने के लिए |

614. सफलता की कहानियां मत पढ़ो उससे आपको केवल एक सन्देश मिलेगा। असफलता की कहानियां पढ़ो उससे आपको सफल होने के कुछ विचार मिलेंगे।

615. अब उसके न मिलने का गिला क्या करें उससे जब अपनी हसरत ही इतनी बेजान सी निकली |

616. सुबह का हर पल ज़िंदगी दे आपको, दिन का हर लम्हा खुशी दे आपको, जहा गम की हवा छू कर भी न गुज़रे, खुदा वो जन्नत से ज़मीन दे आपको|

617. लगातार हो रही असफलताओं से निराश नही होना चाहिये कभी कभी गुच्छे की आखिरी चाभी ताला खोल देती है |

618. मैं किस जुर्रत से इश्क करता “साहिल” गिरेबाँ है चाक और जेब में ना पैसा है |

619. फर्क होता है खुदा और फ़क़ीर में, फर्क होता है किस्मत और लकीर में अगर कुछ चाहो और न मिले तो समझ लेना कि कुछ और अच्छा लिखा है तक़दीर में।

620. पैर की मोच और छोटी सोच, हमें आगे बढ़ने नहीं देती |

621. देख घर रोशन औरों का दिल मचल गया उसका दबी आवाज में उसने कहा “ऐसी होती है दिवाली” |

622. इश्क़ सभी को जीना सिखा देता है, वफ़ा के नाम पर मरना सीखा देता है, इश्क़ नहीं किया तो करके देखो, ज़ालिम हर दर्द सहना सीखा देता है|

623. दुनिया में सब चीज मिल जाती है, केवल अपनी गलती नहीं मिलती |

624. ये वादों – कसमों को निभाना क्या है मैं तो इक पल भी तुम्हें भूलता नहीं हूँ |

625. जिस दिन बंद कर ली हमने आंखें, कई आँखों से उस दिन आंसु बरसेंगे, जो कहते हैं के बहुत तंग करते है हम, वही हमारी एक शरारत को तरसेंगे |

626. अपनी कमियाँ पूरी दुनिया से छिपाइए, लेकिन अपनी कमियाँ कभी खुद से मत छिपाइए अपनी कमियाँ खुद से छिपाने का मतलब होता है, अपने आप को खुद बर्बाद करना |

627. बडी नाराज़गी देखते हैं अब उन आँखो में जो कभी हमें प्यार से देखा करती थीं |

628. तेरे मेरे रिश्ते को क्या नाम दूँ, यह नाम दूँ या वह नाम दूँ, इस दुनिया की भीड़ मैं नाम हो जाते है बदनाम, क्यों न अपने रिश्ते को बेनाम ही रहने दूँ |

629. मुसीबत में अगर मदद मांगो तो सोच कर मांगना क्योकि मुसीबत थोड़ी देर की होती है और एहसान जिंदगी भर का |

630. उस नज़र को पास पाता नहीं हूँ मैं जिसका था मैं बरसों आइना हुआ |

631. ज़िन्दगी लहर थी आप साहिल हुए, न जाने कैसे हम आपकी दोस्ती के काबिल हुए, न भूलेंगे हम उस हसीं पल को, जब आप हमारी छोटी सी ज़िन्दगी में शामिल हुए|

632. ईश्वर हर जगह नहीं हो सकते इसलिए उन्होंने माँ को बनाया |

633. सस्ते महँगे में कहाँ उलझ रहे हो जनाब यहाँ आदमी को किंमत नहीं आदमी की |

634. लगे है फोन जबसे तार भी नहीं आते, बूढी आँखों के अब मददगार भी नहीं आते, गए है जबसे शहर में कमाने को लड़के, हमारे गाँव में त्यौहार भी नहीं आते।

635. परिश्रम वह चाबी है जो सौभाग्य के द्वार खोलती है |

636. लौट आया तेरी महफील इक आस लिये चाहत ना सही दिदार होता रहे |

637. कागज़ की कश्ती से पार जाने की ना सोच, चलते हुए तुफानो को हाथ में लाने की ना सोच, दुनिया बड़ी बेदर्द है, इस से खिलवाड़ ना कर, जहाँ तक मुनासिब हो, दिल बचाने की सोच।

638. मस्तक को थोड़ा झुकाकर देखिए आपका अभिमान मर जाएगा |

639. यूँ ही नहीं होती हैं जिंदगी में तब्दीलियाँ साहब मौम को भी रोशन होने के लिये पिघलना पड़ता है |

640. इस दिल को किसी की आस रहती है, निगाहों को किसी सूरत की प्यास रहती है, तेरे बिना किसी चीज़ की कमी तो नही, पर तेरे बेगैर जिन्दगी बड़ी उदास रहती है |

641. आँखें को थोड़ा भिगा कर देखिए आपका पत्थर दिल पिघल जाएगा |

642. बस ताल्लुकात ही नहीं रहे तुझसे मोहब्बत तुझसे तो आज भी करते है |

643. उदास लम्हों की न कोई याद रखना, तूफ़ान में भी वजूद अपना संभाल रखना, किसी की ज़िंदगी की ख़ुशी हो तुम, बस यही सोच तुम अपना ख्याल रखना।

644. दांतों को आराम देकर देखिए आपका स्वास्थ्य सुधर जाएगा |

645. क्यूँ ना समझे फ़लसफ़ा ये कुदरत का ‘साहील’ शाख से टूटकर पत्ता बिखरने के काम आया |

646. सितारों से भरी इस रात में, जन्नत से भी खूबसूरत ख्वाब आपको आये, इतनी हसीन हो आने वाली सुबह की, मांगने से पहले ही आपकी हर मुराद पूरी हो जाये |

647. जिव्हा पर विराम लगा कर देखिए आपका क्लेश का कारवाँ गुज़र जाएगा |

648. रख दो ना हाथ तुम कभी इस दिल पर यूँ फासलों से ही मोहब्बत कब तक करें |

649. अपनी जिंदगी के अलग असूल हैं, यार की खातिर तो कांटे भी कबूल हैं, हंस कर चल दूं कांच के टुकड़ों पर भी, अगर यार कहे, यह मेरे बिछाए हुए फूल हैं |

650. इच्छाओं को थोड़ा घटाकर देखिए आपको खुशियों का संसार नज़र आएगा |

651. ये महज़ शेर नहीं कहें हमने साहीब ये खज़ाना है किसी की याद का |

652. गुलाब खिलते रहे ज़िंदगी की राह् में, हँसी चमकती रहे आप कि निगाह में. खुशी कि लहर मिलें हर कदम पर आपको, देता हे ये दिल दुआ बार–बार आपको |

653. हाथ में घडी कोई भी हो, लेकिन वक़्त अपना होना चाहिए |

654. कीमत उसकी लगाना जिसकी खरीदने की हैसीयत हो वाइज़ खुदा भी मिलता उन्हें ही, जिनकी साफ नियत हो |

655. चलो! थोड़ी मुस्कुराहट बाँटते है थोड़ा दुख तकलीफों को डाँटते है क्या पता ये साँसे चोर कब तक हैं| क्या पता ‘जिन्दगी की चरखी’ में ड़ोर कब तक हैं |

656. मनुष्य को चाहिए कि दुराचारी, कुदृष्टि वाले, बुरे स्थान में रहने वाले और दुर्जन मनुष्य के साथ मित्रता न करें, क्योंकि इनके साथ मित्रता करने वाला मनुष्य शीघ्र ही नष्ट हो जाता है |

657. बडी है दुनिया सारे बेवफा ना होंगे ढूंढें तो वफा का शहर भी आयेगा |

658. ज़िन्दगी के लिए जान जरुरी है, पाने के लिए अरमान ज़रूरी है, हमारे पास चाहे हो कितना ही गम, पर आपके चेहरे पर मुस्कान ज़रूरी है |

659. विद्या के अलंकार से अलंकृत होने पर भी दुर्जन से दूर ही रहना चाहिए, क्योंकि मणि से भूषित होने पर भी क्या सर्प भयंकर नहीं होता |

660. मोहब्बतों का गुमाँ रखे कभी गैर भी करे तेरी नज़र ये सियासी भी अच्छी लगती है |

661. जिंदगी देने वाले, मरता छोड़ गये, अपनापन जताने वाले तन्हा छोड़ गये, जब पड़ी जरूरत हमें अपने हमसफर की, वो जो साथ चलने वाले रास्ता मोड़ गये।

662. शत्रु को सदैव भ्रम में रखना चाहिए । जो उसका अप्रिय करना चाहते हो तो उसके साथ सदा मधुर व्यवहार करो, उसके साथ मीठा बोलो । शिकारी जब हिरण का शिकार करता है तो मधुर गीत गाकर उसे रिझाता है, और जब वह निकट आ जाता है, तब वह उसे पकड लेता है |

663. तुम आँखों में छुपा के रखना, मैं दिल में छुपा के रखूँगा ये राज़े-मोहब्बत बयाँ हुई तो हमारे दरमियाँ ज़माना होगा |

664. अपनी तो ज़िन्दगी है अजीब कहानी है, जिस चीज़ की चाह है वो ही बेगानी है, हँसते भी है तो दुनिया को हँसाने के लिए, वरना दुनिया डूब जाये इन आखों में इतना पानी है।

665. हम क्या कर चुके हैं इससे ज्यादा महत्वपूर्ण ये है कि अभी क्या करना बाकि है |

666. मोहब्बत में ज़िन्दगी के नुकसान से ना गए हम दिल से तो गए बस जान से ना गए |

667. समझ ना आया ऐ जिंदगी तेरा ये फलसफा, एक तरफ कहती है सबर का फल मीठा होता है और दूसरी तरफ कहती है वक़्त किसी का इंतजार नही करता |

668. पेड़ कभी डाली काटने से नहीं सूखता पेड़ हमेशा जड़ काटने से सूखता है वैसे ही इंसान अपने कर्म से नहीं बल्कि अपने छोटी सोच और गलत व्यवहार से हारता है |

669. इस बार मोहब्बत का ज़ख्म बेहद गहरा है दिल का लहू अब के आँखों में आ ठहरा है |

670. जिंदगी तुझसे हर कदम पर समझौता क्यों किया जाय, शौक जीने का है मगर इतना भी नहीं कि मर मर कर जिया जाए। जब जलेबी की तरह उलझ ही रही है तू ए जिंदगी तो फिर क्यों न तुझे चाशनी में डुबा कर मजा ले ही लिया जाए |

671. ध्यान रहे शिखर पर इंसान हमेशा अकेला होता है |

672. मोहब्बतों में हार के अब जाऊं किस तरफ ऐ दिले-नाकाम बता तुझे छुपाऊं किस तरफ |

673. तेरी धड़कन ही ज़िंदगी का किस्सा है मेरा, तू ज़िंदगी का एक अहम् हिस्सा है मेरा मेरी मोहब्बत तुझसे, सिर्फ़ लफ्जों की नहीं है, तेरी रूह से रूह तक का रिश्ता है मेरा |

674. आपके हाथों से कोई छीन सकता है लेकिन जो नसीब में है उसे कोई नहीं छीन सकता |

675. लौ चाहे कितनी भी तेज़ हो ज़माने की मगर ज़िया मोहब्बत के चिराग की बड़ती ही जाती है |

676. कागज़ के नोटों से आखिर किस किस को खरीदोगे, किस्मत परखने के लिए यहाँ आज भी सिक्का ही उछाला जाता है |

677. आकाश से ऊँचा कौन – पिता धरती से बड़ा कौन – माता |

678. दूरियां बड़ा रही हैं मुसलसल मोहब्बतें इसीलिए रूह प्यासी भी अच्छी लगती है |

679. कहीं बेहतर है तेरी अमीरी से मुफलिसी मेरी, चंद सिक्कों के लिए तुने क्या नहीं खोया है, माना नहीं है मखमल का बिछोना मेरे पास, पर तु ये बता, कितनी राते चैन से सोया है।

680. प्रयास करने वाला इंसान एक बार गिरता है लेकिन प्रयास ना करने वाले लोग जीवन भर गिरते रहते हैं |

681. मोहब्बत के दिये जलाओ तो पोशीदा रखना ज़माने की आंधियां इन चिरागों को बुझा देंगी |

682. अगर बिकने पे आ जाओ तो घट जाते हैं दाम अक़सर, न बिकने का इरादा हो तो क़ीमत और बढ़ती है|

683. दुःख में इंसान ईश्वर को याद करता है लेकिन सुख में इंसान ईश्वर को भूल जाता है। अगर सुख में भी इंसान ईश्वर के करीब रहे तो दुःख ही क्यों हो |

684. मेरी मोहब्बतें बहुत राहतें देंगी तुम्हें ठंडे पानी सा भरा इक मटका हूँ मैं |

685. जब भी देखता हूँ किसी गरीब को हँसते हुए तो यकीन आ जाता है की खुशियो का ताल्लुक दौलत से नहीं होता |

686. पैसे से बिस्तर खरीदा जा सकता है, नींद नहीं पैसे से महल खरीदा जा सकता है लेकिन खुशियाँ नहीं |

687. हम भी मरीज़ हैं तेरी मोहब्बत के किसी रोज़ हमारी भी तो दवा कर |

688. इस बनावटी दुनिया में कुछ सीधा सच्चा रहने दो, तन वयस्क हो जाए चाहे, दिल तो बच्चा रहने दो, नियम कायदो की भट्टी में पकी तो जल्दी चटकेगी, मन की मिट्टी को थोडा सा तो गीला, कच्चा रहने दो।

689. जो इंसान दूसरों का दुःख दर्द समझता है वही महापुरुष है |

690. ये आग के घर में रहने का शौक़ीन है बहुत इश्क को दिल की बस्ती में पनाह मत देना |

691. एक पहचान हज़ारो दोस्त बना देती हैं, एक मुस्कान हज़ारो गम भुला देती हैं, ज़िंदगी के सफ़र मे संभाल कर चलना, एक ग़लती हज़ारो सपने जला कर राख बना देती है |

692. भगवान हर जगह मौजूद नहीं हो सकते इसीलिए उन्होंने माँ को बनाया |

693. मेरा इश्क़ अगर जुर्म है तो तू भी मेरे गुनाहों में था |

694. ना संघर्ष न तकलीफ तो क्या मज़ा है जीने में बड़े बड़े तूफ़ान थम जाते हैं जब आग लगी हो सीने में |

695. “लोग क्या कहेंगे”- ये बात इंसान को आगे नहीं बढ़ने देती |

696. इस इश्क़ के होने भर से ही चलो कोई तो मसला है |

697. कल के नौसखिए सिकंदर हो गए | हल्की हवा के झोंके बवंडर हो गए | मै लड़ता रहा उसूलों की पतवार थामें मै कतरा ही रहा लोग समन्दर हो गए |

698. मैं आप उस इंसान को ढूंढ रहे हैं जो आके आपकी मदद करेगा तो शीशे के सामने खड़े हो जाएँ आपको वो इंसान नजर आएगा जो आपकी मदद कर सकता है |

699. नायाब किया इश्क़-ओ-सुखन ने हमारे अब खुद ही पे मर जाने लगा है वो |

700. किसी रोज़ याद न कर पाऊं तो खुदगर्ज़ न समझ लेना दोस्तों, दरसल छोटी सी इस उम्र में परेशानिया बहुत हैं, मैं भूला नहीं हूँ किसी को मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं ज़माने में, बस थोड़ी ज़िन्दगी उलझ पड़ी है दो वक़्त की रोटी कमाने में|

701. सफलता का कोई पैमाना नहीं होता – एक गरीब बाप का बेटा बड़ा होकर ऑफिसर बने पिता के लिए यही सफलता है। जिस इंसान के पास कुछ खाने को ना हो वो सुख पूर्वक 2 वक्त की रोटियां जुटा ले ये भी सफलता है |

702. बस जाँ से चले जाएं तो अच्छा है मगर इससे पहले भी अंजाम हैं कई इश्क के |

703. बहुत आसान है जमाने में जनम लेना, बड़ी मुश्किल है एक उम्र तक जीवन जीना, हम तो खामोश हैं तेरी ही खामोशी से, तुमसे ही सीखा है हमने आंसू पीना |

704. कितने मूर्ख हैं हम भगवान के बनाए फलों को भगवान को ही अर्पण करके धन दौलत माँगने लगते हैं |

705. वादी-ए-इश्क से इक सदा आती है हर रोज़ दिल के उजड़ने का हमें भी मलाल है बहुत |

706. जब मुल्ला को मस्जिद में राम नजर आए, जब पंडित को मंदिर में रहमान नजर आए, सुरत ही बदल जाए इस दुनिया की गर इंसान को इंसान में इंसान नजर आए |

707. धागा एक बार टूट जाये तो फिर से जोड़ने पर भी गाँठ पड़ ही जाती है उसी तरह रिश्ते एक बार टूट जाये तो फिर से जोड़ने में एक गाँठ बन ही जाती है |

708. इश्क़ पे मुकदमा अगर चले तो मेरा भी नदीम कभी मुद्दा रखना |

709. किस से सीखू मैं खुदा की बंदगी, सब लोग खुदा के बँटवारे किए बैठे है, जो लोग कहते है खुदा कण कण में है, वही मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे लिए बैठे हैं |

710. जो लोग दूसरों का भला सोचते हैं केवल उन्हीं का जीवन सफल है, अपने लिए तो जानवर भी जीते हैं |

711. ऐ इश्क दिल ने तेरा क्या बिगाड़ा है तू क्यूँ इतने ग़म दिए जा रहा है |

712. जीत किसके लिए, हार किसके लिए, ज़िंदगी भर ये तकरार किसके लिए जो भी आया है वो जायेगा एक दिन, फिर ये इतना अहंकार किसके लिए |

713. मुस्कुराहट मन का बोझ हल्का कर देती है |

714. ये इश्क़ था या कोई बला जा’ना ये क्या हाल हमने बना लिया |

715. मत सताओ हमे हम सताए हुए है, अकेला रहने का ग़म उठाये हुए है, खिलौना समज के ना खेलो हम से, हम भी उसी खुदा के बनाये हुए है |

716. कामयाब होने वाले इंसान हमेशा खुश रहते हैं और जो खुश रहते हैं वही कामयाब होते हैं |

717. इश्क़ की इन्हीं हसीं राहों पे कभी “आकाश” बिछड़ा था दिल मेरा |

718. हमें न मोहब्बत मिली न प्यार मिला, हम को जो भी मिला बेवफा यार मिला, अपनी तो बन गई तमाशा ज़िन्दगी, हर कोई अपने मकसद का तलबगार मिला |

719. गुस्सा करना अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारने जैसा ही है – क्यूंकि आप जिसपे गुस्सा करते हैं उससे ज्यादा आपका खुद का नुकसान हो जाता है |

720. तन्हाई, उदासी और ग़म रहते हैं वहां वीराना-ए-दिल कोई देखने की जगह नहीं |

721. छोटे से दिल में गम बहुत है, जिन्दगी में मिले जख्म बहुत हैं, मार ही डालती कब की ये दुनियाँ हमें, कम्बखत दोस्तों की दुआओं में दम बहुत है |

722. ज्ञानी इंसान कभी घमण्ड नहीं करता और जिसे घमंड होता है ज्ञान उससे कोसों दूर रहता है |

723. दर–ब-दर लेके फिरता रहा है मुझको दिल को मेरी रहनुमाई करने नहीं आई |

724. ज़मीं पर रह कर आसमां को छूने की फितरत है मेरी, पर गिरा कर किसी को, ऊपर उठने का शौक़ नहीं मुझे |

725. अमर वही इंसान होते हैं जो दुनियां को कुछ देकर जाते हैं |

726. दिल का क्या ऐतबार कब पलट जाए तुम याद आते हो तो आते रहना |

727. मंजिल मिले ना मिले ये तो मुकदर की बात है | हम कोशिश भी ना करे ये तो गलत बात है |

728. हर सफलता संघर्ष से होकर गुजरती है बिना संघर्ष के सफलता की कल्पना भी नहीं की जा सकती |

729. तुम अब हिज्र का मलाल मत करना दिल तेरे ग़म में भी शाद रहा है |

730. सड़क कितनी भी साफ हो “धुल” तो हो ही जाती है | इंसान कितना भी अच्छा हो “भूल” तो हो ही जाती है |

731. मुस्कुराना एक कला है जिसने इस कला को सीख लिया वो जीवन में कभी दुखी हो ही नहीं सकता |

732. बस बिका ही नहीं किसी बाज़ार में यूँ तो सोगवार दिल मशहूर था बहुत |

733. कहने वालों का कुछ नहीं जाता, सहने वाले कमाल करते हैं, कौन ढूंढें जवाब दर्दों के, लोग तो बस सवाल करते हैं|

734. जिनका कद ऊँचा होता है वो दूसरों से झुक कर ही बात करते हैं |

735. दिल-ए-नाशाद को ले के अब जाऊं किस सिम्त तेरे कुचे में आने की भी लग गयी हैं पाबंदियां |

736. खामोश बैठें तो लोग कहते हैं उदासी अच्छी नहीं, ज़रा सा हँस लें तो मुस्कुराने की वजह पूछ लेते हैं |

737. इंसान अच्छा या बुरा नहीं होता बस वक्त अच्छा और बुरा होता है |

738. कभी दर्द, कभी हिज्र, कभी उदासी, कभी तन्हाई तेरे इक इश्क में दिल को क्या-क्या सहना पड़ा है |

739. राह संघर्ष की जो चलता है, वो ही संसार को बदलता है। जिसने रातों से जंग जीती है, सूर्य बनकर वही निकलता है।

740. त्याग दी सब ख्वाहिशें कुछ अलग करने के लिए “राम” ने खोया बहुत कुछ “श्री राम” बनने के लिए |

741. बस ज़िक्र इश्क का जा-ब-जा होता है “आकाश” जो दिल पे गुजरती है वो किसी को ना दिखती है |

742. अभी सूरज नहीं डूबा जरा सी शाम होने दो, मैं खुद लौट जाऊंगा मुझे नाकाम तो होने दो, मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढ़ता है जमाना | मैं खुद हो जाऊंगा बदनाम पहले मेरा नाम तो होने दो |

743. जिस दिन आपने अपनी सोच बड़ी कर ली साहब बड़े बड़े लोग आपके बारे में सोचना शुरू कर देंगे |

744. दिल से तेरी याद मिटाऊं कैसे इस घर में खुद आग लगाऊं कैसे |

745. ना किसी से ईर्ष्या, ना किसी से कोई होड़, मेरी अपनी मंजीले, मेरी अपनी दौड़ |

746. ना दवा, ना दुआ से काम बना दर्द ही दिल का आराम बना |

747. माना कि मोहब्बत की ये भी एक हकीकत है फिर भी, जितना तुम बदले हो उतना भी नहीं बदला जाता।

748. बेजान चीज़ो को बदनाम करने के तरीके कितने आसान होते है | लोग सुनते है छुप छुप के बाते, और कहते है के दीवारो को भी कान होते हैं |

749. मैं बेखबर रहा हूँ खुद से मुद्दतों वो जो दिल में था वो कहाँ गया |

750. तुझे चाहा तो बहुत इजहार न कर सके, कट गई उम्र किसी से प्यार न कर सके, तूने माँगा भी तो अपनी जुदाई माँगी, और हम थे कि तुझे इंकार न कर सके।

751. इंतज़ार तो हम भी किया करते हैं, आपसे मिलने की आस किया करते हैं, मेरी याद हिचक़ियो की मोहताज़ नही, हम तो आपको सांसो से याद करते हैं।

752. मुझे खबर नहीं अब कैसा है मेरी दिल से बात नहीं होती |

753. हैरत से न देख मेरे चेहरे की दरारें, मैं वक़्त के हाथों में खिलौने की तरह था।

754. ना दूर हमसे जाया करो, दिल तड़प जाता है, आपके ख्यालों में ही हमारा दिन गुज़र जाता है, पूछता है यह दिल एक सवाल आपसे, कि क्या दूर रहकर भी आपको हमारा ख्याल आता है |

755. चाँदनी बन के बरसने लगती हैं तेरी यादें मुझ पर, बड़ा ही दिलकश मेरी तनहाइयों का मंज़र होता है।

756. चिंगारी का खौफ न दो हमें, दिल में आग का दरिया बसाये बैठे हैं, जल जाते कब के इस आग में, मगर खुद को आंसुओं में भिगोये बैठे हैं।

757. रह नहीं पाओगे तुम ज़ुल्मत बड़ी है दिल में |

758. दुनिया तेरे वजूद को करती रही तलाश, हमने तेरे ख्याल को दुनिया बना लिया।

759. चुपके से धड़कन में उतर जायेंगे, राहें उल्फत में हद से गुजर जायेंगे, आप जो हमें इतना चाहेंगे हम तो आपकी साँसों में पिघल जायेंगे।

760. ना दिल से ना जिगर से दर्द उठता है तेरी जानिब से |

761. हुस्न-ए-बेनजीर के तलबगार हुए बैठे हैं, उनकी एक झलक को बेकरार हुए बैठे हैं, उनके नाजुक हाथों से सजा पाने को, कितनी सदियों से गुनाहगार हुए बैठे हैं।

762. जब आप किसी को चाहो तो ऎ मत सोचो की, वो आप को पसंद करता है की नही, बस उसॆ इतना चाहो की उसॆ आप कॆ सिवा, किसी और की चाहत पसंद ही ना आए।

763. कभी दिल में दर्द होता था अब दर्द में दिल डूबा रहता है |

764. औरों से कहा तुमने औरों से सुना तुमने, कभी हमसे कहा होता कभी हमसे सुना होता।

765. अपने सीने से लगाए हुए उम्मीद की लाश, मुद्दतों जीस्त को नाशाद किया है मैंने, तूने तो एक ही सदमे से किया था दो-चार, दिल को हर तरह से बर्बाद किया है मैंने |

766. तुम्हें दिल में बसा के भूल गया मैं तुम्हें दर – ब – दर ढूँढता रहा |

767. छुप-छुप के एहतमाम में सफ़र का पता चला, वो जुदा हो गया तब उसके हुनर का पता चला, जब एक-एक फूल उड़ा ले गई हवा, तब जाकर बहार को मेरे घर का पता चला।

768. हर कदम हर पल साथ हैं, दूर होकर भी हम आपके पास हैं, आपका हो न हो पर हमें आपकी कसम, आपका हो न हो पर हमें आपकी कसम, आपकी कमी का हर पल अहसास है |

769. तुम पे जिसने दिल हारा था वो इक दिल सिर्फ हमारा था |

770. आसान नहीं आबाद करना घर मोहब्बत का, ये उनका काम है जो जिंदगी बर्बाद करते हैं।

771. आँखों की गहराई को समझ नही सकते, होंटो से कुछ कह नही सकते, कैसे बया करे हम आपको यह दिल का हाल की, तुम्ही हो जिसके बगैर हम रह नही सकते|

772. तेरे आने से बदले हैं हालात दिल-ए-तबाह के वगरना ग़म आ टपकता था हर ख़ुशी से पहले |

773. रात देर तक तेरी दहलीज़ पर बैठी रहीं आँखें, खुद न आना था तो कोई ख्वाब ही भेज दिया होता।

774. लोग प्यार दिल से नहीं चेहरे से करते है, वो दिल पे नहीं सुंदरता पे मरते है, हम सुन्दर नहीं पर दिल के साफ़ है, इसीलिए बहुत काम लोग हमें पसंद करते है।

775. इश्क में दुनिया से किनारा कर लिया दिल ने कितना ही ख़सारा कर लिया |

776. ग़म-ए-इश्क रह गया है ग़म-ए-जुस्तज़ू में ढलकर, वो नजर से छुप गए हैं मेरी जिंदगी बदल कर।

777. हकीक़त कहो तो उनको ख्वाब लगता है शिकायत करो तो उनको मजाक लगता है कितने सिद्दत से उन्हें याद करते है हम और एक वो है, जिन्हें ये सब इत्तेफाक लगता है |

778. दुनिया में किसे ना तेरी जरूरत है तू तो हर दिल की पहली चाहत है |

779. सच कहूँ तो मुझे एहसान बुरा लगता है, जुल्म सहता हुआ इंसान बुरा लगता है, कितनी मसरुक हो गयी है ये दुनिया, एक दिन ठहरे तो मेहमान बुरा लगता है।

780. मौत के बाद याद आ रहा है कोई, मिट्ठी मेरी कबर से उठा रहा है कोई, या खुदा दो पल की मोहल्लत और दे दे, उदास मेरी कबर से जा रहा है कोई |

781. तुम जैसे चाहो वैसे रहना दिल तुम्हारी ही तो जागीर है |

782. काश फुरसत में उन्हें भी ये ख्याल आ जाये, कि कोई याद करता है उन्हें ज़िन्दगी समझकर।

783. खोया इतना कुछ कि फिर पाना न आया, प्यार कर तो लिया पर जताना न आया, आ गए तुम इस दिल में पहली ही नज़र में, बस हमें आपके दिल में समाना ना आया।

784. ग़म है याद है फ़िराक है उदासी है सब यहीं है इस दिल की बस्ती में कोई भी तन्हा नहीं है |

785. हम तुमसे कभी खफा हो नहीं सकते, दोस्ती के रिश्ते बेवफा हो नहीं सकते, तुम हमें भूलकर भले ही सो जाओ, हम तुम्हें याद किये बिना सो नहीं सकते।

786. जिस दिन सपनो में उनका दीदार हो जाता है, उस रात सोना दुस्वार हो जाता है, मरता हे कोई हम पर भी, ये सोच कर अपने आप से प्यार हो जाता है |

787. ये लौ उधर भी अब के जलनी चाहिए तुम्हें बात दिल की अब के कहनी चाहिए |

788. ताल्लुक़ टूट कर बाद में जो कुछ भी रह गये, मगर मोहब्बत में वो पहला मुस्कुराना हमेशा याद आता है।

789. चुप ना होगी हवा भी, कुछ कहेगी घटा भी, और मुमकिन है तेरा, जिक्र कर दे खुद़ा भी, फिर तो पत्थर ही शायद ज़ब्त से काम लेंगे, हुस्न की बात चली तो, सब तेरा नाम लेंगे।

790. तुम्हारी दहलीज़ पे दिल छोड़े जा रहा हूँ अब ये मेरे किसी काम का नहीं रहा |

791. ऐ चाँद मत कर इतना गुरुर तुझमें तो दाग है, पर मेरे वजूद में जो चाँद सिमटा है वो बेदाग है।

792. क्यों जिंदगी इस तरह तुम दूर हो गए क्या बात है जो इस तरह मगरूर हो गए। हम तरसते रहे तुम्हारा प्यार पाने को बेवफा बनकर तुम तो मशहूर हो गए।

793. अपने दिलों पे चलो इक एहसान करते हैं इस मोड़ पे इक – दुसरे को अब भूलते हैं |

794. ये शाम बहुत तनहा है मिलने की भी तलब है, पर दिल की सदाओं में वो ताकत ही कहाँ है, कोशिश भी बहुत की और भरोसा भी बहुत था, मिल जायें बिछड़ कर वो किस्मत की कहाँ है।

795. वफ़ा निभा के वो हमे कुछ दे ना सके पर बहुत कुछ दे गये जब वो बेवफा हुए |

796. इश्क़ में सभी इलज़ाम हमीं पे ही आते – जाते हैं कोई उससे कहो वो भी तो कभी कोई गुनाह करे |

797. रिश्ता नहीं रखना तो हम पर नज़र क्यों रखते हो, जिन्दा हैं या मर गए तुम ये खबर क्यों रखते हो |

798. अरे बेपनाह मोहब्बत की थी हमने तुझसे ओ बेवफा | तुझे दुःख दूं ये न होगा कभी खुद मर जाऊं यहीं ठीक है |

799. ऐसे इक शख्स से है इश्क़ मुझे चुम लेता है लब जिसके गैर कोई |

800. यूं आये जिंदगी में कि ख़ुशी मिल गई, मुश्किल राहों में चलने की वजह मिल गई, हर एक लम्हा खुशनुमा बना दिया, मेरी उम्मीद को नई मंजिल मिल गई।

801. ये बेवफा, वफा की कीमत क्या जाने | ये बेवफा गम-ए-मोहब्बत क्या जाने | जिन्हे मिलता है हर मोड पर नया हमसफर | वो भला प्यार की कीमत क्या जाने |

802. करूँ हूँ तुझसे इश्क़ बेतहाशा इसलिए के जाने कब टूट जाएं धागे सांसों के |

803. सुलगती जिंदगी से मौत आ जाये तो बेहतर है, हमसे दिल के अरमानों का अब मातम नहीं होता।

804. चलो छोड़ो ये बहस कि वफ़ा किसने की और बेवफा कौन है तुम तो ये बताओ कि आज ‘तन्हा’ कौन है |

805. इस जन्म खता हो गयी इश्क़ में अगले जन्म वाइज़ खानदान पूछूँगा |

806. इल्जाम न दे मुझको तूने ही सिखाई बेवफाई है, देकर के धोखा मुझे मुझको दी रुसवाई है, मोहब्बत में दिया जो तूने वही अब तू पाएगी, पछताना छोड़ दे तू भी औरों से धोखा खायेगी।

807. मैंने भी किसी से प्यार किया था उनकी रहो में इंतजार किया था हमें क्या पता वो भूल ज्यांगे हमें कसूर उनका नहीं मेरा ही था जो एक बेवफा से प्यार किया था |

808. तुमने दी तो है सदा इश्क़ कीवही खाक लेकिन कौन छाने |

809. कोई तो जलवा खुदा के वास्ते, दीदार के काबिल दिखाई दे, संगदिल तो मिल चुके हैं हजारों, कोई अहल-ए-दिल तो दिखाई दे।

810. प्यार में बेवाफाई मिले तो गम न करना; अपनी आँखे किसी के लिए नम न करना; वो चाहे लाख नफरते करें तुमसे; पर तुम अपना प्यार कभी उसके लिए कम न करना।

811. वस्ल की तड़फ तो कभी हिज़्र का डरइश्क़ इंसान को बेबस कर देता है |

812. दिल वो नगर नहीं जो फिर आबाद हो सके, पछताओगे तुम बहुत इसको उजाड़ कर।

813. जिस किसीको भी चाहो वोह बेवफा हो जाता है, सर अगर झुकाओ तो सनम खुदा हो जाता है,जब तक काम आते रहो हमसफ़र कहलाते रहो,काम निकल जाने पर हमसफ़र कोई दूसरा हो जाता है |

814. इश्क़ ना जाँ लेता है ना छोड़ताइसकी पीड़ भी और सही नहीं जाती |

815. लम्हे ये सुहाने साथ हो न हो, कल में आज ऐसी बात हो न हो, आपसे प्यार हमेशा दिल में रहेगा, चाहे पूरी उम्र मुलाकात हो न हो।

816. तुम समझ लेना बेवफा मुझको, मै तुम्हे मगरूर मान लूँगाये वजह अच्छी होगी , एक दूसरे को भूल जाने के लिये |

817. “आकाश” तुम मानो या ना, ये इश्क़मुझे बड़ा उदास करने लगा है अब |

818. अगर तुमसे कोई पूछे बताओ जिंदगी क्या है, हथेली पर जरा सी ख़ाक रखना और उड़ा देना।

819. हमारे हर सवाल का सिर्फ एक ही जवाब आया,पैगाम जो पहूँचा हम तक बेवफा इल्जाम आया।

820. दिल में मरी हुई हसरतों का ढेर है अब कदम रखोगे तो कहाँ रखोगे |

821. चलो माना कि हमें प्यार का इज़हार करना नहीं आता, जज़्बात न समझ सको इतने नादान तो तुम भी नहीं।

822. मोहब्बत का नतीजा दुनिया में हमने बुरा देखा जिन्हे दावा था वफा का उन्हें भी हमने बेवफा देखा |

823. इक मुसाफिर से दिल का पाला पड़ा हैइसीलिए तो पाँव में छाला पड़ा है |

824. वो फूलों वाला तकिया मोड़ के सोना, सपनों की रजाई ओढ़ के सोना, रात को ख्वाबों में हम भी आयेंगे, इसलिए हमारे लिए थोड़ी-सी जगह छोड़ के सोना।

825. मेरे कलम से लफ्ज़ खो गए सायद आज वो भी बेवफा हो गाए सायद जब नींद खुली तो पलकों में पानी था मेरे ख्वाब मुझपे रो गाए सायद |

826. मैं चाहता था के तू चारागरी करे दिल कीतेरे आते-आते ज़ख्म नासूर हो गए मगर |

827. लोगों ने छीन ली है मेरी तन्हाई तक, इश्क आ पहुँचा है इलज़ाम से रुसवाई तक।

828. टूटा दिल तो गम कैसा, वो चल दिये तो सितम कैसा, मन भरा यार बदले, बेवफा हुए साफ, तो फिर इश्क का भ्रम कैसा ।

829. इश्क में दिलो-जाँ के नुकसान हैं मगर मिलते दोनों जहान हैं |

830. दिल ही दिल में तुम्हें प्यार करते हैं, चुप-चाप मोहब्बत का इजहार करते हैं, ये जानते हुए भी आप मेरी किस्मत में नहीं, पर पाने की कोशिश बार-बार करते है।

831. आप बेवफा होंगे सोचा ही नहीं था, आप भी कभी खफा होंगे सोचा नहीं था, जो गीत लिखे थे कभी प्यार पर तेरे, वही गीत रुसवा होंगे सोचा ही नहीं था।

832. दिल है के प्यार ढूंढे ज़हन है के रोज़गार ढूंढे |

833. अपनी मोहब्बत के लिए आशियाना बदल देंगे, दिल ने चाहा तो ये फ़साना बदल देंगे, अरे दुनिया वालों तुम्हारी हस्ती ही क्या है, जरूरत पड़ी तो सारा ज़माना ही बदल देंगे।

834. भले किसी ग़ैर की जागीर थी वो, पर मेरे ख्वाबों की तस्वीर थी वो, मुझे मिलती तो कैसी मिलती… किसी और के हिस्से की तकदीर थी वो ।

835. बेग़म जीता हूँ तो अब लुत्फ़ नहीं आता मैं चाहता हूँ तुम दिल को परेशान करो |

836. राह-ए-वफ़ा में इक ऐसा मुक़ाम भी आये, तेरे सिवा किसी और की जुस्तजू भी न रहे।

837. बेवफायी का मौसम भी अब यहाँ आने लगा है, वो फिर से किसी और को देख कर मुस्कुराने लगा है ।

838. वो इश्क सुलगती हुई चिता – सा था बस धुआं उठ के दिल में ही रह गया |

839. मेरे दिल की मजबूरी को कोई इल्जाम न दे, मुझे याद रख बेशक मेरा नाम न ले, तेरा वहम है कि मैंने भुला दिया तुझे, मेरी एक भी साँस ऐसी नहीं जो तेरा नाम न ले।

840. पहले ज़िन्दगी छीन ली मुझसे, अब मेरी मौत का वो फायदा उठाती है, मेरी कब्र पे फूल चढाने के बहाने, वो किसी और से मिलने आती है।

841. अपने अंदर ही बिखरा हूँ मैं जब जब तुझसे बिछड़ा हूँ मैं |

842. कभी यादें कभी आँखों में पानी भेज देता है, वो खुद आता नहीं अपनी निशानी भेज देता है।

843. मेरी तलाश का है जुर्म या मेरी वफा का क़सूर, जो दिल के करीब आया वही बेवफा निकला।

844. चश्म से लहू टपकता तो जानते मुझ में क़त्ल हुआ है कौन-कौन |

845. ढूंढोगे कहाँ मुझको, मेरा पता लेते जाओ, एक कब्र नई होगी एक जलता दिया होगा।

846. पहले इश्क फिर धोखा फिर बेवफ़ाई, बड़ी तरकीब से एक शख्स ने तबाह किया ।

847. उससे कहना के अब बहुत बीमार है दो – चार दिनों का बस मेहमान है |

848. कभी बनती थी तो कभी बिगड़ कर बैठ जाती थी, तेरे साथ जैसी भी थी जिंदगी जिंदगी जैसी तो थी।

849. तेरी चौखट से सिर उठाऊं तो बेवफा कहना, तेरे सिवा किसी और को चाहूँ तो बेवफा कहना, मेरी वफाओं पे शक है तो खंजर उठा लेना, मैं शौक से मर ना जाऊं तो बेवफा कहना ।

850. तुम्हारी रहनुमाई के लिए दिल जलाये बैठे हैं तुम्हें रोशनी के लिए दिए की क्या जरुरत |

851. नज़रें मिली तो बेख्याल हो गए, नज़रें झुकी तो सवाल हो गए, और इतना घुमाया उसे प्यार में, शॉपिंग कराते कराते कंगाल हो गए |

852. कैसी अजीब तुझसे यह जुदाई थी, कि तुझे अलविदा भी ना कह सका, तेरी सादगी में इतना फरेब था, कि तुझे बेवफा भी ना कह सका।

853. हर गाम जीने की शिकायत क्या करनी चलो ऐसा करते हैं के मर जाते हैं हम |

854. वो किताब लौटाने का बहाना तो लाखों में था, लोग ढूढ़ते रहे सबूत पैगाम तो आँखों में था।

855. तेरी बेवफाई का सौ बार शुक्रिया, मेरी जान छूटी इश्क़-ऐ-बवाल से |

856. हसीनो ने हसीन बनकर गुनाह किया, औरों को तो ठीक पर हम को भी तबाह किया, अर्ज़ किया जब ग़ज़लों मे उनकी बेवफ़ाई को तो, औरों ने तो ठीक उन्होने भी वा वा किया |

857. मुझसे मेरी वफ़ा का सबूत मांग रहा है | खुद बेवफ़ा हो के मुझसे वफ़ा मांग रहा है |

858. वफ़ा के नाम से मेरे सनम अनजान थे, किसी की बेवफाई से शायद परेशान थे, हमने वफ़ा देनी चाही तो पता चला हम खुद बेवफा के नाम से बदनाम थे।

859. इक नज़र मिला के वो आगे बड गया बड़े सलीके से सब मरासिम तोड़ गया |

860. उनसे मिलने को तरसती हैं आँखें, तरस तरस कर बरसती हैं आँखें, बरस बरस कर जब थक जाती हैं आँखें, तो फिर से मिलने को तरसती हैं आँखें।

861. इंसान के कंधों पर इंसान जा रहा था, कफ़न में लिपटा अरमान जा रहा था, जिसे भी मिली बे-वफ़ाई मोहब्बत में, वफ़ा की तलाश में श्मशान जा रहा था।

862. देख के शिद्दत उसके तर्क-ए-ताल्लुक की मुझे अपने अहदे-वफ़ा पे बहुत रोना आया |

863. धूप में निकलो, घटाओं में नहाकर देखो, ज़िन्दगी क्या है किताबों को हटाकर देखो।

864. ना पूछ मेरे सब्र की इंतेहा कहाँ तक है, तू सितम कर ले, तेरी हसरत जहाँ तक है वफ़ा की उम्मीद, जिन्हें होगी उन्हें होगी, हमें तो देखना है, तू बेवफ़ा कहाँ तक है।

865. मेरे बाद सुने हो जाएंगे दरो-दीवार मेरे साथ मेरे घर को भी जला देना |

866. काश बनाने वाले ने दिल काँच का बनाया होता, दिल तोड़ने वाले के हाथों में ज़ख्म तो आया होता, जब भी वो देखता अपने हाथों की तरफ, कम से कम उसे मेरा ख्याल तो आया होता।

867. सुबकती रही रात अकेली तनहाइयों के आगोश़ में, और वो काफिऱ दिन से मोहब्बत करके उसका हो गया।

868. आज उम्र भर की सब पूंजी मैं लुटा आया हूँ गंगा में तेरी तस्वीर, तेरे ख़त बहा आया हूँ |

869. क्या बेचकर हम खरीदें फुर्सत ऐ जिंदगी, सब कुछ तो गिरवी पड़ा है जिम्मेदारी के बाजार में।

870. रात की गहराई आँखों में उतर आई, कुछ ख्वाब थे और कुछ मेरी तन्हाई, ये जो पलकों से बह रहे हैं हल्के हल्के, कुछ तो मजबूरी थी कुछ तेरी बेवफाई।

871. शबो-रोज़ हो या शाम-ओ-सहर में रहा है तू करीब मेरे पहर-पहर में |

872. स्याह रात में जलते हैं जुगनुओं की तरह, दिलों के ज़ख्म भी दोस्तों कमाल होते हैं।

873. आग दिल में लगी जब वो खफ़ा हो गए, महसूस हुआ तब जब वो जुदा हो गए, करके वफ़ा कुछ दे ना सके वो हमें, पर बहुत कुछ दे गए जब बेवफ़ा हो गए ।

874. तकदीरों के हेर – फेर बदल के तुम इक बार को मेरे हो जाओ ना |

875. जो हुकुम करता है, वो इल्तज़ा भी करता है, आसमान कही झुका भी करता है, और तू बेवफा है तो ये खबर भी सुन ले, इन्तेज़ार मेरा कोई वहा भी करता है |

876. जब – जब नींद से आँख खोलूं मैं तुझे बस देखना चाहता हूँ |

877. जिस नगर भी जाओ किस्से हैं कमबख्त दिल के, कोई ले के रो रहा है कोई दे के रो रहा है।

878. कैसे यकीन करें हम तेरी मोहब्बत का, जब बिकती है बेवफाई तेरे ही नाम से।

879. तुम हसरत-ए-जिंदगी होते तो जी भी लेते हम शरत-ए-ज़िंदगी हो तुमसे बिछड़ के मर जाएंगे हम |

880. दिल में राज छिपा है दिखाऊं कैसे, हो गया है प्यार आपसे बताऊँ कैसे, दुनिया कहती है मत लिखो नाम दिल पर, जो नाम दिल में है उसे मिटाऊं कैसे।

881. इश्क़ के खुमार में उसे अपनी जिंदगी बना लिया, जब भी उसकी याद आई दिल थामकर रो लिया, वफ़ा का नाम देकर उसने बेबफाई की तो क्या हुआ, जिंदगी थी वो मेरी उसके दिए सारे ग़म बर्दाश्त कर लिया।

882. हम ही हैं जो झेल रहे हैं इस तन्हाई को अगर तुम होते तो यक़ीनन मर जाते |

883. इश्क में तेरे जागा वर्षों और तन्हाई बनी रही, धूप रही मेरे चौतरफा पर पुरबाई बनी रही।

884. इश्क़ ने जब माँगा खुदा से दर्द का हिसाब, वो बोले हुस्न वाले ऐसे ही बेवफाई किया करते हैं।

885. उम्र भर के सफ़र पे चल दिए ना राह देखी, ना रहबर देखा |

886. इस दौर में अहसास-ए-वफ़ा ढूँढने वालो, सेहरा में कहाँ मिलते हैं दीवार के साए।

887. जो जले थे हमारे लिऐ, बुझ रहे हैं वो सारे दिये, कुछ अंधेरो ने की थी साजिशें, कुछ उजालों ने धोखे दिये |

888. तेरी ज़ुल्फ़ के पेचो-ख़म हैं जिस तरह मैंने ज़िंदगी बसर की है इस तरह |

889. कुछ रिश्तों को कभी भी नाम ना देना तुम, इन्हें चलने दो ऐसे ही इल्जाम ना देना तुम, ऐसे ही रहने दो तुम तिश्नग़ी हर लफ़्ज़ में, कि अल्फ़ाज़ों को मेरे अंज़ाम ना देना तुम।

890. समेट कर ले जाओ अपने झूठे वादों के अधूरे क़िस्से अगली मोहब्बत में तुम्हें फिर इनकी ज़रूरत पड़ेगी।

891. उसके साथ उसके शहर से भी टूट गये हैं मरासिम “आकाश” अब कहाँ से देखेंगे बाम-ओ-दर उसके |

892. तुम मेरे लिए अब कोई इल्जाम न ढूँढो, चाहा था तुम्हें एक यही इल्जाम बहुत है।

893. तस्वीर में भी बदले हुए हैं उनके तेवर, आँखों में मुरब्बत का कहीं नाम नहीं है।

894. कंकर पानी में फेंकता हूँ और टूटता कुछ दिल में जाता है |

895. सरहद तुम्हें पुकारे तुम्हें आना ही होगा, कर्ज अपनी मिट्टी का चुकाना ही होगा, दे करके कुर्बानी अपने जिस्मो-जां की, तुम्हे मिटना भी होगा मिटाना भी होगा।

896. उसने महबूब ही तो बदला है फिर ताज्जुब कैसा, दुआ कबूल ना हो तो लोग खुदा तक बदल लेते है।

897. मैं दर्द के पहलू में ही पला बड़ा हूँ तुम ज़ख्म दो भी तो दर्द ना होगा |

898. नफरत को मोहब्बत की आँखों में देखा, बेरुखी को उनकी अदाओं में देखा, आँखें नम हुईं और मैं रो पड़ा… जब अपने को गैरों की बाहों में देखा।

899. किसी की खातिर मोहब्बत की इन्तेहाँ कर दो, लेकिन इतना भी नहीं कि उसको खुदा कर दो, मत चाहो किसी को टूट कर इस कदर इतना, कि अपनी वफाओं से उसको बेवफा कर दो।

900. ज़िंदगी जो अधूरी सी लगती थी इश्क हुआ तो तमाम हो गयी |

901. तेरी नीली आँखों का मैं काजल बन जाऊं, तेरी आँखों में आँसू का मैं बादल बन जाऊं, ख्वाहिश तो मेरी हर पल है इतनी, तेरे रस्ते के काँटों का मैं चादर बन जाऊं।

902. तेरा ख्याल दिल से मिटाया नहीं अभी, बेवफा मैंने तुझ को भुलाया नहीं अभी।

903. इस हिज्र में कुछ भी नहीं बदला है मैं कल भी तेरा था मैं आज भी तेरा हूँ |

904. जिन फूलों को संवारा था हमने अपनी मोहब्बत से, हुए खुशबू के काबिल तो बस गैरों के लिए महके।

905. मुझे तू अपना बना या न बना तेरी खुशी, तू ज़माने में मेरे नाम से बदनाम तो है।

906. मैं तुझसे चाहे कितना भी दूर रहा हूँ मगर दिल में इक धड़कन तेरे नाम से धड़कती रही है |

907. कभी देखेंगे ऐ जाम तुझे होठों से लगाकर, तू मुझमें उतरता है कि मैं तुझमें उतरता हूँ।

908. उसके तर्क-ए-मोहब्बत का सबब होगा कोई, जी नहीं मानता कि वो बेवफ़ा पहले से था।

909. ये किस नज़ाकत से तुमने चलाया है खंज़र ना जिगर के आर है ना जिगर के पार है |

910. चलो खेलें वही बाजी जो पुराना खेल है तेरा, तू फिर से बेवफाई करना मैं फिर आँसू बहाऊंगा।

911. हसीं चेहरों के लिए आईने कुर्बान किये हैं, इस शौक में अपने बड़े नुकसान किये हैं, महफ़िल में मुझे गालियाँ देकर है बहुत खुश, जिस शख्स पर मैंने बड़े एहसान किये है।

912. इस हिज्र में तन्हा मैं ही नहीं हुआ हूँ मुझसे बिछड़ के वो भी अधुरा – सा है |

913. अब कैसे कहें कि अपना बना लो मुझको, अपनी बाहों की क़ैद में समा लो मुझको, एक पल भी बिन तुम्हारे काटना है मुश्किल, अब तो मुझसे ही चुरा लो मुझको।

914. आज कतरा के गुजरते हुए पाया है तझे, बेवफाई का हुनर किसने सिखाया है तुझे।

915. हम भी तेरे ही वजूद का हिस्सा हैं गौर हम पे भी तुम करते रहना |

916. तिश्नगी जम गई पत्थर की तरह होंठों पर, डूब कर भी तेरे दरिया से मैं प्यासा निकला।

917. गर हमें तेरी बदनामियों का डर न होता, न तू वेवफा कहती… न मैं वेवफा होता।

918. बस इक खुद को ना मांगना मुझसे तुम खुद के सिवा कुछ भी मांग लो |

919. मजबूरी में जब कोई किसी से जुदा होता है, ये तो ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है, देकर वो आपकी आँखों में जुदाई के आँसू, तन्हाई में वो आपसे भी ज्यादा रोता है।

920. मैंने कुछ इस तरह से खुद को संभाला है, तुझे भुलाने को दुनिया का भरम पाला है, अब किसी से मुहब्बत मैं कर नहीं पाता, इसी सांचे में एक बेवफा ने मुझे ढाला है।

921. याद आज फिर तुम आ रहे हो आज फिर तुम सोने नहीं दोगे ना |

922. जल-जल के दिल मेरा जलन से जल रहा, एक अश्क मेरे आँख में मुद्दत से पल रहा, जिसका मैं कर रहा हूँ घुट-घुट के इंतजार, वो बेवफा ना आई मेरा दम निकल रहा।

923. लिख-लिख कर मिटा दिए तेरी बेवफाई के गीत, किया करती थी तू भी वफ़ा एक ज़माने में।

924. दरवाजे – खिड़कियाँ बंद रखता हूँ फिर भी तेरी याद चली आती है |

925. निकले हम दुनिया की भीड़ में तो पता चला, कि हर वो शख्स अकेला है जो दूसरों पर भरोसा करता है।

926. हमने चाहा था जिसे उसे दिल से भुलाया न गया, जख्म अपने दिल का लोगों से छुपाया न गया, बेवफाई के बाद भी प्यार करता है दिल उनसे, कि बेवफाई का इल्ज़ाम भी उस पर लगाया न गया।

927. मैं ही बस इक गवाह हूँ उस शख्स का जिसका मेरे अंदर रोज़ क़त्ल होता है |

928. काश तू मेरे आँखों का आंसू बन जाये, मैं रोना ही छोड़ दूँ तुझे खोने के डर से।

929. तेरे इश्क़ ने दिया सुकून इतना, कि तेरे बाद कोई अच्छा न लगे, तुझे करनी है बेवफाई तो इस अदा से कर, कि तेरे बाद कोई बेवफ़ा न लगे।

930. जीता हूँ तो तड़पता हूँ बहुत मर जाऊंगा तो ठीक रहूँगा |

931. मंजिल भी उसी की थी रास्ता भी उसका था, एक हम अकेले थे काफिला भी उसका था, साथ साथ चलने की कसम भी उसी की थी, और रास्ता बदलने का फैसला भी उसका था।

932. इक उम्र तक मैं जिसकी जरुरत बना रहा फिर यूँ हुआ कि उस की जरुरत बदल गई।

933. मैं ही रोक लेता हूँ अक्सर हाथ अपना वगरना मेरी कलम तुझे लिखना चाहती है |

934. एक अजीब सा रिश्ता है मेरे और ख्वाहिशों के दरमियाँ, वो मुझे जीने नही देतीं और मैं उन्हें मरने नही देता।

935. इकरार बदलते रहते है इंकार बदलते रहते हैं, कुछ लोग यहाँ पर ऐसे है जो यार बदलते रहते हैं।

936. जाने को बस तैयार हूँ मैं आज बहुत बीमार हूँ मैं |

937. अब आयें या न आयें इधर पूछते चलो, क्या चाहती है उनकी नजर पूछते चलो, हमसे अगर है तर्क-ए-ताल्लुक तो क्या हुआ, यारो कोई तो उनकी खबर पूछते चलो।

938. वो कहता है कि मजबूरियां हैं बहुत साफ लफ़्ज़ों में खुद को बेवफा नहीं कहता।

939. दुनिया मैं कोई किसी का नहीं होता मुझे चंद लोगों ने यही सिखाया है |

940. यूँ चेहरे पर उदासी ना ओढ़िये साहब वक़्त ज़रूर तकलीफ का है लेकिन कटेगा मुस्कुराने से ही।

941. दोस्त बनकर भी वो नहीं साथ निभानेवाला, वही अंदाज़ है उस ज़ालिम का ज़माने वाला।

942. इक शख्स को बस भुलाना था हमने शौक में नहीं पढ़ी किताबें |

943. दोस्त बन कर भी नहीं साथ निभाने वाला, वही अंदाज़ है ज़ालिम का ज़माने वाला, तेरे होते हुए आ जाती थी दुनिया सारी, आज तनहा हूँ तो कोई नहीं आने वाला।

944. टूटे हुए दिल ने भी उसके लिए दुआ मांगी, मेरी साँसों ने हर पल उसकी ख़ुशी मांगी, न जाने कैसी दिल्लगी थी उस बेवफा से, कि मैंने आखिरी ख्वाहिश में भी उसकी वफ़ा मांगी।

945. इक हादसे की तरह जिंदगी गुज़र गई और हम सोचते थे के शौक में बसर की |

946. जल जाते हैं मेरे अंदाज से मेरे दुशमन क्यूंकि एक मुद्दत से मैंने न मोहब्बत बदली और न ही दोस्त बदले।

947. कभी ग़म तो कभी तन्हाई मार गयी, कभी याद आ कर उनकी जुदाई मार गयी, बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने, आखिर में उनकी ही बेवफाई मार गयी।

948. मैं तुम्हें भुलाने की अब कोशिश नहीं करूँगा तुम्हें भूलता हूँ तो तुम बहुत याद आते हो |

949. खुश हूँ कि मुझको जला के तुम हँसे तो सही, मेरे न सही किसी के दिल में बसे तो सही।

950. कैसे मिलेंगे हमें चाहने वाले बताइये, दुनिया खड़ी है राह में दीवार की तरह, वो बेवफ़ाई करके भी शर्मिंदा ना हुए, सजाएं मिली हमें गुनहगार की तरह।

951. ये हिज्र बस तुमसे ही नहीं रहेगा तुम्हारे बाद सबसे बिछड़ जाऊंगा मैं |

952. दिलों में गर पली बेजा कोई हसरत नहीं होती, हम इंसानों को इंसानों से यूँ नफरत नहीं होती।

953. बेवफाई उसकी दिल से मिटा के आया हूँ, ख़त भी उसके पानी में बहा के आया हूँ, कोई पढ़ न ले उस बेवफा की यादों को, इसलिए पानी में भी आग लगा कर आया हूँ।

954. तेरी दिल्लगी के फ़साने बहुत मशहूर हैं माना लेकिन अहले-गम पे जो गुज़री तुमने ना जाना |

955. कब तक हम यूँ जियें तेरी यादों में एक बार तू भी तो मेरी तरह जी के देख तब तो तुझे पता चले कि हम कैसे जी रहे हैं और कैसे तेरी यादों के आँसू पी रहे हैं |

956. वो जमाने में यूँ ही बेवफ़ा मशहूर हो गये दोस्त, हजारों चाहने वाले थे किस-किस से वफ़ा करते।

957. हमने कुरेदे थे आज फिर से ज़ख्म अपने तभी तो आज फज़ा में कुछ खुमारी है |

958. दिल टूटने से थोड़ी सी तकलीफ़ तो हुई, लेकिन तमाम उम्र को आराम हो गया।

959. मुझे इश्क है बस तुमसे नाम बेवफा मत देना, गैर जान कर मुझे इल्जाम बेवजह मत देना, जो दिया है तुमने वो दर्द हम सह लेंगे मगर, किसी और को अपने प्यार की सजा मत देना ।

960. ऐसा गम ना दे के कभी रो भी ना सकूँ शब क्या दिन में भी सो भी ना सकूँ पहले ही बहुत दाग़ हैं मेरे दामन में और दागदार ना कर के धो भी ना सकूँ |

961. किरदार की अज़मत को गिरने न दिया हमने, धोखे तो बहुत खाए लेकिन धोखा न दिया हमने।

962. तेरे प्यार का सिला हर हाल में देंगे, खुदा भी मांगे ये दिल तो टाल देंगे, अगर दिल ने कहा तुम बेवफ़ा हो, तो इस दिल को भी सीने से निकाल देंगे।

963. दर्दो – गम भी सौगातें हैं इश्क कीं इश्क जो दे हँस के बस लिया कर |

964. जिद में आकर उनसे ताल्लुक तोड़ लिया हमने, अब सुकून उनको नहीं और बेकरार हम भी हैं।

965. हर भूल तेरी माफ़ की हर खता को तेरी भुला दिया गम है कि, मेरे प्यार का तूने बेवफा बनके सिला दिया|

966. दुःख की सियाह रातों में चाँद ग़र कभी छत पे आए तो देखा करना |

967. तू हमसफ़र तू हमडगर तू हमराज नजर आता है, मेरी अधूरी सी जिंदगी का ख्वाब नजर आता है, कैसी उदास है जिंदगी बिन तेरे हर लम्हा, मेरे हर लम्हे में तेरी मौजूदगी का अहसास नजर आता है।

968. उसके चले जाने के बाद हम महोबत नहीं करते किसी से, छोटी सी जिन्दगी है किस किस को अजमाते रहेंगे |

969. इक तरफ तेरा गम होता है और इक तरफ तेरी याद इन्हीं दो औरतों के साथ मेरी रात गुज़रा करती है |

970. लड़खड़ाये कदम तो गिरे उनकी बाँहों मे, आज हमारा पीना ही हमारे काम आ गया।

971. उन्होंने हमें आजमाकर देख लिया, इक धोखा हमने भी खा कर देख लिया. क्या हुआ हम हुए जो उदास, उन्होंने तो अपना दिल बहला के देख लिया |

972. सुलगता रहता है दिल शबो-रोज़ आतिशे-ग़म से क्या कोई ऐसी भी है आग जो दिल को राख करे |

973. कहीं पर शाम ढलती है कहीं पर रात होती है, अकेले गुमसुम रहते हैं न किसी से बात होती है, तुमसे मिलने की आरज़ू दिल बहलने नहीं देती, तन्हाई में आँखों से रुक-रुक के बरसात होती है।

974. तन्हाई सौ गुना बेहतर है झूठे वादों से झूठे लोगों से |

975. गम के सैलाब में दिल के साथ – साथ तुम्हें पता भी है के बहा है क्या – क्या |

976. रोने की सज़ा है न रुलाने की सज़ा है, ये दर्द मोहब्बत को निभाने की सज़ा है, हँसते हैं तो आँखों से निकलते हैं आँसू, ये उस शख्स से दिल लगाने की सज़ा है।

977. हर किसी के नसीब में कहा लिखी होती हे चाहतें कुछ लोग दुनिया में आते हे सिर्फ तन्हाइयों के लिए |

978. गम की मुसाफ़त पे निकला हूँ जबसे मुझको खबर भी किसी की नहीं रही |

979. परदा तो होश वालों से किया जाता है हुज़ूर, तुम बेनक़ाब चले आओ हम तो नशे में हैं।

980. कतरा कतरा आग बन के जला रही है यादे तेरी बरस के इश्क तू भी दिल की लगी बुझा |

981. मैं क्यों उदास सा अब भी रहता हूँ जब के ना तेरा गम, ना कोई दिल में कसक है अब |

982. जिंदगी का सबसे खूबसूरत पौधा विश्वास होता है, जो जमीन में नहीं दिल में उगता है |

983. क्यों नाम दूँ उसे बेवफ़ा का , वो तो वक़्त था , जिसे मेरी हँसी देखी नही गयी |

984. शब-ए-फ़िराक हमारे नैन पिघल रहे हैं आतिश-ए-गम से दिलो-जाँ सुलग रहे हैं |

985. ना तलवार की धार से ना गोलियों की बौछार से, बंदा डरता है तो सिर्फ अपने बाप की मार से।

986. कौन करता है यहाँ प्यार निभाने के लिये, दिल तो बस एक खिलौना है जमाने के लिये |

987. तालुकात जबसे टूटे हैं तुमसे हजूम गम का बरपा है |

988. अभी अभी वो मिला था हज़ार बातें कीं, अभी अभी वो गया है मगर ज़माना हुआ।

989. तरस जाओगे दीदार को भी जब लौट कर हम नही आए |

990. ये गम गौहर हैं आखिर मोहब्बत के इन्हें मन के धागे में बस पिरोया कर |

991. तेरे आने की खबर मुझे ये हवाएं देती हैं, तेरे मिलने को मेरी हर साँस तरसती है, तू कब आके मिलेगी अपने इस दीवाने से, तुझसे मिलने को मेरी आवाज तरसती है।

992. दर्द ही सही मेरे इश्क़ का इनाम तो आया, खाली ही सही होठों तक जाम तो आया, मैं हूँ बेवफा सबको बताया उसने, यूँ ही सही चलो उसके लबों पर मेरा नाम तो आया |

993. बेहद बतिया के वो जब बिछड़ जाता है दिल को बहुत ही उदास कर जाता है |

994. वो बेवफा हर बात पे देता है परिंदों की मिसाल, साफ साफ नहीं कहता मेरा शहर छोड़ दो।

995. कैसे बुरा कह दूँ तेरी बेवफाई को, यही तो है जिसने मुझे मशहूर किया है |

996. मुझ से जो भी मिला बेवफा मिला वफ़ा कैसी होती है कभी जाना नहीं |

997. समर में घाव खाता है उसी का मान होता है, छिपा उस वेदना में अमर बलिदान होता है, सृजन में चोट खाता है छेनी और हथौड़ी का, वही पाषाण मंदिर में कहीं भगवान होता है।

998. दुनियाँ को इसका चेहरा दिखाना पड़ा मुझे, पर्दा जो दरमियां था हटाना पड़ा मुझे, रुसवाईयों के खौफ से महफिल में आज, फिर इस बेवफा से हाथ मिलाना पड़ा मुझे |

999. होंठों के कई शबनमी जाम मेरी प्यास बुझाना चाहे हैं इन दरियाओं से मन की कब पर प्यास बुझा करती है |

1000. आँखो से आँखे मिलाकर तो देखो, एक बार हमारे पास आकर तो देखो, मिलना चाहेंगे सब लोग तुमसे, एक बार मेरे दोस्त साबुन से नहाकर तो देखो।

1. चाँदनी बन के बरसने लगती हैं तेरी यादें मुझ पर, बड़ा ही दिलकश मेरी तनहाइयों का मंज़र होता है।

2. चंदन का टीका रेशम का धागा; सावन की सुगंध बारिश की फुहार; भाई की उम्मीद बहना का प्यार; मुबारक हो आपको रक्षा-बंधन का त्योहार।

3. कुछ घूंट नशे की ले बेठी कुछ ले बेठी तेरी यारी रै बोतल नै तो भीतर फुक्या तनै फुक दी जिंदगी सारी रै |

4. हर एक बात पर वक़्त का तकाजा हुआ, हर एक याद पर दिल का दर्द ताजा हुआ, सुना करते थे ग़ज़लों में जुदाई की बातें, खुद पे बीती तो हकीकत का अंदाजा हुआ।

5. जब खुदा ने दुनिया को बनाया होगा एक बात से जरूर घबराया होगा कैसे रखूँगा ख्याल इतनी कुड़ियों का, तब उस ने सब के लिए एक भाई बनाया होगा |

6. मेरी मंजिल इब भी तू ही है बस फर्क इतना है पहलां तेरी आबादी थी इब तेरी बर्बादी है ।

7. दिल से हमें पुकारा ना करो, यूँ आँखों से इशारा ना करो, तुमसे दूर हैं मजबूरी है हमारी, तन्हाई में हमें यूँ तड़पाया ना करो।

8. याद आता है अक्सर वो गुज़रा हुआ ज़माना, तेरी मीठी से आवाज़ में भाई कहकर बुलाना, वो सुबह स्कूल के लिए तेरा मुझको जगाना, अब क्या करे बहना यही है ज़िन्दगी का तराना |

9. र इतणी जल्दी भूल ज्यागी मैं इतणा भी माड़ा कोन्या मन्ने क्यूकर दिल त काढ़ेगी मेरा फोटु तक पाड़या कोन्या |

10. यह हम ही जानते हैं जुदाई के मोड़ पर, इस दिल का जो भी हाल तुझे देख कर हुआ।

11. आया है एक जश्न का त्यौहार, जिसमे होता है भाई बहन का प्यार, चलो मनाये रक्षा का ये त्यौहार! रक्षा बंधन मुबारक |

12. सफर ऐ शहर मै किते टकरा गी तो देख लिए तेरी आँख्या मै पछतावे के आंशू नहीं आज्यां तो |

13. जब तक मिले न थे जुदाई का था मलाल, अब ये मलाल है कि तमन्ना निकल गई।

14. वो बचपन की शरारते,वो झूलों पे खेलना वो माँ का डांटना,वो पापा का लाड पर एक चीज़ जो इन सब से ख़ास है वो है मेरी प्यारी बहन का प्यार रक्षा-बंधन की हार्दिक शुभकामनायें |

15. सुलगती चिंगारी जळती सिगरट तिलमिलाम्ते फेफडे बेरंग सा धुम्मा धुम्मे के छल्ले अर एश ट्रे मै झड़ती जिंदगी |

16. अब अगर मेल नहीं है तो जुदाई भी नहीं, बात तोड़ी भी नहीं तुमने तो बनाई भी नहीं।

17. हमें ये मोहब्बत किस मोड़ पे ले आई, दिल में दर्द है और ज़माने में रुसवाई, कटता है हर एक पल सौ बरस के बराबर, अब मार ही डालेगी मुझे तेरी जुदाई।

18. हम तो मुँहमागी दुआ तुम अनसुनी फ़रियाद हो |

19. इतना बेताब न हो मुझसे बिछड़ने के लिए, तुझे आँखों से नहीं मेरे दिल से जुदा होना है।

20. रब किसी को किसी पर फ़िदा न करे, करे तो क़यामत तक जुदा न करे, ये माना की कोई मरता नहीं जुदाई में, लेकिन जी भी तो नहीं पाता तन्हाई में।

21. कितणा ए जी लाकै निभा ल्यो रिश्ता बदलण आळे तो बदल ए जा हैं |

22. हो जुदाई का सबब कुछ भी मगर, हम उसे अपनी खता कहते हैं, वो तो साँसों में बसी है मेरे, जाने क्यों लोग मुझसे जुदा कहते हैं।

23. मेरी निगाह में फिर कोई दूसरा चेहरा नहीं आया, भरोसा ही कुछ ऐसा था तुम्हारे लौट आने का।

24. माडा टाइम था मेरा जब तने चाह बैठ्या मै आज फेर तेरी बेवफाई प गीत बना बैठ्या मै |

25. याद में तेरी आँहें भरता है कोई, हर सांस के साथ तुझे याद करता है कोई, मौत तो सचाई है आनी ही है, लेकिन तेरी जुदाई में हर रोज़ मरता है कोई।

26. आपकी जुदाई भी हमें प्यार करती है, आपकी यादें भी हमे बेकरार करती है, आते जाते यूँ ही हो जाए मुलाकात आपसे, तलाश आपको ये नजर बार बार करती है।

27. देखी तरेड़ आज मन्नै बेरा नै शीशा टूट रह्या था अक मैं |

28. किसी से जुदा होना इतना आसान होता तो, रूह को जिस्म से लेने फ़रिश्ते नहीं आते।

29. मुद्दत से ख्वाब में भी नहीं नींद का ख्याल, हैरत में हूँ ये किस का मुझे इंतज़ार है।

30. धड़कनें टूटकर बिखरने लगती हैं जब याद तुम बे-हिसाब आते हो |

31. आओ किसी शब मुझे टूट के बिखरता देखो, मेरी रगों में ज़हर जुदाई का उतरता देखो, किस किस अदा से तुझे माँगा है खुदा से, आओ कभी मुझे सजदों में सिसकता देखो।

32. देर लगी आने में तुमको, शुक्र है फिर भी आये तो, आस ने दिल का साथ न छोड़ा, वैसे हम घबराये तो।

33. रै बहोत भीड़ थी तेरे दिल मै हाम खुद नहीं लिकड़ते तो धक्के दे कै काढे जाते |

34. सोचा था कि मिटाकर सारी निशानी तेरी, चैन से सो जायेंगे । बंद आँखो ने अक्स देखा तेरा, तो बेचैन दिल ने पुकारा तुझको ।

35. तेरे इंतजार में कब से उदास बैठे हैं, तेरे दीदार में आँखे बिछाये बैठे हैं, तू एक नज़र हम को देख ले बस, इस आस में कब से बेकरार बैठे हैं।

36. बहोत बदल गया हूं तेरे जाए पाछै, बस तन्नै याद करण की वा आदत ईब भी न्यू की न्यू है |

37. उस शख्स को बिछड़ने का सलीका नहीं आता, जाते जाते खुद को मेरे पास छोड़ गया।

38. ये इंतज़ार सहर का था या तुम्हारा था, दिया जलाया भी मैंने दिया बुझाया भी।

39. बहोत याद आवैं हैं वे भूले भिसरे दिन कुछ तेरे गैल कुछ तेरे बिन |

40. हर मुलाक़ात पर वक़्त का तकाज़ा हुआ, हर याद पर दिल का दर्द ताज़ा हुआ । सुनी थी सिर्फ लोगों से जुदाई की बातें, खुद पर बीती तो हक़ीक़त का अंदाज़ा हुआ ।

41. दिल जलाओ या दिए आँखों के दरवाज़े पर, वक़्त से पहले तो आते नहीं आने वाले।

42. दर्द‬ देकै चली गई वा, ‪‎दिल‬ मेरे नै ‪‎तडफाकै‬ कै सोचै ‪खुश‬ रह गी, ना ‪बैरण‬ स वहम तेरा किते कुण मै ‪‎कल्ली‬ बैठ कै ‪रोवेगी‬, दिल गैरा तै ला कै |‬‬‬‬‬‬

43. ऐ चाँद चला जा क्यूँ आया है तू मेरी चौखट पर, छोड़ गया वो शख्स जिस के धोखे मे तुझे देखते थे ।

44. लौट आओ और मिलो उसी तड़प से, अब तो मुझे मेरी वफाओं का सिला दे दो, इंतजार ख़त्म नहीं होता है आँखों का, किसी शब् अपनी एक झलक दे दो।

45. र इतणी जल्दी भूल ज्यागी मैं इतणा भी माड़ा कोन्या, मन्ने क्यूकर दिल त काढ़ेगी मेरा फोटु तक पाड़या कोन्या |

46. शब-ए-इंतज़ार की कशमकश में न पूछ कैसे सहर हुई, कभी एक चिराग जला दिया कभी एक चिराग बुझा दिया।

47. गुलशन तो तू है मेरा, बहारों का मैं क्या करूँ, नैनों मैं बस गए हो तुम, नज़ारों का मैं क्या करूँ।

48. ये दुनिया वाले भी बडे अजीब है दर्द आँखो से निकले तो ‘कायर’कहते हैं और बातों से निकले तो ‘शायर’कहते है |

49. वो कह कर गया था कि लौटकर आऊँगा, मैं इंतजार ना करता तो क्या करता, वो झूठ भी बोल रहा था बड़े सलीके से, मैं एतबार ना करता तो क्या क्या करता।

50. तुम साथ हो तो दुनियां अपनी सी लगती है, वरना सीने मे सांसे भी पराई सी लगती है।

51. दर्द बयां करना है तो शायरी से कीजिये जनाब लोगों के पास वक़्त कहाँ एहसासों को सुनने का |

52. कासिद पयामे-शौक को देना बहुत न तूल, कहना फ़क़त ये उनसे कि आँखें तरस गयीं।

53. किसी से प्यार करो और तजुर्बा कर लो, ये रोग ऐसा है जिसमें दवा नहीं लगती।

54. कर कर कै बहाने रोवैगी जब याद तन्नै मेरी आवैगी फोटो धर कै सिराहणै सोवैगी जब याद तन्नै मेरी आवैगी |

55. ता फिर न इंतज़ार में नींद आये उम्र भर, आने का अहद कर गये आये जो ख्वाब में।

56. थोड़ा दर्द भी सहलो महोबत के लिए, थोड़ा इश्क़ भी करलो सेहत के लिए।

57. सोच के गुजरैगी तेरे दिल पै जब कोए जब चाह्वैगा तन्नै मेरै ज्यु और छोड़ कै चल्या जागा तन्नै तेरै ज्युं |

58. तू मुझे याद करे न करे तेरी ख़ुशी, हम तो तुझे याद करते रहते हैं, तुझे देखने को दिल तरसता रहता है, और हम इंतज़ार करते रहते हैं।

59. है छोटी सी ज़िन्दगी तकरारें किस लिए, रहो एक दूसरे के दिलों में यह दीवारें किसलिए।

60. कभी जो फुर्सत मिले, तो मुड़कर देख लेना मुझे एक दफ़ा | तेरी नजरो से घायल होने की चाहत मुझे आज भी है |

61. उदास आँखों में अपने करार देखा है, पहली बार उसे बेक़रार देखा है, जिसे खबर ना होती थी मेरे आने जाने की, उसकी आँखों में अब इंतज़ार देखा है।

62. मैं तेरे खयालो से बच के कहाँ जाऊं, तुम मेरी सोच के हर रस्ते पे नजर आते हो।

63. नींद में भी गिरते हैं मेरी आँख से आंसू जब भी तुम ख्वाबों में मेरा हाथ छोड़ देती हो |

64. इंतजार तो बस उस दिन का है जिस दिन तुम्हारे नाम के पीछे हमारा नाम लगेगा |

65. अभी तो चन्द लफ्जो मे शिकायत है तुझे मैने, अभी तो मेरी किताबों मे तेरी तफसिर बाकी है।

66. उसकी चाहत का मैं ओर के सबूत द्यूं उसने लाई थी बिंदी वा भी मेरी आख्यां में देख कै |

67. कुछ रोज़ यह भी रंग रहा तेरे इंतज़ार का, आँख उठ गई जिधर बस उधर देखते रहे।

68. मत फेक पानी में पथर उसे भी कोई पिता है, मत रहो यु उदास तुम्हे देख कर भी जिंदगी मे कोई जीता है।

69. पहले मुहब्बत का नशा था मन्नै दिल ईसा टूट्या के नशे तै मुहब्बत होगी |

70. किन लफ्जों में लिखूँ मैं अपने इन्तजार को तुम्हें, बेजुबां है इश्क़ मेरा ढूँढता है खामोशी से तुझे।

71. दिल में ना हो जुर्रत तो मोहब्बत नहीं मिलती, खैरात में इतनी बड़ी दौलत नहीं मिलती।

72. कदे दुख हो तो हामनै याद कर लिये दुख गिरवी धर कै खुशी उधार दिया करां हाम |

73. ये चांदनी रात बड़ी देर के बाद आयी, ये हसीं मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी, आज आये हैं वो मिलने को बड़ी देर के बाद, आज की ये रात बड़ी देर के बाद आयी।

74. सोचता हूँ गुलशन मे काटो के साथ साथ बबूल भी होगे, क्या हुआ अगर उसने बेवफाई की उसके अपने उसूल भी होगे।

75. आज फेर तेरी याद नै खोश लिया होश-ओ-हवास, बावळा हो ज्यांगा रै मैं तो जै न्युए चालता रह्या तो |

76. उस इश्क़ की आग मेरे दिल को आज भी जलाया करती है, जुदा हुए तो क्या हुआ ये आँख आज भी उनका इंतज़ार करती है।

77. दूरियाँ जब बढ़ी तो गलतफहमियां भी बढ़ गयी। फिर तुमने वो भी सुना जो मैंने कहा ही नही।

78. गुरुर मत करै अपणे हुस्न पै, एक दिन मैं भी राख हो ज्यांगा एक दिन तू भी राख हो ज्यागी |

79. न देखने से मेरा प्यार कम ना होगा, तू पलट के ना देख इजहार कम ना होगा, तुझको देख कर धड़कनें बढ़ जाती है सच है, लेकिन तेरे लिए मेरे दिल में प्यार कभी कम ना होगा।

80. जिद कर ही बैठे हो जाने की, तो ये भी सुन लो, खैरियत मेरी कभी गैरों से मत पूछना |

81. नूं बोली तन्नै आज होक्के अर मेरे म तै एक चुनना पडैगा मखा बैरण जांदी जांदी चिलम तो भरजा |

82. तुम तारों की तरह रात भर चमकते रहे, हम चाँद की तरह तन्हा सफ़र करते रहे, तुम तो बीते वक़्त थे तुम्हें आना न था, यूँ ही हम सारी रात करबटें बदलते रहे।

83. दोष कांटो का कहाँ हमारा है जनाब, पैर हमने रखा वो तो अपनी जगह पे थे।

84. जिंदगी झंड करके नै वा बडे महल मै बैठी सै म्हारा रिस्ता तक ना होया, अर वा 2 जाम कै बैठी सै |

85. किश्तों में खुदकुशी कर रही है ये जिन्दगी इंतज़ार तेरा मुझे पूरा मरने भी नहीं देता ।

86. सिर्फ बेचैनीयाँ लिखी जाती हैं दिल की, लफ्जों से पूरी कहा होती है कमी सनम तेरी।

87. घाल कै आंख्या म स्याही तू पढ़ण जावै या पढाण जा है किस छोरै प तेरा दिल आग्या किसनै नया सूट दिखाण जा सै|

88. इंतज़ार रहता है हर शाम तेरा, यादें कटती हैं ले ले कर नाम तेरा, मुद्दत से बैठे हैं यह आस पाले, कि कभी तो आएगा कोई पैगाम तेरा।

89. बहक न जाए आज लौ की नीयत कही यारो उससे कहना होंठों से यू वो दीप बुझाया न करे।

90. मन्ने तो पोते पोतिया के नाम भी सोच लिए पर ब्याह तो ना हो रया |

91. आँखें भी मेरी पलकों से सवाल करती हैं, हर वक़्त आपको ही तो याद करती हैं, जब तक देख न लें चेहरा आपका, हर घडी आपका ही इंतज़ार करती हैं।

92. हमें ये दिल हारने की बीमारी ना होती, अगर आपकी दिल जीतने की अदा इतनी प्यारी ना होती।

93. रेलवे फाटक दिन में दस ब बंद हो लेगा पर गर्लफ्रेंड के चिलत्तर एक ब बी ना होवंते |

94. दिल की धड़कन को, एक लम्हा सब्र नहीं, शायद उसको अब मेरी ज़रा भी कद्र नहीं, हर सफर में मेरा कभी हमसफ़र था वो, अब सफर तो है मगर वो हमसफ़र नहीं।

95. नक़ाब उलटे हुए जब भी चमन से वह गुज़रता है, समझ कर फूल उसके लब पे तितली बैठ जाती है।

96. जाड्डयाँ में मोटी गर्मियां में माड़ी घेटी तलां कर कें कट्ठी चालें सारी |

97. कोई मिलता ही नहीं हमसे हमारा बनकर, वो मिले भी तो एक किनारा बनकर, हर ख्वाब टूट के बिखरा काँच की तरह, बस एक इंतज़ार है साथ सहारा बनकर।

98. दिल ने कहा भी था मत चाह उसे यू पागलो की तरह, कि वो मगरूर हो जायेगा तेरी बेपनाह मुहब्बत देखकर।

99. भोत भूंडे लागै करै वे छोरे मनै, जो छोरी न दैख क रिफळ जाया करै |

100. कहीं वो आ के मिटा दें न इंतज़ार का लुत्फ़, कहीं क़ुबूल न हो जाए इल्तिजा मेरी ।

101. भीगी नहीं थी मेरी आँखें कभी वक़्त के मार से, देख तेरी थोड़ी सी बेरुखी ने इन्हें जी भर के रुला दिया।

102. दुध दही का खाणा, टयुबवैल तलै का नहाणा। बिना जान पहचान भाई बताणा, यो सै म्हारा हरियाणा |

103. कभी ख़ुशी से ख़ुशी की तरफ नहीं देखा, तुम्हारे बाद किसी की तरफ नहीं देखा, ये सोच कर के तेरा इंतजार लाजिम है, तमाम उम्र घडी की तरफ नहीं देखा ।

104. ये ना पूछना ज़िन्दगी ख़ुशी कब देती है, क्योकि शिकायते तो उन्हें भी है जिन्हें ज़िन्दगी सब देती है।

105. जै यो होक्का नी होदां, मै कदे का फांसी खा जांदा |

106. ग़जब किया तेरे वादे पर एतबार किया, तमाम रात किया क़यामत का इंतज़ार किया।

107. तु मुझसे मेरे गुनाहों का हिसाब ना मांग मेरे खुदा मेरी तकदीर लिखने में, कलम तो तेरी ही चली थी।

108. आँखया की तलवार चलाकै मेरा नरम कालजा छोले है, के खांड खा कै जामी थी जो इतनी मिट्ठी बोले है।

109. आज तक है उसके लौट आने की उम्मीद, आज तक ठहरी है ज़िंदगी अपनी जगह, लाख ये चाहा कि उसे भूल जाये पर, हौंसले अपनी जगह बेबसी अपनी जगह ।

110. यूँ ही नहीं होती हाँथ की लकीरों के आगे उँगलियाँ, रब ने भी किस्मत से पहले मेहनत लिखी है।

111. ठँडा बैठया सै “यार” बदनाम होण क डर ते जद मूड बणैगा यारा का तनै ठा लै जयाँगै घर तै |

112. चले भी आओ तसव्वुर में मेहरबां बनकर, आज इंतज़ार तेरा, दिल को हद से ज्यादा है ।

113. आँखों की झील से दो कतरे क्या निकल पड़े मेरे सारे दुश्मन एकदम खुशी से उछल पडे।

114. कई लोगा की म्हारै पै न्यू बळे ज्युकर आग लागै पाछै रुई बळया करै पर हाम ईणकी न्यू ऐ जलावांगे |

115. वफ़ा में अब यह हुनर इख़्तियार करना है, वो सच कहें या ना कहें बस ऐतबार करना है, यह तुझको जागते रहने का शौक कबसे हो गया, मुझे तो खैर बस तेरा इंतज़ार करना है ।

116. वादा था मुकर गया नशा था उतर गया दिल था भर गया इंसान था बदल गया।

117. बाहण नै भाई इब प्यारा कोन्या, सगे होज्या सै बिराणे। गया बख्त आवै कोन्या, ना रहरे माणस श्याणे |

118. कोई शाम आती है आपकी याद लेकर, कोई शाम जाती है आपकी याद देकर, हमें तो इंतज़ार है उस हसीन शाम का, जो आये कभी आपको अपने साथ लेकर।

119. नसीब ने पूछा बोल क्या चाहिए ख़ुशी क्या मांग ली खामोश हो गया।

120. प्यार तो इतणा करया था उस्तै उसका बन्द होएडा नम्बर भी डिलीट करण नै जी ना करदा |

121. जीने की ख्वाहिश में हर रोज़ मरते हैं, वो आये न आये हम इंतज़ार करते हैं, झूठा ही सही मेरे यार का वादा है, हम सच मान कर ऐतबार करते हैं ।

122. आप हमें चाहें न चाहें इसका गिला नहीं, हम जिसे चाहें उस पर जान लुटा देते हैं।

123. छोरी पै लाइन अर कुत्ते कै लठ सोच समझ के मारणा चहिये, ये गैल भी पड़ लिया करें।

124. टूट गया दिल पर अरमां वही है, दूर रहते हैं फिर भी प्यार वही है, जानते हैं कि मिल नहीं पायेंगे, फिर भी इन आँखों में इंतज़ार वही है।

125. सारी उम्र तो कोई जीने की वजह नहीं पूछता, लेकिन मौत वाले दिन सब पूछते है कि कैसे मरे।

126. क्या खता हमसे हुई की खत का आना बंद है आप हैं हमसे खफा या डाक-खाना बंद है।

127. किसी भी मुश्किल का अब किसी को हल नहीं मिलता, शायद अब घर से कोई माँ के पैर छूकर नहीं निकलता।

128. जिन्हें हम देख कर जीते थे ‘नासिर’ वो लोग आँखों से ओझल हो गए हैं!

129. भीगी नहीं थी मेरी आँखें कभी वक़्त के मार से देख तेरी थोड़ी सी बेरुखी ने इन्हें जी भर के रुला दिया।

130. तेरे क़दमों में ये सारा जहां होगा एक दिन, माँ के होठों पे तबस्सुम को सजाने वाले।

131. तेरे दरबार में आकर ख़ुशी से फूल जाता हूँ गम चाहे कैसा भी हो, मै आकर भूल जाता हूँ बताने बात जो भी आऊ, वही मै भूल जाता हूँ ख़ुशी इतनी मिलती है कि माँगना भूल जाता हूँ |

132. दुआ करो, मैं कोई रास्ता निकाल सकूँ तुम्हें भी देख सकूँ, खुद को भी सम्भाल सकूँ।

133. सबकुछ मिल जाता है दुनिया में मगर, याद रखना की बस माँ-बाप नहीं मिलते, मुरझा कर जो गिर गए एक बार डाली से, ये ऐसे फूल हैं जो फिर नहीं खिलते।

134. हर पल के रिश्ते का वादा हैं तुमसे अपनापन कुछ इतना ज्यादा हैं तुमसे कभी ना सोचना के भूल जायेंगे तुम्हे ज़िन्दगी भर का साथ देंगे ये वादा है तुमसे |

135. क्या बताये अपनी चाहतों का आलम, वो पल ही याद नहीं जिस पल तुझे हम भूले हों।

136. रूह के रिश्तों की ये गहराइयाँ तो देखिये, चोट लगती है हमें और चिल्लाती है माँ, हम खुशियों में माँ को भले ही भूल जायें, जब मुसीबत आ जाए तो याद आती है माँ।

137. किस से सीखू मैं खुदा की बंदगी, सब लोग खुदा के बँटवारे किए बैठे है, जो लोग कहते है खुदा कण कण में है, वही मंदिर, मस्जिद, गुरूद्वारे लिए बैठे हैं |

138. मोहब्बत की दास्ताँ लिखने का हुनर तो आ गया पर महबूब को मनाने में अब भी नाकाम हूँ मैं।

139. सख्त राहों में भी आसान सफ़र लगता है, ये मेरी माँ की दुआओं का असर लगता है।

140. पहले जैसा रंग नहीं है जीवन की रंगोली में, जाने कितना ज़हर भरा है अब लोगों की बोली में |

141. तुम से सदियों की वफाओं का कोई नाता न था, तुम से मिलने की लकीरें थीं मेरे हाथों मे।

142. जब भी कश्ती मेरी सैलाब में आ जाती है, माँ दुआ करती हुई ख्वाब में आ जाती है।

143. क्यों कभी किसी के काबिल न हो सका खुशी में खुद अपनी शामिल न हो सका वो दाखिल होता गया मुझ में हर दफ़ा मैं अपने ही दिल में दाखिल न हो सका।

144. हर पल में प्यार है, हर लम्हे में ख़ुशी है, खो दो तो याद है जी लो तो ज़िन्दगी है।

145. वो लिखा के लायी है किस्मत में जागना, माँ कैसे सो सकेगी कि बेटा सफ़र में है।

146. गणेश जी का रूप निराला हैं चेहरा भी कितना भोला भाला हैं जिसे भी आती हैं कोई मुसीबत उसे इन्ही ने तो संभाला हैं |

147. कोई तीर होता तो, दाग़ देते तेरे दिल पर, कमबख्त मौहब्बत है, जताई भी नही जाती।

148. जरा सी बात है लेकिन हवा को कौन समझाए, कि मेरी माँ दिए से मेरे लिए काजल बनाती है।

149. “जीत” किसके लिए ‘हार’ किसके लिए ‘ज़िंदगी भर’ ये ‘तकरार’ किसके लिए, जो भी ‘आया’ है वो ‘जायेगा’ एक दिन फिर ये इतना “अहंकार” किसके लिए |

150. मुझमें हजार ख़ामियां है माफ किजिए, पर अपने आइने को भी तो कभी साफ किजिए।

151. सीधा साधा भोला भाला मैं ही सब से सच्चा हूँ, कितना भी हो जाऊं बड़ा माँ आज भी तेरा बच्चा हूँ।

152. आदमी ही आदमी को छल रहा है, ये क्रम आज से नही, बरसों से चल रहा है रोज चौराहे पर होता है ” सीताहरण ” जबकि मुद्दतों से ‘रावण’ जल रहा है |

153. कच्चे-रिश्ते, और अधूरा-अपनापन, मेरे हिस्से में आई हैं ऐसी ही सौग़ातें।

154. यूँ तो मैंने बुलन्दियों के हर निशान को छुआ, जब माँ ने गोद में उठाया तो आसमान को छुआ।

155. वो लूट रहे हैं सपनो को मैं चैन से कैसे सो जाऊ वो बेच रहे हैं भारत को मैं खामोश कैसे हो जाऊ |

156. तुमको जब बोझ लगे मेरा साथ तो बता देना, मैं चुपके से तेरी मोहब्बत से मुकर जाऊँगा।

157. अपनी माँ को कभी न देखूँ तो चैन नहीं आता है, दिल न जाने क्यूँ माँ का नाम लेते ही बहल जाता है।

158. कितना कोमल हैं हुस्न उसका ये तो जानता खुदा भी नहीं हमने चाहा हैं उसकी रूह को जिस्म तो कभी चाहा ही नहीं |

159. तुम भी अच्छे तुम्हारी वफ़ा भी अच्छी, बुरे तो हम है जिनका दिल नही लगता तुम्हारे बिना।

160. कभी मुस्कुरा दे तो लगता है जिंदगी मिल गयी मुझको, माँ दुखी हो तो दिल मेरा भी दुखी हो जाता है।

161. बीवी को कही घुमाने जाये तो शादी का एल्बम जेब में रख कर साथ ज़रूर जाये।

162. कीमतें गिर जाती हैं अक्सर खुद की, किसी को कीमती बनाकर अपना बनाने में।

163. गिन लेती है दिन बगैर मेरे गुजारें हैं कितने, भला कैसे कह दूं कि माँ अनपढ़ है मेरी।

164. बेशक पहली प्यार हासिल हो या ना हो पर वो शख्स दिल के कोने मे हमेशा ज़िंदा रहता है|

165. अंधो के शहर में अँधा बन गया तो क्या गिला, शीशे ने पहचाना नहीं तो अपनों से क्या गिला।

166. किसी को घर मिला हिस्से में या कोई दुकान आई, मैं घर में सबसे छोटा था मेरे हिस्से में माँ आई।

167. लोग कहते हैं की लडकिया ज़िन्दगी होती हैं, मौत नहीं मगर वो लोग ये क्यों भूल जाते हैं, धोखा भी ज़िन्दगी ही देती हैं, मौत नहीं |

168. नाराज़ ना होना कभी बस यही एक गुज़ारिश है महकी हुई इन साँसों की साँसों से सिफ़ारिश है।

169. न हिन्दु दिखता था न मुसलमान दिखता था। उसे तो बस इन्सानो मे इन्सान दिखता था। हो ग्ई आज खामोश वो आवाज सदा के लिए । जिसकी बातो मे केवल हिन्दुस्तान दिखता था।

170. खामोशियों में धीमी सी आवाज़ है, तन्हाईयों में भी एक गहरा राज़ है, मिलते नही हैं सबको अच्छे दोस्त यहाँ, आप जो मिले हो हमें खुद पर नाज़ है।

171. नाराज़ ना होना कभी बस यही एक गुज़ारिश है, महकी हुई इन साँसों की साँसों से सिफ़ारिश है।

172. हंसने की इच्छा ना हो, तो भी हंसना पड़ता है, कोई जब पूछे कैसे हो तो मजे में हूँ कहना पड़ता है |

173. यादों के भंवर में एक पल हमारा हो, खिलते चमन में एक गुल हमारा हो, जब याद करें आप अपने दोस्तों को, उन नामों में बस एक नाम हमारा हो।

174. लोग अच्छी ही चीजों को यहाँ ख़राब कहते हैं, दवा है हज़ार ग़मों की उसे शराब कहते हैं।

175. त्याग दो सब ख्वाहिशें कुछ अलग करने के लिए ‘राम’ ने खोया बहुत कुछ ‘श्री राम’ बनने के लिए |

176. तूफानों की दुश्मनी से न बचते तो खैर थी, साहिल से दोस्तों के भरम ने डुबो दिया।

177. कभी मिले फुर्सत तो इतना जरुर बताना, *वो कौनसी मुहोब्बत थी जो हम तुम्हे ना दे सक।

178. मेरे दिल में एक धड़कन तेरी है उस धड़कन कि क़सम तू ज़िन्दगी मेरी है मेरी एक साँस में एक साँस तेरी है वो साँस जो रूक जाये तो मौत मेरी है |

179. दोस्ती किस से न थी किस से मुझे प्यार न था, जब बुरे वक़्त पे देखा तो कोई यार न था।

180. न जाने रूठ के बैठा है दिल का चैन कहाँ, मिले तो उस को हमारा कोई सलाम कहे।

181. कैसे बयान करे आलम दिल की बेबसी का, वो क्या समझे दर्द आंखों की नमी का ऊनके चाहने वाले ईतने हो गये की उन्हे एहसास नहीं हमारी कमी का |

182. जो दिल के हो करीब उसे रुसवा नहीं करते, यूँ अपनी दोस्ती का तमाशा नहीं करते, खामोश रहोगे तो घुटन और बढ़ेगी, अपनों से कोई बात छुपाया नहीं करते।

183. ऐ दिल अब छोड़ भी दे उसे याद करना, वो कलमा नही जो तू भूल गया तो काफिर हो जायेगा।

184. हार जाउँगा मुकदमा उस अदालत में, ये मुझे यकीन था जहाँ वक्त बन बैठा जज और नसीब मेरा वकील था |

185. एहसास बहुत होगा जब छोड़ के जाएंगे, रोयेंगे बहुत मगर आँसू नहीं आएँगे, जब साथ कोई ना दे तो आवाज़ हमें देना, आसमान पर होंगे तो भी लौट के आएंगे।

186. वो किसी की खातिर मुझे भूल भी गया तो कोई बात नहीं, हम भी तो भूल गये थे सारा ज़माना उस की खातिर।

187. किसी ने खूब कहा है: ऐ चाँद तू किस मजहब का है | ईद भी तेरी और करवाचौथ भी तेरा |

188. देखी जो नब्ज मेरी तो हँस कर बोला हकीम, तेरे मर्ज़ का इलाज महफ़िल है तेरे दोस्तों की।

189. होठों पे मुस्कान थी कंधो पे बस्ता था, सुकून के मामले में वो जमाना सस्ता था।

190. मोहब्बत ज़िन्दगी के फैसलों से लड़ नहीं सकती, किसी को खोना पड़ता है, तो किसी को न चाहते हुऐ भी, उसी का होकर रहना पड़ता है |

191. आपकी हमारी दोस्ती सुरों का साज है, आप जैसे दोस्त पर हमें नाज़ है, अब चाहे कुछ भी हो जाये जिंदगी में, दोस्ती वैसे ही रहेगी जैसे आज है।

192. हमारी चर्चा छोडो दोस्तों, हम ऐसे लोग है जिन्हें, नफरत कुछ नहीं कहती और मोहब्बत मार डालती है।

193. करनी है खुदा से गुजारिश, तेरी के सिवा कोई बंदगी न मिले, हर जनम में मिले दोस्त तेरे जैसा, या फिर कभी जिंदगी न मिले।

194. जाम तो यू ही बदनाम है यारों कभी इश्क करके देखो या तो पीना भूल जाओगे या फिर पी-पी के जीना भूल जाओगे |

195. बहुत कमजोर निकला तु तो ए दिल, और तुझे लेकर मैं दुनिया संभालने निकला था।

196. तुम सदा मुस्कुराते रहो ये तमन्ना है हमारी, हर दुआ में माँगी है बस खुशी तुम्हारी, तुम सारी दुनिया को दोस्त बना कर देख लो, फ़िर भी महसूस करोगे कमी हमारी।

197. अब के सावन में सबका हिसाब कर दूंगा जिसका जो वाकी है वो भी हिसाब कर दूंगा और मुझे इस गिलास में ही कैद रख वरना पूरे शहर का पानी शराब कर दूंगा |

198. किस किस से वफ़ा के वादे कर रखे हैं तूने, हर रोज़ एक नया शख्स मुझसे तेरा नाम पूछता है।

199. साथ अगर दोगे तो मुस्कुराएंगे ज़रूर, प्यार अगर दिल से करोगे तो निभाएंगे ज़रूर, कितने भी काँटे क्यों ना हों दोस्ती की राहों में, आवाज़ अगर दिल से दोगे तो आएंगे ज़रूर।

200. कुछ तो शराफत सीख ले इश्क शराब से बोतल पे लिखा तो है मैं जानलेवा हूँ |

201. मुझे किसी के बदल जाने का कोई गम नही, बस कोई था जिससे ये उम्मीद नही थी।

202. दिए तो आँधी में भी जला करते हैं, गुलाब तो काँटो में भी खिला करते हैं, खुशनसीब बहुत होती है वो शाम, दोस्त आप जैसे जब मिला करते हैं।

203. चुप चाप चल रहे थे अपनी मंज़िल की ओर फिर ठेके पर नज़र पड़ी और गुमराह से हो गये हम |

204. तरस आता है मुझे अपनी मासूम सी पलकों पर, जब भीग कर कहती है की अब रोया नहीं जाता।

205. गुनाह करके सजा से डरते है, ज़हर पी के दवा से डरते है, दुश्मनो के सितम का खौफ नहीं हमे, हम दोस्तों के खफा होने से डरते है।

206. तन्हाई में भी कहते है लोग जरा महफ़िल में जिया करो पैमाना लेके बिठा देते है मैखाने में और कहते है जरा तुम कम पिया करो |

207. तारे और इंसान में कोई फर्क नहीं होता, दोनो ही किसी की ख़ुशी के लिऐ खुद को तोड़ लेते हैं।

208. एक रात रब ने मेरे दिल से पूछा, तू दोस्ती में इतना क्यूँ खोया है? दिल बोला दोस्तों ने ही दी हैं सारी खुशियाँ, वरना प्यार करके तो दिल हमेशा रोया है।

209. तेरी यादों को अपने सीने से लगा लेता हूँ और शाम होते ही मैं दो जाम लगा लेता हूँ |

210. अपनी रातें उनके लिए ख़राब करना छोड़ दो दोस्तों, जिनको ये भी परवाह नहीं की तुम सुबह उठोगे भी या नहीं।

211. चंद लम्हों की जिंदगानी है, नफरतों से जिया नहीं करते, दुश्मनों से गुजारिश करनी पड़ेगी, दोस्त तो अब याद किया नहीं करते।

212. नशा हम किया करते है इलज़ाम शराब को दिया करते है कसूर शराब का नहीं उनका है जिनका चहेरा हम जाम मै तलाश किया करते है |

213. खूबसूरती का तो हर कोई आशिक होता है, किसी को खूबसूरत बनाकर इश्क किया जाय तो क्या बात है।

214. इश्क़ और दोस्ती मेरी ज़िन्दगी के दो जहाँ है, इश्क़ मेरा रूह तो दोस्ती मेरा ईमान है, इश्क़ पे कर दूँ फ़िदा अपनी सारी ज़िन्दगी, मगर दोस्ती पे तो मेरा इश्क़ भी कुर्बान है।

215. रख ले 2-4 बोतल कफ़न में साथ बैठ कर पिया करेंगे जब माँगे गा हिसाब गुनाहों का एक पेग उससे भी दे दिया करेंगे |

216. ज़र्रा ज़र्रा बिखर गया तेरी याद में,कतरा कतरा ही सही दर्द में मोहलत दे दे।

217. तेरी आँखों से यून तो सागर भी पिए हैं मैने तुझे क्या खबर जुदाई के दिन कैसे जिए हैं मैने |

218. हम तुम्हारी याद में रो-रो के टब भर दिए, तुम इतने बेवफा निकले कि नहाकर चल दिए।

219. किसी टूटे हुए मकान की तरह हो गया है ये दिल, कोई रहता भी नहीं और कमबख्त बिकता भी नहीं।

220. शराब चीज़ ही ऐसी है ना छोडी जाए ये मेरे यार के जैसी है ना छोडी जाए |

221. मोहब्बत के खर्चों की बड़ी लंबी कहानी है, कभी फिल्म दिखानी है तो कभी शॉपिंग करानी है, मास्टर रोज कहता है कहाँ हैं फीस के पैसे? उसे कैसे समझाऊँ कि मुझे छोरी पटानी है|

222. उठा लो दुपट्टे को ज़मीन से कहीं दाग़ न लग जाए, पर्दे में रखो चेहरे को कहीं आग न लग जाए।

223. हम तो जी रहे थे उनका नाम लेकर वो गुज़रते थे हमारा सलाम लेकर कल वो कह गये भुला दो हुमको हमने पुछा कैसे वो चले गये हाथो मे जाम देकर |

224. हसीना से मिलें नजरें अट्रैक्शन हो भी सकता है, चढ़े फीवर मोहब्बत का तो एक्शन हो भी सकता है, हसीनों को मुसीबत तुम समझ कर दूर ही रहना, ये अंग्रेजी दवाएं हैं रिएक्शन हो भी सकता है।

225. कुछ यूँ उतर गए हो मेरी रग-रग में तुम, कि खुद से पहले एहसास तुम्हारा होता है।

226. हर रोज़ पीता हूँ तेरे छोड़ जाने के ग़म में वर्ना पीने का मुझे भी कोई शौंक नहीं बहुत याद आते है तेरे साथ बीताये हुये लम्हें वर्ना मर मर के जीने का मुझे भी कोई शौंक नहीं |

227. चिरागों में इतना नूर ना होता, तो तनहा दिल मजबूर ना होता, हम आपसे मिलने जरूर आते, अगर आपका घर इतना दूर ना होता।

228. प्यार आज भी तुझ से उतना ही है बस, तुझे एहसास नही और हमने जताना भी छोड़ दिया।

229. देवदास की तरह जान मत दो यारो प्यार को लात मारो मेरी बात मानो ना चंद्रमुखी ना पारो रोज़ रात एक स्ट्रॉंग बियर मारो और चैन से ज़िंदगी गुजारो |

230. ये बारिश का मौसम बहुत तड़पाता है, वो बस मुझे ही दिल से चाहता है, लेकिन वो मिलने आए भी तो कैसे…? उसके पास न रेनकोट है और ना छाता है।

231. इतना दिल से ना लगाया करो मेरी बातो को, कोई बात दिल में रह गई तो हमे भुला नहीं पाओगे।

232. जाम पे जाम पीने से क्या फायदा दोस्तों रात को पी हुयी शराब सुबह उतर जाएगी अरे पीना है तो दो बूंद बेवफा के पी के देख सारी उमर नशे में गुज़र जाएगी |

233. ताज महल क्या चीज है हम इससे भी अच्छी इमारत बनवा देंगे, शाहजहां ने मुमताज़ को मुर्दा दफनाया था, हम तुझे ज़िंदा ही दफना देंगे।

234. मुझे तेरा साथ जिंदगीभर नहीं चाहिये, बल्कि जब तक तु साथ है तब तक जिंदगी चाहिये।

235. महफ़िल में इस कदर पीने का दौर था हमको पिलाने के लिए सबका जोर था पी गए हम इतनी यारो के कहने पर न अपना गौर था न ज़माने का गौर था |

236. कहते हैं कि प्यार की राहों पे चलना आसान नहीं, मैंने भी कल चल के देखा मुझे ताे रास्ता ठीक ही लगा।

237. आइना और दिल वैसे तो दोनो ही बडे नाज़ुक होते है लेकिन, आइने मे तो सभी दिखते है और दिल मे सिर्फ अपने दिखते है।

238. लोगों ने कहा की मैं शराबी हूँ मैने कहा उन्हो ने आँखों से पिलाइ है लोगों ने कहा की मैं आशिक़ हूँ मैने कहा आशिक़ी उन्हो ने सिखाई है लोगों ने कहा राहुल तू शायर दीवाना है मैने कहा उनकी मोहब्बत रंग लाई है |

239. ऐ दोस्त व्हिस्की को कफ़न में बांध ला, कब्र में बैठ कर पिया करेंगे, इन लड़कियो से मिला है धोखा चुड़ैलों से सेटिंग किया करेंगे।

240. दो मुलाकात क्या हुई हमारी तुम्हारी, निगरानी में सारा शहर लग गया।

241. पानी में विस्की मिलाओ तो नशा चड़ता है पानी में रम मिलाओ तो नशा चड़ता है पानी में ब्रेंड़ी मिलाओ तो नशा चड़ता है साला पानी में ही कुछ गड़बड़ है |

242. मुस्कुराना तो हर लड़की की अदा है जो इसे प्यार समझे वो सबसे बड़ा गधा है।

243. अपने खिलाफ बाते खामोशी से सुन लो, यकीन मानो वक्त बेहतरीन जवाब देगा।

244. जाने कभी गुलाब लगती हे जाने कभी शबाब लगती हे तेरी आखें ही हमें बहारों का ख्बाब लगती हे में पिए रहु या न पिए रहु लड़खड़ाकर ही चलता हु क्योकि तेरी गली कि हवा ही मुझे शराब लगती हे |

245. अंधकार के घोर तिमिर में हॅसने के बाद रुलाती है, तन्हाई और गम है साथ ये जिंदगी भी तड़पाती है, मेरी हालत भी मुझसे जलती और रूठ जाती है, जब आइंस्टीन और न्यूटन संग याद तुम्हारी आती है।

246. वक़्त को भी हुआ है ज़रूर किसी से इश्क़, जो वो बेचैन है इतना कि ठहरता ही नहीं।

247. बैठे हैं दिल में ये अरमां जगाये के वो आज नजरों से अपनी पिलाये मजा तो तब ही पीने का यारो इधर हम पियें और नशा उनको आये |

248. एक बेवफा की याद में हम कुछ ख़ास हो गए, पहले हम लोटा थे पर अब गिलास हो गए।

249. बडी लम्बी खामोशी से गुजरा हूँ मै, किसी से कुछ कहने की कोशिश मे।

250. तेरा दिल उदास क्यों है तेरी आँखों में प्यास क्यों है जो छोड़ गया तुझे मझदार में उससे मिलने की आस क्यों है जो दे गया दर्द ज़िन्दगी भर का वही तेरे लिए ख़ास क्यों है |

251. नखरे आपके तौबा-तौबा गजब आपका स्टाईल है, मैसेज तो आप कभी करते नहीं, बस हल्ला मचा रखा है कि हमारे पास भी मोबाईल है।

252. नींद सोती रहती है हमारे बिस्तर पे, और हम टहलते रहते हैं तेरी यादों में।

253. आप को इस दिल में उतार लेने को जी चाहता है खूबसूरत से फूलो में डूब जाने को जी चाहता है आपका साथ पाकर हम भूल गए सब मैखाने क्योकि उन मैखानो में भी आपका ही चेहरा नज़र आता है |

254. इस क़दर था खटमलों का चारपाई में हुजूम, वस्ल का दिल से मेरे अरमान रुख़्सत हो गया।

255. उड़ जायेंगे तस्वीरों से रंगो की तरह हम, वक़्त की टहनी पर हैं परिंदो की तरह हम।वक़्त की टहनी पर हैं परिंदो की तरह हम।

256. रात गुमसूँ है मगर चेन खामोश नही कैसे कहदू आज फिर होश नही ऐसा डूबा तेरी आखो की गहराई मैं हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही |

257. ये मोहब्बत नहीं, उसूल-ए-वफ़ा है ऐ दोस्त, हम जान तो दे देंगे जान का नंबर नहीं देंगे।

258. तुम्हें गुमां है कि मैं जानता नहीं कुछ भी, मुझे ख़बर है कि रस्ता बदल रहे हो तुम।

259. मैं तोड़ लेता अगर तू गुलाब होती मैं जवाब बनता अगर तू सबाल होती सब जानते है मैं नशा नही करता मगर मैं भी पी लेता अगर तू शराब होती |

260. इश्क का जिसको ख्वाब आ जाता है, समझो उसका वक़्त खराब आ जाता है, महबूब आये या न आये, पर तारे गिनने का हिसाब आ जाता है।

261. टूटे हुए दिल भी धड़कते है उम्र भर, चाहे किसी की याद में या फिर किसी फ़रियाद में।

262. हमें बेहोश कर साक़ी, पिला भी कुछ नहीं हमको करम भी कुछ नहीं हमको, सिला भी कुछ नहीं हमको मोहब्बत ने लिया है सब, मोहब्बत ने दिया है सब मिला भी कुछ नहीं हमको, गिला भी कुछ नहीं हमको |

263. कितना शरीफ शख्श है वीवी पे फ़िदा है, उस पे ये कमाल है कि अपनी पे फ़िदा है।

264. अगर तुमसे कोई पूछे बताओ ज़िन्दगी क्या है, हथेली पर जरा सी राख़ रखना और उड़ा देना।

265. दिल दो किसी एक को और वो भी किसी नेक को, मंदिर का प्रसाद नहीं जो बांट दो हर एक को।

266. अब आयें या न आयें इधर पूछते चलो, क्या चाहती है उनकी नजर पूछते चलो, हमसे अगर है तर्क-ए-ताल्लुक तो क्या हुआ, यारो कोई तो उनकी खबर पूछते चलो।

267. नहीं ‘मालूम ‘हसरत है या तू मेरी मोहब्बत है, बस इतना जानता हूं कि मुझको तेरी जरूरत है।

268. रहता है इबादत में हमें मौत का खटका, हम याद ख़ुदा करते हैं कर ले न ख़ुदा याद।

269. खोकर हमें फिर पा न सकोगे, जहाँ हम होंगे वह आ न सकोगे, हरपल हमें महसूस तो करोगे लेकिन पर हम होंगे वहां जहाँ से हमें फिर बुला न सकोगे।

270. बात वफ़ाओ की होती, तो कभी न हारते, बात नसीब की थी, कुछ ना कर सके।

271. वो आज भी हमें देख कर मुस्कुराते हैं, वो आज भी हमें देख कर मुस्कुराते हैं, ये तो उनके बच्चे ही कम्बख्त हैं, जो हमें मामा-मामा बुलाते है।

272. मौसम को मौसम की बहारों ने लूटा, हमें तो कश्ती ने नहीं किनारों ने लूटा, आप तो डर गए हमारी एक ही अदा से, हमें आपकी कसम देकर हजारों ने लूटा।

273. हर पल में प्यार है हर लम्हे में ख़ुशी है, खो दो तो याद है जी लो तो ज़िन्दगी है।

274. दिल दो किसी एक को, वो भी किसी नेक को, जब तक मिल ना जाए कोई, ट्राई करते रहो हर एक को।

275. ज़िंदा रहे तो क्या है जो मर जाएं हम तो क्या, दुनिया से खामोशी से गुजर जाएं हम तो क्या, हस्ती ही अपनी क्या है इस ज़माने के सामने, एक ख्वाब हैं जहान में बिखर जायें हम तो क्या।

276. बहुत दूर है तुम्हारे घर से हमारे घर का किनारा, पर हम हवा के हर झोंके से पूछ लेते हैं क्या हाल है तुम्हारा।

277. तारीफ के काबिल हम कहाँ, चर्चा तो आपकी चलती है, सब कुछ तो है आपके पास, बस सींग और पूंछ की कमी खलती है।

278. चाहत की राह में बिखरे अरमान बहुत हैं, हम उसकी याद में परेशान बहुत हैं, वो हर बार दिल तोड़ता है ये कह कर, मेरी उम्मीदों के अभी मुकाम बहुत हैं।

279. निगाहें नाज करती है फलक के आशियाने से, खुदा भी रूठ जाता है किसी का दिल दुखाने से।

280. आसमान जितना नीला है, सूरजमुखी जितना पिला है, पानी जितना गीला है, आपका स्क्रू उतना ही ढीला है।

281. प्यास दिल की बुझाने वो कभी आया भी नहीं, कैसा बादल है जिसका कोई साया भी नहीं, बेरुखी इससे बड़ी और भला क्या होगी, एक मुद्दत से हमें उसने सताया भी नहीं।

282. यूं तो तेरी महफिल में हमे चाहने वालो की कमी नहीं, पर हम तुझे चाहने में कोई खता करें ये भी तो हमें गवारा नही।

283. ऐ खुदा हिचकियों में कुछ तो फर्क डाला होता अब कैसे पता करूँ कि कौनसी वाली याद कर रही है|

284. हमने भी कभी चाहा था एक ऐसे शख्स को, जो था आइने से नाज़ुक मगर था संगदिल।

285. चलो फ़िर से हौले से मुस्कुराते हैं, बिना माचिस के ही लोगों को जलाते हैं।

286. उम्र की राह में जज्बात बदल जाते है, वक़्त की आंधी में हालात बदल जाते है, सोचता हूं काम कर-कर के रिकॉर्ड तोड़ दूं, कमबख्त सैलेरी देख के ख्यालात बदल जाते हैं।

287. दुनिया ने हम पे जब कोई इल्जाम रख दिया, हमने मुकाबिल उसके तेरा नाम रख दिया, इक ख़ास हद पे आ गई जब तेरी बेरुखी, नाम उसका हमने गर्दिशे-अय्याम रख दिया।

288. भरोसा क्या करना गैरों पर, जब गिरना और चलना है अपने ही पैरों पर।

289. इससे ज्यादा दुश्मनी की इन्तहा क्या होगी ग़ालिब टोयलेट की टंकी में कोई बर्फ डाल गया।

290. गजब का प्यार था उसकी उदास आँखो में, महसूस तक ना होने दिया कि वो छोड़ने वाला है।

291. ये सर्द शामें भी किस कदर ज़ालिम है, बहुत सर्द होती है, मगर इनमें दिल सुलगता है।

292. तुम्हारा साया बन कर ताउम्र तुम्हारा साथ निभायेंगे, हर एक कदम तुम्हारी राहों को फूलों से सजायेंगे, अगर मौत ने जुदा कर भी दिया हमें तुमसे, तो तुम्हारी खिड़की के सामने वाले पेड़ पर, प्रेत बन कर उलटे लटक जायेंगे।

293. बहुत चाहा उसको जिसे हम पा न सके, ख्यालों में किसी और को हम ला न सके, उसको देखकर आँसू तो पोंछ लिए, लेकिन किसी और को देखकर हम मुस्कुरा न सके।

294. तोड़ा कुछ इस अदा से तालुक़ उस ने ग़ालिब, कि सारी उम्र हम अपना क़सूर ढूँढ़ते रहे।

295. जुल्फों में फूलों को सजा के आयी, चेहरे से दुपट्टा उठा के आयी, किसी ने पूछा आज बड़ी खुबसूरत लग रही है, हमने कहा शायद आज नहा के आयी।

296. तेरी ये रेशमी ज़ुल्फ़ें हैं एक जंजीर के टुकड़े, मेरी नस-नस में बसे है तेरी तस्वीर के टुकड़े, अगर यकीन ना आये तो दिल चीर के दिखा दूँ, मेरे दिल से भी निकलेंगे तेरी तस्वीर के टुकड़े।

297. उसकी आंखे इतनी गहरी थी की, तैरना तो आता था मगर डूब जाना अच्छा लगा।

298. हम भी जान-ए-मन तेरे लिए ताजमहल बनायेंगे, अर्ज़ किया है, हम भी जान-ए-मन तेरे लिए ताजमहल बनायेंगे, एक कप सुबह पिलायेंगे और एक कप शाम को पिलायेंगे।

299. मुझसे नजरें तो मिलाओ कि हजारों चेहरे, मेरी आँखों में सुलगते हैं सवालों की तरह, जुस्तजू ने किसी मंजिल पे ठहरने न दिया, हम भटकते रहे आवारा ख्यालों की तरह।

300. खोजती है निग़ाहें उस चेहरे को, याद में जिसकी सुबह हो जाती है।

301. उस की ‪गली‬ से गुजरे तो उसकी ‪रँगोली‬ भी देख आए, ‪‎गजब‬ की बनाती है हमें तो लगा था बस ‪‎मुँह‬ बनाना आता होगा।‬‬‬‬‬‬‬‬

302. चलो अच्छा हुआ काम आ गयी दीवानगी अपनी, वरना हम ज़माने भर को समझाने कहाँ जाते।

303. चलो हो गयी रात अब फिर, दिल के किसी कोने में उसकी याद उमड़ आएगी।

304. आशिक पागल हो जाते हैं प्यार में, बाकी कसर पूरी हो जाती है इंतज़ार में, मगर ये दिलरुबा नहीं समझती, वो तो गोल गप्पे और पपड़ी खाती फिरती है बाज़ार में ।

305. मुझे वो छोड़ गया ये कमाल है उस का, इरादा मैंने किया था कि छोड़ दूँगा उसे।

306. खेलना अच्छा नहीं किसी के नाज़ुक दिल से, दर्द जान जाओगे जब कोई खेलेगा तुम्हारे दिल से।

307. हमसे मोहब्बत का दिखावा न किया कर, हमे मालुम है तेरे वफा की डिगरी फर्जी है ।

308. जिंदगी जैसी एक हसीं शै को, चंद ख्वाबों ने कर दिया बरबाद, कुछ हसीनों ने कर दिया घायल, कुछ शराबों ने कर दिया बरबाद।

309. ये नज़र चुराने की आदत आज भी नहीं बदली उनकी, कभी मेरे लिए ज़माने से और अब ज़माने के लिए हमसे।

310. वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो, ज़रा गौर फरमाइये वो कहती अपने भाइयों से, मेरे आशिक़ को यूँ ना पीटो, बड़ा ज़िद्दी है ये कमीना, पहले कुत्ते की तरह घसीटो।

311. जरा-सा झूठ ही लिख दो कि तुम बिन दिल नहीं लगता, हमारा दिल बहल जाए तो तुम फिर से मुकर जाना।

312. ज़माने में बस ये दो हादसे नही होते, हम तुमसे जुदा, तुम हमारे नही होते।

313. लड़कियों से प्यार न करना क्योंकि, दिखती हैं हीर की तरह, लगती हैं खीर की तरह, दिल में चुभती हैं तीर की तरह, और छोड़ जाती हैं फकीर की तरह ।

314. तुम अगर याद रखोगे तो इनायत होगी, वरना हमको कहाँ तुम से शिकायत होगी, ये तो बेवफा लोगों की दुनिया है, तुम अगर भूल भी जाओ तो रिवायत होगी।

315. क़लम जब तुमको लिखती है, दख़ल-अंदाजी फ़िर हम नहीं करते।

316. मोहब्बत न सही मुक़दमा ही कर दे तारीख दर तारीख मुलाकात तो होगी ।

317. मालूम था कि मेरी साँसे मेरी ना थीं कभी, बस इक शौक था उसके साथ जीने का।

318. तेरी याद में मेरी कलम भी रो पड़ी तू ही बता, मैं कैसे कह दूं कि मुझे तुझसे मोहब्बत नहीं।

319. तेरा प्यार भी हजार की नोट जैसा है, डर लगता है कहीं नकली तो नहीं ।

320. तेरी आँखों में सच्चाई की एक राह दिखाई देती है, तू है मोहब्बत का दीवाना ऐसी चाह दिखाई देती है, माना कि ठोकर खाई है जमाने में बेवफाओं से, पर तू आशिक है तुझमें मोहब्बत की चाह दिखाई देती है।

321. नहीं फुर्सत यकीं मानो हमें कुछ और करने की, तेरी यादें, तेरी बातें बहुत मसरूफ़ रखती है।

322. रोया है फ़ुर्सत से कोई मेरी तरह सारी रात यकीनन, वर्ना रुख़सत-ए- मार्च में यहाँ बरसात नहीं होती।

323. मेरी यादें, मेरा चेहरा, मेरी बातें रुलायेंगी, हिज़्र के दौर में, गुज़री मुलाकातें रुलायेंगी, दिन तो चलो तुम काट भी लोगे फसानों में, जहाँ तन्हा रहोगे तुम, तुम्हें रातें रुलायेंगी।

324. मुझे भी पता है कि तुम मेरी नहीं हो, इस बात का बार बार एहसास मत दिलाया करों।

325. न वफा का जिकर होगा, न वफा कि बात होगी, अब मोहब्बत जिससे भी होगी, गेहूँ काटने के बाद होगी।

326. वो मेरा हमसफर भी था वो मेरा राहगुजर भी था, मंजिलें ही एक न थीं, दरमियाँ ये फासला भी था।

327. रब ना करें इश्क़ की कमी किसी को सताए, प्यार करो उसी से जो तुम्हें, दिल की हर बात बताये।

328. जेलर- सुना है की तुम शायर हो कुछ सुनाओ यार कैदी- गम ए उल्फत मे जो जिन्दगी कटी हमारी, जिस दिन जमानत हुई जिन्दगी खतम तुम्हारी ।

329. किसी का यूँ तो हुआ कौन उम्र भर फिर भी, ये हुस्न ओ इश्क़ तो धोखा है सब मगर फिर भी।

330. कोई मजबूरी होगी जो वो याद नहीं करते, सम्भल जा ऐ दिल तुझे तो रोने का बहाना चाहिए।

331. तुझे पाने के लिये कुछ भी कर सकता हूँ, तेरे प्यार मे जी तो क्या मर भी सकता हूँ, फिर भी तू नही मिली तो मुझे कोई गम नही, ये तरीका किसी दूसरी पर भी सेट कर सकता हूँ।

332. ऐसा तल्ख़ जवाबे-वफ़ा पहली ही दफा मिला, हम इस के बाद फिर कोई अरमां न कर सके।

333. तुझे बर्बाद कर दूँगी, अभी भी लौट जा वापिस, मोहब्बत नाम है मेरा मुझे क़ातिल भी कहते हैं।

334. आपकी सूरत मेरे दिल में ऐसे बस गयी है, जैसे छोटे से दरवाजे में भैंस फंस गयी है।

335. इतना तो ज़िंदगी में, न किसी की खलल पड़े, हँसने से हो सुकून, न रोने से कल पड़े, मुद्दत के बाद उसने, जो की लुत्फ़ की निगाह, जी खुश तो हो गया, मगर आँसू निकल पड़े।

336. दोस्ती का फर्ज इस तरह निभाया जायेँ, अगर रहीम रहेँ भूँखा तो राम से भी ना खाया जायेँ।

337. आँखों से आसुओं की विदाई कर दो, दिल से ग़मों की जुदाई कर दो, गर फिर भी दिल न लगे कही, तो मेरे घर की पुताई कर दो।

338. बहुत लहरों को पकड़ा डूबने वाले के हाथों ने, यही बस एक दरिया का नजारा याद रहता है, मैं किस तेजी से जिन्दा हूँ मैं ये तो भूल जाता हूँ, नहीं आना है दुनिया में दोबारा याद रहता है।

339. महफ़िल में कई शायर है तो सुनाओ, हमे वो शायरी जो दिल के आर पार हो जाये।

340. है हसरत कि हो ऐलान एक दिन, कि हजरात-ए-इश्क इन्तेकाल कर गए ।

341. देखी है बेरुखी की आज हम ने इन्तेहाँ, हमपे नजर पड़ी तो वो महफ़िल से उठ गए।

342. जिसका ये ऐलान है कि वो मज़े में है, या तो वो फ़कीर है या फिर नशे में है।

343. मोहब्बत हमने उसी दिन छोड़ दी थी ग़ालिब जब उसने कहा था कि पप्पियों के पैसे अलग और झप्पियों के अलग।

344. छोंड़ गए हमको वो अकेले ही राहों में, चल दिए रहने वो गैर की पनाहों में, शायद मेरी चाहत उन्हें रास नहीं आयी, तभी तो सिमट गए वो औरों की बाँहों में।

345. इश्क न हुआ कोहरा हो जैसे, तुम्हारे सिवा कुछ दिखता ही नहीं।

346. मेरी सांसो में जो समाया बहुत लगता है, वही शख्स मुझे पराया भी बहुत लगता है, उनसे मिलने की तमन्ना तो बहुत है मगर, आने-जाने में किराया ही बहुत लगता है।

347. जो आँसू दिल में गिरते हैं वो आँखों में नहीं रहते, बहुत से हर्फ़ वो होते हैं जो लफ़्ज़ों में नहीं रहते, किताबों में लिखे जाते हैं दुनिया भर के अफ़साने, मगर जिन में हकीकत हो किताबों में नहीं रहते।

348. एक हसरत थी की कभी वो भी हमे मनाये, पर ये कम्ब्खत दिल कभी उनसे रूठा ही नही।

349. निगाहें आज भी उस शख्स को शिद्दत से तलाश करती हैं, जिसने कहा था “बस दसवी कर लो, आगे पढ़ाई आसान है ।

350. किस्मत बुरी या मैं बुरा ये फैसला न हो सका, मैं हर किसी का हो गया कोई मेरा न हो सका।

351. अधूरा ही रह जाता है हर अल्फाज, मेरी शायरी का तेरे अहसास की खुश्बू के बिना।

352. झूठे वादों पर थी अपनी जिंदगी, अब तो वो भी आसरा जाता रहा।

353. तमन्नाओं के ये दिए जलते रहेंगे, मेरी आँखों से आँसू निकलते रहेंगे, आप शमां बनके दिल में रौशनी तो करो, हम तो मोम बनकर पिघलते रहेंगे।

354. कभी मैं तो कभी ये बात बदल रही है, कमबख्त नींद से मेरी लड़ाई चल रही है।

355. याद जब आती है तुम्हारी तो सिहर जाता हूँ मैं, देख कर साया तुम्हारा अब तो डर जाता हूँ मैं, अब न पाने की तमन्ना है न है खोने का डर, जाने क्यूँ अपनी ही चाहत से मुकर जाता हूँ मैं।

356. प्यार का बदला कभी चुका न सकेंगे, चाह कर भी आपको भुला न सकेंगे, तुम ही हो मेरे लबों की हँसी तुमसे बिछड़े तो फिर मुस्कुरा न सकेंगे।

357. दिल अधूरी सी कहानियों का अंत ढूंढता रहा, और वो कोरा पन्ना मुझे देर तक घूरता रहा।

358. मैं उसके चेहरे को दिल से उतार देता हूँ, मैं कभी कभी तो खुद को भी मार देता हूँ।

359. किसी मोड़ पर तेरा दीदार हो जाये, काश तुझे मुझ पर ऐतबार हो जाये, तेरी पलकें झुके और इकरार हो जाये, काश तुझे भी मुझसे प्यार हो जाये।

360. जिस्म से रूह तक जाए तो हकीकत है इश्क, और रूह से रूह तक जाए तो इबादत है इश्क़।

361. अब भला छोड़ के घर क्या करते, शाम के वक्त हम सफ़र क्या करते, इश्क ने सारे सलीके बख्शे हमें, हुस्न से कस्बेहुनर क्या करते।

362. भंवर से निकलकर किनारा मिला है, जीने को फिर से एक सहारा मिला है, बहुत कशमकश में थी ये ज़िंदगी मेरी, उस ज़िंदगी में अब साथ तुम्हारा मिला है।

363. शक होता है जिनको अपने मर्द होने पर शायद वो ही मासूमों पर मर्दानगी आजमाते हैं।

364. मोहब्बत खूबसूरत होगी किसी और दुनियाँ में, इधर तो हम पर जो गुजरी है हम ही जानते हैं।

365. ज़िन्दगी से यही गिला है मुझे, तू बहुत देर से मिला है मुझे, तू मोहब्बत से कोई चाल तो चल, हार जाने का हौसला है मुझे।

366. ये इश्क है जनाब यहा इंसान निखरता भी, कमाल का है और बिखरता भी कमाल का है।

367. शायद ये वक़्त हमसे कोई चाल चल गया, रिश्ता वफ़ा का और ही रंगों में ढल गया, अश्क़ों की चाँदनी से थी बेहतर वो धूप ही, चलो उसी मोड़ से शुरू करें फिर से जिंदगी।

368. मेरे दिल ने जब भी कभी कोई दुआ माँगी है, हर दुआ में बस तेरी ही वफ़ा माँगी है, जिस प्यार को देख कर जलते हैं यह दुनिया वाले, तेरी मोहब्बत करने की बस वो एक अदा माँगी है।

369. कितने ही दिल तोड़ती है ये फरवरी, यूं ही नही बनाने वाले ने इसके दिन घटाये होंगे।

370. उनकी एक नज़र को हम तरसते रहेंगे, ये आंसू हर पल यूँही बरसते रहेंगे, कभी बीते थे कुछ पल उनके साथ, बस यही सोच कर हम हँसते रहेंगे।

371. राह में संग चलूँ ये न गँवारा उसको, दूर रहकर वो करता है इशारे बहुत, नाम तेरा कभी आने न दिया होंठों पर, यूँ तेरे जिक्र से शेर सँवारे हैं बहुत।

372. हाल यह है के तेरी याद में गम हूँ, सब को मेरी और मझे को तेरी पड़ी रहती है।

373. वक़्त तो दो ही कठिन गुजरे है सारी उम्र में, इक तेरे आने के पहले इक तेरे जाने के बाद।

374. दिल पे आए हुए इल्ज़ाम से पहचानते हैं, लोग अब मुझ को तेरे नाम से पहचानते हैं।

375. सच कहू तो में आज भी इस सोच में गुम हूँ, में तुम्हे जीत तो सकता था जाने हरा क्यों।

376. न हाथ थाम सके और न पकड़ सके दामन, बहुत ही क़रीब से गुज़र कर बिछड़ गया कोई।

377. नजर से क्यूँ जलाते हो आग चाहत की, जलाकर क्यूँ बुझाते हो आग चाहत की, सर्द रातों में भी तपन का एहसास रहे, हवा देकर बढ़ाते हो आग चाहत की।

378. हाथ पर हाथ रखा उसने तो मालुम हुआ, अनकही बात को किस तरह सुना जाता है।

379. यूँ बदल जाते है मौसम हमें मालूम न था, प्यार है प्यार का मातम हमें मालूम न था, इस मोहब्बत में यहाँ किसका भला होना है, हर मुलाक़ात की किस्मत में जुदा होना है।

380. उसके लिये तो मैंने यहाँ तक दुआएं की है, कि कोई उसे चाहे भी तो बस मेरी तरह चाहे।

381. जिंदगी में कुछ ऐसे लोग भी मिलते है, जिन्हें हम पा नहीं सकते सिर्फ चाह सकते हैं।

382. वैसे ही दिन वैसी ही रातें हैं, वही रोज का फ़साना लगता है, अभी महीना भी नहीं गुजरा और यह साल अभी से पुराना लगता है।

383. तेरे शहर में आ कर बेनाम से हो गए, तेरी चाहत में अपनी मुस्कान ही खो गए, जो डूबे तेरी मोहब्बत में तो ऐसे डूबे, कि जैसे तेरी आशिक़ी के गुलाम ही हो गए।

384. आज बता रहा हूँ नुस्खा-ए-मौहब्बत ज़रा गौर से सुनो, न चाहत को हद से बढ़ाओ न इश्क़ को सर पे चढ़ाओ।

385. गुमनामी का अँधेरा कुछ इस तरह छा गया है, कि दास्ताँ बन के जीना भी हमें रास आ गया है।

386. क्यूँ किसी से इतना प्यार हो जाता है, एक दिन का भी इंतजार दुश्वार हो जाता है, लगने लगते है अपने भी पराए, जब एक अजनबी पर ऐतबार हो जाता है।

387. जिन्हें सांसो की महक से इश्क महसूस ना हो, वो गुलाब देने भर से हाल-ए-दिल को क्या समझेंगे।

388. ले लो वापस वो आँसू वो तड़प वो यादें सारी, नहीं कोई जुर्म हमारा तो फिर ये सजाएं कैसी।

389. हम भी कुछ प्यार के गीत गाने लगे हैं, जब से ख़्वाबों में मेरे वो आने लगे हैं।

390. बड़ी ख़ामोशी से गुज़र जाते हैं हम एक दूसरे के करीब से, फिर भी कमबख्त दिलों का शोर सुनाई दे ही जाता है।

391. कुछ इस तरह से गुज़ारी है ज़िंदगी जैसे, तमाम उम्र किसी दूसरे के घर में रहा।

392. तेरे रंग में ऐसे रंगीन हो गए हैं हम, कि तेरे बिना जिंदगी के रंग फीके लगेंगे।

393. फूँक डालूँगा किसी रोज़ ये दिल की दुनिया, ये तेरा ख़त तो नहीं है कि जला भी न सकूँ।

394. कुछ तबीयत ही मिली थी ऐसी, चैन से जीने की सूरत नहीं हुई, जिसको चाहा उसे अपना न सके, जो मिला उससे मुहब्बत न हुई।

395. अगर आप अजनबी थे तो लगे क्यों नहीं, और अगर मेरे थे तो मुझे मिले क्यों नहीं।

396. अगर नींद आ जाये तो सो भी लिया करो, रातों को जगने से मोहब्बत लोटा नहीं करती।

397. रूप से अक्सर प्यार नहीं होता, मन चाहा सपना साकार नहीं होता, हर किसी पर न मर मिटना मेरे दोस्त, क्योंकि हर किसी के दिल में सच्चा प्यार नहीं होता।

398. तपती दोपहरी, गरम रेत पर ठंडे पानी की बूँदों जैसा काम कर गई तेरी आवाज़ जो कल सुनी मैंने।

399. मौत ने आँखें मिलाई थी कई बार मुझसे, पर तेरा दीवाना किसी और पे मरता कैसे।

400. हाथ मेरे भूल बैठे दस्तकें देने का फ़न, बंद मुझ पर जब से उस के घर का दरवाज़ा हुआ।

401. नजरों को तेरे प्यार से इंकार नहीं है, अब मुझे किसी और का इंतज़ार नहीं है, खामोश अगर हूँ मैं तो ये वजूद है मेरा तुम ये न समझना कि तुमसे प्यार नहीं है।

402. थक गया है चाहतों का वजुद अब कोई, अच्छा भी लगे तो हम इजहार नही करते।

403. एक न एक दिन मैं ढूँढ ही लूंगा तुमको, ठोंकरें ज़हर तो नहीं कि खा भी ना सकूँ।

404. आसमान पे चाँद जल रहा होगा, किसी का दिल मचल रहा होगा, उफ़ ये मेरे पैरों में चुभन कैसी है, जरूर वो काँटों पर चल रहा होगा।

405. पहले सौ बार कभी इधर कभी उधर देखा है, तब कहीं डर के तुझे एक नज़र देखा है।

406. बिना मेरे रह ही जाएगी कोई न कोई कमी, तुम जिंदगी को जितनी मर्जी सँवार लेना।

407. माना कि तुम जीते हो ज़माने के लिये, एक बार जी के तो देखो हमारे लिये, दिल की क्या औकात आपके सामने, हम तो जान भी दे देंगे आपको पाने के लिये|

408. उम्र छोटी है तो क्या ज़िंदगी का हरेक मंज़र देखा है, फरेबी मुस्कुराहटें देखी हैं बगल में खंजर देखा।

409. थोड़ी मस्ती थोड़ा सा ईमान बचा पाया हूँ, ये क्या कम है मैं अपनी पहचान बचा पाया हूँ, कुछ उम्मीदें, कुछ सपने, कुछ महकी-महकी यादें, जीने का मैं इतना ही सामान बचा पाया हूँ।

410. रग-रग में इस तरह से समा कर चले गये, जैसे मुझ ही को मुझसे चुराकर चले गये, आये थे मेरे दिल की प्यास बुझाने के वास्ते, इक आग सी वो और लगा कर चले गये।

411. गलत सुना था कि मोहब्बत आँखों से होती है, दिल तो वो भी चुरा लेते हैं जो पलकें नहीं उठाते।

412. दिल में लगी थी वो प्यास जागी है, आपसे मिलने की आस बाकी है यूँ आदत न थी ऐसे तड़पने की ऐ खुदा मेरी कितनी सजा और बाकी है।

413. मुझे इश्तिहार सी लगती हैं, ये मोहब्बतों की कहानियाँ जो कहा नहीं, वो सुना करो, जो सुना नहीं, वो कहा करो।

414. मत खाओ कसमे सारी ज़िन्दगी साथ निभाने की, हम ने साँसो को भी जुदा होते देखा है।

415. तुम्हारे बगैर ये वक़्त, ये दिन और ये रात, गुजर तो जाते हैं मगर, गुजारे नहीं जाते।

416. गुलाब के फूल को हम कमल बना देते, आपकी एक अदा पर कई गजल बना देते, आप ही हम पर मरती नहीं वरना आपके घर के सामने ताजमहल बना देते।

417. जो मशहूर हुए सिर्फ उन्होंने ही तो मोहब्बत नहीं की कुछ लोग चुपचाप भी तो क़त्ल हुए है मोहब्बत के हाथोँ।

418. तरसते थे जो मिलने को हमसे कभी, आज वो क्यों मेरे साए से कतराते हैं, हम भी वही हैं दिल भी वही है, न जाने क्यों लोग बदल जाते हैं।

419. उदास आपको देखने से पहले ये आँखे न रहें, खफा हो आप हमसे तो ये हमारी साँसें न रहें, अगर भूले से भी ग़म दिए हमने आपको, आपकी जिंदगी में हम क्या हमारी यादें भी न रहें।

420. नींद भी नीलाम हो जाती हैं दिलों की महफ़िल में जनाब, किसी को भूल कर सो जाना इतना आसान नहीं होता।

421. किसी के जख़्म तो किसी के ग़म का इलाज़, लोगों ने बाँट रखा है मुझे दवा की तरह।

422. खुशियों की दामन में आँसू गिराकर तो देखिये, ये रिश्ता कितना सच्चा है आजमा कर तो देखिये, आपके रूठने से क्या होगी मेरे दिल की हालत, किसी आइने पर पत्थर गिराकर तो देखिये।

423. हमें भी आते है अंदाज़ दिल तोड़ने के, हर दिल में ख़ुदा बसता है यही सोचकर चुप हूँ।

424. तू हवा के रुख पे चाहतों का दिया जलाने की ज़िद न कर, ये क़ातिलों का शहर है यहाँ तू मुस्कुराने की ज़िद न कर।

425. दिन रात हम वो हर काम लिख लेते हैं, तेरी याद में गुजरी हर शाम लिख लेते हैं, तुझे देखे बिना इक पल भी कटता नहीं, अकेले में हथेली पे तेरा नाम लिख लेते हैं।

426. मंजिल का नाराज होना भी जायज था, हम भी तो अजनबी राहों से दिल लगा बैठे थे।

427. शेर-ओ-शायरी तो दिल बहलाने का ज़रिया है जनाब, लफ़्ज़ काग़ज़ पर उतारने से महबूब लौटा नहीं करते।

428. ना जाने इतनी मोहब्बत कहाँ से आई है उसके लिये, कि मेरा दिल भी उसकी खातिर मुझसे रूठ जाता है।

429. रात भर तारीफ करता रहा तेरी चाँद से, चाँद इतना जला कि सुबह तक सूरज हो गया।

430. अपनी रुसवाई तेरे नाम का चर्चा देखूं, एक जरा शेर कहूँ और मैं क्या क्या देखूं।

431. अच्छा सुनो ना जरुरी नहीं हर बार शब्द ही हों कभी ऐसा भी हो कि मैं सोचूं और तुम समझ लो|

432. तुम और तुम्हारी हर बात मेरे लिए ख़ास हैं, यहीं शायद मोहब्बत का पहला अहसास हैं।

433. कितना आसाँ था तेरे हिज्र में मरना जाना फिर भी इक उम्र लगी जान से जाते-जाते।

434. खामोशियों से मिल रहे, खामोशियों के जवाब, अब कैसे कहूँ कि उनसे मेरी बात नहीं होती।

435. मिट जाते है वो औरों को मिटाने वाले, लाश कहा रोती है रोते हैं जलाने वाले।

436. तुमको पाने की तमन्ना नहीं फिर भी खोने का डर है, कितनी शिद्दत से देखो मैनें तुमसे मोहब्बत की है।

437. खुदा करे वो अचानक सामने आकर, मेरे लबों को कुछ नए सवाल दे जायें।

438. दिल टूटा है सम्भलने में कुछ वक्त तो लगेगा साहिब, हर चीज़ इश्क़ तो नहीं कि एक पल में हो जाये।

439. खुदा ने लिखा ही नहीं तुझको मेरी किस्मत में शायद, वरना खोया तो बहुत कुछ था एक तुझे पाने के लिए।

440. लोग कहते हैं कि तू अब भी ख़फ़ा है मुझ से, तेरी आँखों ने तो कुछ और कहा है मुझ से।

441. हर रिश्ते मे सिर्फ नूर बरसेगा शर्त बस इतनी है कि रिश्ते में शरारतें करो साजिशें नहीं।

442. उल्फत में अक्सर ऐसा होता है, आँखे हंसती हैं और दिल रोता है, मानते हो तुम जिसे मंजिल अपनी, हमसफर उनका कोई और होता है।

443. गिला भी तुझ से बहुत है, मगर मोहब्बत भी, वो बात अपनी जगह है, ये बात अपनी जगह।

444. मैं ना जानू इबादत, मुझे माफ़ कर देना ऐ मेरे खुदा, मैं तो तेरे दर पे आता हूँ, उसकी गली से गुजरने के लिए।

445. जीना चाहा तो जिंदगी से दूर थे हम, मरना चाहा तो जीने को मजबूर थे हम, सर झुका कर कबूल कर ली हर सजा, बस कसूर इतना था कि बेकसूर थे हम।

446. तूने मोहब्बत, मोहब्बत से ज्यादा की थी, मैंने मोहब्बत तुझसे भी ज्यादा की थी, अब किसे कहोगे मोहब्बत की इन्तेहाँ, हमने शुरुआत ही इन्तेहाँ से ज्यादा की थी।

447. ख्वाब, ख्याल, मोहब्बत, हक़ीक़त, गम और तन्हाई, ज़रा सी उम्र मेरी किस-किस के साथ गुज़र गयी।

448. जब मिलो किसी से तो जरा दूर का रिश्ता रखना, बहुत तङपाते हैँ अक्सर सीने से लगाने वाले।

449. मुझे खींच ही लेती है हर बार उसकी मोहब्बत, वरना बहुत बार मिला हूँ आखिरी बार उससे।

450. पत्तों सी हो गई है, रिश्तों की उम्र, आज हरे कल पीले परसों सूखे।

451. तेरी चाहत में रुसवा यूं सरे बाज़ार हो गये, हमने ही दिल खोया और हम ही गुनाहगार हो गये।

452. दिल में छुपी यादों में संवारूँ तुझको, तू दिखे तो आँखों में उतारूँ तुझको, तेरे नाम को लव पर ऐसे सजाया है, सो भी जाऊं तो ख्वाबों में पुकारूँ तुझको।

453. होने लगे रुखसत मेरा दामन पकड़ लिया, जाओ नही कहकर मुझे बाँहों मे भर लिया।

454. चुप हैं किसी सब्र से तो पत्थर न समझ हमें, दिल पे असर हुआ है तेरी बात-बात का।

455. ऐ सनम मैं तेरे लिए बदनाम हो जाऊं, तू अपनी ओर खींचे वो लगाम हो जाऊं, किसी और मंजिल की चाह नहीं मुझको, सिर्फ तेरी ही गलियों में गुमनाम हो जाऊं।

456. अक्सर वही रिश्ते लाजवाब होते हैं, जो एहसानों से नहीं एहसासों से बने होते हैं।

457. तारीखों में कुछ ऐसे भी मंजर हमने देखे है, कि लम्हों ने खता की थी, और सदियों ने सजा पाई।

458. सच्ची मोहब्बत मिलना भी तकदीर होती है, बहुत कम लोगों के हाथों में ये लकीर होती है।

459. तुमने तो गिरा डाली लम्हे में इमारत, हम अरसे लगेंगे हमको मलबा हटाने में।

460. तेरी जरूरत, तेरा इंतजार और ये तन्हा आलम, थक कर मुस्कुरा देते हैं, हम जब रो नहीं पाते।

461. तुम्हारे प्यार का रोग नहीं जाता कसम ले लो, गले में डाल कर मैंने सैकड़ों ताबीज़ देखे हैं।

462. अपने जलने मैं नहीं करता किसी को, शरीक रात होते हीं मैं शम्मा बुझा देता हूँ।

463. कितनी जल्दी थी उसको रूठ जाने की, आवाज़ तक न सुनी दिल के टूट जाने की।

464. यूँ हर पल हमें सताया न कीजिये, यूँ हमारे दिल को तड़पाया न कीजिये, क्या पता कल हम हों न हों इस जहॉ में, यूँ नजरें हमसे आप चुराया न कीजिये।

465. ये कौन है कि जिसका जिस्म हमसे ज़िन्दा है, हमें तो चेहरा भी आईने में अपना नहीं लगता।

466. तुझे भूल जाने को जी नहीं चाहता, आदत पड़ गयी है तुझे चाहने की। तमन्ना नहीं है तुझे पाने की, बस वजह बनूँ तेरे मुस्कुराने की।

467. दिल के हर कोने में बसाया है आपको, अपनी यादों में हर पल सजाया है आपको, यकीं न हो तो मेरी अॉखों में देख लीजिये, अपने अश्कों में भी छुपाया है आपको।

468. मेरे इब्तिदा-ए-इश्क़ की कहानी ना पूछ मुझसे, हर सांस में हज़ारों बार तेरा नाम लिया हैं।

469. देख मेरी आँखों में ख्वाब किसके हैं, दिल में मेरे सुलगते तूफ़ान किसके हैं, नहीं गुज़रा कोई आज तक इस रास्ते से हो कर, फिर ये क़दमों के निशान किसके हैं।

470. तेरे रोज के वादों पे मर जायेंगे हम, यूँ ही गुजरी तो गुजर जायेंगे हम।

471. सांसों की पायल पहन के ज़िंदगी निकली तो है, क्या पता कब छनके ना जाने कब टूट जाये।

472. क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने जब माँगा उससे ज़िन्दगी का हिसाब, ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो मोहब्बत की है इसने।

473. रह न पाओगे भुला कर देख लो, यकीं न आये तो आजमा कर देख लो, हर जगह महसूस होगी मेरी कमी, अपनी महफ़िल को कितना भी सजा कर देख लो।

474. जीत लेते हैं हम मुहोब्बत से गैरों का भी दिल, पर ये हुनर जाने क्यों अपनों पर चलता ही नहीं।

475. इस तरह मिली वो मुझे सालों के बाद, जैसे हक़ीक़त मिली हो ख्यालों के बाद, मैं पूछता रहा उस से ख़तायें अपनी, वो बहुत रोई मेरे सवालों के बाद।

476. मेरी आँखों में तुम अपनी परछाइयाँ देख लेना, फुरसत मिले तो दिल की वीरानियाँ देख लेना, तुम नहीं जानती गर क्या है तुम्हारी अहमियत, जरा पलटकर तुम हमारी कहानियाँ देख लेना।

477. ग़ज़ब ख़ूबसूरत है तुम्हारा हर अन्दाज़, इश्क़ में जलने का मुहब्बत में जलाने का।

478. नाराज़ क्यों होते हो? चले जाएंगे तुम्हारी महफ़िल से, लेकिन पहले मुझे मेरे दिल के टुकड़े तो उठा लेने दो।

479. तेरी आँखों में जब से मैंने अपना अक्स देखा है, मेरे चेहरे को कोई आइना अच्छा नहीं लगता।

480. महफ़िल में गले मिल के वो धीरे से कह गए, ये रस्म-ए-अंजुमन है चाहत का गुमाँ न कर।

481. क्यूँ सताते हो मुझे जहाँ में जीने की इजाजत दे दो, बड़ा ही जख्मी दिल है मेरा बस कुछ पल की मुहब्बत दे दो।

482. कतरा-कतरा मैं बहकता हूँ तिनका-तिनका मैं बिखरता हूँ, रोम-रोम तू महकता है, जर्रा-जर्रा मैं तुझमें पिघलता हूँ।

483. बुढे माँ बाप को अपने घर से निकाल रख़ा है, अजिब शौख़ है बेटे का कुतों को पाल रख़ा है।

484. फिर से वो सपना सजाने चला हूँ, उमीदों के सहारे दिल लगाने चला हूँ, पता है कि अंजाम बुरा ही होगा मेरा, फिर भी किसी को अपना बनाने चला हूँ।

485. वो प्यार जो हकीकत में प्यार होता है, जिन्दगी में सिर्फ एक बार होता है, निगाहों के मिलते मिलते दिल मिल जाये, ऐसा इतेफाक सिर्फ एक बार होता है।

486. जब दिल से हमारा रिश्ता था बहुत कमाल था, तुमने दिमाग लगाके बड़ा बवाल कर दिया।

487. बरबाद कर देती है मोहब्बत हर मोहब्बत करने वाले को क्यूकि इश्क़ हार नही मानता और दिल बात नही मानता।

488. जाने कितनी रातों की नीदें ले गया वो, जो पल भर मौहब्बत जताने आया था।

489. तू हर जगह खूबसूरती तलाश न कर, हर अच्छी चीज मेरे जैसी नहीं होती।

490. भूल शायद बहुत बड़ी कर ली, दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली, तुम मोहब्बत को खेल कहते हो, हम ने बर्बाद ज़िन्दगी कर ली।

491. अभी कमसिन हैं जिदें भी हैं निराली उनकी, इसपे मचले हैं हम कि दर्द-ए-जिगर देखेंगे।

492. सुनो तुम मुझसे पहले न मरना मुझे तुम्हे अपनी मौत का दर्द देना है।

493. कोई उम्मीद नहीं थी हमें उनसे मुहब्बत की एक ज़िद थी कि दिल टूटे तो सिर्फ उनके हाथ से टूटे ।

494. मोहब्बत खुद बताती है, कहाँ किसका ठिकाना है, किसे ऑखों में रखना है, किसे दिल मे बसाना है।

495. आखिर लग ही गयी न तुम्हें मोहब्बत की ठण्ड, कितना समझाया था कि ओढ़ लो तमन्ना मेरी।

496. पूछा था हाल उन्होंने मेरा बड़ी मुद्दतों के बाद कुछ गिर गया है आँख में कह कर हम रो पड़े l

497. सोचा नहीं अच्छा बुरा, देखा सुना कुछ भी नहीं, माँगा ख़ुदा से हर वक़्त तेरे सिवा कुछ भी नहीं, जिस पर हमारी आँख ने, मोती बिछाये रात भर, भेजा वही कागज़ उसे, हमने लिखा कुछ भी नहीं।

498. ये सोच के कटवा दिया कमबख्त ने वो पेड़, आँगन में मेरे है और पड़ोसी को हवा देता है।

499. नाराज क्यों होते हो, चले जायेंगे बहुत दूर, जरा टूटे हुए दिल के टुकड़े तो उठा लेने दो।

500. ना हीर की तमन्ना है, ना परियों पर मरता हूँ, एक भोली-भाली सी लड़की है, मैं जिससे मोहब्बत करता हूँ।

501. एक ख्याल हूँ तुम्हारा कब तक मुझे याद रखोगे, भूल ही जाओगे जब सिरहाने नये ख्वाब रखोगे।

502. मौहब्बत की मिसाल में, बस इतना ही कहूँगा । बेमिसाल सज़ा है, किसी बेगुनाह के लिए ।

503. सितम को हम करम समझे, जफा को हम वफा समझे, जो इस पर भी न समझे वह तो उस बुत को खुदा समझे।

504. मुझे नहीं आती हैं उड़ती पतंगों सी चालाकियां, गले मिलकर गला काटूं वो मांझा नहीं हूँ मै।

505. जब भी वो उदास हो उसे मेरी कहानी सुना देना, मेरे हालात पर हंसना उसकी पुरानी आदत है ।

506. हर साँस में उनकी याद होती है, मेरी आंखों को उनकी तलाश होती है, कितनी खूबसूरत है चीज ये मोहब्बत, कि दिल धड़कने में भी उनकी आवाज होती है।

507. बस चाहत है इतनी सी मेरी, मेरी धड़कन तेरे दिल से जुड़ी रहे।

508. सरे राह जो उनसे नज़र मिली, तो नक़्श दिल के उभर गए, हम नज़र मिला कर झिझक गए, वो नज़र झुका कर चले गए।

509. मेरी ये बेचैनियाँ और उन का कहना नाज़ से, हँस के तुम से बोल तो लेते हैं और हम क्या करें।

510. दूरियों से ही एहसास होता है, कि नज़दीकियाँ कितनी ख़ास होती है।

511. कहानी बस इतनी सी थी तुम्हारी मेरी मोहब्बत की मौसम की तरह तुम बदल गए, फसल की तरह हम बरबाद हो गए ।

512. अक्सर ठहर कर देखता हूँ अपने पैरों के निशान को, वो भी अधूरे लगते हैं तेरे साथ के बिना।

513. तुम सामने आये तो अजब तमाशा हुँआ, हर शिकायत ने जैसे खुदखुशी कर ली।

514. हर कोई मुझे जिंदगी जीने का तरीका बताता है। उन्हे कैसे समझाऊं कि एक ख्वाब अधूरा है मेरा वरना जीना तो मुझे भी अच्छे से आता है।

515. ऐ जिंदगी मुझसे दगा ना कर मैं जिंदा रहूं ये दुआ न कर कोई छूता है तुझको तो होती है जलनऐ हवा तू भी उसे छुआ न कर।

516. जानता हूँ मैं, अभी भी चाहती है मुझे, ज़िद्दी है वो थोड़ी सी, मगर बेवफ़ा नहीँ।

517. हुआ जब इश्क़ का एहसास उन्हें, आकर वो पास हमारे सारा दिन रोते रहे, हम भी निकले खुदगर्ज़ इतने यारो कि, कफ़न में आँखें बंद करके सोते रहे।

518. मत कर हिसाब किसी के प्यार का, कहीं बाद में तू खुद ही कर्ज़दार न निकले।

519. बस ये ही बात मुझे उसकी अच्छी लगती है, उदास करके कहते है, नाराज तो नही हो ना।

520. न वो सपना देखो जो टूट जाये, न वो हाथ थामो जो छूट जाये, मत आने दो किसी को करीब इतना, कि दूर जाने से इंसान खुद से रूठ जाये।

521. काग़ज़ पे तो अदालत चलती है हमने तो तेरी आँखो के फैसले मंजूर किये।

522. रिश्ता उन से इस कदर मेरा बढ़ने लगा, वो मुझे पढ़ने लगे, हम उन्हें लिखने लगे।

523. मोहब्बत में किसी का इंतजार मत करना, हो सके तो किसी से प्यार मत करना, कुछ नहीं मिलता मोहब्बत कर के, खुद की ज़िन्दगी बेकार मत करना।

524. मुझे उस जगह से भी मोहब्बत हो जाती है, जहाँ बैठ कर एक बार तुम्हें सोच लेता हूँ।

525. पुराने आशिक वफा तलाश करते थै, आजकल के आशिक जगह तलाश करते है।

526. प्यार की कली सब के लिए खिलती नहीं, चाह कर भी हरेक एक चीज मिलती नहीं, सच्चा प्यार किस्मत से मिलता है, पर हर एक को ऐसी किस्मत मिलती नहीं ।

527. मैं अल्फाज़ हूँ तेरी हर बात समझता हूँ, मैं एहसास हूँ तेरे जज़्बात समझता हूँ, कब पूछा मैंने कि क्यूँ दूर हो मुझसे, मैं दिल रखता हूँ तेरे हालात समझता हूँ।

528. इतनी ठोकरे देने के लिए शुक्रिया ए-ज़िन्दगी, चलने का न सही, सम्भलने का हुनर तो आ गया।

529. मुहब्बत और नफरत सब मिल चुके हैं मुझे, मैं अब तकरीबन मुकम्मल हो चुका हूँ ।

530. मोहब्बत की भी देखों ना, कितनी अजीब कहानी है, जहर तों पिया मीरा ने, फिर भी राधा ही दिल की रानी हैं।

531. फितरत किसी की ना आजमाया कर ऐ जिंदगी, हर शख्स अपनी हद में बेहद लाजवाब होता है।

532. कुछ और कश लगा ले ऐ जिंदगी बुझ जाऊंगा किसी रोज सुलगते सुलगते।

533. उसके साथ रहते रहते हमे चाहत सी हो गयी, उससे बात करते करते हमे आदत सी हो गयी, एक पल भी न मिले तो न जाने बेचैनी सी रहती है, दोस्ती निभाते निभाते हमे मोहब्बत सी हो गयी।

534. ये आशिको का ग्रुप है जनाब यहाँ दिन सुरज से नही दीदार से हुआ करते है।

535. अफ़सोस तो है तुम्हारे बदल जाने का मगर तुम्हारी कुछ बातों ने मुझे जीना सिखा दिया ।

536. चांदनी रात में बरसात बुरी लगती है और महबूबा रूठ जाये तो हर बात बुरी लगती है।

537. न कोई वादा न कोई यक़ीं न कोई उम्मीद, मगर हमें तो तेरा इंतज़ार करना था।

538. मेरी कोशिश कभी कामयाब ना हो सकी, पहले तुझे पाने की फिर तूझे भुलाने की ।

539. बहुत ज़ालिम हो तुम भी मुहब्बत ऐसे करते हो, जैसे घर के पिंजरे में परिंदा पाल रखा हो।

540. उम्र कैद की तरह होते हे कुछ रिश्ते, जहा जमानत देकर भी रिहाई मुमकिन नही।

541. कहानी खत्म हो तो कुछ ऐसे खत्म हो कि लोग रोने लगे तालियाँ बजाते बजाते ।

542. तुम तो अपने घर के थे तुमसे कोई पर्दा न था लेकिन, जो दिल की बात थी ज़ालिम वही मुँह से नहीं निकली।

543. कमाल का जिगर रखते है कुछ लोग, दर्द पढ़ते है और आह तक नहीं करते।

544. राह-ए-वफ़ा में हम को ख़ुशी की तलाश थी, दो कदम ही चले थे कि हर कदम पे रो पड़े।

545. काश तू चाँद मैं तारा होता, आसमान पे एक आशियाना हमारा होता, लोग तुम्हें दूर से देखते, पास आने का हक़ सिर्फ हमारा होता।

546. कभी कुछ रिश्ते इस कदर घायल कर देंते है, की अपने ही घर लौट पाना मुश्किल हो जाता है।

547. बहुत अजब होती हैं यादें यह मोहब्बत की, रोये थे जिन पलों में याद कर उन्हें हँसी आती है, और हँसे थे जिन पलों में अब याद कर उन्हें रोना आता है।

548. हमारे आँसू पोंछ कर वो मुस्कुराते हैं, इसी अदा से वो मेरे दिल को चुराते हैं, हाथ उनका छू जाये हमारे चेहरे को, बस इसी उम्मीद में खुद को रुलाते हैं।

549. उम्मीद ना करो इस दुनिया से किसी से हमदर्दी, की बड़े प्यार से जख्म देते हैँ, शिद्दत से चाहने वाले।

550. असल मोहब्बत तो वो पहली ही मोहब्बत थी इसके बाद तो हर शख्स में सिर्फ उसी को ढूँढा है ।

551. भूलकर भी तुझे न भूल पायेगें हम, बस यही एक वादा निभा पायेगें हम, खुद को भी मिटा देंगे जहान से लेकिन, तेरा नाम दिल से न मिटा पायेगें हम।

552. ख्वाब हमारे टूटे तो हालात कुछ ऐसी थी, आँखे पल पल रोती थीं, किस्मत हँसती रहती थी।

553. ना जाने क्यूँ खुद को अधूरा सा पाया है, हर एक रिश्ते में खुद को गँवाया है । शायद कोई तो कमी है मेरे वजूद में, तभी हर किसी ने हमें यूँ ही ठुकराया है ।

554. खुद को वो चाहे लाख मुकमल समझे, लेकिन मेरे बिना वो मुझे अधूरा ही लगता है|

555. मेरी तमन्नाओं की दुनिया पर उदासी छा गयी, भूली थी कभी जो दास्ताँ आज फिर याद आ गयी।

556. जब जान प्यारी थी तब दुश्मन हजार थे, अब मरने का शौक है तो कातिल नहीँ मिलते ।

557. बदलना आता नहीं हमें मौसम की तरह, हर इक रुत में तेरा इंतज़ार करते हैं, ना तुम समझ सकोगे जिसे क़यामत तक, कसम तुम्हारी तुम्हें इतना प्यार करते हैं।

558. उनसे बिछड़े तो मालूम हुआ मौत क्या चीज है, ज़िन्दगी वो थी जो हम उनकी महफ़िल में गुजार आए।

559. वो रास्ता जो हमें उसके दिल तक ले जाता उम्र सारी उसी रस्ते की तलाश में गुजरी।

560. दिल की धड़कन और मेरी सदा है वो, मेरी पहली और आखिरी वफ़ा है वो, चाहा है उसे मैंने चाहत से बढ़ कर, मेरी चाहत और चाहत की इंतिहा है वो।

561. इश्क करने चला है तो कुछ अदब भी सीख लेना, ए दोस्त इसमें हँसते साथ है पर रोना अकेले ही पड़ता है।

562. हम से खेलती रही दुनिया ताश के पत्तो की तरह, जिसने जीता उसने भी फेका जिसने हारा उसने भी फेका।

563. काश ये पल थम जाता इस पल को जिंदगी भर जीने को मन करता है। मगर जो थम जाये वो जिंदगी नही।

564. रोज़ मिट्टी में कहां जान पड़ा करती है, इश्क सदियों में कोई ताजमहल देता है।

565. तेरी खामोशी जला देती है इस दिल की तमन्नाओं को, बाकी सारी बातें अच्छी है तेरी तस्वीर में।

566. गीत आप का होगा, गजल हम बनायेगे, रास्ते आप चुनेंगे, मंजिल हम बनायेगे हाथ आप देंगे साथ हम निभाएंगे.

567. चिराग कैसे अपनी मजबूरियाँ बयाँ करे, हवा जरूरी भी और डर भी उसी से है।

568. नींद आए या ना आए चिराग बुझा दिया करो, यूँ रात भर किसी का जलना हमसे देखा नहीं जाता।

569. जोश-ए-जुनूँ में लुत्फ़-ए-तसव्वुर न पूछिए, फिरते हैं साथ साथ उन्हें हम लिए हुए।

570. बिछड़ कर फिर मिलेंगे यकीन कितना है, बेशक खवाब ही है मगर हसीन कितना है।

571. एक ज़रा सी भूल खता बन गयी, मेरी वफ़ा ही मेरी सजा बन गयी, दिल लिया और खेल कर तोड़ दिया, हमारी जान गयी और उनकी अदा बन गयी।

572. नफरतों के जहान में हमको प्यार की बस्तियां बसानी हैं, दूर रहना कोई कमाल नहीं, पास आओ तो कोई बात बने।

573. तुम्हें चलना ही कितना है सनम बस मेरी धड़कनों से गुजरकर इस दिल में ही उतरना है।

574. आँसू आ जाते हैं रोने से पहले, ख्वाब टूट जाते हैं सोने से पहले, लोग कहते हैं मोहब्बत गुनाह है, काश कोई रोक लेता इसे होने से पहले ।

575. बरबाद कर देती है मोहब्बत, हर मोहब्बत करने वाले को, क्योंकि इश्क़ हार नही मानता, और दिल बात नही मानता।

576. क्या बताऊँ उनकी बातें कितनी मीठी हैं, सामने बैठ के फीकी चाय पीते रहते हैं।

577. दिल में आया था वो बहुत से रास्तों से । जाने का रास्ता न मिला तो दिल ही तोड़ दिया ।

578. जो रहते हैं दिल में वो जुदा नहीं होते, कु एहसास लफ़्ज़ों से बयां नहीं होते, एक हसरत है कि उनको मनाये कभी, एक वो हैं कि कभी खफा नहीं होते।

579. नशा इन निगाहों का अब जीने ना देगा, लग गया जो एक बार तो कुछ और पीने ना देगा।

580. वफा के बदले बेवफाई ना दिया कर, मेरी उमीद ठुकरा कर इन्कार ना किया कर, तेरी मौहब्बत में हम सब कुछ गवां बैठे, जान चली जायेगी इम्तिहान ना लिया कर ।

581. बेवक्त बेवजह बेसबब सी बेरुखी तेरी, फिर भी बेइंतहा तुझे चाहने की बेबसी मेरी।

582. जिन्दगी में हर साँसे मीठी लगने लगती है, जब तुम कहते हो, हम आपके दिल में रहते हैं।

583. मुहब्बत में सच्चा यार न मिला, दिल से चाहे हमें वो प्यार न मिला। लूटा दिया उसके लिए सब कुछ मैने, मुसीबत में मुझे मददग़ार न मिला।

584. सितारों को आँखों में महफूज रखना, बड़ी देर तक रात ही रात होगी, मुसाफिर हैं हम, मुसाफिर हो तुम भी, किसी मोड़ पर फिर मुलाक़ात होगी।

585. भीगे कागज की तरह कर दिया तूने जिंदगी को, न लिखने के काबिल छोड़ा न जलने के।

586. नहीं वादा कोई करना, नहीं कसमें ही खानी है, मुझे चुपचाप रहकर यूं, सभी रस्में निभानी है।

587. टूटी हुई डाली का दर्द उसकी साख से पूँछो, धरती की प्यास बरसात से पूँछो, मैं आपको कितना चाहता हूँ, ये मुझसे नहीं अपने आप से पूँछो।

588. नज़रों से ना देखो हमें तुम में हम छुप जायेंगे, अपने दिल पर हाथ रखो तुम हम वही तुम्हें मिल जायेंगे।

589. वही रंजिशें वही हसरतें, न ही दर्द-ए-दिल में कमी हुई, है अजीब सी मेरी ज़िन्दगी, न गुज़र सकी न खत्म हुई।

590. तेरा नाम ही ये दिल रटता है, ना जाने तुम पे ये दिल क्यू मरता है नशा है तेरे प्यार का इतना, कि तेरी ही याद में ये दिन कटता है।

591. बात वफ़ाओ की होती तो कभी न हारते, बात नसीब की थी कुछ ना कर सके।

592. मुझ से नाराज़ है तो छोड़ दे तन्हा मुझको, ऐ ज़िन्दगी मुझे रोज़ रोज़ तमाशा न बनाया कर।

593. अपने दिल की बात उनसे कह नहीं सकते, बिन कहे भी जी नहीं सकते, ऐ खुदा ऐसी तकदीर बना, कि वो खुद हम से आकर कहे कि हम आपके बिना जी नही सकते।

594. बहोत-सा इश्क है मुझे तुमसे, बस तुम ज़रा-सा कर लो मुझसे।

595. पढ़ने वालों की कमी हो गयी है आज इस ज़माने में नहीं तो गिरता हुआ एक-एक आँसू पूरी किताब है।

596. तुझे भूलकर भी न भूल पायेगें हम, बस यही एक वादा निभा पायेगें हम, मिटा देंगे खुद को भी जहाँ से लेकिन, तेरा नाम दिल से न मिटा पायेगें हम।

597. बेजान तो हम अब भी नही पर जो हमें, जान कहते थे वो कहीं खो गये।

598. बहुत ख़ास थे कभी नज़रों में किसी के हम भी मगर नज़रों के तकाज़े बदलने में देर कहाँ लगती है।

599. ख्वाहिश तो थी मिलने की पर कभी कोशिश नहीं की सोचा के जब खुदा माना है उसको तो बिन देखे ही पूजेंगे ।

600. तुझ से जो इश्क़ है वो बेहद है क्यूँकि, हद और सरहद ज़मीं की होती है दिल की नहीँ।

601. अजीब रंग का मौसम चला है कुछ दिन से, नज़र पे बोझ है और दिल खफा है कुछ दिन से, वो और थे जिसे तू जानता था बरसों से, मैं और हूँ जिसे तू मिल रहा है कुछ दिन से।

602. वक़्त मिले तो प्यार की किताब पढ़ लेना, हर प्यार करने वाले की कहानी अधूरी होती है।

603. नहीं मालूम हसरत है या तू मेरी मोहब्बत है, बस इतना जानता हूं कि मुझको तेरी जरूरत है।

604. पलकों को कभी हमने भिगोए ही नहीं, वो सोचते हैं की हम कभी रोये ही नहीं, वो पूछते हैं कि ख्वाबो में किसे देखते हो? और हम हैं की उनकी यादो में सोए ही नहीं।

605. लाखो हसीन है इस दुनिया में तेरी तरह, क्या करे हमें तो तेरी रूह से प्यार है ।

606. लफ़्ज़ों के इत्तेफाक़ में यूँ बदलाव करके देख, तू देख कर न मुस्कुरा बस मुस्कुरा के देख।

607. परछाइयों के शहर की तन्हाईयाँ ना पूछ; अपना शरीक-ए-ग़म कोई अपने सिवा ना था।

608. मंजिल भी तुम हो, तलाश भी तुम हो, उम्मीद भी तुम हो, आस भी तुम हो, इश्क भी तुम हो और जूनूँ भी तुम ही हो, अहसास तुम हो जिंदगी भी तुम ही हो।

609. तेरी मेरी मोहब्बत का राज उस वक्त खुल गया, जब दिल तेरी कसम खाने से मुकर गया।

610. उन गलियों से जब गुज़रे तो मंज़र अजीब था, दर्द था मगर वो दिल के करीब था, जिसे हम ढूँढ़ते थे अपनी हाथों की लकीरों में, वो किसी दूसरे की किस्मत किसी और का नसीब था।

611. मोहब्बत यूँ ही किसी से हुआ नहीं करती अपना वजूद भुलाना पड़ता है, किसी को अपना बनाने के लिए ।

612. सुनसान सी लग रही है, आज ये शायरों की बस्ती, क्या किसी के दिल मे, अब दर्द नहीं रहा।

613. अपनी आँखों के समंदर में उतर जाने दे, तेरा मुजरिम हूँ मुझे डूब के मर जाने दे । ज़ख़्म कितने तेरी चाहत से मिले हैं मुझको, सोचता हूँ कि कहूँ तुझसे मगर जाने दे ।

614. दो चार लफ्ज़ प्यार के लेकर हम क्या करेंगे, देनी है तो वफ़ा की मुकम्मल किताब दे दो ।

615. जरूरी नहीं है ईश्क में बॉहों के सहारे ही मिले, किसी को जी भर के महसुस करना भी मोहब्बत है।

616. अब जिस के जी में आये वही पाये रौशनी हम ने तो दिल जला कर सरेआम रख दिया ।

617. वो पिला कर जाम लबों से अपनी मोहब्बत का, अब कहते हैं नशे की आदत अच्छी नहीं होती।

618. खींच कर उतार देते हैं उम्र की चादर, ये कमबख़्त दोस्त कभी बूढ़ा नहीं होने देते।

619. ये क्या जगह है दोस्तो ये कौन सा दयार है, हद्द-ए-निगाह तक जहाँ ग़ुबार ही ग़ुबार है ।

620. हाल तो पूछ लूँ तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी, जब जब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है ।

621. झूठी हँसी से जख्म और बढ़ता गया, इससे बेहतर था खुलकर रो लिए होते।

622. काम अब कोई न आएगा बस इक दिल के सिवा, रास्ते बंद हैं सब कूचा-ए-क़ातिल के सिवा ।

623. पहली मोहब्बत थी और हम दोनों ही बेबस वो ज़ुल्फ़ें सँभालते रहे और मैं खुद को ।

624. लोग पूछते है वजह तेरे मेरे करीब होने की, बता दे उनको मैं इश्क हूँ और तू मेरी आदत।

625. वो नाराज़ हैं हमसे कि हम कुछ लिखते नहीं, कहाँ से लाएं लफ्ज़ जब हमको मिलते नहीं, दर्द की ज़ुबान होती तो बता देते शायद, वो ज़ख्म कैसे दिखाए जो दिखते ही नहीं।

626. न समझ मैं भूल गया हूँ तुझे, तेरी खुशबू मेरे सांसो में आज भी हैं । मजबूरियों ने निभाने न दी मोहब्बत, सच्चाई मेरी वफाओ में आज भी हैं ।

627. तुम मुहब्बत के सौदे बड़े अजीब करते हो, बस यू नीगाहों से मुस्कुराते हो और दिल खरीद लेते हो।

628. हँसोगे तो साथ हँसेगी दुनिया बैठ अकेले रोना होगा, चुपके चुपके बहा कर आँसू दिल के दुःख को धोना होगा, बैरन रीत बड़ी दुनिया की आँख से जो भी टपका मोती, पलकों से ही उठाना होगा पलकों से ही पिरोना होगा।

629. इत्तेफ़ाक़ से ही सही मगर मुलाकात हो गयी, ढूंढ रहे थे हम जिन्हें उन से बात हो गयी, देखते ही उन को जाने कहाँ खो गए हम, वहीं से हमारे प्यार की शुरुआत हो गयी।

630. ये कश्मकश है ज़िंदगी की, कि कैसे बसर करें, ख्वाहिशे दफ़न करे, या चादर बड़ी करें।

631. दर्द दे गए सितम भी दे गए, ज़ख़्म के साथ वो मरहम भी दे गए, दो लफ़्ज़ों से कर गए अपना मन हल्का, और हमें कभी ना रोने की कसम दे गए।

632. नज़रें मिल जाएं तो प्यार हो जाता है, पलकें उठ जाएं तो इज़हार हो जाता है, ना जाने क्या कशिश है आपकी चाहत में, कि कोई अनजान भी हमारी ज़िन्दगी का हक़दार हो जाता है।

633. तेरी मौजूदगी महसूस वो करे जो जुदा हो तुझसे, मैंने तो अपने आप में तुझे बसाया है एक दोस्त की तरह।

634. काम आ सकीं ना अपनी वफ़ाएं तो क्या करें, उस बेवफा को भूल ना जाएं तो क्या करें।

635. कोई कहता है प्यार नशा बन जाता है, कोई कहता है प्यार सज़ा बन जाता है, पर प्यार करो अगर सच्चे दिल से, तो प्यार जीने की वजह बन जाता है।

636. याद आयेगी हर रोज, मगर तुझे आवाज़ न दूंगा, लिखूंगा तेरे लिये हर गजल, मगर तेरा नाम न लूंगा।

637. डूबी हैं मेरी उँगलियाँ खुद अपने लहू में, ये काँच के टुकड़ों को उठाने के सज़ा है|

638. आँख तो प्यार में दिल की ज़ुबान होती है, सच्ची चाहत तो सदा बे-ज़ुबान होती है, प्यार में दर्द भी मिले तो क्या घबराना, सुना है दर्द से ही चाहत और जवान होती है।

639. मेरे रोने से उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ऐ दिल, जिनके चाहने वाले ज्यादा हो वो अक्सर बे दर्द हुआ करते हैं।

640. तंग आ चुके हैं कशमकश-ए-ज़िंदगी से हम, ठुकरा न दें जहाँ को कहीं बे-दिली से हम।

641. बहुत वक़्त लगा हमें आप तक आने में, बहुत फरियाद की खुदा से आपको पाने में, कभी तुम यह दिल तोड़ कर मत जाना, हमने उम्र लगा दी आप जैसा सनम पाने में।

642. तलब मौत की करना गुनाह है ज़माने में यारो, मरने का शौक है तो मोहब्बत क्यों नही करते।

643. पहली मोहब्बत थी मेरी हम ये जान न सके, ये प्यार क्या होता है हम पहचान न सके, हमने उन्हें दिल में बसाया है इस कदर कि, जब भी चाहा हम उसे दिल से निकाल न सके।

644. तन्हाईओं मे उनको ही याद करते हैं, वो सलामत रहें यही फरियाद करते हैं, हम उनके ही मोहब्बत का इंतेज़ार करते हैं, उनको क्या पता हम उनसे कितना प्यार करते हैं|

645. जिंदगी में कभी भी अपने किसी हुनर पे घमंड मत करना, क्यूँकी पत्थर जब पानी में गिरता है तो अपने ही वजन से डूब जाता है।

646. मेरी चाहतें आप से अलग कब हैं, दिल की बातें आप से छुपी कब हैं, आप साथ रहो दिल में धड़कन की तरह, फिर ज़िन्दगी को साँसों की ज़रूरत कब है।

647. धड़कनो को बड़ा अच्छा लगता हैं जब तुम कहती हो तुम दिल की धड़कन में रहते हो |

648. रास आने लगती है तन्हाई भी, बस एक-दो रोज़ बुरा लगता है।

649. ख़ाक उड़ती है रात भर मुझमें कौन फिरता है दर-ब-दर मुझमें, मुझ को मुझमें जगह नहीं मिलती कोई मौजूद है इस क़दर मुझमें ।

650. दिल मे तो तुम्हे कब से बसा रखा है प्यार के आसमाँ के नीचे एक घर इश्क का बना है |

651. तुम्हें ये कौन समझाये, तुम्हें ये कौन बतलाये, बहुत खामोश रहने से, ताल्लुक टूट जाते है।

652. इसी कश्मकश का नाम मोहब्बत हैं आंखों में समंदर हो फिर भी प्यास रहती हैं ।

653. जाने क्या बात है तेरी आँखों में के हर पल हम इसमें डूबे रहते हैं |

654. आईना कब किसको, सच बता पाया है, जब देखा दायाँ तो, बायाँ ही नजर आया है।

655. कभी क़रीब तो कभी दूर हो के रोते हैं, मोहब्बतों के भी मौसम अजीब होते हैं।

656. रख लूँ नजर में चेहरा तेरा दिन रात इसी पे मरती रहूँ, जब तक ये सासें चलती रहे मैं तुमसे मोहब्बत करती रहूँ |

657. ज़ुल्म के सारे हुनर हम पर यूँ आज़माए गये, ज़ुल्म भी सहा हमने और ज़ालिम भी कहलाये गये।

658. कभी पहलू में आओ तो बताएँगे तुम्हें, हाल-ए-दिल अपना तमाम सुनाएँगे तुम्हें । काटी हैं कैसे हमने तन्हाई की ये रातें, हर उस रात की तड़प दिखाएँगे तुम्हें ।

659. तुम्हारा हाथ पकड़ कर घूमने का, दिल करता है, चाहे वो ख्वाबों में हो या हकीक्रत में |

660. रहे न कुछ मलाल बड़ी शिद्दत से कीजिये, नफरत भी कीजिये तो ज़रा मोहब्बत से कीजिये।

661. एक लफ्ज मुहब्बत का, इतना सा फसाना है, सिमटे तो दिले आशिक, बिखरे तो जमाना है।

662. अच्छा हुआ जो तूने मुझे छोड़ दिया, वो प्यार ही किस काम का जिसमें, हर बात का यकीन दिलाने के लिए कसमें खानी पड़े. |

663. ज़माने के सवालों को मैं हँस के टाल दूँ लेकिन, नमी आखों की कहती है मुझे तुम याद आते हो।

664. अजीब सा मौसम है आज ये मन बड़ा शांत हुआ है, ऐसा लगता है दिल का मौहब्बत में देहान्त हुआ है |

665. कभी किसी के ज़ज्बातो का मजाक ना बनाना ना जाने कौन सा दर्द लेकर कोई जी रहा है |

666. नदी के किनारों सी लिखी उसने तकदीर हमारी, ना लिखा कभी मिलना हमारा, ना लिखी जुदाई हमारी।

667. बहुत ही खुश किसमत है वो लोग जिसे प्यार के बदले प्यार मिल गया, बदनसीब तो मै हु मैने प्यार तो किया, लेकिन मुजे न प्यार मिला, ना यार मिला |

668. दोस्ती वो नहीं जो जान देती है दोस्ती वो भी नहीं जो मुस्कान देती है, अरे सच्ची दोस्ती तो वो है जो पानी में गिरा हुआ आंसू भी पहचान लेती है |

669. जज़्बात कहते हैं खामोशी से बसर हो जाए, दर्द की ज़िद्द है कि दुनिया को खबर हो जाए।

670. बहुत सी बातें सोच रखी थी तुम्हें बताने को पर मुद्दतों बाद जब बात हुई तुमने तो हाल भी न पूछा |

671. दोस्त एक ऐसा चोर होता है जो आँखों से आंसू चेहरे से परेशानी दिल से मायूसी ज़िन्दगी से दर्द और बस चले तो तो हाथो की लकीरों से मौत तक चुरा ले |

672. वक़्त वक़्त की मोहब्बत है वक़्त वक़्त की रूसवाईयां, कभी पंखे सगे हो जाते हैं तो कभी रजाईयां।

673. जाओ ढुँढ लो हमसे ज्यादा चाहने वाला, मिल जाये तो खुश रहना और ना मिले तो हम फिर भी तुम्हारे है |

674. तक़दीर लिखने वाले एक एहसान करदे, मेरे दोस्त की तक़दीर मैं एक और मुस्कान लिख दे, न मिले कभी दर्द उनको, तू चाहे तो उसकी किस्मत मैं मेरी जान लिख दे |

675. कुछ नेकियाँ ऐसी भी होनी चाहिए, जिसका खुद के सिवा कोई गवाह ना हो।

676. जिसने कल जिंदगी भर साथ जीने की कसम खाई थी, आज उसकी ही जुदाई मे मर मर के जी रहा हू |

677. हम तो बिछड़े थे तुमको अपना अहसास दिलाने के लिए मगर तुमने तो मेरे बिना ही जीना सीख लिया |

678. छूती है जब सर्द हवाएं मेरे तन मन को, तो ना जाने क्यूँ एहसास तुम्हारा होता है।

679. जिस्म फिर भी, थक हार कर सो जाता है दिल का भी, कोई बिस्तर होना चाहिये |

680. न जाने सालों बाद कैसा समां होगा, हम सब दोस्तों में से कौन कहा होगा, फिर अगर मिलना होगा तो मिलेंगे ख्वाबों मे, जैसे सूखे गुलाब मिलते है किताबों मे |

681. इबादत में ना जो फायदा तो यूँ भी होता है, हर नई मन्नत पर दरगाहें बदल जाती है।

682. कोई फर्क नही पड़ता कि तुमने किसे चाहा और कितना चाहा हमें तो ये पता है कि हमने तुम्हें चाहा और हद से ज्यादा चाहा |

683. बहुत खूबसूरत होते है ऐसे रिश्ते जिन पर कोई हक भी ना हो और कोई शक भी न हो |

684. तू हर जगह खूबसूरती तलाश ना कर, हर अच्छी चीज़ मेरे जैसी नहीं होती।

685. दर्द हैं दिल में पर इसका ऐहसास नहीं होता, रोता हैं दिल जब वो पास नहीं होता, बरबाद हो गए हम उनकी मोहब्बत में, और वो कहते हैं कि इस तरह प्यार नहीं होता |

686. एक जैसे दोस्त सारे नही होते, कुछ हमारे होकर भी हमारे नहीं होते, आपसे दोस्ती करने के बाद महसूस हुआ, कौन कहता है ‘तारे ज़मीं पर’ नहीं होते |

687. नाख़ून अल्फ़ाज़ों के रोज़ पैने करता हूँ, ज़ख़्म रूह के सूखे अच्छे नहीं लगते।

688. अब छोड़ दिया है “इश्क़” का “स्कूल” हमने भी हमसे अब “मोहब्बत” की “फीस” अदा नही होती |

689. छू ले आसमान ज़मीन की तलाश ना कर जी ले ज़िंदगी खुशी की तलाश ना कर तकदीर बदल जाएगी खुद ही मेरे दोस्त मुस्कुराना सीख ले वजह की तलाश ना कर |

690. ज़िन्दगी की खरोंचों से ना घबराइए जनाब, तराश रही है खुद ज़िन्दगी निखर जाने को।

691. पागल उसने कर दिया, एक बार देखकर मै कुछ भी ना कर सका लगातार देखकर |

692. मिल जाती है कितनो को ख़ुशी, मिट जाते हैं कितनो के गम, मैसेज इसलिये भेजते है हम, ताकि न मिलने से भी अपनी दोस्ती न हो कम |

693. ये मेरे चारों तरफ किस लिए उजाला है, तेरा ख़्याल है या दिन निकलने वाला है।

694. दिल मे तो तुम्हे कब से बसा रखा है आज नजरो से भी तुम्हे पाना है प्यार के आसमाँ के नीचे एक घर इश्क का सजाना है |

695. दोस्ती वो नहीं जो जान देती है, दोस्ती वो भी नहीं जो मुस्कान देती है, अरे सच्ची दोस्ती तो वो है जो पानी में गिरा हुआ आंसू भी पहचान लेती है |

696. ये कौन कहता है कि तेरी याद से बेखबर हूँ मैं, मेरी आँखों से पूछ लें मेरी रातें कैसे गुज़रती है।

697. रख लूँ नजर में चेहरा तेरा दिन रात इसी पे मरती रहूँ , जब तक ये सासें चलती रहे मैं तुमसे मोहब्बत करती रहूँ |

698. उनके दीदार के लिए दिल तड़पता है उनके इंतजार में दिल तरसता है क्या कहें इस कम्बख्त दिल को अपना हो कर किसी और के लिए धड़कता है |

699. सारी दुनियाँ छोड़ के मैंने तुझको अपना बनाया था, करोगे याद सदियों तक कि किसी ने दिल लगाया था।

700. सुनो कितनी अजीब बात है न हर रोज लड़तें हैं तुमसे और फिर हर रोज मोहब्बत हो जाती है तुमसे |

701. कमियाँ तो मुझमें भी बहुत है,पर मैं बेईमान नहीं मैं सबको अपना मानता हूँ सोचता फायदा या नुकसान नहीं एक शौक है ख़ामोशी से जीने का,कोई और मुझमें गुमान नहीं छोड़ दूँ बुरे वक़्त में दोस्तों का साथ वैसा तो मैं इंसान नहीं |

702. मोहब्बत किसी से करनी हो तो हद में रहकर करना, वरना किसी को बेपनाह चाहोगे तो टूटकर बिखर जाओगे।

703. तुझे मोहब्बत है मुझसे कभी जिक्र तो किया होता मैं तेरे मेरे प्यार की एक अलग कहानी लिख देता|

704. ऐ दोस्त जरा सभल कर चलना यहा ऐसे बहुत लोग मिलेंगे जो सिर्फ वक़्त गुजारने की लिए मिलेंगे |

705. उसे शोहरत ने तनहा कर दिया है, समंदर है मगर प्यासा बहुत है।

706. ये कैसी बाजी खेली तुमने मोहब्बत की खुद तो आजाद रहे हमे अपनी यादों में बांध कर दिल में कैद कर गये |

707. उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ सामने न सही पर आस-पास हूँ पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ |

708. यूँ बार बार निहारती हो आईना, ख़ूबसूरती पे गुमान है या शक।

709. सारी कायनात डूब जाएगी आपकी आँखों में हर एक की मिठास झलकती है आपकी बातों में आप खूबसूरत ही इतने हो की खुद जन्नत ही समा जाएगी आपकी बाहों में |

710. भूलना चाहो तो भी याद हमारी आएगी, दिल की गहराई मे हमारी तस्वीर बस जाएगी. ढूढ़ने चले हो हमसे बेहतर दोस्त, तलाश हमसे शुरू होकर हम पे ही ख़त्म हो जाएगी |

711. हर्फ़ तीखे और लहज़ा अदब का, वाह क्या हुनर है तुम में गजब का।

712. मजबूती से बाहों में, इस कदर थाम लूं तुझे की मेरे इश्क़ की कैद से तू चाहकर भी ना छुड़ सकें|

713. सिर्फ शायरी पढने का रिश्ता ना रखो कभी खैरियत भी तो पूछ कर देखो |

714. फटे दुपटटे से सर ढक लिया ग़रीबी ने, हवा में उडता है आंचल अमीरज़ादी का।

715. प्यार एक अहसास है, जो दिल के बड़ा पास है। सारी दुनिया लगती है बेगानी, वही लगता है प्यारा जिसका दिल मे वास है।

716. दोस्ती करो तो हमेशा मुस्कुराके किसी को धोखा ना दो अपना बना के कार्लो याद जबतक हम जिन्दा है फिर ना कहना चले गाए दिल में यादे बसा के |

717. सोंचता था मैं रह नहीं पाऊंगा तेरे बग़ैर, देखो तुमने ये भी सिखा दिया मुझको।

718. सुनो..वैसे तो “तुम” मेरी “पहली” पसंद हो मगर मैंने “चाहा” है तुम्हे अपनी “आख़री” मोहब्बत की तरह |

719. वो रोए तो बहुत पर मुहं मोड़कर रोए कोई तो मजबूरी होगी जो दिल तोड़कर रोए मेरे सामने कर दिए मेरी तस्वीर के टुकडे़ पता चला मेरे पीछे वो उन्हें जोड़कर रोए |

720. किसी को घर से निकलते ही मिल गई, मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा।

721. एक पल की ये बात नहीं, दो पल का ये साथ नहीं, कहने को तो जिन्दगी जन्नत से प्यारी है पर वो साथ ही क्या, जिसमे तेरा हाथ नहीं |

722. मेरी हर बात समझ जातें हो तुम, फिर भी क्युँ मुझे सताते हो तुम तुम बिन कोई और नहीं मेरा, शायद इसी बात का फ़ायदा उठाते हो तुम |

723. चल यारा मोहब्बत करने का हुनर सिखाता हूँ, इश्क तुम शुरू करो.. निभाकर मैं दिखाता हूँ।

724. हम वो नही जो तुम्हे गम में छोड़ देंगे , हम वो नही जो तुजसे नाता तोड़ देंगे , हम वो हे जो तुम्हारी साँसे रुके तो , अपनी साँसे छोड़ देंगे |

725. क्या खूब मजबूरिया थी मेरी भी अपनी खुशी को छोड़ दिया उसे खुश देखने के लिए |

726. बहुत मुश्किल से करता हूँ, तेरी यादों का, कारोबार मुनाफा कम है पर गुज़ारा हो ही जाता है।

727. “हमेँ कँहा मालूम था क़ि इश्क़ होता क्या है | बस एक ‘तुम’ मिले और ज़िन्दगी मुहब्बत बन गई |

728. नही छोड़ी कमी किसी भी रिश्ते को निभाने में मैंने कभी आने वाले को दिल का रास्ता भी दिया और जाने वाले को रब का वास्ता भी दिया |

729. हर सांस सज़्दा करती है, हर नज़र में इबादत होती है, वो रूह आसमानी होती है, जिस दिल में मुहब्बत होती है।

730. गिले शिकवे दिलसे न लगा लेना कभी रूठ जाऊ तो मना लेना कल का क्या पता हम हो नहो इसलिए जब भी मिलू प्यार से मेरा हाथ थाम लेना |

731. एक चाहने वाला ऐसा हो जो बिल्कुल तेरे जैसा हो |

732. मेरी धड़कन की आवाज़ सुननी हो तो, मेरे सीने पर अपना सर रख, वादा है मेरा ज़िन्दगी भर तेरे कानों में, मेरी मोहब्बत गूंजेगी।

733. #मेरी हर खुशी का रास्ता, तुझसे होकर गुजरता है| अब ये मत पुछना मेरे क्या लगते हो तुम |

734. मुझे उसकी ये नादान अदा खूब भाती हैं, नाराज़ मुझसे होती हैं और गुस्सा सबको दिखाती हैं |

735. पन्नों के परे भी है एक ज़िन्दगी, सब किरदार, किताबों में नहीं होते।

736. “ये अलग बात है कि तुम्हें यकींन नही आता पर ये दिल तुम्हारे सिवा कहीं और नही जाता।”

737. इन पलकों में कैद कुछ सपने है कुछ बेगाने है कुछ अपने है ना जाने कैसी कशिश है इन ख्यालो में कुछ लोग दूर होकर भी कितने अपने है|

738. काश की वो लौट आए मुझसे ये कहने, कि तुम कौन होते हो मुझसे बात ना करने वाले।

739. कल रात चाँद बिल्कुल आप जैसा था वो ही खूबसूरती, वो ही नूर, वो ही गुरुर, और वैसे ही आप की तरह दूर।

740. भरोसा रखो हमारी दोस्ती पर, हम किसी का दिल दुखाया नही करते, आप और आपका अंदाज़ हमे अच्छा लगा, वरना हम किसी को दोस्त बनाया नही करते |

741. ये तो परिन्दों की मासूमियत है साहेब, वर्ना दूसरों के घरों में अब आता जाता कौन है।

742. तुम्हारे सब चाहने वाले मिलकर भी उतना नहीं चाह सकते तुम्हें | जितनी मोह़ब़्बत मैं अकेले करता हूँ तुम से |

743. रिश्ते उन्ही से बनाओ जो निभाने की औकात रखते हो |

744. चलता हूं यारो कुछ काम करता हु, खुद को हँसा के अपने गम को गुमनाम करता हु।

745. सुन्नो उदास नहीं होना, क्योंकि मैं साथ हूँ, सामने न सही पर आस-पास हूँ, पल्को को बंद कर जब भी दिल में देखोगे, मैं हर पल तुम्हारे साथ हूँ |

746. जिससे सच्ची मोहब्बत की जाती है उसकी इज्ज़त मोहब्बत से भी ज्यादा की जाती है |

747. अगर मालूम होता की इतना तडपता है इश्क तो दिल जोड़ने से पहले हाथ जोड़ लेते।

748. में दिल हु, तुम साँसे, में जिस्म हु, तुम जान, में चाहत हु, तुम इबादत, में नशा हु, तुम आदत |

749. ऊँचा उठाना है तो अपने अन्दर के अहँकार को निकाल कर स्वय को हल्का करो क्युकी ऊँचा वही उठता है जो हल्का होता है |

750. मुझको ढूंढ लेती है रोज़ एक नए बहाने से, तेरी याद वाक़िफ़ हो गयी है मेरे हर ठिकाने से |

751. तुम्हे देखना फिर तुम्हे सोचना , तुम्हे सोचना फिर तुम्हे चाहना, तुम्हे चाहना फिर तुम्हे पाना, तुम्हारे पास जाना फिर तुम्हारा मेरे पास आना, कितना प्यारा सा सफर है ये हमारे प्यार का |

752. वक्त दोस्त और रिश्ते वो चीजे है जो हमे मुफ्त मिलती है -मगर इनकी कीमत पता हमे तब चलता है जब ये कही खो जाते है |

753. वो रोया तो ज़रूर होगा, खाली कागज़ देखकर, ज़िन्दगी कैसी बीत रही है पूछा था सवाल उसने।

754. प्यार वो है जब हज़ार नाराज़गियों के बाद भी वो बेफ़िक्र सुकून से. तुम्हारी ही गोद में सर रख के सो जाए |

755. हर रोज इतना मुस्कुराया करो की ग़म भी कहे | यार मै गलती से कहा आ गया |

756. इस हकीकत से खूबसूरत कोई ख्वाब नही, इश्क मर्जी है खुदा की कोई इत्तफाक नही।

757. आपको याद करना मेरी आदत बन गई है, आपका खयाल रखना मेरी फितरत बन गई है, आपसे मिलना ये मेरी चाहत बन गई है, आपको प्यार करना मेरी किस्मत बन गई है।

758. दिल के दरवाजो को हमेशा ही खुला रखती हूँ | कहा है उन्होंने देर लगेगी पर आएंगे जरूर |

759. इंतज़ार हमारा करे कोई मंजिल हमारी बने कोई, दिल की यह आरजू है छोटी, दिल में आके रहे कोई।

760. पता नहीं क्या जादू है तुम्हारे प्यार में, किसी और के बारे में सोचने का मन ही नहीं करता।

761. किस्मत पर एतबार किसको हैं | मिल जाये खुसी इंकार किसको हैं | कुछ मजबूरिय हैं मेरे दोस्त | वरना जुदाई से प्यार किसको हैं |

762. आखिर किस कदर खत्म कर सकते है उनसे रिश्ता, जिनको सिर्फ महसूस करने से हम दुनिया भूल जाते है।

763. मैं ‘गलती’ करूँ तब भी मुझे ‘सीने’ से लगा ले, कोई’ ऐसा चाहिये, जो मेरा हर ‘नखरा’ उठा ले |

764. ज़माने भर में मिलते हे आशिक कई , मगर वतन से खूबसूरत कोई सनम नहीं होता , नोटों में भी लिपट कर, सोने में सिमटकर मरे हे कई , मगर तिरंगे से खूबसूरत कोई कफ़न नहीं होता |

765. फिर कोई ज़ख़्म मिलेगा, तैयार रह ऐ दिल, कुछ लोग फिर पेश आ रहे हैं, बहुत प्यार से।

766. दिल हँसता हैं, आँखें मुस्कारती हैं, और साँसे खिल उठती हैं जब जब तेरी याद आती हैं |

767. ना हिन्दू बन कर देखो ना मुस्लिम बन कर देखों बेटों की इस लड़ाई में दुःख भरी भारत माँ को देखो |

768. इतनी करुंगा मुहब्बत के तू खुद कहेगी, देखो वो मेरा आशिक़ जा रहा है।

769. तू ही मेरी आरज़ू, तू ही मेरी बंदग़ी, तू ही मेरी सादगी, बस तू ही तू हैं मेरी ज़िंदगी |

770. आन देश की शान देश की, देश की हम संतान हैं, तीन रंगों से रंगा तिरंगा, अपनी ये पहचान है |

771. जिद, जुनून, जिंदगी, जिंदादिली तुम्हीं से है, तुम नहीं तो शब्द शब्द मायने बदल गए।

772. कितना चाहता हूँ तुम्हे , यह तो नहीं बता सकता, लेकिन हर पल⌚ में तुम मुझे याद जरूर करोगी |

773. विकसित होता राष्ट्र हमारा, रंग लाती हर कुर्बानी है फक्र से अपना परिचय देते, हम सारे हिन्दोस्तानी है |

774. कभी कभी पहली नजर कुछ ऐसे रिश्ते बना लेती है, जो आखिरी सासँ तक छुड़ाने से नहीं छूटती।

775. हर पल तेरी यादों में खोए रहते हैं, हर घड़ी तेरा सपना आँखों में बसायें रखते हैं, यक़ीन ना आयें तो पूछ ले अपने दिल से,, क्यूँ ये “वक़्त बेवक्त” हमें याद करता रहता हैं |

776. चड़ गये जो हंसकर सूली; खाई जिन्होने सीने पर गोली; हम उनको प्रणाम करते हैं! जो मिट गये देश पर; हम सब उनको सलाम करते हैं! स्वतंत्रता दिवस की बधाई |

777. मौत से कहना कि हमसे नाराजगी खत्म कर ले, वो लोग बदल गये जिनके लिये हम जिया करते थे।

778. चाहते तो हम भी तुम्हे बहुत है, लेकिन बताने से डरते है, हर पल तेरे ही खयालो मे खोये रहते है, तुम मानो या ना मानो, कसम से हम तुम्हे सच्चावाला प्यार करते है |

779. आओ झुक कर सलाम करे उनको; जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है; खुशनसीब होता है वो खून जो देश के काम आता है |

780. कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी, कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।

781. परछाई आपकी हमारे दिल में है, यादे आपकी हमारी आँखों में है, कैसे भुलाये हम आपको, प्यार आपका हमारी साँसों में है |

782. वतन हमारा ऐसा कोई ना छोड पाये , रिश्ता हमारा ऐसा कोई न तोड़ पाये , दिल एक है जान एक है हमारी , हिन्दुस्तान हमारा है यह शान हैं हमारी।

783. किसी और तरीके से भी मिल जाती है क्या मोहब्बत, मुझे तो दुआओं के आगे कुछ भो नही आता।

784. सुन पगली “जब तुम सामने आती हो, तो हम सब कुछ भूल जाते हैं और “जब तुम दूर रहती हो, तो हम बहुत कुछ बोलना चाहते हैं |

785. आओ देश का सम्मान करें, शहीदों की शहादत को याद करें, एक बार फिर से राष्ट्र की कमान, हम हिन्दुस्तानी अपने हाथ धरे, आओ स्वंतंत्र दिवस का सम्मान करें |

786. टूटे हुए सपनो और रूठे हुए अपनों ने उदास कर दिया, वरना लोग हमसे मुस्कराने का राज पुछा करते थे।

787. जब भी दिल करे मेरे दिल की धड़कन्ने सुन सकती हो, ये नादान हर पल तुझसे प्यार करने की ज़िद्द करता हैं |

788. तलवार उठाने से पहले तुम इसीलिए मिट जाने वालों का गौरव गान करो | आरती सजाने से पहले तुम इसीलिए , आजादी के परवानो का सम्मान करो|

789. दुआ कौनसी थी हमें याद नही, बस इतना याद है की, दो हथेलिया जुडी थी एक तेरी थी एक मेरी थी।

790. मुझे नही खबर कि तुम्हारी जिन्दगी में वो कौन सा पल है जो सिर्फ मेरे लिए हो पर मेरी जिन्दगी का हर इक पल. सिर्फ तुम्हारे लिए है |

791. नफरत बुरी है, न पालो इसे, दिलो में खालिश है, निकालो इसे, न तेरा, न मेरा, न इसका, न उसका ये सबका वतन है, संभालों इसे! स्वतंत्रा दिवस की बधाई |

792. छोड दी हमने हमेशा के लिए उसकी, आरजू करना, जिसे मोहब्बत, की कद्र ना हो उसे दुआओ, मे क्या मांगना।

793. कुछ सोचूं तो तेरा ही खयाल आता है कुछ बोलूं तो तेरा ही नाम आता है कब तक छुपाऊं दिल की बात तुम्हारी हर बात पर मुझे प्यार आ जाता है |

794. वतन हमारा मिसाल मोहब्बत की तोड़ता है दीवार नफरत की, मेरी खुशनसीबी कि मिली ज़िन्दगी इस चमन में, भुला न सके कोई इसकी खुशबू सातों जनम में, 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस की बधाई |

795. मंज़िले हमारे करीब से गुज़रती गयी जनाब, और हम औरो को रास्ता दिखाने में ही रह गये।

796. चाहत बन गये हो तुम कि आदत बन गये हो तुम हर सांस में यू आते जाते हो जैसे मेरी इबादत बन गये हो तुम।

797. रात के अंधियारे में , जब तक रुतबा रहेगा चाँद का , कारगिल की चोटियों पर , तब तक फैरता रहेगा तिरंगा शान का . धरती क्या आसमान में , डंका बजेगा हिंदुस्तान नाम का |

798. सारे सितारे फ़लक से ज़मीं पर जब उतर कें आयेंगे, फिर हम तेरी यादों के साथ रात भर दिवाली मनायेंगे।

799. देखकर बहते आँसू तुम्हारे हम सह नहीं सकते , मोहब्बत तुमसे कितनी है हम कह नहीं सकते ,, कितना भी नाराज़ हो जाएँ हम तुमसे सनम , मगर ये सच है तुम्हारे बिन हम रह नहीं सकते |

800. खुदा करे वो मोहब्बत जो तेरे नाम से है, हजार साल गुजरने पे भी जवान ही रहे।

801. रब्ब जाने क्या कशिश है इस मोहब्बत में इक अंजान, हमारा हकदार बन बैठा।

802. प्यार करना सीखा है, नफरतों का कोई ठौर नही बस तू ही तू हैं दिल में, दूसरा कोई और नहीं |

803. तेरे रुखसार पर ढले हैं मेरी शाम के किस्से, खामोशी से माँगी हुई मोहब्बत की दुआ हो तुम।

804. कैसी मुहब्बत हैं तेरी महफ़िल मे मिले तो, अन्जान कह दिया, तनहा ज़ो मिले तो जान कह दिया।

805. चल चले उस मोहब्बत के जहाँ मेँ, जहाँ मेरी आँखे कभी ना नम हो, मेरे दामन मेँ भरी रहेँ खुशिया तेरी मोहब्बत से, और वो मोहब्बत कभी ना कम हो।

806. न जाने किस तरह का इश्क कर रहे हैं हम, जिसके हो नहीं सकते उसी के हो रहे हैं हम।

807. लफ़्ज़ों में बातें बयां कर पाते तो कब का, कर देते मगर बयां करना नही आता हमे।

808. रात मैंने अपने दिल से उसके दिल का रिश्ता पूछा कमबख्त कहता है, जितना मैं उसका हूँ उतना तो तेरा भी नहीं हूँ |

809. धोखा ना देना कि तुझपे ऐतबार बहुत है, ये दिल तेरी चाहत का तलबगार बहुत है, तेरी सूरत ना दिखे तो दिखाई कुछ नहीं देता, हम क्या करें कि तुझसे हमें प्यार बहुत है।

810. दिल साफ़ करके मुलाक़ात की आदत डालो, धूल हटती है तो आईने भी चमक उठते हैं।

811. सुन सजनी तेरा फोटो मेरे मोबाईल से, और तुम मेरे दिल से, कभी नही निकल सकते |

812. काश एक ख्वाहिश पूरी हो इबादत के बगैर, वो आके गले लगा ले मेरी इजाजत के बगैर।

813. मैने इक माला की तरह तुमको अपने आप मे पिरोया हैं, याद रखना टूटे अगर हम तो बिखर तुम भी जाओगे।

814. महक उठती हैं हवाएं भी सिर्फ तेरी यादों से, बता मेरे प्यार को गुलाबों की जरूरत क्या है |

815. मैं वक़्त बन जाऊं तू बन जाना कोई लम्हा, मैं तुझमें गुजर जाऊं तू मुझमें गुजर जाना।

816. कोई मरहम नहीं चाहिये, जख्म मिटाने के लिये, तेरी एक झलक ही काफी है मेरे ठीक हो जाने के लिये।

817. अच्छा है.. ये ज़रा सा फ़ासला दरमियाँ, एक तो मुहब्बत बढ़ती है, दुजा किसी की नज़र नहीं लगती |

818. सामने बैठे रहो दिल को करार आएगा, जितना देखेंगे तुम्हें उतना ही प्यार आएगा।

819. अपने दिल से कह दो किसी और से मोहब्बत की ना सोचे, एक मैं ही काफी हूँ सारी उम्र तुम्हे चाहने के लिए।

820. तेरी आँखों में वो कशिश हैं, जो दिल को छू जाती हैं, तेरी बातों में वो ख़ुशी हैं, जो मेरे रूह में समा जाती हैं |

821. इज़हार-ए-तमन्ना ही तौहीन-ए-तमन्ना है, तुम खुद ही समझ जाओ मैं नाम नहीं लूँगा।

822. उसे न चाहने की आदत, उसे चाहने का जरिया बन गया, सख्त था मैं लड़का, अब प्यार का दरिया बन गया।

823. सुन्नो तेरे चेहरे पे हो हर पल मुस्कराहट, तेरी आँखों में हो हर पल प्यार, तेरी ख़्वाबों में हो हर पल यादें, यही हैं हमारे प्यार के सच्चे वादे |

824. ना समेट सकोगे क़यामत तक जिसे तुम, कसम तुम्हारी तुम्हें इतनी मोहब्बत करते हैं।

825. जलवे तो बेपनाह थे इस कायनात में, ये बात और है कि नजर तुम पर ही ठहर गई।

826. हर शाम से तेरा इज़हार किया करते है, हर ख्वाब मे तेरा दीदार किया करते है, दीवाने है हम तेरे, जो हर वक़्त तेरे मिलने का इंतज़ार किया करते है |

827. आप जब तक रहेंगे आंखों में नजारा बनकर, रोज आएंगे मेरी दुनिया में उजाला बनकर।

828. में रंग हुँ तेरे चेहरे का, जितना तू खुश रहेगा उतना में जाऊंगा जाऊँ गा |

829. तेरे इश्क़ मे हद से गुजरने का दिल करता है खुशी का हिस्सा बनू या न बनूं पर तेरे गम मे डूबने का दिल करता है।

830. हम भी मौजूद थे तकदीर के दरवाजे पे, लोग दौलत पर गिरे और हमने तुझे माँग लिया ।

831. हम अल्फाजो को ढूढते रह गए, और वो आँखों से गज़ल कह गए।

832. तूम मेरी चाहत की वो डोर हैं, जिसे में ज़िंदगी भर तेरे साथ हवा में उड़ना चाहता हु |

833. मुझको फिर वही सुहाना नजारा मिल गया, इन आँखों को दीदार तुम्हारा मिल गया, अब किसी और की तमन्ना क्यूँ मैं करूँ, जब मुझे तुम्हारी बाहों का सहारा मिल गया।

834. हमें मोहब्बत है तुमसे खुशबू की तरह, और खुशबू का कोई पैमाना नहीं होता।

835. आप खुद नहीं जानती आप कितनी प्यारी हो जान हो हमारी पर जान से प्यारी हो दूरियों के होने से कोई फर्क नहीं पड़ता आप कल भी हमारी थी और आज भी हमारी हो |

836. छू गया जब कभी ख्याल तेरा, दिल मेरा देर तक धड़कता रहा, कल तेरा ज़िक्र छिड़ गया घर में, और घर देर तक महकता रहा।

837. तुम्हे हाथो से नहीं दिल से छुना चाहते हैं, ताकि तुम ख्वाबों में नहीं मेरी रूह में आ सको।

838. क्या है जादू तेरे प्यार का कुछ नहीं दिखता तेरे सिवा तू है तू है सिर्फ़ तू है दिल के पास हर साँस तुझसे जुड़ी है मेरी जान |

839. चुपके से आकर इस दिल में उतर जाते हो, सांसों में मेरी खुशबु बनके बिखर जाते हो, कुछ यूँ चला है तेरे इश्क का जादू, सोते-जागते तुम ही तुम नज़र आते हो।

840. रौशनी में कुछ कमी रह गई हो तो बता देना दिल आज भी हाजिर है जलने को।

841. कितना प्यार है तुमसे, वो लफ्ज़ों के सहारे कैसे बताऊ महसूस कर मेरे एहसास को, अब गवाही कहाँ से लाऊँ |

842. चेहरे पर हंसी छा जाती है, आँखों में सुरूर आ जाता है, जब तुम मुझे अपना कहते हो, मुझे खुद पर गुरुर आ जाता है।

843. ना दिल की चली ना आँखों की, हम तो दीवाने बस तेरी मुस्कान के हो गए।

844. इन धड़कनो में तुम्हें बसा लू इन आँखों में तुम्हें सज़ा लू मेरे दिल की आरज़ू हो तुम, इन संसो में तुम्हें छुपा लू |

845. छुपा लूं तुझको अपनी बाँहों में इस तरह, कि हवा भी गुजरने की इजाज़त मांगे, मदहोश हो जाऊं तेरे प्यार में इस तरह, कि होश भी आने की इजाज़त मांगे।

846. बचपन के खिलौने सा कहीं छुपा लूँ तुम्हें, आँसू बहाऊँ, पाँव पटकूँ और पा लूँ तुम्हें।

847. तेरी बातों का मेरे पास कोई जवाब नहीं है अब मेरी आँखों में तेरे सिवा कोई ख्वाब नहीं है तुम मत पूछो मुझे कितनी मोहब्बत है तुमसे इतना ही जानो मेरी मोहब्बत का कोई हिसाब नहीं है।

848. जी चाहे कि दुनिया की हर एक फ़िक्र भुला कर, दिल की बातें सुनाऊं तुझे मैं पास बिठाकर।

849. जब यार ने उठा कर ज़ुल्फ़ों के बाल बाँधे तब मैं ने अपने दिल में लाखों ख़याल बाँधे।

850. सुन पगली सुबह शाम में तुम्हें अपने दिल के पास रखता हु वरना ये धड़कने” नाराज़ हो जाती हैं|

851. मुझे ना सताओ इतना कि मैं रुठ जाऊं तुमसे, मुझे अच्छा नहीं लगता अपनी साँसों से जुदा होना।

852. ना चाहते हुए भी जब दिल मेरा छूते हो, रूहानी मोहब्बत पर और यक़ीन आ जाता है।

853. मुहब्बत में कितने अफसाने बन जाते, शमां जिसको जलाती है परवाने बन जाते, हासिल करना इश्क कि मंजिल नही होती, किसी को खोकर लोग दिवाने बन जाते |

854. आपके आने से ज़िन्दगी कितनी खूबसूरत है, दिल में बसाई है जो वो आपकी ही सूरत है, दूर जाना नहीं हमसे कभी भूलकर भी, हमे हर कदम पर आपकी ज़रूरत है।

855. किसी को प्यार करो तो इतना करो की बयां करने से पहले उसे भी तुमसे प्यार हो जाए।

856. कौन कहता है के दूरी से मिट जाती है मौहब्बत, मिलने वाले तो ख्यालों मे भी मिला करते हैं ।

857. संगमरमर के महल में तेरी तस्वीर सजाऊंगा, मेरे इस दिल में ऐ सनम तेरे ख्वाब सजाऊंगा, आजमा के देख ले तेरे दिल में बस जाऊंगा, प्यार का हूँ प्यासा तेरे आगोश में सिमट जाऊॅंगा।

858. मैं, मेरी तन्हाई, मेरा दर्द और तेरी यादें, हर रात एक ही तकिये पर सोते हैं इकट्ठे होकर।

859. मुस्कुरा जाता हूँ अक्सर गुस्से में भी तेरा नाम सुन कर, तेरे नाम से इतनी मोहब्बत है तो सोच तुझसे कितनी होगी|

860. तेरे सीने से लगकर तेरी आरजू बन जाऊँ, तेरी साँसो से मिलकर तेरी खुश्बू बन जाऊँ, फासले ना रहें कोई तेरे मेरे दरमिआँ, मैं…मैं ना रहूँ बस तू ही तू बन जाऊँ।

861. नाम देने से कौन से रिश्ते सँवर जाते हैं, जहाँ रूह न बँधे दिल बिखर जाते हैं।

862. ऐसा नहीं है कि दिन नहीं ढलता या रात नहीं होती, सब अधूरा सा लगता है जब तुमसे बात नहीं होती |

863. कुछ इस अदा से आज वो पहलू-नशीं रहे, जब तक हमारे पास रहे हम नहीं रहे।

864. इत्तफ़ाक़ से नहीं मिले हम सब एक दूसरे से, इस में थोड़ी बहुत साज़िश तो खुदा की भी रही होगी।

865. मेरी सुबह होती हैं तेरे नाम से, हर पल महकता हैं तेरी यादों से, रात गुज़र जाती हैं तेरी तस्वीर से, अब बाक़ी ज़िंदगी गुज़रे तुम्हारी बाहों में |

866. हमसे ना कट सकेगा अंधेरो का ये सफर अब शाम हो रही हे मेरा हाथ थाम लो।

867. अगर पता होता कि इतना तड़पाती है महोब्बत, तो कसम से दिल लगाने से पहले हाथ जोड़ लेते।

868. महक सी जाती हो रातों में, जब तूम ख़्वाब बनकर समाती हो, यादों की तस्वीर दिल में उतर जाती हैं, जब तुम रूबरू सामने आती हो |

869. खुद नहीं जानते कितनी प्यारे हो आप, जान हो हमारी पर जान से प्यारे हो आप, दूरियों के होने से कोई फर्क नही पड़ता, कल भी हमारे थे और आज भी हमारे हो आप।

870. किस्मत के तराज़ू में तोलो,तो फ़कीर हैं हम, और दर्द-ए-दिल में, हम सा नवाब कोई नहीं।

871. कहते हैं रिश्ते नशा बन जाते हैं कोई कहते हैं रिश्ते सजा बन जाते हैं पर रिश्ते निभाओ सच्चे दिल से तो वे रिश्ते ही जीने की वजह बन जाते हैं |

872. छेड़ आती हैं कभी लब तो कभी रूखसारों को तुमने ज़ुल्फ़ों को बहुत सर पर चढा रखा है।

873. तुझे बर्बाद कर दूंगी, अभी भी लौट जा वापिस, मोहब्बत नाम है मेरा, मुझे कातिल भी कहते हैं।

874. तेरी हर अदा मोहब्बत सी लगती है, एक पल की जुदाई मुद्दत सी लगती है, पहले नही सोचा था अब सोचने लगे है हम, जिंदगी के हर लम्हों में तेरी ज़रूरत सी लगती है |

875. आ भी जाओ मेरी आँखों के रूबरू अब तुम, कितना ख्वावों में तुझे और तलाशा जाए।

876. हाल मेरा भी दिन रात कुछ ऐसा है इन दिनों, वो ज़िन्दगी में आते भी नहीं और ख्यालों से जाते भी नहीं।

877. अपनी सांसों में महकता पाया है तुझे, हर ख्वाब मे बुलाया है तुझे, क्यू न करे याद तुझ को जब खुदा ने हमारे लिए बनाया है तुझे |

878. चेहरे पे मेरे जुल्फों को फैलाओ किसी दिन, क्यूँ रोज गरजते हो बरस जाओ किसी दिन, खुशबु की तरह गुजरो मेरी दिल की गली से, फूलों की तरह मुझपे बिखर जाओ किसी दिन।

879. काँच सा था तो हमेशा तोड़ देते थे मुझे, अब तोड़ के दिखाओ कि अब पत्थर सा हूँ मैं।

880. कुछ लोग खोने को प्यार कहते हैं तो कुछ पाने को प्यार कहते हैं, पर हकीक़त तो ये है, हम तो बस निभाने को प्यार कहते हैं |

881. कहा ये किसने कि फूलों से दिल लगाऊं मैं, अगर तेरा ख्याल ना सोचूं तो मर जाऊं मैं, माँग ना मुझसे तू हिसाब मेरी मोहब्बत का, आ जाऊं इम्तिहान पर तो हद्द से गुज़र जाऊं मैं।

882. नहीं जो दिल में जगह तो नजर में रहने दो, मेरी हयात को तुम अपने असर में रहने दो।

883. ये लकीरें, ये नसीब, ये किस्मत सब फ़रेब के आईनें हैं हाथों में तेरा हाथ होने से ही हाथों में तेरा हाथ होने से ही |

884. मुझे सहल हो गई वो, हवा के रुख भी बदल गये, तेरा हाथ, हाथ में आ गया, कि चिराग राह में जल गये।

885. इश्क था इश्क, भला कैसे गवारा करते, ये कोई निकाह नही जो दोबारा करते।

886. हम वो नही जो तुम्हे गम में छोड़ , हम वो नही जो तुजसे नाता तोड़ देंगे , हम वो हे जो तुम्हारी साँसे रुके तो , अपनी साँसे छोड़ देंगे |

887. अच्छी सूरत नज़र आते ही मचल जाता है, किसी आफ़त में न डाल दे दिल-ए-नाशाद मुझे।

888. लो इबादत रखा अपने रिश्ते का नाम, यारा, मुहब्बत को तो लोगों ने बदनाम कर दिया है।

889. ये वादा है तुमसे वो दिन भी मैं लाऊँगा, जब तुम ख़ुद कहोगी, मुझे दुनिया की परवाह नहीं। मैं बस तुम्हारी होना चाहती हूँ। मैं बस तुम्हारी हूँ।

890. ये तो नहीं कि तुम सा जहान में हसीन नहीं, इस दिल का क्या करूँ ये बहलता कहीं नहीं।

891. अदब-ऐ-वफ़ा भी सीखो मोहबत की दरगाह में, फकत यूं ही दिल लगाने से, दिलो में घर नहीं बनते।

892. ना चाँद की चाहत ना तारों की फ़रमाईश हर जन्म तू मिले बस यही मेरी ख्वाईश |

893. तेरा प्यार मेरी जिंदगी में बहार ले कर आया है, तेरे आने से पहले हर दिन पतझड़ हुआ करता था।

894. तुझमें हमेशा खुदा का अक्स देखा है मैंने, मेरा इश्क़ तो कब का मुकम्मल हो गया।

895. एक पल की ये बात नहीं, दो पल का ये साथ नहीं, कहने को तो जिन्दगी जन्नत से प्यारी है, पर वो साथ ही क्या जिसमे तेरा हाथ नहीं |

896. बस इतना ही कहा था कि बरसों के प्यासे हैं हम, उसने होठों पे होंठ रख के खामोश कर दिया।

897. मेरी फितरत में नहीं है किसी से नाराज होना, नाराज वो होते है जिसे खुद पर गुरुर होता है।

898. सुन पगली मेरी यही ख़्वाहिश है, हर पल हम साथ हो, मेरे हाथो में तेरा हाथ हो, जहाँ भी देखें एक साथ देखें, तुम मेरी नज़र से देखो और मैं तुम्हारी नज़र से.

899. यार पहलू में है तन्हाई है कह दो निकले, आज क्यूँ दिल में छुपी बैठी है हसरत मेरी।

900. आँखों को इंतज़ार का दे कर हुनर चला गया, चाहा था एक शख़्स को जाने किधर चला गया।

901. तेरे सीने से लग कर तेरी आरज़ू बन जाऊँ, तेरी सांसों से मिलकर तेरी खुशबू बन जाऊँ, फासले न रहें कोई हम दोनों के दरम्यान, मैं, मैं न रहूँ बस तू ही तू बन जाऊँ।

902. किताबों से दलील दूँ, या खुद को सामने रख दूँ, वो मुझ से पूछ बैठा है, मोहब्बत किस को कहते हैं|

903. सारी दुनिया के रूठ जाने की परवाह नहीं मुझे, बस एक तेरा खामोश रहना मुझे तकलीफ देता है।

904. किसी को चाहो तो इस अंदाज़ से चाहो, कि वो तुम्हे मिले या ना मिले, मगर उसे जब भी प्यार मिले, तो तुम याद आओ |

905. पूछते हैं मुझसे की शायरी लिखते हो क्यों लगता है जैसे आईना देखा नहीं कभी।

906. तेरी मोहब्बत की बाजी को यारा हम मान गए, खुद तो वादों से बंधे नही हमे ही यादों से बांध गए।

907. मेरी यादो मे तुम हो, या मुझ मे ही तुम हो मेरे खयालो मे तुम हो, या मेरा खयाल ही तुम हो दिल मेरा धडक के पूछे, बार बार एक ही बात मेरी जान मे तुम हो, या मेरी जान ही तुम हो |

908. पहली मोहब्बत थी और हम दोनों ही बेबस, वो ज़ुल्फ़ें सँभालते रहे और मैं खुद को।

909. वक़्त ने कहा, काश थोड़ा और सब्र होता, सब्र ने कहा, काश थोड़ा और वक़्त होता।

910. रिश्ता वो नहीं होता जो दुनिया को दिखाया जाता है! रिश्ता वह होता है,जिसे दिल से निभाया जाता है!! अपना कहने से कोई अपना नहीं होता, अपना वो होता है जिसे दिल से अपनाया जाता है |

911. मुद्दत के बाद उसने जो आवाज़ दी मुझे, कदमों की क्या बिसात थी साँसे ठहर गयीं।

912. शौंक नहीं है मुझे अपने जज़्बातों को यूँ सरेआम लिखने का, मगर क्या करूँ अब जरिया ही ये है तुझसे बात करने का।

913. शान से हम तेरे दिल में रहेंगे, तेरी मोहब्बत पे जान निसार करेंगे, देख के जलेगी हमे दुनियाँ सारी, इस कदर बे-पनाह प्यार तुझे करेंगे |

914. नहीं बसती किसी और की सूरत अब इन आँखो में, काश कि हमने तुझे इतने गौर से ना देखा होता।

915. वापस लौट आया है हवाओं का रुख मोड़ने वाला, दिल में फिर उतर रहा है दिल तोड़ने वाला।

916. ज़िंदगी में बार-बार सहारा नही मिलता, बार-बार कोई प्यार से प्यारा नही मिलता, है जो पास उसे संभाल के रखना, खो कर वो फिर कभी दुबारा नही मिलता।

917. मेरी निगाह-ए-शौक़ भी कुछ कम नहीं मगर, फिर भी तेरा शबाब तेरा ही शबाब है।

918. रहने लगा है ऐसा ही मेरा हाल अक्सर, अब आँखों से बह जाते हैं ख्याल अक्सर।

919. लिख दूं तो लफ्ज़ तुम हो सोच लूं तो ख़याल तुम हो मांग लूं तो मन्नत तुम हो चाह लूं तो मुहब्बत भी तुम हो सब कुछ तुम ही हो |

920. नजाकत ले के आँखों में, वो उनका देखना तौबा, या खुदा हम उन्हें देखें कि उनका देखना देखें।

921. तमन्ना मचल रही है थोड़ा सा साथ दे दो, बदले में ले लो सांसे मुझे अपना हाथ दे दो।

922. हमारी हर ख़ुशी का एहसास तुम्हारा हो तुम्हारे हर ग़म का दर्द हमारा हो मर भी जाए तो हमें कोई ग़म नही बस आख़िरी वक़्त साथ तुम्हारा हो |

923. दिल की दहलीज पर रख कर तेरी यादों के चिराग हमने दुनियां को मोहब्बत के उजाले बख्शे |

924. मौहब्बत कोई तस्वीर नहीं जनाब जो देख लोगे, एक एहसास है जो चुपके से दिल में दस्तक देता है।

925. मेरी हर खुशी हर बात तेरी है, साँसो में छुपी ये हयात तेरी है, दो पल भी नहीं रह सकते तेरे बिना, धड़कनो की धड़कती हर आवाज तेरी है।

926. आए बिछड़ने का कोई और तरीका ढूंढें प्यार बढ़ता है मेरी जां खफा रहने से |

927. शायरी नहीं, यह लफज़ो में लिपटे मखमली अहसास हैं हमारे सिर्फ उनके लिए जो बेहद खास हैं हमारे।

928. प्यार किया तो उनकी मोहब्बत नज़र आई दर्द हुआ तो पलके उनकी भर आई दो दिलों की धड़कन में एक बात नज़र आई दिल तो उनका धड़का पर आवाज़ इस दिल की आई |

929. मुझको ढूंढ लेती है रोज़ एक नए बहाने से तेरी याद वाक़िफ़ हो गयी है मेरे हर ठिकाने से |

930. जिंदगी की रफ्तार बहुत तेज चलती है साहब, एक दिन कुछ ना लिखो तो लोग भुलने लगते हैं।

931. तुम मेरी बाहों का हार बनो, मेरे आँखो की चमक बनो, तुम इस दिल की धड़कन बनो, मेरे साँसों की महक बनो, बस हर पल यूही इस दिल की चाहत बनो |

932. मैं चाहता हूँ एक आशियाना हो जो वाबस्ता सिर्फ तुम से हो |

933. मै तो फना हो गया उसकी एक झलक देखकर, ना जाने हर रोज़ आईने पर क्या गुजरती होगी।

934. इज़हार मोहब्बत का कुछ ऐसे हुआ, क्या कहें की प्यार कैसे हुआ, उनकी एक झलक पे निसार हुए हम, सादगी पे मर-मिटे और आँखो से इक़रार हुआ |

935. कैसे एक लफ्ज़ में बयां कर दूँ दिल को किस बात ने उदास किया |

936. बदलते नहीं जज़्बात मेरे रोजाना तारीखों की तरह, बेपनाह इश्क़ करने की ख्वाहिश मेरी आज भी है।

937. जब नफ़रत करते करते थक जाओ, तो एक मौका प्यार को भी दे देना।

938. खन खना खन है ख्यालों में जरुर आज उसने कंगन पहने होंगे |

939. एक तेरा ही नशा है जो शिकस्त दे गया मुझे, वर्ना मयखाने भी तौबा करते थे मेरी मयकशी से।

940. मैने जो पुछा उनसे कि यूँ बात बात पे रूलाते क्युँ हो, वो बङे प्यार से बोली, मुझे बहता हुआ पानी बेहद पंसद है |

941. हमें तामीर के धोखे में रखकर हमारे ख्वाब चुनवाये गए हैं |

942. नाराजगी चाहे कितनी भी क्यो न हो तुमसे, तुम्हें छोड़ देने का ख्याल हम आज भी नही रखते।

943. क्या क्या रंग दिखाती है जिंदगी क्या खूब इक्तेफ़ाक होता है, प्यार में ऊम्र नहीँ होती पर हर ऊम्र में प्यार होता है |

944. अब ये हसरत है कि सीने से लगाकर तुझको इस क़दर रोऊँ की आंसू आ जाये |

945. नब्ज टटोलते ही हकीमों ने कहा, साहब इसने तो इश्क़ पी रखा हैं।

946. ना शौक दीदार का, ना फिक्र जुदाई की, बड़े खुश नसीब हैँ वो लोग जो, मोहब्बत नहीँ करतेँ |

947. जिस जगह जाकर कोई वापस नहीं आता जाने क्यों आज वहां जाने को जी चाहता है |

948. शायरी करने वाले बढ़ते जा रहे है, ऐ-मोहब्बत लगता है तेरा धंधा जोरो पर है।

949. मोहब्बत कर सकते हो तो खुदा से करो ‘दोस्तों’, मिट्टी के खिलौनों से कभी वफ़ा नहीं मिलती |

950. तुमसे ही रूठ कर तुम्ही को याद करते हैं हमे तो ठीक से नाराज़ होना भी नही आता |

951. एहसास ए करबला तुझे भी हो जाएगा इक दिन, ए-जान तनहा किसी अज़ीज़ की मय्यत उठा के तो देख।

952. मोहब्बत न सही मुकदमा कर दे मुज पर, कम से कम तारीख दर तारीख मुलाकात तो होगी ।

953. तुमको देखूं तो मुझे प्यार बहोत आता है ज़िंदगी इतनी हसीन पहले तो नही लगती थी |

954. ये तेरी हल्की सी नफ़रत और थोड़ा सा इश्क़, यह तो बता ये मज़ा-ए-इश्क़ है या सज़ा-ए-इश्क़।

955. तजुर्बा कहता है मोहब्बत से किनारा कर लूँ, और दिल कहता हैं की ये तज़ुर्बा दोबारा कर लू|

956. जिस्म से होने वाली मोहब्बत का इज़हार आसान होता है रूह से हुई मोहब्बत समझने में ज़िन्दगी गुजर जाती है |

957. सोचा था खुदा के सिवा मुझे कोई बर्बाद नहीं कर सकता, फिर उनकी मोहब्बत ने मेरे सारे वहम तोड़ दिए।

958. हर मर्ज़ का इलाज़ मिलता था उस बाज़ार में, मोहब्बत का नाम लिया दवाख़ाने बन्द हो गये|

959. रात फिर आएगी फिर ज़हेंन के दरवाज़े पर कोई मेंहदी में रंगे हाथ से दस्तक देगा |

960. मकड़ी जैसे मत उलझो तुम गम के ताने बाने में, तितली जैसे रंग बिखेरो हँस कर इस ज़माने में।

961. मैंने कहा बहुत प्यार आता है तुम पर, वो मुस्कुरा कर बोले और तुम्हे आता ही क्या है।

962. उसके लहज़े के बदलने की कहानी को समझ कर अब भी अये दिल उसे चाहो तो तुम्हारी मर्ज़ी |

963. यूँ ही रिहा नहीं हो सकेंगे जहन से तुम्हारे हम, बड़ी सिद्दत से तुम्हारे दिल में घर बनाया है।

964. वही हुआ न तेरा दिल, भर गया मुझसे, कहा था न ये मोहब्बत नहीं हैं, जो तुम करती हो |

965. ज़ूलफ़े तेरी बिखरी बिखरी और आँचल भी सर से सरका देख के तेरा यौवन गोरी तब दिल मेरा भी बहका |

966. सम्भालती है सदा तेरी चाहतें मुझको, मेरी दुआ है कि, तू मुझे भूल ना पाए कभी।

967. चाहो तो छोड़ दो चाहो तो निभा लो, मोहब्बत तो हमारी है पर मर्जी सिर्फ तुम्हारी है |

968. वो चैन से बैठे हैं मेरे दिल को मिटा कर ये भी नहीं अहसास के क्या चीज़ मिटा दी |

969. हमारी अफवाह के धुंए वहीं से उठते है, जहाँ हमारे नाम से आग लग जाती है।

970. सुनो बार बार मेरी ‪‎प्रोफाइल‬ खोल के ‪तस्वीर‬ ना देखा करो नज़र ‪‎मोहब्बत‬ की होगी तो नज़र लग जाऐगी |‬‬‬

971. सुनो क्या तुम भी याद करते हो इस तरह मसल्सल चल रही है साँस जिस तरह |

972. इतना भी गुमान न कर आपनी जीत पर ऐ बेखबर, शहर में तेरे जीत से ज्यादा चर्चे तो मेरी हार के हैं।

973. मोहब्बत भी ठंड जैसी है, लग जाये तो बीमार कर देती है |

974. राब्ते में थोड़े कमज़ोर है हम लेकिन ताअल्लुक़ नहीं टूटे गा भरोसा रखना |

975. लहरों का सुकून तो सभी को पसंद है, लेकिन तुफानो में कश्ती निकालने का मजा ही कुछ और है।

976. मुझे क़बूल है हर दर्द हर तकलीफ़ तेरी चाहत में सिर्फ़ इतना बता दो क्या तुम्हें मेरी मोहब्बत क़बूल है |

977. तेरी कमी खलती रहती है सदा, एक बे नाम तस्वीर की तरह |

978. कितनी अजीब है इस शहर की तन्हाई भी, हज़ारो लोग है मगर फिर भी कोई उस जैसा नहीं।

979. तूने मेरा आज देख के मुझे ठुकराया है, हमने तो तेरा गुजरा कल देख के भी मोहब्बत की थी|

980. कितनी मासूम तमन्ना है नाम अपना तेरी आवाज़ में सुनूँ |

981. मौन हो बस सुनें धड़कनों की ज़ुबाँ, लुत्फ़ क्या है लबों से हुई बात में।

982. एहसान जताना जाने कैसे सीख लिया, मोहब्बत जताते तो कुछ और बात थी।

983. ख्वाब लफ़्ज़ों में ढल नहीं सकते काश आँखें पढ़ा करे कोई |

984. दस्तक और आवाज तो कानो के लिए है, जिसे रूह जी जाए खामोशी उसे कहते हैं।

985. सुनो एक बार और मोहब्बत करनी है तुमसे, लेकिन इस बार बेवफाई हम करेंगे |

986. शायरी वो लोग करते हैं जनाब जिनकी आँखों में दर्द रोटा है |

987. वक़्त की तरह तुम भी ना ठहरे मेरी ज़िन्दगी में, तुम गुज़रते रहे और हम इंतज़ार करते रह गए।

988. मोहब्बत का कोई रंग नही फिर भी वो रंगीन है, प्यार का कोई चेहरा नही फिर भी वो हसीन हैं|

989. कुछ अल्फ़ाज़ की तरतीब से बनती है शायरी कुछ चेहरे भी मुकम्मल ग़ज़ल हुआ करते हैं |

990. लाकर तेरे करीब मुझे दूर कर दिया, तकदीर भी मेरे साथ एक चाल चल गई।

991. हाल तो पूछ लू तेरा पर डरता हूँ आवाज़ से तेरी, ज़ब ज़ब सुनी है कमबख्त मोहब्बत ही हुई है।

992. बिछड़ के तुमसे ज़िन्दगी सज़ा लगती है ये सांस भी जैसे मुझसे ख़फ़ा लगती है अगर उम्मीद-ए-वफ़ा करूँ तो किससे करूँ मुझको तो मेरी ज़िंदगी भी बेवफा लगती है |

993. कैसे कह दूँ कि बदले में कुछ नहीं मिला, सबक भी कोई छोटी चीज तो नहीं है।

994. झूठ कहते हैं लोग कि मोहब्बत सब कुछ #छीन लेती है, मैंने तो मोहब्बत करके ग़म का खजाना पा लिया|

995. तुझे चिठ्ठीयां नहीं करवटो की नकल भेजेंगे अब चादर के नीचे कार्बन लगाने लगे हैँ हम एक ख्वाहिश है मेरी, पूरी हो इबादत के बगैर वो आकर लिपटे मुझसे, मेरी इजाजत के बगैर |

996. दिल की बात दिल में रह जाती है हर शाम, रूठने और मनाने में वक़्त गुजर जाता है।

997. बस तुम्हेँ पाने की तमन्ना नहीँ रही, मोहब्बत तो आज भी तुमसे बेशुमार करतेँ हैँ |

998. बेवफा तेरा मासुम चेहरा भुल जाने के काबिल नही है मगर तु बहुत खुबसुरत पर दिल लगाने के काबिल नही |

999. ऐब भी बहुत हैं मुझमें, और खूबियां भी, ढूँढने वाले तूं सोच, तुझे चाहिए क्या मुझमें।

1000. दिलों में खोट है ज़ुबां से प्यार करते हैं, बहुत से लोग दुनिया में यही व्यापार करते हैं.

1. खुदा के नेक बन्दे हो तो बदी से भी डरा करो । क्योंकि दिन होगा क़यामत का, बस तुम होगे और खुदा होगा।

2. चाँदनी रात बड़ी देर के बाद आयी, ये मुलाक़ात बड़ी देर के बाद आयी, आज आये हैं वो मिलने मुद्दत के बाद, आज की रात बड़ी देर के बाद आयी।

3. आप खुद नही जानती आप कितनी प्यारी हो, जान तो हमारी पर जान से प्यारी हो, दूरियों के होने से कोई फ़र्क नहीं पड़ता, आप कल भी हमारी थी आज भी हमारी हो!!

4. सँभलने दे मुझे ऐ ना-उम्मीदी क्या क़यामत है कि दामान-ए-ख़याल-ए-यार छूटा जाए है मुझ से!

5. यह जो हिज्र में दीवार-ओ-दर को देखते हैं, कभी सबा को कभी नामबर को देखते हैं, वो आये घर में हमारे खुदा की कुदरत है, कभी हम उनको कभी अपने घर को देखते हैं।

6. मेरी यादों में तुम हो या मुझ में ही तुम हो, मेरे ख़यालों में तुम हो या ख़याल ही तुम हो, दिल मेरा धड़क के बार बार ये पूछे, मेरी जान में तुम हो या मेरी जान ही तुम हो!!

7. अंदाज़-ए-सितम उनका निहायत ही अलग है गुज़री है जो दिल पर वो क़यामत ही अलग है |

8. मेरे साथ बैठ कर वक़्त भी रोया एक दिन बोला बन्दा तू ठीक है मैं ही ख़राब चल रहा हूँ |

9. यादों की धुंध में आपकी परछाई सी लगती है, कानो में गूँजती शहनाई सी लगती है, आप करीब है तो अपनापन है, वरना सीने में साँस भी पराई सी लगती है!!

10. तेरा पहलू तेरे दिल की तरह आबाद रहे तुझ पे गुज़रे न क़यामत शब-ए-तन्हाई की।

11. वक्त आता है तो बदल जाती है हर सूरत चाँद भी तो हमेशा अधूरा नहीं रहता |

12. आपकी वफ़ा हमेशा मुझपर उधार रहेगी, मेरी ज़िंदगी आपकी मुस्कुराहट पर निसार रहेगी, दिया है आपने इतना प्यार मुझे, की मर कर भी मेरी ज़िंदगी आपकी कर्ज़दार रहेगी!!

13. दिल में समां गयीं हैं क़यामत की शोख़ियाँ दो-चार दिन मैं भी रहा था मैं किसी की निगाह में |

14. घड़ी की फितरत भी अजीब है, हमेशा टिक-टिक कहती है, मगर, ना खुद टिकती है और ना दूसरों को टिकने देती है |

15. उस दिल से प्यार ना करो जो तुम्हे दर्द दे, पर उस दिल को कभी दर्द ना दो जो तुमसे प्यार करे, क्यूकी तुम दुनिया के लिए कोई एक हो, पर किसी एक के लिए सारी दुनिया हो!!

16. एक मुलाक़ात करो हमसे इनायत समझकर हर चीज़ का हिसाब देंगे क़यामत समझकर मेरी दोस्ती पे कभी शक ना करना हम दोस्ती भी करते है इबादत समझ कर |

17. कुछ नाकामयाब रिश्तों में पैसे नहीं बहुत सारी उम्मीदें और वक्त खर्च हो जाते हैं |

18. रोती हुई आँखो मे इंतेज़ार होता है, ना चाहते हुए भी प्यार होता है, क्यू देखते है हम वो सपने, जिनके टूटने पर भी उनके सच होने का इंतेज़ार होता है |

19. अगर देखनी है क़यामत तो चले आओ हमारी महफ़िल में, सुना है आज महफ़िल में वो बेनक़ाब आ रहे हैं |

20. आँखोँ के परदे भी नम हो गए बातोँ के सिलसिले भी कम हो गए पता नही गलती किसकी है वक्त बुरा है या बुरे हम हो गए |

21. एक आस, एक एहसास, मेरी सोच और बस तुम, एक सवाल, एक मज़ाल, तुम्हारा ख़याल ओर बस तुम, एक बात, एक शाम, तुम्हारा साथ ओर बस तुम, एक दुआ, एक फर्याद, तुम्हारी याद ओर बस तुम, मेरा जुनून, मेरा सुकून बस तुम ओर बस तुम!!

22. मोहब्बत ये नहीं कि तुम तड़पो और उसे खबर भी न हो मोहब्बत ये है की तुम्हारा दिल तड़पे तो उसके दिल पे क़यामत गुज़रे |

23. लगता था ज़िन्दगी को बदलने में वक़्त लगेगा पर क्या पता था बदलता हुआ वक़्त ज़िन्दगी बदल देगा |

24. पास होकर भी दूरिया महसूस कर रहा हू, मे तो सह लूँगा दर्द-ए-ज़ख़्म पर तेरी फिकर कर रहा हू, तुम मेरे इतने करीब आ गई हो की कैसे बताउ, तुम्हारी खामोशियो से मे पल पल मर रहा हू!!

25. क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने जब माँगा उससे ज़िन्दगी का हिसाब; ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो, ‘मोहब्बत’ की है इसने।

26. मेरी ना रात कटती है और ना ज़िन्दगी, वो शख्स मेरे वक़्त को इतना धीमा कर गया।

27. वो जाते हुए कह गये की अब तो हम सिर्फ़ तुम्हारे ख्वाबो मे ही आएगे, कोई कह दे उनसे जाके की वो वादा तो निभाए हम ज़िंदगी भर के लिए सो जाएगे!!

28. ये सुबह का मंज़र भी क़यामत का हसीन है तकिया है कहीं, ज़ुल्फ़ कहीं, खुद वो कहीं हैं |

29. वक़्त रहता नही कहीं टिककर इसकी आदत भी आदमी सी है |

30. बहुत खूबसूरत उनका हर अंदाज़ है, हक़ीक़त है या ख्वाब है, खुशनसीबों के पास रहते हैं वो, मेरे पास तो बस उनकी मीठी सी याद है!!

31. क़यामत के रोज़ फ़रिश्तों ने जब माँगा उससे ज़िन्दगी का हिसाब; ख़ुदा, खुद मुस्कुरा के बोला, जाने दो, ‘मोहब्बत’ की है इसने।

32. इस जज़्ब-ए-ग़म के बारे में एक मशविरा तुमसे लेना है उस वक़्त मुझे क्या लाज़िम है जब तुम पे मेरा दिल आ जाए|

33. दर्द का एहसास जानना है तो प्यार कर के देखो, अपनी आँखो मे किसी को उतार कर देखो, चोट उनको लगेगी आँसू तुम्हे आ जाएँगे, ये एहसास जानना हो तो दिल हार कर देखो!!

34. बदलना आता नहीं हमे मौसम की तरह हर इक रुत में तेरा इंतज़ार करते है ना तुम समझ सकोगे जिसे क़यामत तक कसम तुम्हारी तुम्हे हम इतना प्यार करते है |

35. ऐ रहबर-ए-कामिल चलने को तैयार तो हुँ पर याद रहे उस वक़्त मुझे भटका देना जब सामने मंज़िल आ जाए |

36. यूँ तो पल भर में सुलझ जाती है उलझी ज़ुल्फ़ें उम्र कट जाती है पर वक़्त के सुलझाने में |

37. अगर मैं हद से गुज़र गयी तो मुझे माफ़ करना, तेरे दिल में उतार गयी तो मुझे माफ़ करना, रात में तुझे देख के तेरे दीदार की खातिर, पल भर जो ठहर गयी तो मुझे माफ़ करना!!

38. कल मिला वक़्त तो ज़ुल्फ़ें तेरी सुलझा लूंगा आज उलझा हूँ ज़रा वक़्त के सुलझाने में |

39. वक़्त मेरी तबाही पे हँसता रहा रंग तकदीर क्या क्या बदलती रही |

40. सिर्फ़ मेरी ही नज़रे हो हमेशा उनपे, कोई और आँखें उनका दीदार ना करे, मेरी मुहब्बत की हो शिद्दत इतनी गहरी, के भूल से भी वो किसी और से इश्क़ ना करे!!

41. जिन किताबों पे सलीक़े से जमी वक़्त की गर्द उन किताबों ही में यादों के ख़ज़ाने निकले|

42. इक दूजे का हर पल अब से इक दूजे की भरपाई हो, जीवन भर ऐसे साथ रहो दो जिस्म एक परछाई हो |

43. काग़ज़ भी हमारे पास है, कलम भी हमारे पास है, लिखू तो क्या लिखू ऐ सनम, ये दिल तो तुम्हारे पास है!!

44. जब दिल पे छा रही हों घटाएँ मलाल की, उस वक़्त अपने दिल की तरफ़ मुस्कुरा के देख !!

45. आप दोनों के जीवन ख़ुशियों की भरमार रहे, और ज्यादा क्या कहूँ, बस खुशियों का संसार रहे |

46. परवाह कर उसकी जो तेरी परवाह करे, ज़िंदगी में जो कभी ना तन्हा करे, जान बन के उतार जाए उसकी रूह में, जो जान से भी ज़्यादा तुझसे वफ़ा करे!!

47. ये फैसला तो शायद वक़्त भी न कर सके सच कौन बोलता है अदाकार कौन है |

48. आपकी जोड़ी सलामत रहे; जीवन में बेशुमार प्यार भरा रहे, हर दिन आप ख़ुशी से मनाये; आपको शादी हार्दिक शुभकामनाएं!

49. आँसू आ जाते हैं आँखों मैं, पर लबों पे हँसी लानी पड़ती हे, यह मोहब्बत भी क्या चीज़ है यारो, जिससे करते हो उसी से छिपानी पड़ती है!!

50. वक़्त सी फ़ितरत लिए चलता है वो, ना किसी का होता है ना ठहरता है वो।

51. मुबारक हो तुमको ये शादी तुम्हारी, सदा खुश रहो तुम दुआ है हमारी |

52. एक पल का एहसास बनकर आते हो तुम, दूसरे ही पल खुश्बू की तरह उड जाते हो तुम, जानते हो तन्हाइयों से डर लगता है हमे, फिर भी तन्हा छोड़ जाते हो तुम!!

53. तू मेरी जेब में रकखे हुए क़लम पे न जा मैं वक़्त आने पे चाक़ू निकाल सकता हूँ |

54. बूँद की प्यास हो और नदी मिल जाये दोनो को जहाँ भर की ख़ुशी मिल जाये |

55. आपकी धड़कन से है रिश्ता हमारा, आपकी सांसो से है नाता ह्मारा, भूल के भी कभी भूल ना जाना, आपकी यादो के सहारे है जीना हमारा!!

56. मिलके बिछड़ने में ही सब वक़्त काट गया, दो पल भी ना मिले हाल-ए-दिल सुनाने को।

57. शादी है ख़ुशी का गीत, दूल्हा-दुल्हन के प्यार का संगीत, ये लम्हा लेकर आता है हर पल ख़ुशी का, जिन्दगी भर के लिए वो बन जाते हैं ममीत |

58. आप आएँगे कबतलक इतना तो बता दीजिए, आप के इंतेज़ार में खुद को भुलाए बैठे हैं, वापस जा ना पाओगे बस एक बार चले आओ, आपकी राहों में हम पलकें बिछाये बैठे हैं!!

59. मैं वक़्त की दहलीज़ पे ठहरा हुआ पल हूँ, क़ायम है मेरी शान कि मैं ताजमहल हूँ !!

60. आज इस शुभ घड़ी में एक मीठे रिश्ते की है शुरुआत तुम दोनों सदा रहो साथ साथ भगवन से बस यही है फ़रियाद|

61. मिले तुझे हर खुशी हम दुआ करते है, तेरी हर मंज़िल हो हसीन हम दुआ करते है. वैसे तो कबुल होती नही हमारी मन्नते पर, तेरी हर दुआ कबुल हो हम दुआ करते है!!

62. उम्मीद वक्त का सबसे बड़ा सहारा है, गर हौसला है तो हर मौज में किनारा है !! रात तो वक़्त की पाबंद है ढल जाएगी, देखना ये है चराग़ों का सफ़र कितना है !!

63. मुबारक दे रहे है आपके यार बार बार खुशियां आये आपके घर कई हज़ार दिल से देते है हम बधाई शादी मुबारक हो आपको मेरे भाई |

64. काश उनको कभी फ़ुर्सत में यह ख़याल आ जाए, के कोई याद करता है उन्हे ज़िंदगी समझ कर!!

65. वक़्त पड़ जाए तो जाँ से भी गुज़र जाएँगे, हम दिवाने हैं मोहब्बत के अदाकार नहीं !!

66. शहनाइयों से गूंजी है आज की यह रात रिश्ते में बंधने जा रहा है मेरा यार सजा है दुल्हा सजी है दुल्हन सजे है सारे यार शादी मुबारक हो मुबारक हो मेरे प्यारे यार |

67. आपकी अदा से हम मदहोश हो गये, आप ने पलट कर देखा तो हम बेहोश हो गये, यही एक बात कहनी थी आपसे, ना जाने क्यूँ आपको देखते ही, हम खामोश हो गये!!

68. हम तो गुम थे किसी की खामोशी में आपने याद दिलाया तो वक़्त याद आया |

69. करनी है शादी पर किस्मत नही खुलती, ताजमहल है बनवाना मुमताज नही मिलती, खुली किस्मत एक दिन और हो गयी शादी, अब तो तमन्ना है ताजमहल बनाने की, हाय रे किस्मत, अब मुमताज नही मरती |

70. तेरी आँखों मे, मैं खो नहीं सकता, तेरे काँधे पे मैं सो नहीं सकता, हैं तो बहुत आँसू मेरी आँखों मे पर, तेरे सामने तो मैं रो भी नहीं सकता!!

71. इस क़दर प्यार से ऐ जान-ए-जहाँ रक्खा है, दिल के रुख़सार पे इस वक़्त तेरी याद् ने हाथ |

72. सर पे है सेहरा, शादी वाला दिन, पहना है कोट, आज के दिन, सजी धजी घोड़ी, ना चले आप बिन, मुबारक हो आप को शादी का ये दिन |

73. जब याद तेरी आए तो क्या करू, जब हर लम्हा मुझे सताए तो क्या करू. वैसे तो नींद हमे आती नही रातो मे पर, बेवक्त ख़याल तेरा आए तो क्या करू!!

74. मिलने मिलाने में वक़्त जाया ना कर, आ मेरे दिल में बस जा सदा के लिए।

75. दुल्हन बनकर एक दिन तू जा रही होगी, तेरे हाथों में मेहँदी भी रची होगी, उस दिन तेरी आँखों में मेरे लिए प्यार तो नही होगी, पर उस दिन के बाद तू भी मेरे लिए रो रही होगी |

76. उलफत में कभी यह हाल होता है, आँखें हस्ती हैं मगर दिल रोता है! मानते हैं हम जिससे मंज़िल अपनी, हमसफ़र उसका कोई और होता है!!

77. वक़्त का तकाज़ा है के फिर महफ़िल सजे फिर उनकी निग़ाह हम पे पड़े, फिर उनकी बात चले। वक़्त और हालात दोनी ही बदल जाते हैं, मँज़िलें रह जाती हैं, लोग बिछड़ जाते हैं।

78. आप दोनों की जोड़ी कभी ना टूटे, खुदा करे आप एक दुसरे से कभी न रूठे, यूँ ही एक होकर आप जिन्दगी बिताएं, कि आप दोनों से खुशियों के एक पल भी न छूटे |

79. हैं वो बेवफा फिर भी ऐतबार करते है, अपना दिल हर बार उसी के नाम करते है, इश्क़ करना हैं गुनाह हम जान गये है, फिर क्यू ये गुनाह हम हर बार करते है!!

80. वक़्त सी फ़ितरत नहीं मेरी के बुलाने से भी ना आऊँ, आप आगाज़ करो हम अंजाम तक साथ रहेंगे |

81. उसने हाथों पर मेहंदी लगा रखी थी, हमने भी अपनी बारात सजा रखी थी, क्योकि हमें मालूम था वो बेवफ़ा निकलेगी, इसलिए हमने भी उसकी सहेली पता रखी थी |

82. एक विशेष युगल के लिए जो दिखाते हैं कि प्रेम सच हो सकता है और हमेशा के लिए । आपकी जिंदगीमे हमेशा प्यार और खुशी बढÞती रहे, यही मेरी दुआ है ।

83. बस ज़िन्दगी के उसूलों पे जी रहे हैं, वक़्त बदल रहा है, हम भी बदल रहे हैं।

84. ख़ुश है दूल्हा, खुश हैं दुल्हन, नया है रिश्ता, नया हैं जीवन, करते हैं हम शुभ कामना, शादी करके सुखी हो जीवन|

85. शादियों सिर्फएक दिन में गुजरतें है मगर खुशीया देनेबाले यादें हमेशा साथ रहते है । आपकी यह जीवन आखिरकार खुशी और प्यार से भरा रहे ।

86. वक़्त-ए-सहर जो रात की लौ झिलमिला गयी, उठ कर तुम्हारी जुल्फ सँवारा करेंगे हम !!

87. मोहब्बत बिल्कुल शतरंज की खल जैसी हैं, सिर्फ़ एक गलत चाल और सीधे शादी |

88. मेरे प्यारे दोस्तों के लिए शादी की शुभकामनाएं । मुझे आशा है कि आपका जीवनमे एक साथ खुशी, आनन्द और बहुत सारे प्यार से भरा रहे हमेशा हमेशा ।

89. ज़िन्दगी भी बे-अदबी से पेश आने लगी है, इसको भी वक़्त की नज़ाकत का एहसास हो चला।

90. रहना यूँ तेरे ख्यालों में ये मेरी आदत हैं, कोई कहता इश्क कोई कहता इबादत हैं |

91. आपका ये विशेष दिन आखिरकार आ गया है, तो सबसे मनपसन्द, और एक झक्कास दिन बनाए । मेरे प्यारे दोस्तों के लिए शादी की शुभकामनाएं ।

92. जब भी अंजाम-ए-मुहब्बत ने पुकारा ख़ुद को, वक़्त ने पेश किया हम को मिसालों की तरह !!

93. मुबारक हो तुमको यह शादी तुम्हारी सदा खुश रहो तुम दुआ है हमारी तुम्हारे क़दम चूमे यह दुनिया सारी सदा खुश रहो तुम ये दुआ हमारी |

94. अब कोई ढूँड-ढाँड के लाओ नया वजूद इंसान तो बुलंदी-ए-इंसाँ से घट गया |

95. उनका जिक्र उनकी तमन्ना उनकी याद, वक़्त कितना कीमती है आज कल।

96. तेरे माथे की बिंदिया चमकती रहे तेरे हाथों की मेहँदी महकती रहे तेरे जोड़े की रौनक सलामत रहे तेरी चूड़ी हमेशा खनकती रहे |

97. अदा हुआ न क़र्ज़ और वजूद ख़त्म हो गया मैं ज़िंदगी का देते देते सूद ख़त्म हो गया |

98. वक़्त की हवाओं में उड़ जाने दो गुलाब जेसे शब्द, क्या पता किसी दिल के वीराने इनसे महक उठाएं।

99. दूर कहीं बागों से भँवरा एक आया है महकते हुए गुलाब सा संदेस साथ लाया है बज रहे हैं ढोल और गूँज रही शहनाइयां शादी है आज आपकी आपको हो लाख बधाइयाँ |

100. अगर है इंसान का मुक़द्दर ख़ुद अपनी मिट्टी का रिज़्क़ होना तो फिर ज़मीं पर ये आसमाँ का वजूद किस क़हर के लिए है |

101. ज़िंदगी यूँही बहुत कम है मोहब्बत के लिए रूठ कर वक़्त गँवाने की ज़रूरत क्या है |

102. मुझे ख़ुशी मिली इतनी कि मन में न समायें, पलक बंद कर लू कहीं छलक ही न जाए |

103. हम एक फ़िक्र के पैकर हैं इक ख़याल के फूल तिरा वजूद नहीं है तो मेरा साया नहीं |

104. वक़्त मुक़र्रर कर लेते हैं चाँद को तकने का जिस रोज़ मैं देखूं उस रोज़ तुम देखो |

105. तेरे चेहरे में मेरा नूर होगा, फिर तू कभी ना मुझसे दूर होगा, सोचकर कि क्या ख़ुशी मिलेगी जान मुझे उस पल, जिस पल तेरी मांग में मेरे नाम का सिन्दूर होगा |

106. हमें तो इस लिए जा-ए-नमाज़ चाहिए है कि हम वजूद से बाहर क़याम करते हैं |

107. बस एक वक़्त का ख़ंजर मेरी तलाश में है, जो रोज़ भेस बदल कर मेरी तलाश में है |

108. अगर ऐ नाख़ुदा तूफ़ान से लड़ने का दम-ख़म है इधर कश्ती न ले आना यहाँ पानी बहुत कम है |

109. कभी मोहब्बत से बाज़ रहने का ध्यान आए तो सोचता हूँ ये ज़हर इतने दिनों से मेरे वजूद में कैसे पल रहा है |

110. वक़्त की अदालत में हर कोई गुनहगार है, आज मुझे सजा मुकर्रर हुयी कल को तेरा इंतज़ार है।

111. अगर फ़ुर्सत मिले पानी की तहरीरों को पढ़ लेना हर इक दरिया हज़ारों साल का अफ़्साना लिखता है |

112. ख़ाक हूँ लेकिन सरापा नूर है मेरा वजूद इस ज़मीं पर चाँद सूरज का नुमाइंदा हूँ मैं |

113. हाथ छूटे भी तो रिश्ते नहीं छोड़ा करते, वक़्त की शाख़ से लम्हे नहीं तोडा करते।

114. ऐसी प्यास और ऐसा सब्र दरिया पानी पानी है |

115. ख़त्म होने दे मिरे साथ ही अपना भी वजूद तू भी इक नक़्श ख़राबे का है मर जा मुझ में |

116. वक़्त की तिज़ोरी में बंद कर दिए सब लम्हे खुशनुमा, अपने हालातों को तेरी चाहत से वाकिफ़ नहीं कराते हम।

117. अंदर अंदर खोखले हो जाते हैं घर जब दीवारों में पानी भर जाता है |

118. लम्हों के अज़ाब सह रहा हूँ मैं अपने वजूद की सज़ा हूँ |

119. दाग दामन के हो, दिल के हों के चेहरे के ‘फ़राज़’, कुछ निशान वक़्त की रफ़्तार से लग जाते हैं।

120. दूर तक फैला हुआ पानी ही पानी हर तरफ़ अब के बादल ने बहुत की मेहरबानी हर तरफ़ |

121. मैं भी यहाँ हूँ इस की शहादत में किस को लाऊँ मुश्किल ये है कि आप हूँ अपनी नज़ीर मैं |

122. कोई शाम के वक़्त आएगा लेकिन, सहर से हम आँखें बिछाए बैठे हैं !!

123. हम इंतिज़ार करें हम को इतनी ताब नहीं पिला दो तुम हमें पानी अगर शराब नहीं |

124. मिरा वजूद हक़ीक़त मिरा अदम धोका फ़ना की शक्ल में सर-चश्मा-ए-बक़ा हूँ मैं |

125. खत्म हो जाता है ज़खीरा-ए-अलफ़ाज़ उस वक़्त, जब कोई पूछ लेता है दर्द-ए-इश्क़ के मायनें मुझसे।

126. हर्फ़ अपने ही मआनी की तरह होता है प्यास का ज़ाइक़ा पानी की तरह होता है |

127. मिरा वजूद मिरी रूह को पुकारता है तिरी तरफ़ भी चलूँ तो ठहर ठहर जाऊँ |

128. मेहरबाँ हो के बुला लो मुझे चाहो जिस वक़्त, मैं गया वक़्त नहीं हूँ कि फिर आ भी न सकूँ !!

129. किस ने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी |

130. मिरे वजूद को परछाइयों ने तोड़ दिया मैं इक हिसार था तन्हाइयों ने तोड़ दिया |

131. बेहतर है के वो रिश्ते टूट जाएँ जो वक़्त की डोर से बंधे हो, जो बदलते वक़्त के साथ भी ना बदले वही अपना है।

132. मैं ने अपनी ख़ुश्क आँखों से लहू छलका दिया इक समुंदर कह रहा था मुझ को पानी चाहिए |

133. मुझे शक है होने न होने पे ‘ख़ालिद’ अगर हूँ तो अपना पता चाहता हूँ |

134. और आहिस्ता कीजिये बातें धड़कने कोई सुन रहा होगा लफ्ज़ गिरने न पाये होंठो से, वक़्त के हाथ इनको चुन लेंगे|

135. पानी ने जिसे धूप की मिट्टी से बनाया वो दाएरा-ए-रब्त बिगड़ने के लिए था |

136. सितारा-ए-ख़्वाब से भी बढ़ कर ये कौन बे-मेहर है कि जिस ने चराग़ और आइने को अपने वजूद का राज़-दाँ किया है |

137. वक़्त की किताब के कुछ पन्ने उलटना चाहता हूँ, मैं जो कल था आज फिर वही बनना चाहता हूँ।

138. क़िस्से से तिरे मेरी कहानी से ज़ियादा पानी में है क्या और भी पानी से ज़ियादा |

139. तिरा वजूद गवाही है मेरे होने की मैं अपनी ज़ात से इंकार किस तरह करता |

140. अपने भी अजनबी हो जाते हैं वक़्त के साथ, कुछ अजनबी भी अपने हो जाते हैं वक़्त के साथ।

141. वो धूप थी कि ज़मीं जल के राख हो जाती बरस के अब के बड़ा काम कर गया पानी |

142. कर्म भूमि पर फ़ल के लिए श्रम सबको करना पड़ता हैं, रब सिर्फ़ लकीरें देता हैं रंग हमको भरना पड़ता हैं |

143. दिनों के बाद अचानक तुम्हारा ध्यान आया, ख़ुदा का शुक्र कि उस वक़्त बा-वज़ू हम थे |

144. वो जो प्यासा लगता था सैलाब-ज़दा था पानी पानी कहते कहते डूब गया है |

145. पसीने की स्याही से जो लिखते हैं इरादें को, उसके मुक्कद्दर के सफ़ेद पन्ने कभी कोरे नही होते |

146. किसके नक़्शे-कदम है तू, ए ज़िन्दगी। वक़्त सी रफ़्तार भी नहीं, ज़माने से तुझे प्यार भी नहीं।

147. वो मजबूरी मौत है जिस में कासे को बुनियाद मिले प्यास की शिद्दत जब बढ़ती है डर लगता है पानी से |

148. टूटने लगे होसले तो ये याद रखना, बिना मेहनत के तख्तों-ताज नही मिलते, ढूंढ लेते हैं अंधेरों में मंजिल अपनी, क्योकि जुगनू कभी रौशनी के मोहताज नही होते |

149. वक़्त और हालात तो बदल ही जाते हैं मगर, दर्द तब होता है जब वक़्त के साथ ज़ज़्बात भी बदल जाते है।

150. ये पानी ख़ामुशी से बह रहा है इसे देखें कि इस में डूब जाएँ |

151. जब हौसला बना लिया ऊँची उड़ान का, फिर देखना फ़िजूल हैं कद आसमान का |

152. दर्द ही हमदर्द बन जाता है उस वक़्त, जब खुद से ही अपना हाल बयाँ करने से कतराता है कोई।

153. हँसता पानी रोता पानी मुझ को आवाज़ें देता था |

154. जीतेंगे हम ये ख़ुद से वादा करों, कोशिश हमेशा ज्यादा करों, किस्मत भी रूठे पर हिम्मत न टूटे, मजबूत इतना इरादा करो |

155. फितरतों और आदतों में बस इतना फर्क है, आदतें वक़्त के साथ बदलती हैं और फितरतें नीयत के साथ।

156. हैरान मत हो तैरती मछली को देख कर पानी में रौशनी को उतरते हुए भी देख |

157. ‘भाग्य’ के दरवाजे पर सर पीटने से बेहतर हैं, ‘कर्म’ का तूफ़ान पैदा करे सारे दरवाजे खुल जायेंगे |

158. कहने को तो सब अपने ही हैं यहाँ, पर वक़्त आने कोई कोई चेहरा नहीं दिखता।

159. ध्यान केन्द्रित कर कठिन परिश्रम करना ही सफलता की असली चाबी हैं |

160. दूर जाना हैं तो जाओ मत गिनाओ मजबूरियां अपनी, हमें तो अपना एक एक वादा याद आज भी हैं |

161. वक़्त को थाम के बैठे हैं हम भी, ज़िद्द है के वो मिले तो हम चले।

162. अपने हौसलों के बल पर हम, अपनी प्रतिभा दिखा देंगे, भले कोई मंच ना दे हमको, हु मंच अपना बना लेंगे |

163. मुझे से जलने वालो से मेरा ये वादा हैं, एक ना एक दिन उन्हें अपनी तारीफ का मौका जरुर दूंगा |

164. तूफानों से कह दो कहीं और दिखाए जलवा अपना, हम तो कब के मर गए, हम पे वक़्त जाया ना करना।

165. वर्षो बाद उन्हें फिर से वो वादा याद आ गया, मुझको देखा मुस्कुराया, और खुद ब खुद बाहों में समां गया |

166. फूलों की सुगंध, मूँगफली की बहार सर्दी का मौसम आने को तैयार रजाई,स्वेटर रखो तैयार हैप्पी सर्दी का मौसम मेरे यार |

167. वक़्त की चाल का अंदाज़ा तो नहीं मुझे मगर, वक़्त के साथ टकराने की कोशिश करूँगा मैं सदा।

168. मत करना फिर से कभी, ये झूठा प्यार का वादा.. आज ही हमने मांगी हैं दुआ, तुझे भूल जाने की |

169. कितना दर्द हैं दिल में दिखाया नही जाता, गंभीर हैं किस्सा सुनाया नही जाता, विडियो कॉल मत कर पगली, रजाई में से मुहँ निकाला नही जाता |

170. वक़्त की देहलीज़ पे खड़ी है सर झुका के किस्मत मेरी, वक़्त बदले तो शायद इससे चल पड़े किस्मत मेरी।

171. सुनो एक वादा तो करो कभी हमसे तुम ना बिछडोगे कभी सारे नाज़ तेरे उठा लेंगे, बस तुम ये वादा करो तो सही |

172. समझ में नही आता, सारी रात गुजर जाती हैं, रजाई में हवा किधर से घुस जाती हैं |

173. वक़्त काटना है मुझे बस के वक़्त मेरा ना रहा, वक़्त बे वक़्त यूँ याद आता रहा किस्सा तेरा।

174. तुझसे वादा मैं आज करता हु की मैं सरे वादे निभाऊंगा |

175. हर कामयाबी पर आपका नाम हो, आपके हर क़दम पर सफलता का मुकाम हो, ध्यान रखना, ठण्ड आ गयी हैं, मैं नही चाहता आपको जुकाम हो |

176. वक़्त की पाबंदी लगी है अब तो हर वक़्त, लौट आना इससे पहले के हशर की रात आजाये।

177. क्यों करती हो बार बार ना बिछड़ने का वादा मुझे पता हैं तुझे तुझे खूब आता हैं हुनर अपने वादों से मुकर जाने का|

178. क्यूँ किसी की यादों को सोच कर रोया जाए, क्यूँ किसी के ख्यालों में यूँ खोया जाए, बाहर मौसम बहुत ख़राब हैं, क्यूँ न रजाई तानकर सोया जाए |

179. वक़्त भी फ़रियाद करता है निकलने की, तेरी महफ़िल में जब समां दिलबरों का बंधता है।

180. करो ना कभी वादा ऐसा, जो निभा ना सको ना चाहो उसे जिसे तुम पा ना सको दुनिया में दोस्त वेसे बहुत बनाते हैं, पर एक एसा बनाओ जिसके बिना मुस्कुरा ना सको |

181. पहन लो आप स्वेटर आपसे यही हैं हमारी गुज़ारिश, मुबारक हो आपको सर्दी की पहली बारिश |

182. जरा धीरे चल साथिया, वक़्त लगेगा मुझको तुझसे कदम मिलाने में।

183. करके वादा हम मुकर जाए, ऐसे हम यार नहीं सुन छोरी ये “मन” का दिल हैं, दिल्ली की सरकार नहीं |

184. ठण्ड का बहाना हैं, व्हाट्सऐप करके आपको सताना हैं, मौसम भी दीवाना हैं, आपभी दो-चार व्हाट्सऐप कर दो, क्या नेट पैक का बैलेंस बचा के नया स्वेटर लाना हैं |

185. प्यार का पहला ख़त लिखने में वक़्त तो लगता है, नए परिंदों को उड़ने में वक़्त तो लगता है |

186. वादा नहीं कोई तेरा, फिर भी इंतज़ार है बिछड़ने के बाद भी, हमें तुमसे प्यार हैं तेरे भी चेहरे की उदासी बता रही हैं आज भी तेरा दिल, मेरे लिए बेकरार हैं |

187. मत ढूढ़ना मुझे इस जहाँ की तन्हाई में, ठण्ड बहुत हैं मैं हूँ अपनी रजाई में |

188. एक हाथ दिल पे रख, एक हाथ से थाम ले वक़्त, जो कर सका तू ये, तो यही जावेदा ज़िन्दगी है।

189. ना मोहब्बत थी ना चाहत थी ना ही थी उनमे वफ़ा कुछ भी ना था उसके पास, बस झूठे वादों के सिवा |

190. सीतल-सीतल वायु चली, आकाश हुआ सुहाना, जोकर भी व्हाट्सऐप पढ़ने लगे, शिक्षित हुआ ज़माना |

191. किसी से उनको क्या मतलब, मगर हाँ वक्त पड़ने पर ज़माने भर से अपने दोस्ताने ढूँढ़ लेते हैं |

192. आदतन तुम ने कर दिए वादे आदतन हम ने ए’तिबार किया |

193. बैठ कर टॉयलेट में नबाब की जैसे, ठंडी के मौसम में सोचता हूँ ऐसे, कि बेटा, कर तो ली हैं तूने, अब ठंडे पानी से धोएगा कैसे |

194. वक़्त काट जाने दो यूँ ही पल दो पल में, एक अरसा गुज़ारा है हमने, 2 पल काटने के लिए |

195. तेरे वादे को कभी झूट नहीं समझूँगा आज की रात भी दरवाज़ा खुला रक्खूँगा |

196. लड़की रो-रो कर लड़के से कह रही हैं, हाथ छोड़ो, मेरी नाक बह रही हैं |

197. वक़्त कोई भी हो मगर, ज़हर-ए-इश्क़ अपना शिकार ढूंढ ही लेता है।

198. किया था वादा दोनों ने जीना मरना हैं एक साथ मेरा जिस्म नीला पड़ा और उनके हुए पीले हाथ |

199. अपना समझो या बेगाना, हमारा आपका हैं रिश्ता पुराना, इसलिए मेरा फ़र्ज हैं आपको बताना, ठंड आ गयी हैं, कृपया रोज मत नहाना |

200. जो लिबासों को बदलने का शौक़ रखते थे आखरी वक़्त ना कह पाए क़फ़न ठीक नहीं |

201. अशिक्षित को शिक्षा दो, अज्ञानी को ज्ञान शिक्षा से ही बन सकता हैं, भारत देश महान |

202. ना मुस्कुराने को जी चाहता हैं, ना कुछ खाने-पीने को जी चाहता हैं, अब ठंड बर्दास्त नही होती, सब कुछ छोडकर रजाई में घुस जाने को जी चाहता हैं |

203. हमें ये वक़्त डराता कुछ इस तरह भी है ठहर न जाए कहीं हादसा गुज़रते हुए |

204. जहाँ ज्ञान है वहीं सुख हैं, बिना ज्ञान पूरा जीवन दुःख हैं |

205. उसको चाहा पर इजहार करना नही आया, कट गयी उम्र हमें प्यार करने नही आया, उसने कुछ माँगा भी तो मागी रजाई, और हमे इंकार करना नही आया |

206. उसे याद करके क्यों वक़्त गंवाता मैं, हर मेरे हाथ में होता उसे भूल जाना।

207. बुझने लगी हो आँखे तेरी, चाहे थमती हो रफ़्तार उखड़ रहो हो साँसे तेरी, दिल करता हो चित्कार, दोष विधाता को ना देना, मन में रखना तू ये आस, ‘रन विजयी’ बनता वही, जिसके पास हो ‘आत्मविश्वास’|

208. ठण्ड में वादा नही करते कि दोस्ती निभायेंगे, जरूरत पड़ी तो सब कुछ ले लो, पर रजाई न दे पायेंगे |

209. दर्दे दिल वक्त का पैगाम भी पहुँचाएगा, इस कबूतर को जरा प्यार से पालो यारों !!

210. कोशिशों के बावजूद हो जाती हैं कभी हार, होक निराश मत बैठना मन को अपने मार, बढ़ते रहना आगे सदा हो जैसा भी मौसम, पा लेती हैं मंजिल चीटियाँ भी गिर-गिर कर हर बार |

211. जब भी विंटर सीजन आती हैं, कसम से तेरी याद बहुत आती हैं, दिल सोचता है मेरा बार-बार मेरा इनर कब लौटाओगे यार |

212. यूँ वक़्त बेवक़्त याद आने से कुछ ना होगा, कोई जा के कह दे उसको हमे रुलाना है तो अब खुद ही आ।

213. पाता भी हूँ, खोता भी हूँ, थकता भी हूँ, चलता भी हूँ, गिरता भी हूँ, संभलता भी हूँ, सपने फिर नये बुनता हूँ |

214. सर्द मौसम का मज़ा कितना अलग सा हैं, तन्हा रात में इंतजार कितना अलग सा हैं, धुंध बनी नक़ाब और छुपा लिया सितारों को, उनकी तन्हाई का अब एहसास कितना अलग सा हैं |

215. मुझे अपना तो बना लिया उसने मगर, उसको अपना बनाने में मुझे वक़्त लगेगा।

216. पानी को बर्फ़ में, बदलने में वक्त लगता हैं, ढले हुए सूरज को निकलने में वक्त लगता हैं |

217. दिल की धड़कन रूक सी गई, साँसे मेरी थम सी गई, पूछा हमने दिल के डॉक्टर से तो पता चला कि सर्दी के कारण आपकी यादें दिल में जब सी गई |

218. कौन जाने किस घड़ी लिखी उसने किस्मत हमारी, वक़्त भी रुक गया एक मुकाम के बाद |

219. कर्तव्यों का बोध कराती, अधिकारों का ज्ञान, शिक्षा से ही मिल सकता हैं, सर्वोपरि सम्मान |

220. सर्दी में भी ठंडे-ठंडे पानी से नहाना चाहिए, ज्यादा ठंड लगे तो रजाई में घुस जाना चाहिए |

221. चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज, हो जायेंगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं !!

222. हर किसी को अपने ज्ञान का अभिमान तो होता हैं, असली ज्ञान वही हैं जिसे अपने अभिमान का ज्ञान होता हैं |

223. बड़ी सख्त इम्तिहान की घड़ी होती हैं, सुबह-सुबह ठंड में नहाना बात बड़ी होती हैं |

224. खुदा तो इक तरफ, खुद से भी कोसों दूर होता है, बशर जिस वक्त ताकत के नशे में चूर होता है!!

225. एक शाम आती हैं तेरी याद लेकर, एक शाम जाती हैं तेरी याद लेकर, हमें तो उस शाम का इन्तजार है जो आयें तुम्हे साथ लेकर |

226. श्रद्धा ज्ञान देती हैं, नम्रता मान देती हैं, योग्यता स्थान देती हैं, पर तीनों मिल जाए तो व्यक्ति को हर जगह सम्मान देती हैं!!!

227. जा़या होने से बचा ले मुझे माबूद मेरे ये न हो मुझे वक्त खेल तमाशा करदे |

228. बिंदास मुस्कुराओ क्या गम है, जिन्दगी में टेंशन किसको कम हैं, अच्छा या बुरा तो केवल भ्रम हैं, जिन्दगी का नाम, कभी ख़ुशी कभी गम हैं |

229. माता-पिता की “नसीहत” को लोग अक्सर भूल जाते हैं, मगर उनकी “वसीयत” को लोग हरगिज नही भूलते |

230. वक़्त कभी एक सा रहता नहीं सुन लो साहेब, खुद भी रो पड़ते है औरो को रुलाने वाले |

231. ख़ुशी के लिए काम करोगे तो ख़ुशी नही मिलेगी, लेकिन खुश होकर काम करोगे तो ख़ुशी जरूर मिलेगी |

232. मंदिर में जाकर भगवान नही मिलता, बिना परिश्रम के ज्ञान नही मिलता |

233. अभी कुछ वक्त बाकी है अभी उम्मीद कायम है कहीं से लौट आओ तुम मुह्ब्बत सासं लेती है |

234. दीये तो आँधी में भी जला करते हैं, गुलाब तो कांटो में ही खिला करते हैं, खुश नसीब बहुत होती हैं वो शाम, दोस्त आप जैसे जब मिला करते हैं |

235. सच्ची बातों को जान लेने का नाम ज्ञान हैं, जो अपनी मेहनत से कुछ कर दिखाएँ वही महान हैं |

236. तुमने वो वक्त कहां देखा जो गुजरते ही नहीं दर्द की रात किसे कहते हैं तुम क्या जानो!

237. कोई वादा न कर, कोई इरादा न कर, ख्वाहिशों में खुद को आधा न कर, ये देगी उतना ही जितना लिख दिया, इस तकदीर से उम्मीद ज्यादा न कर |

238. लोग तो किसी को भी कुछ भी बोल कर निकल जाते हैं, जब हालात बदल जाएँ, तो लोगों के बोल बदल जाते हैं |

239. दर्द बे वक्त होगया रुसवा एक आंसू था पी लिया होता!

240. शाम होते ही ये दिल उदास हो जाता हैं, सपनों के सिवा ना कुछ पास होता हैं, आपको बहुत याद करते हैं हम यादों का हर लम्हा मेरे लिए कुछ ख़ास होता हैं |

241. इंसानियत का दामन क्यों इतना छोटा हो गया हैं, क्या इंसान बनना इतना मुश्किल हो गया हैं |

242. जिंदगी एक हसींन ख्वाब है माना, हर हसींन ख्वाब को ताबीर नहीं मिलती टूट के वक्त के साहिल पे बिखर जाते है, कुछ रिश्ते जिन्हें जंजीर नहीं मिलती |

243. जिन्दगी में दो चीजें ख़ास है, एक वक्त और दूसरा प्यार, वक्त किसी का नही होता और प्यार हर किसी से नही होता |

244. माँ भले ही पढ़ी लिखी हो या ना हो, पर संसार का दुर्लभ और महत्वपूर्ण ज्ञान हमें माँ से ही प्राप्त होता हैं |

245. ठहर जा वक़्त ज़रा रुक जा सासें मेरी मेरे महबूब को महसूस कर लूँ कुछ पल के िलये !!

246. रिश्तों से बड़ी चाहत क्या होगी, दोस्ती से बड़ी इबादत क्या होगी, जिसे दोस्त मिल जाए आप जैसा, उसे जिन्दगी से शिकायत क्या होगी |

247. आँखे तो सब की एक जैसी होती हैं, पर सब का देखने का अंदाज अलग होता हैं |

248. एक ज़ुगनू ने कहा मैं भी तुम्हारे साथ हूँ, वक़्त की इस धुंध में तुम रोशनी बनकर दिखो.!!

249. काश ये शाम कभी ढले ना, काश ये शाम मोहब्बत का रुके ना, हो जाए आज दिल की चाहते सारी पूरी, और दिल की कोई चाहत बचे ना |

250. कीमत हर एक चीज की होती हैं, पर ज्ञान की कोई कीमत नही होती हैं |

251. वक़्त के सांथ-सांथ चलता रहे यही बेहतर है आदमी के लिये.!!

252. ये Exam के रिश्ते भी अजीब होते हैं, जो प्रश्न न आये वही Compulsory होते हैं |

253. लबो पर तेरे मुस्कान खिले, सागर किनारे हम हर शाम मिले, मेरे इस मैसेज को संभल कर पढ़ना, वरना कहीं शाम पड़े सागर किनारे, तेरे पापा खड़े ना मिले |

254. सुना है वक़्त कुछ ख़ुश-रंग लम्हे ले के गुज़रा है मुझे भी ‘शाद’ कर जाता गुज़रने से ज़रा पहले |

255. एग्जाम के टाइम पढ़ते है सब बनके उल्लू, इसलिए मिलता हैं सबको बाबा जी का ठुल्लू |

256. हुई शाम उनका ख्याल आ गया वो ही जिन्दगी का सवाल आ गया |

257. जब भी अंजाम-ए-मुहब्बत ने पुकार ख़ुद को वक़्त ने पेश किया हम को मिसालों की तरह |

258. लिखना पढ़ना छोड़ दे बन्दे नेकियों पर रख आस, चादर उठा और आराम से सो जा भगवान करेंगे पास |

259. कभी संशय न करो कि विचारशील, प्रतिबद्ध नागरिकों का एक छोटा सा समूह दुनिया बदल सकता है ; दरअसल , केवल यही है जिसने कभी कुछ बदला है।

260. ऐ रहबर-ए-कामिल चलने को तैयार तो हूँ पर याद रहे उस वक़्त मुझे भटका देना जब सामने मंज़िल आ जाए |

261. ना वफ़ा होगी, ना वफ़ा की बात होगी, मोहब्बत जिससे भी होगी एग्जाम के बाद होगी |

262. अगर हमें पर्यावरण की गुणवत्ता में सुधार लाना है तो केवल एक ही तरीका है, सबको शामिल करना।

263. हर एक राज़ कह दिया,बस एक जवाब ने हमको सिखाया वक़्त ने,तुमको क़िताब ने.!!

264. ताउम्र बस एक यही सबक याद रखिये, Exam में अपनी नियत साफ़ रखिये |

265. पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है , लेकिन लालच पूरा करने के लिए नहीं |

266. वक़्त से पूछ रहा है कोई ज़ख्म क्या वाक़ई भर जाते हैं |

267. रात भर पढ़ाई कर आँख कितनी दर्द सहता हैं, मगर Exam में पेन रूक-रूक कर चलता हैं |

268. पृथ्वी हमारी नहीं हम पृथ्वी के हैं |

269. निभी ना वक़्त की हम ख़ानमाँ-खराबों से हवा उलझती रही टूटती तनाबों से |

270. Exam में मैंने भी बदल दिए अपने उसूल, जो अपनी कॉपी दिखायेगा वही मेरा देख पायेगा |

271. ये सिर्फ “हमारी” दुनिया नहीं है |

272. अब उसे देखो तो आँखों पे यकीं आता नहीं वक़्त उसके जिस्म का सब संगे-मरमर पी गया |

273. समंदर जितना सिलेबस है, नदी जितना पढ़ पाते हैं, बाल्टी जितना याद रख पाते हैं, गिलास जितना लिख पाते हैं, और चुल्लू भर नंबर आते हैं |

274. हमें यह ग्रह हमारे पूर्वजों से उत्तराधिकार में नहीं मिला ,हम इसे अपने बच्चों से उधार में लेते हैं |

275. ये फ़ैसला तो शायद वक़्त भी न कर सक सच कौन बोलता है , अदाकार कौन है.!!

276. इस Exam का सितम देता हैं बहुत पीड़ा, अच्छे-अच्छे को बना देता हैं किताबी कीड़ा |

277. पर्यावरण प्रदूषण एक लाइलाज बीमारी है। इसे केवल रोका जा सकता है।

278. किस शै पे यहाँ वक़्त का साया नही होता इक ख्व़ाब-ए-मोहब्बत है की बूढ़ा नही होता.!!

279. इतना सुकून कही नहीं मिलता हैं, जितना एग्जाम में लम्बे उत्तर लिखने के बाद मिलता है |

280. हमारा कोई समाज नहीं होगा अगर हम पर्यावरण को नष्ट करते हैं।

281. न जाने कितने चरागों को मिल गई शोहरत एक आफ़ताब के बे-वक़्त डूब जाने स !!

282. अहल-ए-हुनर के दिल में धड़कते हैं सब के दिल सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है |

283. हवा और पानी , जंगल और जानवर को बचाने वाली योजनाएं दरअसल इंसान को बचाने की योजनाएं हैं।

284. ना मोहब्बत ना दोस्ती के लिये वक़्त रुकता नहीं किसी के लिये |

285. एक हो जाएँ तो बन सकते हैं ख़ुर्शीद-ए-मुबीं वर्ना इन बिखरे हुए तारों से क्या काम बने |

286. जलवायु परिवर्तन एक भयानक समस्या है, और इसे पूरी तरह से हल करने की आवश्यकता है। यह एक बहुत बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए।

287. चढ़ने दो अभी और ज़रा वक़्त का सूरज।। हो जाएँगे छोटे जो अभी साये बड़े हैं |

288. ‘हफ़ीज़’ अपनी बोली मोहब्बत की बोली न उर्दू न हिन्दी न हिन्दोस्तानी |

289. मैं ईश्वर को प्रकृति में , जानवरों में, पक्षियों में और पर्यावरण में पा सकता हूँ।

290. हर गुज़रते हुए पल का तुझे देना है हिसाब।। ज़िंदगी का ये सफ़र वक़्त-गुज़ारी तो नहीं |

291. हम अहल-ए-दिल ने मेयार-ए-मोहब्बत भी बदल डाले जो ग़म हर फ़र्द का ग़म है उसी को ग़म समझते हैं |

292. अफसोस की बात है, जंगल की तुलना में रेगिस्तान बनाना कहीं आसान होता है।

293. चमक यूँ हि नही आती है, खुद्दारी के चेहरे पर ।। अना को हमने दो-दो वक़्त का फाका कराया है |

294. हमारा ख़ून का रिश्ता है सरहदों का नहीं हमारे ख़ून में गँगा भी चनाब भी है |

295. कोई रास्ता नहीं दुआ के सिवा, कोई सुनता नहीं खुदा के सिवा, मैंने भी जिंदगी को करीब से देखा है ए दोस्त, मुश्किल में कोई साथ नहीं देता बियर और दारू के सिवा |

296. संरक्षण इंसानो और पृथ्वी के बीच एक सामंजस्य की स्थिति है।

297. ख़ंजर चले किसी पे तड़पते हैं हम ‘अमीर’ सारे जहाँ का दर्द हमारे जिगर में है |

298. कुत्ता मर गया रजाई में, मैं पागल हो गया तेरी जुदाई में, हाथी नदी में बह नहीं सकता, अपुन तेरे बिना रह नहीं सकता |

299. भविष्य या तो हरा होगा या तो होगा ही नहीं।

300. किसी का कोई मर जाए हमारे घर में मातम है ग़रज़ बारह महीने तीस दिन हम को मोहर्रम है |

301. राज तो हमारा हर जगह पे है। पसंद करने वालों के “दिल” में और नापसंद करने वालों के “दिमाग” में !!

302. प्रयास करें कि जब आप आये थे उसकी तुलना में पृथ्वी को एक बेहतर स्थान के रूप में छोड़ कर जाएं।

303. मिरे सेहन पर खुला आसमान रहे कि मैं उसे धूप छाँव में बाँटना नहीं चाहता |

304. लोगो से कह दो हमारी तकदीर से जलना छोड़ दे, हम घर से दवा नही माँ की दुआ लेकर निकलते है !!

305. पर्यावरण वो हर एक चीज है जो मैं नहीं हूँ।

306. मुझ में थोड़ी सी जगह भी नहीं नफ़रत के लिए मैं तो हर वक़्त मोहब्बत से भरा रहता हूँ |

307. हम को खरीदने की कोशिश मत करना, हम उन पुरखो के वारिस है, जिन्हो ने ‎मुजरे में ‬हवेलिया दान कर दी थी |

308. खुदा का शुक्र है कि इंसान उड़ नहीं सकते, और आसमान और धरती दोनों को ही बर्वाद नहीं कर सकते।

309. पी शराब नाम-ए-रिंदाँ ता असर सूँ कैफ़ के ज़िक्र-ए-अल्लाह अल्लाह हो वे गर कहे तू राम राम |

310. Aukat कि बात मत कर ए-दोस्त, तेर बंदुक से ज्यादा लोग हमारी आंखो से डरते है |

311. मानवजाति ने शायद पहले के कुल मानव इतिहास की तुलना में २० वीं सदी में पृथ्वी को अधिक नुकसान पहुँचाया है।

312. सात संदूक़ों में भर कर दफ़्न कर दो नफ़रतें आज इंसाँ को मोहब्बत की ज़रूरत है बहुत |

313. कभी कभी खाक़ (जम़ीन) पर बैठ जाता हूँ मैं, क्यूँकि प्यार है मुझे मेरी Aukat से |

314. ये समय इलेक्ट्रिक कारों के लिए उपयुक्त है – वास्तव में ये समय बेहद ज़रूरी है।

315. सुनो हिन्दू मुसलमानो कि फ़ैज़-ए-इश्क़ से ‘हातिम’ हुआ आज़ाद क़ैद-ए-मज़हब-ओ-मशरब से अब फ़ारिग़ |

316. हथियार तो सिर्फ शौक के लिए रखा करते है, वरना किसी के मन में खौंफ पैदा करने के लिए तो बस हमारा नाम ही काफी है |

317. आर्थिक लाभ के लिए वर्षावन नष्ट करना कोई भोजन पकाने के लिए किसी रेनेसेन्स पेंटिंग को जलाने की तरह है।

318. यही है इबादत यही दीन ओ ईमाँ कि काम आए दुनिया में इंसाँ के इंसाँ |

319. हम वो ही हैं, बस जरा ठिकाना बदल गया हैं अब, तेरे दिल से निकल कर, अपनी Aukat में रहते हैं.!!

320. पक्षी पर्यावरण के संकेतक हैं। यदि वे खतरे में हैं तो हम जानते हैं कि हम भी जल्द ही खतरे में होंगे।

321. मोहब्बत मै जबरदस्ती अच्छी नहीं होती, जब आपका दिल चाहे तब मेरे हो जाना |

322. एक बात सुन पगली, कभी मेरी आँखों में आँखे मत मिलाना, फिर मत कहना कि ना चाहते हुए भी तूझसे प्यार हो गया |

323. यह भयावह है कि पर्यावरण बचाने के लिए हमें अपनी ही सरकार से लड़ना पड़ता है।

324. ये मत पूछ के एहसास की शिद्दत क्या थी, धूप ऐसी थी के साए को भी जलते देखा।

325. हमारी रगों में वो खून दोड़ता है, जिसकी एक बूंद अगर तेजाब पर गिर जाये तो तेजाब जल जाये |

326. सागर में हर एक बूँद मायने रखती है।

327. इतनी चाहत के बाद भी तुझे एहसास ना हुआ, जरा देख तो ले दिल की जगह पत्थर तो नहीं।

328. नहीं सिर्फ जश्न मनाना, नहीं सिर्फ झंडे लहराना, ये काफी नहीं है वतन पर, यादों को नहीं भुलाना, जो कुर्बान हुए उनके लफ़्ज़ों को आगे बढ़ाना, खुदा के लिए नही ज़िन्दगी वतन के लिए लुटाना, हम लाएं है तूफ़ान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के |

329. हो सकता है आप मतदाताओं को बेवकूफ बना लें पर आप वातावरण को बेवकूफ नहीं बना सकते।

330. तकलीफ़ मिट गई मगर एहसास रह गया, ख़ुश हूँ कि कुछ न कुछ तो मेरे पास रह गया।

331. आज शहीदों ने है तुमको, अहले वतन ललकारा, तोड़ो गुलामी की जंजीरें, बरसाओ अंगारा, हिन्दू-मुस्लिम-सिख हमारा, भाई-भाई प्यारा, यह है आजादी का झंडा, इसे सलाम हमारा |

332. मैं टैक्स का विरोधी हूँ , लेकिन मैं कार्बन टैक्स का समर्थन करता हूँ।

333. जागना भी कबूल है तेरी यादों में रात भर, तेरे एहसासों में जो सुकून है वो नींद में कहाँ।

334. तैरना है तो समंदर में तैरो नदी नालों में क्या रखा है, प्यार करना है तो वतन से करो इस बेवफ़ा लोगों में क्या रखा है |

335. यदि आप एक जंगल काट देते हैं , तो इससे फर्क नहीं पड़ता कि आपके पास कितनी सॉमिल्स हैं अगर अब पेड़ ही नहीं बचे हैं।

336. वजूद शीशे का हो तो पत्थरों से मोहब्बत नहीं करते, एहसास-ए-चाहत ना मिले तो हस्ती बिखर जाती है।

337. सारे जहाँ से अच्छा, हिन्दोस्ताँ हमारा हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्ताँ हमारा |

338. यदि मधुमक्खी पृथिवी के मुख से गायब हो गयी तो इंसानो के पास जीवित रहने के लिए बस चार साल बचेंगे।

339. कितना प्यार है तुमसे वो लफ़्ज़ों के सहारे कैसे बताऊँ, महसूस कर मेरे एहसास को गवाही कहाँ से लाऊं।

340. दाग गुलामी का धोया है जान लुटा कर, दीप जलाये है कितने दीप भुझा कर, मिली है जब यह आज़ादी तो फिर इस आज़ादी को रखना होगा हर दुश्मन से आज बचाकर |

341. एक देश जो अपनी मिटटी को नष्ट कर देता है वह खुद को नष्ट कर लेता है। जंगल हमारी भूमि के फेफड़े हैं , वे हमारी हवा को शुद्ध करते हैं और लोगों को नयी ताकत देते हैं।

342. ये कैसी रोशनी है कि एहसास बुझ गया​​, ​हर आँख पूछती है कि मंज़र कहाँ गए​​।

343. चलो फिर से खुद को जागते है, अनुसासन का डंडा फिर घुमाते है, सुनहरा रंग है गणतंत्र का सहिदो के लहू से, ऐसे सहिदो को हम सब सर झुकाते है |

344. मैं खुश हूँ कि मैं ऐसे भविष्य में युवा नहीं होऊंगा जिसमे जंगल ना हों।

345. एहसास-ए-मुहब्बत के लिए बस इतना ही काफी है, तेरे बगैर भी हम, तेरे ही रहते हैं।

346. देश भक्तो की बलिदान से, स्वतन्त्र हुए है हम, कोई पूछे कोन हो, तो गर्व से कहेंगे. भारतीय है हम |

347. वो जो मधुमक्खी के छत्ते के लिए ठीक नहीं है वो मधुमक्खी के लिए भी अच्छा नहीं हो सकता |

348. अपनी हालात का ख़ुद अहसास नहीं मुझको, मैंने औरों से सुना है कि परेशान हूं मैं।

349. अलग है भाषा, धर्म जात और प्रान्त, भेष, परिवेश पर हम सब का एक है गौरव राष्ट्रध्वज तिरंगा श्रेष्ठ गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं |

350. फूल बनकर मुस्कुराना ज़िन्दगी, मुस्कुरा के गम भुलाना ज़िन्दगी, जीत कर कोई खुश हो तो क्या हुआ, हार कर खुशियां मनाना भी ज़िन्दगी है |

351. मेरे लिए अहसास मायने रखता है, रिश्ते का नाम चलो तुम रख लो।

352. भारत के गणतंत्र का, सारे जग में मान, दशकों से खिल रही, उसकी अद्भुत शान, सब धर्मो को देकर मान रचा गया इतिहास का, इसलिए हर देशवासी को इसमें है विश्वास |

353. महोब्बत लफ़्ज़ों की मोहताज़ नहीं होती, जॉब तन्हाई में आपकी याद आती है, होंठो पे एक ही फरियाद आती है, खुद आपको हर ख़ुशी दे, क्योंकि आज भी हमारी हर ख़ुशी आपके बाद आती है |

354. ऐ खुदा लोग बनाये थे पत्थर के अगर, मेरे एहसास को शीशे का न बनाया होता।

355. जमाने भर में मिलते है आशिक कई, जमाने भर में मिलते है आशिक कई, मगर वतन से खुबसूरत कोई सनम नही होता |

356. प्यार के समंदर में डूबना चाहते है, प्यार में कुछ खोते है तो कुछ पते है, प्यार तो एक गुलाब है जिसे सब तोडना चाहते है, हम तो इस गुलाब को चूमना चाहते है |

357. कभी कभी हम किसी को यादो में पूरी रात जागते रहते है और उन्हें हमारी कदर तक नही होती |

358. आओ झुक कर सलाम करे उनको, जिनके हिस्से में ये मुकाम आता है, खुशनसीब होता है वो खून जो देश के काम आता है |

359. फूल खिलते रहे ज़िन्दगी की राह में, हँसी चमकती रहे आपकी निगाह में, कदम कदम पर मिले ख़ुशी की बहार आपको, दिल देता है यही दुआ बार बार आपको |

360. अभी गुमनाम हु तो रिश्ता तोड़ लिया है मुझसे ग़र कल को मशहूर हो गया तो कोई रिश्ता मत निकाल लेना |

361. चलो फिर से आज वो नजारा याद करले, चलो फिर से आज वो नजारा याद करले, शहीदों के दिलो में थी जो वो ज्वाला याद करले, जिसमे बहकर आजादी पहुची थी किनारे पे, जिसमे बहकर आजादी पहुची थी किनारे पे, देशभक्ति के खून की वो धारा याद करले |

362. दोस्ती का रिश्ता अनोखा है ना गुलाब सा है ना काँटों सा, दोस्ती का रिस्ता तो उस डाली की तरह है जो गुलाब और कांटे, दोनों को एक साथ जोड़े रखता हे आखरी दम तक |

363. एक अच्छा “रिश्ता हमेंशा हवा” की तरह होना चाहिए खामोश” मगर हमेशा “आसपास” |

364. ना मरो सनम बेवफा के लिए, ना मरो सनम बेवफ़ा के लिए. 2 गज जमीन नही मिलेगी दफन के लिए, मरना है तो मरो अपने वतन के लिए, मरना है तो मरो अपने वतन के लिए, हसीना भी दुपट्टा उतार देगी कफ़न के लिए |

365. चला जा SMS गुलाब बन के, होगी सच्ची दोस्ती तो आएगा जवाब, अगर ना आये तो मत होना उदास, बस समझ लेना की मेरे लिए वक़्त नहीं था उनके पास.

366. खुदा से हमारा रिश्ता भी चश्मे और निगाह सा है वो जब साथ होता है सब कुछ साफ़ नज़र आता है |

367. वतन हमारा ऐसे न छोर पाए कोई, वतन हमारा ऐसे न छोर पाए कोई, रिश्ता हमारा ऐसा ना तोड़ पाए कोई, दिल है हमारे एक है, एक है हमारी जान, दिल है हमारे एक है, एक है हमारी जान, हिन्दुस्तान हमारा है हम है इसकी शान |

368. तेरा मेरा साथ इतना पुराना हो गया, बदलते बदलते मौसम सुहाना हो गया, याद है वो हमारी पेहली मुलाकात, तू मेरी दीवानी, में तेरा दीवाना हो गया |

369. रिश्ता होने से रिश्ता नहीं बनता रिश्ता निभाने से रिश्ता बनता है |

370. यही खुवाहिश खुदा हर जन्म हिन्दुस्तान वतन देना, अगर देना तो दिल में देशभक्ति का चलन देना, न दे दोलत न दे शोहरत, कोई शिकवा नही हमको, झुका दूँ सर मै दुश्मन का यही हिम्मत का घन देना, अगर देना तो दिल में देशभक्ति का चलन देना |

371. बहाने से आपकी बात करते है, हर पल आपको महसूस करते है, इतनी बार सांस न लेते होंगे, जितनी बार हम आपको याद करते है |

372. रिश्ता वो नहीं होता जो दुनिया को दिखाया जाता है रिश्ता वह होता है,जिसे दिल से निभाया जाता है अपना कहने से कोई अपना नहीं होता अपना वो होता है जिसे*दिल से अपनाया जाता है |

373. मेरे हर कतरे-कतरे में, हिन्दुस्थान लिख देना, और जब मोत हो, तन पे, तीरंगे का कफन देना, यही खुवाहिश खुदा हर जन्म हिन्दुस्तान वतन देना, अगर देना तो दिल में देशभक्ति का चलन देना |

374. तेरी हर अदा महोब्बत सी लगती है, एक पल की जुदाई सदियों सी लगती है, पेहले नई सोचा था अब सोचने लगा हूँ, ज़िन्दगी की हर लम्हे में तेरी ज़रूरत सी लगती है |

375. जब रिश्ता नया होता है तो लोग बात करने का बहाना ढ़ुढ़ते है और जब वही रिश्ता पुराना हो जाता है तो लोग दूर होने का बहाना ढूढ़ते है |

376. खुशनसीब है वो जो वतन पर मिट जाते है, मर कर भी वो लोग अमर हो जाते हैं, करता हूँ उन्हें सलाम ए वतन पर मिटने वालों तुम्हारी हर साँस में बसता तिरंगे का नसीब है |

377. मेरा हर ख्वाब आज हक़ीक़त बन जाये, जो हो बस तुम्हारे साथ ऐसी ज़िन्दगी बन जाये, हम लाये लाये लाखो में एक गुलाब तुम्हारे लिए, और ये गुलाब महोब्बत की शरुआत बन जाये।

378. कोई रिश्ता जब खामोसी से टूटता है तो साथ में कोई न कोई एक शक़्स भी टूट जाता है |

379. इंसाफ की डगर पे, बच्चो दिखाओ चल के, ये देश है तुम्हारा, नेता तुम ही हो कल के |

380. हर पतंग जानती हैं, अंत में कचरे में जाना हैं, लेकिन उसके पहले हमें, आसमान छूकर दिखाना हैं |

381. तुम्हारी फिक्र करनेके लिए हमारा रिश्ता होना जरूरी तो नही एहसास की ही तो बात है तुम्हारी इजाजत भी जरूरी नही |

382. चलो फिर से खुद को जगाते है, अनुशासन का डंडा फिर घुमाते है, सुनहरा रंग है गणतंत्र का शहीदों के लहू से, ऐसे शहीदों को हम सब सर झुकाते है |

383. हम ने मोहब्बत के नशे में, आकर उसे खुदा बना डाला, होश तब आया जब उसने कहा कि ख़ुदा किसी एक का नही होता |

384. आज फिर ए तन्हाई लग जा गले के तुझसे लिपट के रोने का बहुत दिल है एक तू ही तो है हमसाया जिंदगी का मेरी वरना यहां तो हर रिश्ता, मेरी रूह का कातिल है |

385. मै भारत बरस का हरदम अमित सम्मान करता हूँ, यहाँ की चांदनी मिट्टी का ही गुणगान करता हूँ, मुझे चिंता नही है स्वर्ग जाकर मोक्ष पाने की, तिरंगा हो कफ़न मेरा, बस यही अरमान रखता हूँ |

386. किसी की क्या मजाल थी जो कोई हमें खरीद सकता, हम तो खुद ही बिक गए ख़रीददार देखकर |

387. आज बिखरी जो तेरी हसीन जुल्फें तो बिखर जाने दे ऐ सनम इस वक्त को कुछ और संवर जाने दे कुछ भी ना रहे बाकी सुबह तलक आज की रात तो ऐसी भी गुजर जाने दे ऐ सनम |

388. मैं इसका हनुमान हूँ, ये देश मेरा राम है, छाती चीर के देख लो, अन्दर बैठा हिन्दुस्तान है |

389. इल्जाम तो लगती रही रोज नई-नई हम पर, मगर जो सबसे हसीं इलज़ाम था वो तेरा नाम था |

390. तेरे हुस्न से मेरा दिल है रोशन उतरता है आँखों के झरोखे से नशा तेरे दीदार का हौले-हौले तेरी याद है सिलसिला मेरी जिन्दगी का |

391. ना जियो घर्म के नाम पर, ना मरों घर्म के नाम पर, इंसानियत ही है धर्म वतन का, बस जियों वतन के नाम पर |

392. माना मौसम भी बदलते हैं मगर धीरे-धीरे, तेरे बदलने की रफ़्तार से तो हवाएँ भी हैरान हैं |

393. मेरी हर सांस में इक दर्द शामिल कर दे सामने मेरी नजरों के मेरी किस्मत कर दे आया हूँ तेरे दर पे मैं सवाली बनकर अपना इश्क मेरे सीने में खाली कर दे |

394. इतनी सी बात हवाओ को बताये रखना, रौशनी होगी विरागो को जलाए रखना, लहू देकर की है जिसकी हिफाजत हमने, ऐसे तिरंगे को हमेशा अपने दिल में बसाए रखना |

395. मैं बड़ो की इज्जत इसलिए करता हूँ, क्योकि उनकी अच्छाईयाँ मुझसे ज्यादा हैं, और छोटो से प्यार इसलिए करता हूँ, क्योकि उनके गुनाह मुझसे कम हैं |

396. जागते-जागते प्यार में तेरे सो जाएँ सुभ का इंतज़ार करके खो जाएँ कोई मेरा अपना बने, बने ना बने आओ, हम तो किसी ना किसी के हो जाएँ |

397. भूख, गरीबी, लाचारी को, इस धरती से आज मिटायें, भारत के भारतवासी को, उसके सब अधिकार दिलायें आओ सब मिलकर नये रूप में गणतंत्र मनायें|

398. इज्जत और तारीफ़ माँगी नही जाती हैं, इसे दोस्तों कमाई जाती हैं |

399. अब मेरे काबू में है दुनिया का आलम नजरों में तुम्हारी है मेरा मकाम किरण रौशनी की हर हाल है तेरी गुलाम दुनिया की हर ख़ुशी को सनम मेरा सलाम |

400. गणतंत्र दिवस की हार्दिक शुभकामनायें । जय हिन्द , जय भारत ।

401. बड़े बुजुर्ग की उंगलियों में कोई ताकत तो न थी, जब झुका सर मेरा तो कापते हाथों ने जमाने भर की दौलत दे दी|

402. करें कैसे बयां अपने अल्फाज में हम इश्क इ मजबूर किस कदर हम हुए नशा तेरे प्यार का हम पर ऐसा चढ़ा जिन्दगी भर के तेरे आशिक हम हुए |

403. आजादी का जोश कभी कम न – देंगे जब भी जरुरत पड़ेगी देश के लिए जान लूटा देंगे क्योंकि भारत हमारा देश है अब दोबारा इस पर कोई आंच न आने देंगे |

404. प्यार तुम्हारा दिल में मेरे उतर आया है मेरी आँखों में नगमा इक नजर आया है है ये असर तेरे इश्क की सुलगती चिंगारी का रंग तेरे हुस्न का अब और भी निखर आया है |

405. इलाही कश्ती-ए-दिल बह रही है किस समंदर में निकल आती हैं मौजें हम जिसे साहिल समझते हैं |

406. अजब बहार दिखाई लहू के छींटों ने ख़िज़ाँ का रंग भी रंग-ए-बहार जैसा था |

407. माह मुझसे है साल मुझसे है हर बीता हुआ काल मुझसे है मैं तो हूँ नन्हा सा इक लम्हा इस वक्त की तो हर चाल मुझसे है |

408. जर्फ पैदा कर समंदर की तरह वसअतै खामोशियां गहराईयां।

409. दश्त-ए-वफ़ा में जल के न रह जाएँ अपने दिल वो धूप है कि रंग हैं काले पड़े हुए |

410. तेरे नाम का आसरा लेकर मैं अपनी तकदीर बदलता हूँ छाँव है मेरे काबू में मैं तो धूप के साथ चलता हूँ |

411. अंधेरों को निकाला जा रहा है मगर घर से उजाला जा रहा है |

412. हज़ार रंग-ब-दामाँ सही मगर दुनिया बस एक सिलसिला-ए-एतिबार है, क्या है |

413. मस्त तेरी आँखों के इक इशारे से जिन्दगी का मेरे खुमार बढ़ता है होने से तेरे बेनाब मेरे महबूब अँधेरे में रौशनी का चिराग जलता है |

414. बहुत सुकून से रहते थे हम अँधेरे में फ़साद पैदा हुआ रौशनी के आने से |

415. लब-ए-नाज़ुक के बोसे लूँ तो मिस्सी मुँह बनाती है कफ़-ए-पा को अगर चूमूँ तो मेहंदी रंग लाती है |

416. लेना है गर तुम्हे लुत्फ़ जिन्दगी का तो इश्क से कुछ खुमार ले लो हुस्न अपनी मौहब्बत का करता है दीदार मेरी नजर से कुछ ख्वाब उधार ले लो |

417. चाँद भी हैरान दरिया भी परेशानी में है अक्स किस का है कि इतनी रौशनी पानी में है |

418. मुझ को एहसास-ए-रंग-ओ-बू न हुआ यूँ भी अक्सर बहार आई है |

419. कुछ तम्मना नहीं खुशियों की जुस्तजू भी नहीं जिन्दगी की जो तेरा साथ रहे उम्र भर दिल में मरने की आरजू भी नहीं |

420. देते नहीं सुझाई जो दुनिया के ख़त्त-ओ-ख़ाल आए हैं तीरगी में मगर रौशनी से हम |

421. मेरी ख़ुशी के लम्हें इस कद्र छोटे हैं यारों गुज़र जाते हैं मेरे मुस्कुराने से पहलें |

422. रंग ही से फ़रेब खाते रहें ख़ुशबुएँ आज़माना भूल गए |

423. घर से बाहर नहीं निकला जाता रौशनी याद दिलाती है तिरी |

424. वक्त सबको मिलता हैं जिन्दगी बदलने के लिए, पर जिन्दगी दुबारा नही मिलती वक्त बदलने के लिए |

425. तमाम रात नहाया था शहर बारिश में वो रंग उतर ही गए जो उतरने वाले थे |

426. घुटन तो दिल की रही क़स्र-ए-मरमरीं में भी न रौशनी से हुआ कुछ न कुछ हवा से हुआ |

427. अभी तो थोडा वक्त हैं, उनको आजमाने दो, रो-रोकर पुकारेंगे हमें, हमारा वक्त तो आने दो |

428. तुम्हारे रंग फीके पड़ गए नाँ मिरी आँखों की वीरानी के आगे |

429. कहीं कोई चराग़ जलता है कुछ न कुछ रौशनी रहेगी अभी |

430. बुरा वक्त तो सबका आता हैं, कोई बिखर जाता हैं कोई निखर जाता हैं |

431. जब जब खुद पर यकीन किया है हमने, तब तब जिन्दगी ने असली रंग दिखाए हैं अपने |

432. ख़ुद ही परवाने जल गए वर्ना शम्अ जलती है रौशनी के लिए |

433. वक्त तू कितना भी सता ले हमे लेकिन याद रख, किसी मोड़ पर तुझे भी बदलने पर मजबूर कर देंगे |

434. सतरंगी रंगों की लिए बरसात है आई रंग पंचमी की सौगात चलो चलाये मिलकर पिचकारी ना बच पाए कोई भी नर नारी हैप्पी रंग पंचमी |

435. नई सहर के हसीन सूरज तुझे ग़रीबों से वास्ता क्या जहाँ उजाला है सीम-ओ-ज़र का वहीं तिरी रौशनी मिलेगी |

436. वक़्त बदलने से उतनी तकलीफ नहीं होती, जितनी किसी अपने के बदल जाने से होती है |

437. खुशियों से हो ना कोई दुरी रहे न कोई ख्वाहिश अधूरी रंगो से भरे इस मौसम में रंगीन हो आपकी दुनिया पूरी हैप्पी रंग पंचमी |

438. नहीं है मेरे मुक़द्दर में रौशनी न सही ये खिड़की खोलो ज़रा सुब्ह की हवा ही लगे |

439. जब आप का नाम जुबान पर आता हैं, पता नहीं दिल क्यों मुस्कुराता हैं, तसल्ली होती है मन को कोई तो है अपना, जो हँसते हुए हर वक्त याद आता हैं |

440. रंग पंचमी का रंग तो कुछ पलो में धूल जाएगा दोस्ती और प्यार का रंग नहीं धुल पाएगा यही तो असली रंग है ज़िंदगी का जितना रंगोगे उतना ही गहरा होता जाएगा हैप्पी रंग पंचमी |

441. नुमूद-ए-सुब्ह से शब की वो तीरगी तो गई ये और बात कि सूरज में रौशनी कम है |

442. जिन्दगी में अगर बुरे वक्त नही आते तो अपनों में छुपे गैर, और गैरों में छुपे हुए अपने कभी नजर नही आते |

443. राधा का रंग और कान्हा की पिचकारी प्यार के रंग से रंग दो दुनियाँ सारी यह रंग ना जाने कोई जात ना कोई बोली मुबारक हो आपको रंगों भरी रंग पंचमी हैप्पी रंग पंचमी |

444. रौशनी जब से मुझे छोड़ गई शम्अ रोती है सिरहाने मेरे |

445. जो रोऊंगा तो पलकों पे नमी रह जायेगी, ज़िन्दगी बस नाम की जिन्दगी रह जायेगी, ये नहीं कि तुम बिन जी न पाउँगा, हाँ मगर जिन्दगी में हर वक्त एक तेरी कमी रह जायेगी |

446. खुदा करे की इस बार रंगपंचमी ऐसी आए बिछडा हुवा मेरा प्यार मुझे मिल जाए मेरी दुनिया तो रंगीन है सिर्फ उस से काश वो आए और चुपके से गुलाल लगा जाए हैप्पी रंग पंचमी |

447. रौशनी की अगर अलामत है राख उड़ती है क्यूँ शरारे पर |

448. वक्त नूर को बेनूर कर देता हैं, छोटे से जख्म को नासूर कर देता हैं, कौन चाहता हैं अपनों से दूर होना, लेकिन वक्त सबको मजबूर कर देता हैं |

449. रंग रंगीला माहौल हो, अपनों का साथ हो स्वादिष्ट पकवानो की मिठास पास हो फिर देरी किस बात की करते हो यारो उठाओ गुलाल और धमाल करो प्यारों हैप्पी रंग पंचमी |

450. रौशनी में अपनी शख़्सियत पे जब भी सोचना अपने क़द को अपने साए से भी कम-तर देखना |

451. तलाश है एक ऐसे शख्स की, जो आँखों में उस वक़्त दर्द देख सके, जब सब लोग मुझसे कहते हैं, क्या बात है हमेशा हँसती रहती हो |

452. रंगों की ना होती कोई जात वो तो लाते बस खुशियों की सौगात हाथ से हाथ मिलाते चलो रंग पंचमी है रंग लगाते चलो हैप्पी रंग पंचमी |

453. रौशनी मुझ से गुरेज़ाँ है तो शिकवा भी नहीं मेरे ग़म-ख़ाने में कुछ ऐसा अँधेरा भी नहीं |

454. ना तूफ़ान ने दस्तक दी, और ना पत्थर ने चोट दी वक्त तकदीर से मिला और मुझे सजा-ए-मोहब्बत दी |

455. रंगों के होते कई नाम कोई कहे पीला कोई कहे लाल हम तो जाने बस खुशियों की रंग पंचमी राग द्वेष मिटाओ और मनाओ रंग पंचमी हैप्पी रंग पंचमी |

456. रौशनी फैली तो सब का रंग काला हो गया कुछ दिए ऐसे जले हर-सू अंधेरा हो गया |

457. तुझे चाहने वाले कम ना होंगे, वक़्त के साथ शायद हम ना होंगे, चाहे किसी को कितना भी प्यार देना, लेकिन तेरी यादों के हकदार सिर्फ हम ही होंगे |

458. दिलो के मिलने का मौसम है दूरियां मिटाने का मौसम है रंग पंचमी का त्यौहार ही ऐसा है रंगो में डूब जाने का मौसम है हैप्पी रंग पंचमी |

459. उल्फ़त का है मज़ा कि ‘असर’ ग़म भी साथ हों तारीकियाँ भी साथ रहें रौशनी के साथ |

460. वक्त का खास होना जरूरी नही खास लोगो के लिए वक्त होना जरूरी हैं |

461. होली के रंग मस्त बिखरेंगे क्योंकि पीया के संग अब हम भी तो भीगेंगे होली में इस बार और भी रंग होंगे क्योंकि मेरे पीया मेरे संग होंगे हैप्पी रंग पंचमी |

462. वक्त बदला और बदली कहानी हैं, संग मेरे हसीं पलों की यादें पुरानी हैं, न लगाओ मेरे ज़ख्मो पे मरहम, मेरे पास उनकी बस यही निशानी हैं |

463. हकीकत जान लो जुदा होने से पहले, मेरी सुन लो अपनी सुनाने से पहले, ये सोच लेना भूलने से पहले, बहुत रोई हैं ये आँखें मुस्कुराने से पहले |

464. मथुरा की खुशबु, गोकुल का हार वृंदावन की सुगंध, बरसाने की फुहार राधा की उम्मीद, कान्हा का प्यार मुबारक हो आपको रंग पंचमी का त्यौहार हैप्पी रंग पंचमी |

465. उनका भरोसा मत करों, जिनका ख्याल वक्त के साथ बदल जाएँ, भरोसा उनका करो जिनका ख्याल वैसे ही रहे, जब आपका वक्त बदल जाए |

466. हम क्या हे वो सिर्फ हम ही जानते हे, लोग तो सिर्फ हमारे बारे में अंदाज़ा लगा सकते हे |

467. खुदा करे हर साल चाँद बन कर आए दिन का उजाला शान बन के आए कभी ना दूर हो आपके चेहरे से हंसी ये रंग पंचमी का त्यौहार ऐसा मेहमान बन के आए रंग पंचमी मुबारक हो |

468. कभी एक लम्हा ऐसा भी आता हैं, जिसमे बीता हुआ कल नज़र आता हैं, बस यादें रह जाती है याद करने के लिए, और वक्त सब कुछ लेके गुज़र जाता हैं |

469. जिसने कभी चाहतों का पैगाम लिखा था, जिसने अपना सब कुछ मेरे नाम लिखा था, सुना है आज उसे मेरे ज़िक्र से भी नफरत है, जिसने कभी अपने दिल पर मेरा नाम लिखा था.टाईगर |

470. यह चमत्कार केवल “विश्वास” ही कर सकता हैं, जो पत्थर को भी “भगवान” कर सकता हैं |

471. वक्त से लड़कर जो अपना नसीब बदल दे, इंसान वही जो अपनी तक़दीर बदल दे, कल क्या होगाकभी ना सोचो, क्या पता कल वक़्त ख़ुद अपनी तस्वीर बदल दे |

472. दिल पे क्या गुज़री वो अनजान क्या जाने, प्यार किसे कहते हैं वो नादान क्या जाने, हवा के साथ उड़ गया घर इस परिंदे का, कैसे बना था घोंसला वो तूफान क्या जाने Tiger |

473. कीमत पानी की नहीं, प्यास की होती हैं, कीमत मौत की नही, साँस की होती हैं, प्यार तो बहुत करते हैं, दुनिया में कीमत प्यार की नही, विश्वास की होती हैं |

474. वक्त की रफ़्तार रुक गयी होती, शरम से आँखें झुक गयी होती, अगर दर्द जानती शम्मा परवाने का, तो जलने से पहले ही वो बुझ गयी होती |

475. जाने क्या सोच के लहरें साहिल से टकराती हैं, और फिर से लौट जाती हैं, समझ नहीं आता की वो किनारों से बेवफाई करती हैं, या फिर लौटके समंदर से वफ़ा निभाती हैं |

476. लोगो के पास बहुत कुछ हैं, मगर मुश्किल यही है कि भरोसे पर शक हैं और अपने शक पे भरोसा हैं |

477. एक तूफ़ान आया और सब कुछ उड़ा कर चला गया, गुजरा हुआ वक्त बहुत कुछ सिखा कर चला गया, कभी सोचा न था दुनिया में ऐसे लोग भी होते हैं, जिन्हें चुप कराया वही हमे रुला कर चला गया |

478. सबके होते हुए भी तन्हाई मिलती है, यादों में भी गम की परछाई मिलती है, जितनी भी दुआ करते हैं हम, किसी को पाने की उतनी ही उनसे बेवफाई मिलती है |

479. जिन्हें फ़िक्र थी कल की, वो रोयें रात भर, जिन्हें यकीन था रब पर वो सोयें रात भर |

480. वक्त से ज्यादा ज़िन्दगी में, कोई भी अपना और पराया नही होता, अगर वक्त अपना हैं तो सभी अपने होते हैं, और अगर वक्त ही पराया हो तो अपने भी पराये हो जाते हैं |

481. तरस जाओगे हमारे लबो से, सुनने को एक एक लफ्ज प्यार की बात तो क्या , हम शिकायत भी नहीं करेंगे |

482. हर रिश्तें में विश्वास रहने दो, जुबान पर हर वक्त मिठास रहने दो, यही तो अंदाज हैं जिन्दगी जीने का, न ख़ुद रहो उदास, न दूसरों को रहने दो |

483. वक्त का पता नही चलता अपनों के साथ, पर अपनों का पता चलता हैं वक्त के साथ |

484. दुआ तो एक ही काफी है गर कबूल हो जाये!! हज़ारों दुआओं के बाद भी मंज़र तबाह देखें है |

485. भरोसा दूसरों पर रखो तो गम दे जाती हैं, भरोसा ख़ुद पर रखो तो ताकत बन जाती हैं |

486. वक्त से लड़कर अपना नसीब बदल दे, इंसान वही जो अपनी तकदीर बदल दे, कल क्या होगा उसकी कबी ना सोचो, क्या पता कल वक्त खुद अपनी लकीर बदल दे |

487. क्या कहें कुछ कहा नहीं जाता, दर्द है पर सहा नहीं जाता, मोहब्बत हो गई है इस कदर आपसे की, बिना याद किए आपको रहा नहीं जाता |

488. “विश्वास” एक छोटा “शब्द” हैं, इसको पढ़ने में तो एक सेकंड लगता हैं, सोचो तो एक मिनट लगता हैं, समझो तो दिन लगता हैं, पर साबित करने में तो “जिन्दगी” लग जाती हैं |

489. चलकर देखा हैं अकसर, मैंने अपनी चाल से तेज पर वक्त और तकदीर से आगे कभी निकल न सका |

490. गम में आंसू बहा ना सके, ख़ुशी मिली तो मुस्कुरा ना सके, अपनी ज़िन्दगी का भी ये एक राज़ है, जिसे चाहा उसे पा ना सके, और इतना चाहा की आजतक भुला ना सके |

491. प्यार और विश्वास कभी भी मत खोना क्योकि प्यार हर किसी से नही होता और विश्वास हर किसी पे नही होता |

492. वक्त की एक आदत बहुत अच्छी हैं, जैसा भी हो गुजर जाता हैं |

493. एक दिल मेरे दिल को ज़ख्म दे गया, ज़िन्दगी भर जीने की कसम दे गया, लाखों फूलों में से एक फूल चुना हमने, जो काँटो से गहरी चुभन दे गया |

494. रिश्तें और विश्वास दोनों मित्र हैं, रिश्ते रखो या ना रखो पर विश्वास जरूर बनाये रखना क्योकि जहाँ विश्वास होता हैं वहाँ रिश्ते अपने आप बन जाते हैं |

495. बुरा वक्त कभी भी बताकर नही आता, पर सिखाकर और समझकर बहुत कुछ जाता हैं |

496. तेरा नाम तरन्नुम बनकर, बजता मन वीणा के तारो पे मेरे हृदय के इस उपवन में, तुम रहते हो संग बहारों के tiger |

497. जो आप पर आँखें बंद करके विश्वास करता हो, उको कभी भी धोखे में मत रखना |

498. किसी की मजबूरियों पर मत हँसिये, कोई मजबूरियाँ ख़रीद कर नही लाता, डरिए वक्त की मार से क्योकि बुरा वक्त किसी को बताकर नही आता |

499. महसूस तब हुआ जब सारा शहर, मुझसे जलने लगा है । तब समझ मे आ गया कि , अपना नाम भी चलने लगा है|

500. जिन्दगी में तीन चीजें कभी मत तोड़ो Trust, Promise और किसी का दिल |

501. रिश्ते खराब होने की एक वजह ये भी है, कि लोग झुकना पसंद नहीं करते |

502. गुमनामी के अंधेरे में था पहचान बना दिया दुनिया के गम से मुझे अनजान बना दिया उनकी ऐसी कृपा हुई गुरू ने मुझे एक अच्छा इंसान बना दिया |

503.

504. छु ले आसमाँ जमीँ की तलाश ना कर’ जी ले जिन्दगी खुशी की तलाश ना कर’ तकदीर बदल जायेगी खुद ही मेरे दोस्त’ मुस्कुराना सिख ले वजह की तलाश ना कर |

505. गुरूदेव के श्रीचरणों में श्रद्धा सुमन संग वंदन जिनके कृपा नीर से जीवन हुआ चंदन धरती कहती, अंबर कहते कहती यही तराना गुरू आप ही वो पावन नूर हैं जिनसे रौशन हुआ जमाना |

506. किसी की यादो को रोक पाना मुश्किल है, रोते हुए दिल को मनाना मुश्किल है, ये दिल अपनो को कितना याद करता है, ये कुछ लफ्जो में बयाँ कर पाना मुश्किल है!!

507. गुजरी हुई जिंदगी को कभी याद न कर, तकदीर मे जो लिखा है, उसकी फर्याद न कर |

508. गुरु ब्रह्मा, गुरु विष्णु गुरु देवो महेश्वर गुरु साक्षात् परमं ब्रह्मा तस्मै श्री गुरुवे नम: |

509. आरज़ू होनी चाहिए किसी को याद करने की!! लम्हें तो अपने आप ही मिल जाते हैं, कौन पूछता है पिंजरे में बंद पंछियों को, याद वही आते है जो उड़ जाते है!!

510. तू जिंदगी को जी, उसे समझने की कोशिश न कर सुन्दर सपनो के ताने बाने बुन, उसमे उलझने की कोशिश न कर |

511. सत्य का पाठ जो पढ़ाएँ वही सच्चा गुरू कहलाये, जो ज्ञान से जीवन को आसन बनाये वही सच्चा गुरू कहलाये |

512. प्यार छिपता नहीं आँखे झुकाने से, दिल रुकता नहीं किसी के समझाने से, हम आपको याद करते है, जीने के बहाने से, क्योंकि रुक जाती है धड़कन आपको भूल जाने से!!

513. न किसी का फेंका हुआ मिले, न किसी से छिना हुआ मिले, मुझे बस मेरे नसीब में लिखा हुआ मिले, ना मिला ये भी तो कोई गम नहीं, मुझे बस मेरी मेहनत का किया हुआ मिले |

514. गुरू के बिना ज्ञान कहाँ, ज्ञान बिना मान कहाँ, गुरु ने दी शिक्षा जहाँ, सुख की सुख हैं वहाँ |

515. याद रुकती नही रोक पाने से, दिल मानता नही किसी के मनाने से, रुक जाती हैं धड़कने आपको भूल जाने से, इसलिए आपको याद करते हैं जीने के बहाने से!!

516. इस कदर हम उनकी मुहब्बत में खो गए, कि एक नज़र देखा और बस उन्हीं के हम हो गए, आँख खुली तो अँधेरा था देखा एक सपना था, आँख बंद की और उन्हीं सपनो में फिर सो गए |

517. जिसे देता हैं हर व्यक्ति सम्मान, जो करता हैं वीरों का निर्माण, जो बनाता हैं इंसान को इंसान, ऐसे गुरु को हम करते हैं प्रणाम |

518. बहुत अजीब होती है ये यादे भी मोहब्बत की, जिन पलो मे हम रोए थे, उन्हें याद करके हमे हँसी आती है, ओर जिन पलो मे हँसे थे, उन्हे याद करके रोना आता है!!

519. पसीने की स्याही से जो लिखते हैं इरादों को उनके मुक़द्दर के सफ़ेद पन्ने कोरे नहीं होते। ख्वाइश बस इतनी सी है कि लोग मेेरे लफ़्ज़ों को समझो । आरज़ू ये नही की लोग वाह वाह करें ।

520. अज्ञान को मिटा कर, ज्ञान का दीपक जलाया हैं, गुरू कृपा से मैने ये अनमोल शिक्षा पाया हैं |

521. आप हंसो तो खुशी मुझे होती है, आप रूठो तो आँखे मेरी रोती है, आप दूर जाओ तो बेचेनी होती है, महसूस करके देखो प्यार मे ज़िंदगी कैसी होती है!!

522. बुझी शमा भी जल सकती है, तूफानों से किश्ती भी निकल सकती है, हो के मायुस यूँ ना अपने इरादे बदल, तेरी किश्मत कभी भी बदल सकती है !

523. बन्द हो जाएँ सब दरवाजे, नया रास्ता दिखाते हैं गुरु, सिर्फ किताबी ज्ञान नही, जीवन जीना सिखाते हैं गुरू |

524. दिल में छिपी यादों से सवारू तुझे, तू देखे तो अपनी आँखो मे उतारू तुझे, तेरे नाम को लबो पे ऐसे सजाया हैं, सो भी जाऊं तो ख्वाबो मे पुकारू तुझे!!

525. रिश्ते पंछियों के समान होते है, जोर से पकडो तो मर सकते है, धीरे से पकडो तो उड सकते है, लेकिन प्यार से पकड कर रखो, तो जिंदगी भर साथ में रहते है |

526. गुरू गोविन्द दोउ खड़े, काके लागू पाव, बलिहारी गुरू आपने, गोविन्द दियो बताय |

527. कदमो की दूरी से दिलो के फ़ासले नही बढ़ते, दूर होने से एहसास नही मरते, कुछ कदमो का फासला ही सही हमारे बीच, लेकिन ऐसा कोई पल नही जब हम तुमको याद नही करते!!

528. मशहूर हो जाते हैं वो जिनकी हस्ती बदनाम होती है, कट जाती है जिंदगी सफ़र में अक्सर जिनकी मंजिलें गुमनाम होती हैं |

529. लक्ष्य प्राप्त कर सकू, आपने मुझे इस योग्य बनाया, जब महसूस किया मैंने हारा, आपका दिया ज्ञान बहुत काम आया गुरु को मेरा नमन |

530. दिल से ना कभी भुला पाएँगे हम, दिल उनका कभी दुखा ना पाएँगे हम, कैसे करते है हम ये गुनाह प्यार मे, जब उनका एक खत तक ना जला पाएँ हम!!

531. सैर कर दुनीया की गालिब, जिन्दगानी फिर कहा, जिन्दगानी गर रही तो, नौजवानी फिर कहा!

532. गुरू में वो शक्ति हैं जो कुछ भी कर सकती हैं, ज्ञान ही हैं जो बाटने पर बढ़ती हैं |

533. मिलने की खुशी है या बिछड़ने का गम, आँखों में आँसू है या उदास है हम, कैसे कहें कि कैसे हैं हम, बस इतना समझ लेना क तुम बिन बहोत अकेले है हम!!

534. मुझे ख़बर थी मेरा इन्तजार घर में रहा, ये हादसा था कि मैं उम्र भर सफ़र में रहा |

535. तन्हाई की आग में कहीं जल ही न जाऊँ के अब तो कोई मेरे आशियाने को बचाले |

536. सामने ना हो तो तरसती है आँखे, याद मे तेरी बरसती है आँखे मेरे लिए नही इनके लिए ही आ जाओ, आप का बेपनाह इंतेज़ार करती हैं ये आँखे!!

537. चले थे जिस की तरफ़ वो निशान ख़त्म हुआ सफ़र अधूरा रहा आसमान ख़त्म हुआ |

538. ये ठीक है मरता नहीं कोई जुदाई में, खुदा किसी को किसी से मगर जुदा न करे।

539. दोस्ती का शुक्रिया कुछ इस तरह अदा करूँ, आप भूल भी जाओ तो मे हर पल याद करूँ, खुदा ने बस इतना सिखाया हे मुझे, कि खुद से पहले आपके लिए दुआ करूँ!!

540. एक सफ़र वो है जिस में पाँव नहीं दिल दुखता है |

541. अपने दुखो पे रोना अपनी खुशियों पे रोना, क्या कुछ सिखा जाता है किसी से जुदा होना।

542. मुस्कान का कोई मोल नही होता, कुछ रिश्तो का तोल नहीं होता, दोस्त तो मिल जाते है हर रास्ते पर, लेकिन हर कोई आपकी तरह अनमोल नहीं होता!!

543. इस सफ़र में नींद ऐसी खो गई हम न सोए रात थक कर सो गई |

544. हुआ है तुझसे बिछडने के बाद ये मालूम कि,सिर्फ तू नहीं था तेरे साथ मेरी एक पूरी दुनिया थी।

545. कुछ मीठे पल हमेशा याद आते है, पलको पे आंसू छोड़ जाते है| कल कोई और मिले तो उन्हें ना भूलना, क्योकि दोस्ती के रिस्ते ज़िंदगीभर काम आते है!!

546. किसी को घर से निकलते ही मिल गई मंज़िल कोई हमारी तरह उम्र भर सफ़र में रहा |

547. लाज़िम नहीं कि उसको भी मेरा ख्याल हो ! मेरा जो हाल है वही उसका भी वही हो !!

548. हर दूरी मिटानी पड़ती है, हर बात बतानी पड़ती है, लगता है दोस्तो के पास वक़्त ही नही है, आज कल खुद अपनी याद दिलानी पड़ती है!!

549. मैं अकेला ही चला था जानिब-ए-मंज़िल मगर लोग साथ आते गए और कारवाँ बनता गया |

550. मैं तन्हाई को तन्हाई में तनहा कैसे छोड़ दूँ ! इस तन्हाई ने तन्हाई में तनहा मेरा साथ दिए है !!

551. आ कि मैं देख लूँ खोया हुआ चेहरा अपना मुझ से छुप कर मिरी तस्वीर बनाने वाले |

552. ज़िंदगी यूँ हुई बसर तन्हा क़ाफ़िला साथ और सफ़र तन्हा |

553. इस तन्हाई का हम पे बड़ा एहसान है साहब ! न देती ये साथ अपना तो जाने हम किधर जाते !!

554. आप ने तस्वीर भेजी मैं ने देखी ग़ौर से हर अदा अच्छी ख़मोशी की अदा अच्छी नहीं |

555. दिल से मांगी जाए तो हर दुआ में असर होता है, मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं जिनकी जिंदगी में सफ़र होता है |

556. अब तो याद भी उसकी आती नहीं ! कितनी तनहा हो गई तन्हाईयाँ !!

557. आता था जिस को देख के तस्वीर का ख़याल अब तो वो कील भी मिरी दीवार में नहीं |

558. मुसीबतें लाख आएंगी जिंदगी की राहों में, रखना तू सबर, मिल जाएगी तुझे मंजिल इक दिन बस जारी रखना तू सफ़र |

559. शाम-ए तन्हाई में इजाफा बेचैनी ! एक तेरा ख्याल न जाना एक दूसरा तेरा जवाब न आना !!

560. अपने जैसी कोई तस्वीर बनानी थी मुझे मिरे अंदर से सभी रंग तुम्हारे निकले |

561. मुकम्मल होगा सफ़र एक दिन बस दिल में ताजा जज़्बात रखना, तमाम मुश्किलें आएंगी लेकिन अपने काबू में हर हालत रखना |

562. इश्क़ के नशे डूबे तो ये जाना हमने फ़राज़ ! की दर्द में तन्हाई नहीं होती.तन्हाई में दर्द होता है !!

563. अपनी तस्वीर बनाओगे तो होगा एहसास कितना दुश्वार है ख़ुद को कोई चेहरा देना |

564. रहेंगे दर्द जिंदगी में तो ख़ुशी का इंतजाम क्या होगा निकल पड़े हैं जो बदलने खुद को न जाने इस सफ़र का अंजाम क्या होगा |

565. तुझपे खुल जाती मेरे रूह की तन्हाई भी ! मेरी आँखों में कभी झांक के देखा होता !!

566. चाहिए उस का तसव्वुर ही से नक़्शा खींचना देख कर तस्वीर को तस्वीर फिर खींची तो क्या |

567. बीत जाएगा ये सफ़र भी दर्द की राहों का मिलेगा साथ जब खुशियों की बाहों का, बढ़ाते रहना कदम, मत रुकना कभी होगा रुतबा तेरा जैसे शहंशाहों का |

568. कभी गम तो कभी तन्हाई मार गयी कभी याद आ कर उनकी जड़ी मार गयी बहुत टूट कर चाहा जिसको हमने आखिन में उनकी बेवफाई मार गयी |

569. चुप-चाप सुनती रहती है पहरों शब-ए-फ़िराक़ तस्वीर-ए-यार को है मिरी गुफ़्तुगू पसंद |

570. इन अजनबी सी राहों में जो तू मेरा हमसफ़र हो जाये, बीत जाए पल भर में ये वक़्त और हसीन सफ़र हो जाये |

571. मेरे दिल का दर्द किसने देखा जुम्हे बस खुदा ने तड़पते देखा हम तन्हाई में बैठे रोते है लोगो ने हमें महेफिलों में हस्ते देखा |

572. दिल के आईने में है तस्वीर-ए-यार जब ज़रा गर्दन झुकाई देख ली |

573. मंजिल बड़ी हो तो सफ़र में कारवां छूट जाता है, मिलता है मुकाम तो सबका वहम टूट जाता है |

574. फिर उसके जाते ही दिल सुनसान हु कर रह गया अच्छा भला आबाद शहर वीरान हो कर रह गया |

575. एक कमी थी ताज-महल में मैं ने तिरी तस्वीर लगा दी |

576. तेरी जिंदगी की असलियत का जब तुझ पर असर होगा, असल में उस समय ही शुरू तेरे जीने का सफ़र होगा |

577. में अक्सर रात में युहीं सड़क पर निकलता हूँ ये सोचकर कि कही चाँद को तन्हाई का अहेसास न हो |

578. इक बार तुझे अक़्ल ने चाहा था भुलाना सौ बार जुनूँ ने तिरी तस्वीर दिखा दी |

579. आरज़ू हसरत और उम्मीद शिकायत आँसू इक तिरा ज़िक्र था और बीच में क्या क्या निकला |

580. वो भी तनहा रोती है और इधर खुश में भी नहीं सायद पियार की मंजिल यहाँ भी नहीं वहां भी नहीं |

581. जिस से ये तबीअत बड़ी मुश्किल से लगी थी देखा तो वो तस्वीर हर इक दिल से लगी थी |

582. अब रात की दीवार को ढाना है ज़रूरी ये काम मगर मुझ से अकेले नहीं होगा |

583. मेरी आँखों को देख कर एक साहिब एल्म बोला तेरी संजीदगी बताती है के तुझे हंसने का शोक था |

584. जो चुप-चाप रहती थी दीवार पर वो तस्वीर बातें बनाने लगी |

585. अब तक दिल-ए-ख़ुश-फ़हम को तुझ से हैं उमीदें ये आख़िरी शमएँ भी बुझाने के लिए आ |

586. हर रात रोते हुवे सूख जाते है आंसू किया हमारी गलती इतनी बड़ी है जो सजा पोरी नहीं होती |

587. कह रही है ये तिरी तस्वीर भी मैं किसी से बोलने वाली नहीं |

588. एक चराग़ और एक किताब और एक उम्मीद असासा उस के बा’द तो जो कुछ है वो सब अफ़्साना है |

589. आज इनता तनहा महेसूस किया खुद को जेसे लोग दफना क्र चले गए हों |

590. कहीं ऐसा न हो कम-बख़्त में जान आ जाए इस लिए हाथ में लेते मिरी तस्वीर नहीं |

591. इसी उम्मीद पर तो जी रहे हैं हिज्र के मारे कभी तो रुख़ से उट्ठेगी नक़ाब आहिस्ता आहिस्ता |

592. बस में इतना जनता हूँ तेरे बिगैर ज़िन्दगी हयात नहीं मोअत निजत नहीं |

593. कल तेरी तस्वीर मुकम्मल की मैं ने फ़ौरन उस पर तितली आ कर बैठ गई |

594. इतना भी ना-उमीद दिल-ए-कम-नज़र न हो मुमकिन नहीं कि शाम-ए-अलम की सहर न हो |

595. दर्द ही सही मेरे इश्क का इनाम तो आया खली ही सही हातों में जाम तो आया में हूँ बेवफा सबको बताया उसने यु ही सही उसके लबों पे मेरा नाम तो आया |

596. ख़ुशबू गिरफ़्त-ए-अक्स में लाया और उस के बाद मैं देखता रहा तिरी तस्वीर थक गई |

597. इतने मायूस तो हालात नहीं लोग किस वास्ते घबराए हैं |

598. खुशबू बनकर गुलों से उड़ा करते हैं, धुआं बनकर पर्वतों से उड़ा करते हैं, हमें क्या रोकेंगे ये ज़माने वाले, हम परों से नहीं हौसलों से उड़ा करते हैं।

599. कोई तस्वीर मुकम्मल नहीं होने पाती धूप देते हैं तो साया नहीं रहने देते |

600. झूटे वादों पर थी अपनी ज़िंदगी अब तो वो भी आसरा जाता रहा |

601. आज़ादी का जोश कभी कम ना होने देंगे, जब भी ज़रूरत पड़ेगी देश के लिए जान लुटा देंगे. क्योंकि भारत हमारा देश है, अब दोबारा इस पर कोई आंच ना आने देंगे |

602. कुछ तो इस दिल को सज़ा दी जाए उस की तस्वीर हटा दी जाए |

603. कहते हैं कि उम्मीद पे जीता है ज़माना वो क्या करे जिस को कोई उम्मीद नहीं हो |

604. ना जुबान से, ना निगाहों से, ना दिमाग से, ना रंगों से, ना ग्रीटिंग से, ना गिफ्ट से, आपको 26 जनवरी मुबारक डायरेक्ट दिल से |

605. ताब-ए-नज़्ज़ारा नहीं आइना क्या देखने दूँ और बन जाएँगे तस्वीर जो हैराँ होंगे |

606. ख़्वाब, उम्मीद, तमन्नाएँ, तअल्लुक़, रिश्ते जान ले लेते हैं आख़िर ये सहारे सारे |

607. वतन हमारा ऐसे ना छोड़ पाए कोई, रिश्ता हमारा ऐसे ना तोड़ पाए कोई, दिल हमारा एक है एक है हमारी जान. हिन्दुस्तान हमारा है हम है इसकी शान 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की शुभकामनायें |

608. तस्वीर के दो रुख़ हैं जाँ और ग़म-ए-जानाँ इक नक़्श छुपाना है इक नक़्श दिखाना है |

609. किस से उम्मीद करें कोई इलाज-ए-दिल की चारागर भी तो बहुत दर्द का मारा निकला |

610. हैरान हूँ तेरा इबादत में झुका सर देखकर ऐसा भी क्या हुआ जो खुदा याद आ गया |

611. तेरी सूरत से किसी की नहीं मिलती सूरत हम जहाँ में तिरी तस्वीर लिए फिरते हैं |

612. कुछ कटी हिम्मत-ए-सवाल में उम्र कुछ उमीद-ए-जवाब में गुज़री |

613. तेरे बग़ैर इश्क़ हो तो कैसे हो इबादत के लिए ख़ुदा भी तो ज़रूरी होता है |

614. तिरी तस्वीर तो वा’दे के दिन खिंचने के क़ाबिल है कि शर्माई हुई आँखें हैं घबराया हुआ दिल है |

615. तर्क-ए-उम्मीद बस की बात नहीं वर्ना उम्मीद कब बर आई है |

616. मैं आदत हुँ उसकी वो ज़रुरत हैं मेरी, मैं फरमाईश हुँ उसकी वो इबादत हैं मेरी।

617. ज़िंदगी भर के लिए रूठ के जाने वाले मैं अभी तक तिरी तस्वीर लिए बैठा हूँ |

618. तिरे वा’दों पे कहाँ तक मिरा दिल फ़रेब खाए कोई ऐसा कर बहाना मिरी आस टूट जाए |

619. दर्द भी तुम दवा भी तुम इबादत भी तुम ख़ुदा भी तुम |

620. भेज दी तस्वीर अपनी उन को ये लिख कर ‘शकील’ आप की मर्ज़ी है चाहे जिस नज़र से देखिए |

621. तुम कहाँ वस्ल कहाँ वस्ल की उम्मीद कहाँ दिल के बहकाने को इक बात बना रखी है |

622. इश्क़ महसूस करना भी इबादत से कम नहीं, ज़रा बताइये, छू कर खुदा को किसी ने देखा हैं |

623. दिल्ली के न थे कूचे औराक़-ए-मुसव्वर थे जो शक्ल नज़र आई तस्वीर नज़र आई |

624. उमीद-ए-वस्ल ने धोके दिए हैं इस क़दर ‘हसरत’ कि उस काफ़िर की हाँ भी अब नहीं मालूम होती है |

625. मुहब्बत शोर है, तो, शोर मत कर इबादत है अगर, कुछ, और मत कर नज़ाकत से, नफ़ासत से, निभाना ये कच्ची डोर है, तू जोर मत कर |

626. हम हैं उस के ख़याल की तस्वीर जिस की तस्वीर है ख़याल अपना |

627. उमीद-ओ-बीम के मेहवर से हट के देखते हैं ज़रा सी देर को दुनिया से कट के देखते हैं |

628. उसकी याद आई हैं साँसों ज़रा धीरे चलो, धड़कनो से भी इबादत में खलल पड़ता है |

629. हर्फ़ को लफ़्ज़ न कर लफ़्ज़ को इज़हार न दे कोई तस्वीर मुकम्मल न बना उस के लिए |

630. उम्मीद तो बंध जाती तस्कीन तो हो जाती वा’दा न वफ़ा करते वा’दा तो किया होता |

631. तेरी ख्वाहिश कर ली तो कौन सा गुनाह किया, लोग तो इबादत में सारी कायनात मांगते खुदा से।

632. लगता है कई रातों का जागा था मुसव्विर तस्वीर की आँखों से थकन झाँक रही है |

633. सीने में जलन आँखों में तूफ़ान क्यों होता है, इस आशिकी में हर आदमी परेशान क्यों होता है।

634. जिसे पूजा था हमने वो खुदा तो न बन सका, हम ईबादत करते करते फकीर हो गए |

635. मैं लाख इसे ताज़ा रखूँ दिल के लहू से लेकिन तिरी तस्वीर ख़याली ही रहेगी |

636. इसमें इश्क़ की किस्मत भी बदल सकती थी, जो वक़्त बीत गया मुझको आजमाने में।

637. तेरी खवाहीश कर ली तो कौन सा गुनाह कर दिया! लोग तो इबादत मैं पुरी कायनात मांगते है!

638. मैं ने भी देखने की हद कर दी वो भी तस्वीर से निकल आया |

639. महफ़िल ना सही तन्हाई तो मिलती है, मिलना न सही जुदाई तो मिलती है, कौन कहता इश्क़ में कुछ नहीं मिलता वफ़ा न सही बेवफाई तो मिलती है।

640. तकलीफें तो हज़ारों हैं इस ज़माने में, बस कोई अपना नज़र अंदाज़ करे तो बर्दाश्त नहीं होता !!

641. मैं ने तो यूँही राख में फेरी थीं उँगलियाँ देखा जो ग़ौर से तिरी तस्वीर बन गई |

642. दिल की हसरत मेरी जुबान पे आने लगी, तूने देखा और ये ज़िन्दगी मुस्कुराने लगी, ये इश्क़ की इन्तहा थी या दीवानगी मेरी, हर सूरत में सूरत तेरी नजर आने लगी।

643. पहले ज़मीं बँटी फिर घर भी बँट गया, इंसान अपने आप में कितना सिमट गया।

644. मुद्दतों बाद उठाए थे पुराने काग़ज़ साथ तेरे मिरी तस्वीर निकल आई है |

645. ये इश्क भी शराब का नशा जैसा है दोस्तों, करें तो मर जाएँ और छोड़े तो किधर जाएँ।

646. आइना कोई ऐसा बना दे, ऐ खुदा जो, इंसान का चेहरा नहीं किरदार दिखा दे।

647. मुझ को अक्सर उदास करती है एक तस्वीर मुस्कुराती हुई |

648. तुझे देखे बिना तेरी तस्वीर बना दूँ, तुझे मिले बिना तेरा हाल बता दूँ, मेरी मोहब्बत में इतना दम है कि, तेरी आँखों के आँसू अपनी आँखों से गिरा दूँ।

649. इंसाँ की ख़्वाहिशों की कोई इंतिहा नहीं, दो गज़ ज़मीं भी चाहिए दो गज़ कफ़न के बाद।

650. मुझे ये ज़ोम कि मैं हुस्न का मुसव्विर हूँ उन्हें ये नाज़ कि तस्वीर तो हमारी है |

651. जब्त से काम लिया दिल ने तो क्या फक्र करूँ, इसमें क्या इश्क की इज्ज़त थी कि रुसवा न हुआ, वक्त फिर ऐसा भी आया कि उससे मिलते हुए, कोई आँसू भी ना गिरा कोई तमाशा ना हुआ।

652. हमारी आरजूओं ने हमें इंसान बना डाला​, ​वरना जब जहां में आये थे बन्दे ​​​थे खुदा के​।​

653. प्यार गया तो कैसे मिलते रंग से रंग और ख़्वाब से ख़्वाब एक मुकम्मल घर के अंदर हर तस्वीर अधूरी थी |

654. गजल-ए-उल्फत पढ़ लिया करो, एक खुराक सुबह एक खुराक शाम, ये वाहिद दवा है जिससे, बीमारे-इश्क को मिलता है तुरंत आराम।

655. फितरत सोच और हालात में फर्क है वरना, इन्सान कैसा भी हो दिल का बुरा नही होता।

656. रंग ख़ुश्बू और मौसम का बहाना हो गया अपनी ही तस्वीर में चेहरा पुराना हो गया |

657. लगाके इश्क़ की बाजी सुना है दिल दे बैठे हो, मुहब्बत मार डालेगी अभी तुम फूल जैसे हो।

658. हम खुदा थे गर न होता दिल में कोई मुद्दा, आरजूओं ने हमारी हमको बंदा कर दिया।

659. रफ़्ता रफ़्ता सब तस्वीरें धुँदली होने लगती हैं कितने चेहरे एक पुराने एल्बम में मर जाते हैं |

660. उसी से पूछ लो उसके इश्क की कीमत, हम तो बस भरोसे पे बिक गए।

661. दिल के मंदिरों में कहीं बंदगी नहीं करते, पत्थर की इमारतों में खुदा ढूंढ़ते हैं लोग।

662. रोज़ है दर्द-ए-मोहब्बत का निराला अंदाज़ रोज़ दिल में तिरी तस्वीर बदल जाती है |

663. इक बात कहूँ इश्क़ बुरा तो नहीं मानोगे, बड़ी मौज के थे दिन, तुमसे पहचान से पहले।

664. जिन्हें महसूस इंसानों के रंजो-गम नहीं होते, वो इंसान भी हरगिज पत्थरों से कम नहीं होते।

665. शहर हो दश्त-ए-तमन्ना हो कि दरिया का सफ़र तेरी तस्वीर को सीने से लगा रक्खा है |

666. तेरी जब याद आती है तो फिर साँसें नहीं आती, इश्क़ में हम सी बेचैनी कहाँ पर पाओगे हमदम।

667. चंद सिक्कों में बिकता है यहाँ इंसान का ज़मीर, कौन कहता है मेरे मुल्क में महंगाई बहुत है।

668. सोचता हूँ तिरी तस्वीर दिखा दूँ उस को रौशनी ने कभी साया नहीं देखा अपना |

669. इस इश्क ने हमें मगरूर कर दिया, हर खुशी से बहुत दूर कर दिया, सोचा नहीं था कभी हमें इश्क़ होगा, पर आपकी नजरों ने मजबूर कर दिया।

670. जिस्म की सारी रगें तो स्याह खून से भर गयी हैं, फक्र से कहते हैं फिर भी हम कि हम इंसान हैं।

671. सूरत छुपाइए किसी सूरत-परस्त से हम दिल में नक़्श आप की तस्वीर कर चुके |

672. जा और कोई ज़ब्त की दुनिया तलाश कर ऐ इश्क़ हम तो अब तेरे काबिल नहीं रहे।

673. इन्सानियत की रौशनी गुम हो गई कहाँ, साए तो हैं आदमी के मगर आदमी कहाँ |

674. सूरत-ए-वस्ल निकलती किसी तदबीर के साथ मेरी तस्वीर ही खिंचती तिरी तस्वीर के साथ |

675. मेरे हवास इश्क़ में क्या कम हैं मुंतशिर, मजनूँ का नाम हो गया क़िस्मत की बात है।

676. देखें करीब से तो भी अच्छा दिखाई दे, इक आदमी तो शहर में ऐसा दिखाई दे।

677. पलकों की इस लुक-छुपी को दिल कहते है, मैं प्यार मान लू, न कह के तुम हंस देती हो, कैसे मैं इंकार मान लूँ |

678. वो अयादत को तो आया था मगर जाते हुए अपनी तस्वीरें भी कमरे से उठा कर ले गया |

679. गर हो जाए इश्क तो हमसे साझा कर लेना। कुछ हम रख लेंगे कुछ तुम रख लेना।

680. मेरी जबान के मौसम बदलते रहते हैं, मैं तो आदमी हूँ मेरा ऐतबार मत करना।

681. कुछ इस तरह मेरी ज़िदगी को मैंने आसान कर लिया। भूलकर तेरी बेवफाई ,मेरी तन्हाई से प्यार कर लिया।

682. अगर इश्क़ गुनाह है तो गुनाहगार है खुदा, जिसने बनाया दिल किसी पर आने के लिए।

683. खुदा न बदल सका आदमी को आज भी यारों, और आदमी ने सैकड़ो खुदा बदल डाले।

684. किस्मत से लिखी कोई बात हो तुम, तक़दीर से मिली सौगात हो तुम, तुमसे मिलकर महसूस हुआ की, बरसो से मेरे साथ हो तुम!!

685. इश्क है वही जो हो एक तरफा, इजहार-ए-इश्क तो ख्वाहिश बन जाती है, है अगर इश्क तो आँखों में दिखाओ, जुबां खोलने से ये नुमाइश बन जाती है।

686. इल्म-ओ-अदब के सारे खजाने गुजर गए, क्या खूब थे वो लोग पुराने गुजर गए, बाकी है बस जमीं पे आदमी की भीड़, इंसान को मरे हुए तो ज़माने गुजर गए।

687. आरज़ू है तुमसे दूर रहने की, करीब आना नही चाहते, तमन्ना नही तुन्हें पाने की, मगर खोना नही चाहते!!

688. इश्क क्या चीज होती है यह पूछिये परवाने से, जिंदगी जिसको मयस्सर हुई मर जाने के बाद।

689. यह ज़रूरी महि की बोल देने से ही प्यार होता है, आँखों आँखों में भी तो प्यार का इज़हार होता है, आप बस एक बार हमारी तरफ सिख लीजिये, फिर देखना के आपका दिल कैसे |

690. ​दर्द से अब हम खेलना सीख गए,​ ​हम बेवफाई के साथ जीना सीख गए, क्या बताएं किस कदर दिल टूटा है मेरा, मौत से पहले, कफ़न ​ओढ़ कर सोना सीख गए।

691. वो मुझ तक आने की राह चाहता है, लेकिन मेरी मोहब्बत का गवाह चाहता है, खुद आते जाते मौसमों की तरह है, और मेरे इश्क़ की इन्तहा चाहता है।

692. कुछ देर हमारे साथ चलो, हम अपनी कहानी कह देंगे, समझे न जिसे तुम आँखों से, वो बात ज़ुबानी कह देंगे!!

693. आकाश मे डूबा एक प्यारा तारा हे, हमको तो किसी की बेवफ़ाई ने मारा हे, हम उनसे अब भी मोहब्बत करते हे, जिसने हमे मौत से भी पहेले मारा हे |

694. अकेले हम ही शामिल नहीं हैं इस जुर्म में जनाब, नजरें जब भी मिली थी मुस्कराये तुम भी थे।

695. उठा लो चुनरी को ज़मीं से, कहीँ दाग न लग जाये, छुपा लो हुस्न को, कहीं दुनिया में आग न लग जाये!!

696. यू तो हर दिल में एक कशिश होती है हर कशिश में एक ख्वाहिश होती है मुमकिन नही सभी के लिए ताज महल बनाना लेकिन हर दिल में एक मुमताज़ होती है |

697. इश्क के रास्ते में मुमसिक तो बहुत मिले, मिला दे महबूब से ना आज तक कोई ऐसा मिला |

698. सदियों से होंठो के प्यास थी, आज समुन्दर देखा तो पि गए, पैदा होते ही मारने की तमन्ना थी, पर तुझे देखा तो जी गए!!

699. हम ने हर दुख को मोहब्बत की अनायत समझा, हम कोई तुम थे जो दुनिया से शिकायत करते |

700. मेरी किस्मत में है एक दिन गिरफ्तार-ए-वफ़ा होना, मेरे चेहरे पे तेरे प्यार का इलज़ाम लिखा है।

701. पलकों की इस लुक-छुपी को दिल कहते है, मैं प्यार मान लू, न कह के तुम हंस देती हो, कैसे मैं इंकार मान लूँ !!

702. एक सपने की तरह तुझे सज़ा के रखूं, चाँदनी रात की नज़रों से छूपा के रखूं.. मेरी तक़दीर में तुम्हारा साथ नही, वरना सारी उमर तुझे अपना बना के रखूं |

703. तजुर्बा एक ही काफी था बयान करने के लिए, मैंने देखा ही नहीं इश्क़ दोबारा करके।

704. बहुत खुसनुमा कल की रात गुजरी है, कुछ तन्हा पर कुछ खास गुजरी है, न नींद आई न ख्वाब कोई, बस आपके ही ख्यालों के साथ गुजरी है!!

705. हर शख्स से उलफत का इक़रार नही होता!! हर चेहरे से दिल को कभी प्यार नही होता!! जो रूह को छ्छू जाए, जो दिल मे उतार जाए!! उस इश्क़ का लफ़्ज़ों में इज़हार नही होता |

706. कुछ अजब हाल है इन दिनों तबियत का साहब, ख़ुशी ख़ुशी न लगे और ग़म बुरा न लगे ।

707. तुम पर लिखना हम कहाँ से शुरू करे, अदा से करे या वफ़ा से करे, तुम कितने अच्छे हो बताना है मुमकिन, तुम्हारी तारीफ अपनी जुबा से क्या करे!!

708. बारिश मुझे इसलये प्यारी लगती हैं, क्योकि की बारिश तुम्हारी यादें ले कर आती हैं, तुम मुझे इसलये प्यारी लगती हो, क्योकि की तुम्हारी यादें, बारिश को और भी प्यारा बना देती हैं |

709. किसी का इश्क़ किसी का ख्याल थे हम भी, गए दिनों में बहुत बा-कमाल थे हम भी।

710. सूरज से रोशन है सारा जहाँ, हमे एक दिए की तलाश है, अपने पास लोगो की कमी नहीं, पर दूर अपना भी कोई पास हो!!

711. खूबसूरत सा एक पल किस्सा बनजता है, जाने कब कौन ज़िंदगी का हिस्सा बनजता है, कुच्छ लोग ज़िंदगी में मिलते है ऐसे जिनसे कभी ना टूतनेवाला रिश्ता बनजता है |

712. ये इश्क़ जिसके कहर से डरता है ज़माना, कमबख्त मेरे सब्र के टुकड़ों पे पला है ।

713. मेंने दिल को लाख समझाया कि ऐ दिल उनको याद करना छोड़ दे पर दिल के हर कोने से आवाज़ आई यहाँ तो हर सांस में ही वो बस्ता तो क्या सांस लेना छोड़ दे |

714. इस दिल की ख्वाहिश को नाम क्या दू, मोहब्बत का उनको पैगाम क्या दू, इस दिल मे दर्द नही यादे हे उनकी, अगर यादे मूज़े दर्द दे तो इल्ज़ाम क्या दू |

715. जश्न-ए-शब में मेरी कभी जल न सका इश्क़ का दिया, वो अपनी अना में रही और मैंने अपने ग़मो को ज़िया।

716. तुझे देखे बिना तेरी तस्वीर बना सकता हूँ, तुझसे मिले बिना तेरा हाल बता सकता हूँ, है मेरी दोस्ती में इतना दम, तेरी आँख का आँसू आपनी आँख से गिरा सकता हूँ।

717. यह रोग इश्क़ का बहुत बुरा है दोस्तो, आप इस रोग से खुद को बचा लेना, अगर हँसी कोई नज़रें मिलना भी चहाए, तो आप नज़रों को अपनी हटा लेना |

718. फ़रिश्ते ही होंगे जिनका हुआ इश्क मुकम्मल, इंसानों को तो हमने सिर्फ बर्बाद होते देखा है।

719. घर से बाहर वो नक़ाब मे निकली, सारी गली उनकी फिराक मे निकली, इनकार करते थे वो हमारी मोहब्बत से, ओर हमारी ही तस्वीर उनकी किताब से निकली।

720. ये दिल हे क्या तेरे मिलने की दुआ ना करे, मैं तुजको भूल के ज़िंदा राहु, खुदा ना करे, रहेग